
<div style="border:1px solid #990000;padding-left:20px;margin:0 0 10px 0;">

<h4>A PHP Error was encountered</h4>

<p>Severity: Warning</p>
<p>Message:  Illegal string offset 'desc'</p>
<p>Filename: hi/Rss.php</p>
<p>Line Number: 277</p>


</div>
<div style="border:1px solid #990000;padding-left:20px;margin:0 0 10px 0;">

<h4>A PHP Error was encountered</h4>

<p>Severity: Warning</p>
<p>Message:  Illegal string offset 'title'</p>
<p>Filename: hi/Rss.php</p>
<p>Line Number: 278</p>


</div>
<div style="border:1px solid #990000;padding-left:20px;margin:0 0 10px 0;">

<h4>A PHP Error was encountered</h4>

<p>Severity: Warning</p>
<p>Message:  Illegal string offset 'link'</p>
<p>Filename: hi/Rss.php</p>
<p>Line Number: 281</p>


</div><?xml version="1.0" encoding="utf-8"?><rss version="2.0" xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom" xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/" xmlns:media="http://search.yahoo.com/mrss/" xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/" xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/" xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/" xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"><channel><atom:link href="http://api.indiatvnews.com/v3/hi/7fd9f0e714a11805d00bb64c9d8ca3bc/rssfeed/category/887/news" rel="self" type="application/rss+xml"/><title></title><link>https://www.indiatv.in/ </link><description></description><item>    <title>    <![CDATA[     10 साल पुराना PHP बग बना वेबसाइट्स के लिए बड़ा खतरा, AI ने खोली साइबर सिक्योरिटी की पोल     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ दुनियाभर में वेबसाइटों को चलाने वाली प्रोग्रामिंग लैंग्वेज PHP में दो बड़ी सुरक्षा खामियां सामने आई हैं। इनका नाम PHP2Shell रखा गया है। साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन खामियों का फायदा उठाकर हैकर्स बिना अनुमति सर्वर पर खतरनाक कोड चला सकते हैं और पासवर्ड, API Keys जैसे डेटा चुरा सकते हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/cyberattack-1792651089.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[PHP बग बना वेबसाइट्स के लिए बड़ा खतरा]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : CANVA]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/cyberattack-1792651089.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/cyberattack-1792651089.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      PHP बग बना वेबसाइट्स के लिए बड़ा खतरा
                      <span class="copyright">Image Source : CANVA</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>इंटरनेट पर मौजूद ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म या किसी कंपनी की वेबसाइट के पीछे एक ऐसी तकनीक काम करती है, जिसके सॉफ्टवेयर में छिपी खामी अब साइबर सुरक्षा के लिए बड़ी चिंता बन गई है। PHP प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में दो गंभीर सुरक्षा खामियों का पता चला है, जिनका इस्तेमाल करके हैकर्स वेबसाइट के सर्वर तक पहुंचने, सेंसिटिव डेटा चुराने और सिस्टम पर कंट्रोल हासिल करने की कोशिश कर सकते हैं। खास बात यह है कि ये खामियां एक दशक से भी ज्यादा पुराने सॉफ्टवेयर वर्जन में मौजूद हो सकती हैं।</p>

<p>इस सुरक्षा समस्या को PHP2Shell नाम दिया गया है। <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/pnb-issues-warning-to-customers-alerts-them-about-ai-driven-cyber-fraud-2026-10-20-1249930" target="_blank">साइबर सिक्योरिटी</a> रिसर्च कंपनी Wiz रिसर्च ने 21 अक्टूबर 2026 को इन खामियों की जानकारी दी। इस खोज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भी अहम भूमिका रही। इससे जहां AI की मदद से साइबर सुरक्षा मजबूत करने की संभावनाएं सामने आई हैं, वहीं यह चिंता भी बढ़ी है कि अपराधी इसी तकनीक का इस्तेमाल साइबर हमलों को आसान बनाने के लिए कर सकते हैं।</p>

<h3><strong>क्या है PHP2Shell और क्यों बढ़ी चिंता?</strong></h3>

<p>PHP एक लोकप्रिय प्रोग्रामिंग लैंग्वेज है, जिसका इस्तेमाल वेबसाइट बनाने और उन्हें चलाने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग वेबसाइट के बैकएंड, यानी सर्वर पर होने वाले कामों को संभालने में किया जाता है। PHP के जरिए वेबसाइट यूजर्स से मिलने वाली जानकारी को प्रोसेस करती है और डेटाबेस से जुड़कर कई काम पूरे करती है।</p>

<p>Wiz रिसर्च के मुताबिक, PHP के कोर इंजन में दो गंभीर सुरक्षा खामियां मिली हैं। इन्हें CVE-2026-109618 और CVE-2026-109619 के नाम से ट्रैक किया जा रहा है। ये मेमोरी से जुड़ी सुरक्षा कमजोरियां हैं, जिनका फायदा उठाकर हमलावर संवेदनशील जानकारी तक पहुंचने या सर्वर पर मनमाना कोड चलाने की कोशिश कर सकते हैं। रिमोट कोड एक्जीक्यूशन का मतलब है कि हमलावर दूर बैठे ही किसी प्रभावित सिस्टम पर अपना कोड चलाने में सफल हो सकता है। यदि ऐसा हमला सफल होता है, तो सर्वर पर मौजूद डेटा और सेवाओं के लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।</p>

<h3><strong>कौन-कौन सी वेबसाइट्स हो सकती हैं प्रभावित?</strong></h3>

<p>इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि खामी किसी एक वेबसाइट या किसी खास कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम तक सीमित नहीं है। यह PHP के कोर इंजन में मौजूद है। इसलिए प्रभावित PHP वर्जन का इस्तेमाल करने वाली वेबसाइटें जोखिम में हो सकती हैं। Wiz रिसर्च ने अपने परीक्षणों में WordPress, Drupal और Joomla पर हमले सफलतापूर्वक प्रदर्शित किए। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन प्लेटफॉर्म की अपनी प्रोग्रामिंग में ही खामी है। खतरा PHP के प्रभावित वर्जन से जुड़ा है, जिस पर ये वेबसाइटें चल सकती हैं।</p>

<p>रिपोर्ट के मुताबिक, PHP 5.4 से शुरू होने वाले पुराने वर्जन भी इस समस्या की चपेट में हो सकते हैं। इसका मतलब है कि लंबे समय से अपडेट नहीं किए गए सर्वर और वेबसाइटों के लिए जोखिम अधिक हो सकता है। हालांकि, केवल किसी प्लेटफॉर्म का नाम जानकर यह तय नहीं किया जा सकता कि कोई वेबसाइट असुरक्षित है। इसके लिए यह देखना जरूरी है कि वेबसाइट किस PHP वर्जन पर चल रही है और क्या उसके लिए जारी सुरक्षा अपडेट लागू किए गए हैं।</p>

<h3><strong>हैकर्स चुरा सकते हैं पासवर्ड और सेंसिटिव जानकारी</strong></h3>

<p>यदि कोई हमलावर इन कमजोरियों का सफलतापूर्वक फायदा उठाता है, तो सर्वर की मेमोरी में मौजूद सेंसिटिव जानकारी उजागर होने का खतरा हो सकता है। इसमें पासवर्ड, ऑथेंटिकेशन टोकन, API की और दूसरी गोपनीय जानकारियां शामिल हो सकती हैं। ऑथेंटिकेशन टोकन का इस्तेमाल यूजर या किसी एप्लिकेशन की पहचान की पुष्टि करने के लिए किया जाता है। वहीं, API की अलग-अलग सॉफ्टवेयर सेवाओं को आपस में जोड़ने और उनके बीच सुरक्षित तरीके से काम कराने में मदद करती है। यदि ऐसी जानकारियां गलत हाथों में चली जाएं, तो उनका इस्तेमाल दूसरे सिस्टम या अकाउंट तक पहुंचने की कोशिश में किया जा सकता है। कुछ परिस्थितियों में हमलावर प्रभावित सर्वर पर अपना कोड चलाने में भी सफल हो सकता है। इससे वेबसाइट की सेवाएं बाधित होने, डेटा में अनधिकृत बदलाव होने या अन्य सुरक्षा समस्याएं पैदा होने की आशंका रहती है। इसलिए वेबसाइट मालिकों और सर्वर प्रशासकों के लिए जरूरी है कि वे इस समस्या को गंभीरता से लें और अपने सिस्टम की सुरक्षा की जांच करें।</p>

<h3><strong>AI ने कैसे खोजीं PHP की ये खामियां?</strong></h3>

<p>इस मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका खास रही। Wiz रिसर्च के मुताबिक, एडवांस AI मॉडल ने शोधकर्ताओं को PHP में मौजूद जटिल मेमोरी संबंधी गड़बड़ियों को समझने, संभावित कमजोरियों की पहचान करने और उनका फायदा उठाने के तरीकों का परीक्षण करने में मदद की। रिपोर्ट में Wiz Atlas, गूगल के Gemini 4 Argon और OpenAI के GPT-5.6 Sol का जिक्र किया गया है। इन AI टूल्स की मदद से शोधकर्ताओं ने तकनीकी गड़बड़ियों का विश्लेषण किया, एक्सप्लॉइट यानी सुरक्षा खामी का फायदा उठाने वाले तरीके विकसित और जांचे तथा सुरक्षा पैच की टेस्टिंग में मदद ली। ऐसे कामों के लिए पारंपरिक तरीके से काफी मैनुअल टेस्टिंग और विशेषज्ञों के समय की जरूरत पड़ सकती है। AI ने इस प्रक्रिया को तेज करने में मदद की। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर AI साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स को कमजोरियां खोजने में मदद कर सकता है, तो यही तकनीक हमलावरों को भी जटिल साइबर हमलों के तरीके समझने में मदद कर सकती है। इस कारण सॉफ्टवेयर कंपनियों और सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स के सामने नई चुनौती खड़ी हो रही है।</p>

<h3><strong>सार्वजनिक खुलासे से पहले हमले की कोशिशें भी मिलीं</strong></h3>

<p>इस मामले में एक और चिंताजनक पहलू सामने आया। अमेजन ने बताया कि उसके MadPot थ्रेट इंटेलिजेंस सिस्टम ने इन कमजोरियों की सार्वजनिक जानकारी सामने आने से पहले ही उनसे जुड़े हमले के प्रयासों का पता लगाया था। MadPot इंटरनेट से जुड़े सिस्टम पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी करता है। हालांकि, Amazon ने यह स्पष्ट नहीं किया कि हमलावरों को सार्वजनिक खुलासे से पहले इन खामियों की जानकारी कैसे मिली। इससे यह समझ आता है कि गंभीर सुरक्षा कमजोरियों का पता चलने के बाद जल्द कार्रवाई करना क्यों जरूरी है। केवल किसी खामी के सार्वजनिक रूप से सामने आने का इंतजार करना पर्याप्त नहीं हो सकता।</p>

<p><strong>यह भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/sbi-data-breach-alert-bank-flags-suspected-dark-web-exposure-of-3897-customer-records-investigation-underway-2026-10-21-1250042" target="_blank">SBI के ग्राहकों का डेटा डार्क वेब पर लीक होने का शक, 3897 रिकॉर्ड सामने आने के बाद बैंक ने शुरू की जांच</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/10-year-old-php-bug-has-become-a-major-threat-to-websites-ai-has-exposed-the-vulnerabilities-in-cybersecurity-2026-10-22-1250278     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/10-year-old-php-bug-has-become-a-major-threat-to-websites-ai-has-exposed-the-vulnerabilities-in-cybersecurity-2026-10-22-1250278 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 22 Oct 2026 12:08:26 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के लिए कैसे बने हॉटस्पॉट? अबतक निशाने पर कौन-कौन?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कई हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटीज और कारोबारियों को धमकी दी है। महाराष्ट्र की अलग अलग जेलों में उसके 50 गुर्गे बंद हैं। मुंबई और पुणे लॉरेंस गैंग के लिए हॉटस्पॉट बने? जानिए इस एक्सप्लेनर में।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/lawrence-gang-1-1792575207.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[लॉरेंस बिश्नोई गैंग ]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/lawrence-gang-1-1792575207.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/lawrence-gang-1-1792575207.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      लॉरेंस बिश्नोई गैंग 
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/explainers/tiger-shroff-attack-lawrence-bishnoi-gang-is-d-company-underworld-model-how-network-operates-explained-2026-10-20-1249844">बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद बॉलीवुड में दहशत का माहौल है</a>। मुंबई में 18 अक्टूबर की शाम करीब सात बजे टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग हुई थी, जिसमें वो बाल बाल बच गए थे। उनपर हमले की जिम्मेदारी लॉरेंस बिश्नोई गैंग के गुर्गे अनिल पंडित ने ली है। देश के कई राज्यों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग दहशत फैलाते रहते हैं। पुलिस के मुताबिक इस गैंग ने महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे में खासतौर पर अपना साम्राज्य फैला रखा है। पिछले दो सालों में 10 से ज्यादा घटनाओं को अंजाम दिया गया है। मुंबई में हाई प्रोफाइल सेलिब्रिटी तो पुणे के कारोबारियों पर गोलीबारी की वारदात को अंजाम दिया है। महाराष्ट्र की अलग अलग जेलों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 50 गुर्गे बंद हैं। जानिए कैसे महाराष्ट्र में मुंबई और पुणे बिश्नोई गैंग के लिए बना हॉटस्पॉट? </p>

<p class="rtejustify">पुलिस सूत्रों के औपचारिक क्राइम डाटा रिपोर्ट के मुताबिक 2024 से 2026 के बीच पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से कथित तौर पर जुड़े 10 से अधिक रंगदारी के मामले दर्ज हुए हैं। जांच में विदेश में बैठे हैंडलर, स्थानीय संपर्क और दूसरे राज्यों से बुलाए गए शूटरों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है... कुछ मामलों में चार सीट दायर की जा चुकी है तो कुछ में करना बाकी है... ज्यादातर मामलों में लॉरेंस बिश्नोई के गुर्गे शुभम लोनकर का नाम सामने आता है। </p>

<p class="rtejustify"><strong>मुंबई और पुणे की प्रमुख वारदातें : और उसका टाइमलाइन</strong></p>

<p class="rtejustify"><strong>14 अप्रैल 2024 - सलमान खान के घर पर फायरिंग, बांद्रा</strong><br />
दो बाइक सवार हमलावरों ने गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर गोलियां चलाईं। मुंबई क्राइम ब्रांच ने मामले में महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून (MCOCA) लगाया। चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई, अनमोल बिश्नोई और अन्य आरोपियों की भूमिका का उल्लेख किया गया।</p>

<p class="rtejustify"><strong>12 अक्टूबर 2024 - बाबा सिद्दीकी की हत्या, बांद्रा ईस्ट</strong><br />
एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की गोली मारकर हत्या की गई। मुंबई पुलिस की जनवरी 2025 की चार्जशीट के मुताबिक, साजिश में अनमोल बिश्नोई और पुणे के शुभम लोणकर समेत आरोपियों की भूमिका सामने आई। चार्जशीट में गैंग का दबदबा स्थापित करने और सलमान खान से सिद्दीकी की नजदीकी को संभावित वजहों में शामिल किया गया।</p>

<p class="rtejustify"><strong>मई 2026 - फर्नीचर मॉल पर फायरिंग, पिंपरी-चिंचवड़</strong><br />
AJ Furniture Mall को निशाना बनाकर छह गोलियां चलाई गईं। इससे पहले कारोबारी के बिजनेस पार्टनर से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगी गई थी। सोशल मीडिया पोस्ट और ऑडियो में बिश्नोई गैंग के नाम से जिम्मेदारी लेने का दावा सामने आया; पुलिस ने मामले की जांच की।</p>

<p class="rtejustify"><strong>22 जून 2026 - कारोबारी के गोदाम पर फायरिंग, फुरसुंगी</strong><br />
पुणे के फुरसुंगी इलाके में एक कारोबारी के गोदाम के बाहर फायरिंग की घटना सामने आई। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी और उसके नौ बिजनेस पार्टनरों से कथित तौर पर कुल 50 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने का मामला जांच के दायरे में आया। जुलाई में पुलिस ने एक नाबालिग समेत आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी।</p>

<p class="rtejustify"><strong>1 फरवरी 2026 - रोहित शेट्टी के घर पर फायरिंग, जुहू</strong><br />
रोहित शेट्टी के घर पर पांच राउंड फायरिंग की गई। पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक, वारदात गैंग का दबदबा स्थापित करने के इरादे से की गई थी। मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किए जाने की रिपोर्ट सामने आई। </p>

<p class="rtejustify"><strong>18 अक्टूबर 2026 - टाइगर श्रॉफ की कार के पास फायरिंग, जुहू</strong><br />
इस मामले में अब तक कुल मिलाकर सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है; जांच अभी भी चल रही है। केवल इतना ही नहीं नवंबर 2024 में बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच ने दावा किया था कि सिद्दीकी के बाद पुणे के एक राजनीतिक नेता को संभावित अगले निशाने के तौर पर रखा गया था। पुलिस ने उस नेता का नाम सार्वजनिक नहीं किया था।</p>

<p class="rtejustify"><strong>कौन है लॉरेंस बिश्नोई गैंग का अहम चेहरा शुभम लोणकर</strong><br />
शुभम लोणकर को महाराष्ट्र में लॉरेंस बिश्नोई गैंग की मुख्य कड़ी के तौर पर देखा गया है। बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच में मुंबई पुलिस ने उसकी भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए। जांच एजेंसियों के मुताबिक, लोणकर ने हत्या की साजिश में अहम भूमिका निभाई थी। इसके अलावा, महाराष्ट्र में कारोबारियों से रंगदारी मांगने और फायरिंग की घटनाओं में भी बिश्नोई गैंग के नेटवर्क की जांच होती रही है।एक्सटॉर्शन या दबदबा महाराष्ट्र में घटनाओं को अंजाम देकर क्या संकेत देना चाहता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग, ये बड़ा सवाल है।</p>

<p class="rtejustify"><strong>गैंग की गतिविधियों पर असर नहीं</strong><br />
मुंबई की विभिन्न जेलों में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के 56 सदस्य बंद हैं। इन पर एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या, अभिनेता सलमान खान के आवास के बाहर फायरिंग और फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी तथा अभिनेता रणवीर सिंह को धमकियां देने समेत कई मामलों में आरोप हैं। इनमें से करीब 31 आरोपी ऐसे हैं,जो केवल बाबा सिद्दीकी की हत्या मामले में आरोपी हैं।</p>

<p class="rtejustify"><strong>अब तक किन नामचीन हस्तियों को लॉरेंस गैंग ने दी धमकी</strong><br />
लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने अबतक बॉलीवुड के बड़े चेहरे सलमान खान, रणवीर सिंह, आमिर खान, रोहित शेट्टी, आयुष शर्मा, कपिल शर्मा, मुनव्वर फारुकी, टाइगर श्रॉफ को धमकी दी है। इसके साथ ही पंजाब और हरियाणा के कई बड़े सिंगरो को भी धमकी भरे कॉल्स आए हैं।</p>

<p class="rtejustify"><strong>ये भी पढ़ें:-</strong></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/india/national/tiger-shroff-case-update-lawrence-bishnoi-gang-2-women-arms-smuggler-arrested-2026-10-21-1250015">Tiger Shroff Case update: लॉरेंस बिश्नोई गैंग में लड़कियां भी शामिल हैं? गिरफ्तार की गईं राधा-बबीता कौन हैं</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/10-crimes-in-2-years-how-did-mumbai-and-pune-become-hotspots-for-lawrence-bishnoi-gang-explained-2026-10-21-1250094     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/10-crimes-in-2-years-how-did-mumbai-and-pune-become-hotspots-for-lawrence-bishnoi-gang-explained-2026-10-21-1250094 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 14:52:03 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सऊदी अरब की सख्त सजा, क्या है 'ताज़ीर', मक्का में बांग्लादेशी कपल को क्यों दी गई मौत?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ सऊदी अरब में एक बांग्लादेशी युवक और युवती को चुपके से फांसी की सजा दे दी गई। दोनों पर आरोप था कि उन्होंने पवित्र मक्का मस्जिद में एक दूसरे को चूमा था। इस सजा को लेकर बांग्लादेश में विवाद बढ़ गया है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arab-2-1792556158.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[सऊदी अरब में फांसी की सजा]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arab-2-1792556158.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arab-2-1792556158.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      सऊदी अरब में फांसी की सजा
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद में अनैतिक कार्य करने के आरोप में दो बांग्लादेशी नागरिकों, एक युवक और युवती को 14 अक्टूबर के दिन चुपचाप फांसी दे दी गई। दोनों को इस तरह से फांसी दिए जाने पर बांग्लादेश में भारी आक्रोश है। फांसी की सजा क्यों दी गई, दोनों के अपराध क्या थे, फांसी की पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी थी, क्या उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिला, और क्या ढाका को पहले से सूचित किया गया था ताकि वे इन लोगों की जान बचाने में कोई मदद कर पाते? अब इस तरह के सवालों से बवाल मचा हुआ है। सऊदी मीडिया की रिपोर्टों में यह नहीं बताया गया है कि वे "अनैतिक कार्य" क्या थे, जिसके लिए उन्हें फांसी दी गई है।</p>

<p><strong>ताजीर के तहत दी गई फांसी की सजा</strong><br />
हालांकि कहा गया है कि, इन दोनों बांग्लादेशियों को 'ताज़ीर' के तहत मौत की सज़ा सुनाई गई थी। खबरों के अनुसार, संबंधित न्यायिक अधिकारियों ने उनकी सज़ा को बरकरार रखा, जिसके बाद एक शाही आदेश जारी कर मक्का क्षेत्र में उन्हें फांसी देने की अनुमति दे दी गई। ये बात सामने नहीं आई है कि दोनों ने आखिर ऐसा क्या किया था, जिसकी वजह से उन्हें मौत की सजा दी गई। शुरुआत में इसे एक कथित "अनैतिक कृत्य" बताया गया और ऐसी खबरें आईं कि वे मस्जिद के अंदर एक-दूसरे को चूम रहे थे, जबकि बाद में सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि यह केवल माथे पर किया गया एक चुंबन था।</p>

<p><strong>कौन थे दोनों बांग्लादेशी नागरिक?</strong><br />
सऊदी अरब के मीडिया ने गृह मंत्रालय के हवाले से बताया है कि इन दो लोगों के नाम नज़रुल इस्लाम अब्दुल बशीर और सिती अख्तर थे। उन पर पवित्र शहर मक्का की एक मस्जिद के अंदर "अनैतिक कृत्य" करने का आरोप था। रियाद ने बस इतनी ही जानकारी दी है। सऊदी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि वे कथित कृत्य क्या थे, उन्हें कब गिरफ्तार किया गया था, या उन पर मुकदमा कैसे चलाया गया।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arab-1-1792556158.jpg"    /></p>

<p><strong>नजरुल के परिवार ने क्या बताया</strong>?<br />
फांसी की सजा पाए नज़रुल, चट्टोग्राम डिवीजन के ब्राह्मणबरिया के रहने वाले थे। वह नवंबर 2022 में सऊदी अरब चले गए और मक्का की मस्जिद अल-हरम में सफाईकर्मी के तौर पर काम करते थे। उनके परिवार ने 'प्रोथोम आलो' को बताया कि आठ महीने बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ़्तार कर लिया और फांसी दिए जाने तक वह जेल में ही रहे। परिवार ने बताया कि उनको एक फोन आया जिसमें उन्हें नज़रूल को फांसी दिए जाने की जानकारी दी गई। यह खबर सुनकर उनकी 65 वर्षीय चाची, आबेदा बेगम बेहोश हो गईं और बाद में उनकी मौत हो गई।</p>

<p>नज़रुल के पिता, अब्दुल बशीर, जो खुद 24 साल तक सऊदी अरब में काम कर चुके हैं, ने 'द डेली स्टार' को बताया कि उनके बेटे को निष्पक्ष सुनवाई का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने कहा, "अगर मेरे बेटे को बिना किसी ठोस वजह के फांसी दी गई है, तो मुझे न्याय चाहिए।" </p>

<p><strong>नजरुल के साथ सीती को क्यों दी गई मौत की सजा?</strong><br />
सऊदी अरब में नजरुल के साथ जिस बांग्लादेशी महिला को मौत की सजा दी गई, उसका नाम सीती अख्तर बताया जा रहा है। सीती अख्तर के नज़रुल के साथ संबंधों के बारे में सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी है। नज़रुल के पिता, अब्दुल बशीर ने इस बात से इनकार किया कि सीती, नज़रुल की पत्नी थी। उन्होंने कहा, "हम तो उसे जानते भी नहीं हैं। मैंने सुना है कि वे दोनों एक ही जगह काम करते थे।" हालांकि, परिवार के एक सदस्य ने, जिसने अपनी पहचान उजागर नहीं की, बीबीसी बांग्ला को बताया कि नज़रुल ने एक बार स्वीकार किया था कि उसका सीती के साथ "अफेयर" था।</p>

<p><strong>सऊदी अरब का सख्त कानून</strong><br />
बता दें कि सऊदी अरब दुनिया में मौत की सजा देने वाले सबसे प्रमुख देशों में से एक है। 'ह्यूमन राइट्स वॉच' की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कम से कम 356 लोगों को मौत की सजा दी गई, जिनमें से ज़्यादातर मामले नशीले पदार्थों से जुड़े थे, जिनमें कोई हिंसा शामिल नहीं थी। यह तब हुआ है, जब प्रधानमंत्री और क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने 2022 के एक इंटरव्यू में कहा था कि मौत की सज़ा को अब केवल हत्या के मामलों तक सीमित कर दिया गया है।</p>

<p><strong>इन अपराधों में मिलती है मौत की सजा</strong><br />
सऊदी अरब इस्लामी कानून की तीन मुख्य श्रेणियों के तहत मौत की सज़ा देता है, जिसमें पहला है क़िसास यानी बदले की सज़ा, मुख्य रूप से हत्या के मामलों में, दूसरा है हुदूद, जिसमें कुछ खास अपराधों के लिए तय की गई सज़ाएं होती हैं और तीसरा है ताज़ीर यानी न्यायाधीश के विवेक पर दी जाने वाली सज़ाएं, जिसमें नशीले पदार्थों की तस्करी और अन्य अपराध शामिल हैं।</p>

<p><strong>बांग्लादेशी जोड़े को मौत की सजा दिए जाने पर भारी आक्रोश</strong><br />
सऊदी अरब में इन <a href="https://www.indiatv.in/world/asia/sheikh-hasina-bangladesh-return-december-kill-arrest-torture-2026-10-20-1249880">दोनों बांग्लादेशियों को मौत की सजा दिए जाने से बांग्लादेश और दुनिया के अन्य हिस्सों में भारी आक्रोश है</a>। लोग इस पूरी प्रक्रिया के पारदर्शी न होने पर सवाल उठा रहे हैं। लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि सिर्फ माथे पर चूमने जैसी मामूली बात के लिए सऊदी अरब में इन बांग्लादेशियों को मौत की सजा दी जा सकती है। लोगों में इस बात को लेकर भी भारी गुस्सा है कि यह सजा चुपचाप क्यों दी गई और इस बारे में किसी तरह की कोई जानकारी क्यों नहीं दी गई।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/tiger-shroff-attack-lawrence-bishnoi-gang-is-d-company-underworld-model-how-network-operates-explained-2026-10-20-1249844">लॉरेंस बिश्नोई गैंग दाऊद की 'डी-कंपनी' से जुड़ा अंडरवर्ल्ड मॉडल है? खौफ का दूसरा नाम, कैसे करता है काम</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/killed-for-kiss-in-mecca-mosque-why-bangladeshi-couple-hanges-secretly-in-saudi-arabia-explained-2026-10-21-1250039     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/killed-for-kiss-in-mecca-mosque-why-bangladeshi-couple-hanges-secretly-in-saudi-arabia-explained-2026-10-21-1250039 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 21 Oct 2026 10:24:48 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     लॉरेंस बिश्नोई गैंग दाऊद की 'डी-कंपनी' से जुड़ा अंडरवर्ल्ड मॉडल है? खौफ का दूसरा नाम, कैसे करता है काम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले के बाद एक बार फिर से लॉरेंस बिश्नोई गैंग की चर्चा हो रही है। लॉरेंस बिश्नोई खुद तो साबरमती के सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में बंद है। फिर उसके गैंग का नेटवर्क विदेश से कैसे ऑपरेट होता है?     ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/dawood-1-1792465869.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[लॉरेंस गैंग कैसे करता है काम]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/dawood-1-1792465869.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/dawood-1-1792465869.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      लॉरेंस गैंग कैसे करता है काम
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल की हाई-सिक्योरिटी बैरक में बंद है, लेकिन अक्सर हाई-प्रोफाइल हस्तियों, गायकों और राजनेताओं को निशाना बनाता रहा है। अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हमले के बाद उसका विदेशी नेटवर्क एक बार फिर चर्चा में है। रविवार को मुंबई में तीन हमलावरों ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलियां चलाईं। लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो कथित सदस्यों ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें से एक अमेरिका में रहने वाले अनिल पंडित ने अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर हुए हमले की जिम्मेदारी ली है।</p>

<p><strong>कैसे काम करता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?</strong><br />
हाल ही में अनिल पंडित ने गिरोह की ओर से खुद को चर्चा में लाने की कोशिश की है, ताकि लोगों का ध्यान अमेरिका में बिश्नोई के सहयोगी सतविंदर सिंह उर्फ ​​गोल्डी बराड़ से हट सके, जिसकी तलाश फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) कर रही है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि श्रॉफ को निशाना बनाने के बारे में सोशल मीडिया पर पंडित का दावा सच लगता है। वहीं, जांचकर्ता इस गिरोह के व्यापक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रहे हैं, जिसमें एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल और शूटर्स तक विदेशी हथियारों की सप्लाई शामिल है।</p>

<p>FBI ने इस गिरोह को 'लॉरेंस बिश्नोई ऑर्गेनाइज्ड क्राइम ग्रुप' (OCG) का नाम दिया है। यह गिरोह अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के पार काम करने, विदेश से स्थानीय शूटर्स को भर्ती करने और बड़े लोगों को निशाना बनाकर व्यापारियों को धमकाने में सक्षम है, ताकि वे अपने कामकाज के लिए उनसे फंड वसूल सकें।</p>

<p>बता दें कि अभिनेता टाइगर श्रॉफ से पहले, इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने बॉलीवुड सितारों सलमान खान, रणवीर सिंह, आमिर खान और निर्देशक रोहित शेट्टी को भी धमकी दी थी और उन्हें अपना निशाना बनाया था। मई 2022 में मशहूर पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या कर दी गई थी, और अक्टूबर 2024 में महाराष्ट्र के नेता बाबा सिद्दीकी की भी हत्या कर दी गई। इन हत्याओं के पीछे भी लॉरेंस बिश्नोई का ही हाथ बताया जाता है।</p>

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<p><strong>कौन है अनिल पंडित ?</strong><br />
हरियाणा के पानीपत जिले के रैर कलां गांव का रहने वाला 32 वर्षीय पंडित, 2023 में भारत से भाग गया था। कहा जाता है कि वह थाईलैंड और कनाडा होते हुए अमेरिका पहुंच गया। इस साल जुलाई में अमेरिका में दायर एक आरोप-पत्र के अनुसार, उसके संबंध गैंगस्टर रणदीप मलिक और कनाडा में रहने वाले रविंदर सिंह ढांडा से हैं, जो लॉरेंस बिश्नोई के संगठित अपराध गिरोह (OCG) के साथ काम करते हैं।</p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/india/national/tiger-shroff-attack-case-update-contract-killing-from-california-shooters-cut-hair-changed-clothes-in-train-2026-10-20-1249855">भारतीय जांच एजेंसियों का कहना है कि अनिल पंडित कैलिफोर्निया से अपना काम चलाता है</a> और ऐसा शक है कि वह गोल्डी बराड़ के भी संपर्क में है। टाइगर श्रॉफ को निशाना बनाने से पहले, इस साल उसका नाम गोलीबारी और जबरन वसूली की कई घटनाओं में सामने आया था। इनमें पश्चिमी दिल्ली में गायक गुरु रंधावा से जुड़े एक जिम मालिक पर गोलीबारी, पुणे के एक ज्वेलरी शोरूम में फायरिंग, और भिवाड़ी तथा सोनीपत में हुए दो हमले शामिल हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/anil-pandit-1-1792466015.jpg"    /></p>

<p>दिल्ली और हरियाणा पुलिस इन घटनाओं की जांच कर रही है। जांच में यह भी पता चला है कि शूटर्स से संपर्क करने और विदेशों में बने हथियारों को मंगवाने के लिए 'सिग्नल' (एक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप) का इस्तेमाल किया गया था।</p>

<p><strong>कौन है हरमन संधू?</strong><br />
हाल ही के हमले में एक और मुख्य संदिग्ध हरमनवीर सिंह उर्फ ​​हरमन संधू का नाम सामने आ रहा है, जिसे जून में FBI की 'वांटेड' लिस्ट में भी शामिल किया गया था। बताया जाता है कि संधू, रविंदर ढांडा नेटवर्क का सदस्य है, जो बिश्नोई गैंग के साथ मिलकर काम करता है और उसे जुलाई में कैलिफोर्निया में FBI ने हिरासत में ले लिया था। अब इस बात की जांच की जा रही है कि ' टाइगर श्रॉफ शूटिंग' मामले में उसका नाम कैसे सामने आया।</p>

<p>23 जून को, अमेरिका के कैलिफोर्निया (लॉस एंजिल्स) स्थित डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने संधू के खिलाफ एक फेडरल अरेस्ट वारंट जारी किया था। उस पर प्रतिबंधित पदार्थों को रखने, उन्हें बांटने की साजिश रचने और उन्हें निर्यात करने की साजिश रचने जैसे आरोप लगाए गए थे। जांचकर्ताओं का कहना है कि संधू कथित तौर पर टारगेट की पहचान करने, शूटर्स के बीच तालमेल बिठाने, हथियारों का इंतजाम करने या बातचीत में मदद करने जैसे कामों में शामिल था।</p>

<p><strong>क्या है 'ऑपरेशन हार्ड बॉल'?</strong><br />
जुलाई में, अमेरिकी अधिकारियों ने 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' की घोषणा की। यह अमेरिका, कनाडा और यूरोप के बीच एक संयुक्त कानून-प्रवर्तन अभियान था, जिसमें भारत के 37 गैंगस्टरों के खिलाफ तीन संघीय अभियोग (federal indictments) दायर किए गए और उनमें से 24 को गिरफ्तार कर लिया गया। ये लोग लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर सिंह ढांडा के नेटवर्क से जुड़े हुए हैं।</p>

<p>अमेरिकी अभियोजकों ने बताया कि लॉरेंस बिश्नोई भारत के गुजरात के साबरमती जेल के हाई सिक्योरिटी बैरक से अपने आपराधिक नेटवर्क को चलाता है। इसके लिए वह प्रतिबंधित मोबाइल फोन और वॉयस-ओवर-इंटरनेट-प्रोटोकॉल (VoIP) उपकरणों का इस्तेमाल करता है। इन गतिविधियों में टारगेट किलिंग, गोलीबारी, जबरन वसूली, अपहरण, नशीले पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराध शामिल हैं।</p>

<p><strong>लोगों के मन में खौफ पैदा करना है मकसद?</strong><br />
लॉरेंस बिश्नोई के अलावा, FBI ने गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा का भी नाम लिया है। बताया गया है कि वे उसके मुख्य सहयोगी (senior lieutenants) के रूप में काम करते थे और अलग-अलग देशों में मौजूद गिरोह के सदस्यों और साथियों को निर्देश देने में मदद करते थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ये गिरोह बड़े पैमाने पर हिंसा करते हैं और ऑनलाइन जिम्मेदारी लेते हैं ताकि लोगों के मन में डर पैदा किया जा सके, खासकर भारत में और विदेशों में रह रहे भारतीय समुदायों के बीच। फिर, वे इसी डर का फायदा उठाकर लोगों से जबरन वसूली करते हैं।</p>

<p>अमेरिकी अभियोजकों ने जून 2023 में ब्रिटिश कोलंबिया के सरे में सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का जिक्र किया, जिसे बिश्नोई गैंग ने अंजाम दिया था। FBI ने इस आपराधिक नेटवर्क को अंतरराष्ट्रीय कोकीन तस्करी और प्रतिद्वंद्वी आपराधिक समूहों की नशीले पदार्थों की खेप चुराने के मामलों से जोड़ा है।</p>

<p><strong>डी-कंपनी की तरह काम करता है लॉरेंस बिश्नोई गैंग?</strong></p>

<ul>
	<li>गैंगस्टरों की जांच करने वाले भारतीय जांचकर्ताओं के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई सिंडिकेट एक ऐसा नेटवर्क है जो अलग-अलग देशों में फैला हुआ है। इसमें जेल में बंद गैंगस्टर, विदेशों से काम करने वाले हैंडलर, स्थानीय शूटर और फाइनेंसर शामिल हैं।</li>
	<li>नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने मार्च 2023 की एक चार्जशीट में बताया है कि कैसे उत्तर भारत के गैंगस्टर खालिस्तान-समर्थक तत्वों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं।</li>
	<li>एजेंसी ने 2015 के बरगारी आंदोलन और 2016 की नाभा जेल ब्रेक की घटना को इस नेटवर्क के विस्तार में अहम पड़ाव माना है। खालिस्तान-समर्थक तत्वों को अनुभवी शूटरों, हथियारों और लॉजिस्टिक सपोर्ट की जरूरत थी, जबकि गैंगस्टरों को अत्याधुनिक हथियारों और फंडिंग के नए स्रोतों की तलाश थी। यहीं पर बिश्नोई गैंग ने मदद की पेशकश की।</li>
	<li>एजेंसी ने बताया कि बिश्नोई सिंडिकेट पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, बिहार और झारखंड तक फैला हुआ है।</li>
	<li>आपराधिक गतिविधियों से जुटाया गया पैसा कनाडा, अमेरिका, थाईलैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भेजा जाता था, ताकि वहां मौजूद गैंग के सदस्यों की मदद की जा सके।</li>
	<li>एजेंसी ने इस नेटवर्क की पहुंच और संपर्कों की तुलना 1990 के दशक में दाऊद इब्राहिम की 'डी-कंपनी' से जुड़े अंडरवर्ल्ड मॉडल से की है।</li>
</ul>

<p><strong>पुलिस के सामने क्यों चुनौती है ये गैंग?</strong><br />
अनिल पंडित और पूरे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के नेटवर्क का काम टाइगर श्रॉफ और अन्य बड़ी हस्तियों को निशाना बनाना, भारतीय एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती को दर्शाता है। इसके पीछे कारण यह है कि इन गतिविधियों को चलाने वाले हैंडलर देश के बाहर से काम करते हैं, जबकि उनके द्वारा काम पर रखे गए हजारों शूटर स्थानीय स्तर पर हमलों को अंजाम देते हैं। ये शूटर ज्यादातर बेरोजगार युवा होते हैं जिन्हें ऑनलाइन भर्ती किया जाता है। इन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं होती कि इनके हैंडलर कहां हैं या पूरा ऑपरेशन कैसे चल रहा है। इन्हें बस पैसे और हथियार मिल जाते हैं, और ये अपराध की दुनिया में अपना नाम बनाने के लिए हमलों को अंजाम देते हैं।</p>

<p>संदिग्ध हैंडलर और हमला करने वालों के बीच संचार की कड़ी का पता लगाना, हथियारों और पैसों के लेन-देन को समझना, और यह तय करना कि क्या अलग-अलग घटनाएं एक ही आपराधिक नेटवर्क से जुड़ी हैं, ये सब एक बड़ी चुनौती बन जाती है। <br />
<br />
<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/rajasthan/tiger-shroff-attack-case-all-three-shooters-were-connect-with-zangi-app-cash-and-weapons-2026-10-20-1249848">Tiger Shroff attack मामले में बड़ा खुलासा, तीनों शूटरों को कैसे होती थी फंडिंग? कैसे मिले हथियार</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/tiger-shroff-attack-lawrence-bishnoi-gang-is-d-company-underworld-model-how-network-operates-explained-2026-10-20-1249844     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/tiger-shroff-attack-lawrence-bishnoi-gang-is-d-company-underworld-model-how-network-operates-explained-2026-10-20-1249844 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 20 Oct 2026 07:36:28 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     फ्रांस में हिंसा के पीछे इमिग्रेशन या आर्थिक असमानता? अमेरिका में क्यों छिड़ी बहस     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ फ्रांस में हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने अमेरिका में इमिग्रेशन बनाम आर्थिक असमानता की बहस छेड़ दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इसके लिए पश्चिमी देशों की उदारवादी इमिग्रेशन नीतियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने इसे बढ़ती आर्थिक असमानता, महंगे आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्या बताया।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-new-pic-1792403510.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[फ्रांस में हिंसा]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-new-pic-1792403510.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-new-pic-1792403510.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      फ्रांस में हिंसा
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>फ्रांस में हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने पूरी दुनिया में एक नई चिंता पैदा कर दी है। वहीं अमेरिका में इस मुद्दे पर नई राजनीतिक बहस छिड़ गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन घटनाओं को पश्चिमी देशों की उदारवादी इमिग्रेशन नीतियों और अप्रवासियों के समायोजन में नाकामी से जोड़ते हुए डेमोक्रेट्स पर निशाना साधा है। वहीं, भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने इस तर्क को खारिज करते हुए आर्थिक असमानता, महंगे आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी समस्याओं को युवाओं के गुस्से की बड़ी वजह बताया है। नवंबर 2026 में होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों से पहले दोनों नेताओं के बीच यह बहस इमिग्रेशन बनाम आर्थिक असमानता की राजनीतिक लड़ाई बन गई है।</p>

<h3>जेडी वेंस इमिग्रेशन को क्यों ठहराया जिम्मेदार?</h3>

<p>अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस हिंसा को लेकर पश्चिमी देशों की उदारवादी नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि विविधता और मानवीय संवेदनाओं के नाम पर पश्चिमी देशों ने गरीब देशों से लोगों को बुलाकर अपनी सामाजिक व्यवस्था को खतरे में डाल दिया है। वेंस ने फ्रांस के लिमोज शहर के टाउन हॉल में लगी आग का वीडियो शेयर करते हुए अमेरिकी नागरिकों को भी अलर्ट रहने की सलाह दी। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका में डेमोक्रेट्स जिस तरह की नीतियां चाहते हैं, उनका नतीजा भविष्य में ऐसी घटनाओं के रूप में सामने आ सकता है।</p>

<p>वेंस का तर्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की इमिग्रेशन नीति के अनुरूप है। ट्रंप प्रशासन अवैध प्रवासन पर सख्ती, निर्वासन और सीमा सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं में रखता है। रिपब्लिकन नेताओं के लिए फ्रांस की घटनाएं इस दलील को मजबूत करने का अवसर हैं कि इमिग्रेशन केवल सीमा प्रबंधन का मुद्दा नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा, राष्ट्रीय पहचान और सामाजिक स्थिरता से भी जुड़ा है। हालांकि, वेंस के बयान से यह साबित नहीं होता कि फ्रांस में हुई हिंसा के पीछे इमिग्रेशन ही प्रत्यक्ष कारण था। किसी घटना में शामिल लोगों की पहचान या ऑनलाइन प्रसारित तस्वीरों के आधार पर पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराना भी उचित नहीं है।</p>

<h3>रो खन्ना ने क्यों उठाया आर्थिक असमानता का मुद्दा?</h3>

<p>वहीं डेमोक्रेटिक सांसद रो खन्ना ने वेंस के तर्क का जवाब देते हुए उनके नजरिए को नैतिक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि यह मौजूदा परिस्थितियों को समझने में भी चूक है। खन्ना के मुताबिक, फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों के पीछे एक साझा चिंता है। वह चिंता है बढ़ती आर्थिक असमानता और बेहतर भविष्य की संभावनाओं का कमजोर होना। उन्होंने कहा कि जब संपत्ति और सत्ता कुछ लोगों के हाथों में केंद्रित हो जाती है, तब आम युवाओं के लिए शिक्षा, घर और रोजगार हासिल करना मुश्किल हो जाता है।</p>

<p>फ्रांस में स्कूलों में शिक्षकों की कमी, खराब बुनियादी ढांचे और विश्वविद्यालयों में प्रवेश से जुड़ी शिकायतें विरोध का हिस्सा रही हैं। स्पेन में मकानों और किराये की बढ़ती कीमतों ने युवाओं और आम परिवारों की मुश्किलें बढ़ाई हैं। वहीं, अल्बानिया में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर असंतोष सामने आया है। खन्ना ने इस स्थिति के समाधान के लिए अमेरिका में आर्थिक और राजनीतिक बदलाव की जरूरत बताई। उनके प्रस्तावित दृष्टिकोण को 'अमेरिका का अगला न्यू डील' कहा गया है। यह पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट के न्यू डील कार्यक्रम की याद दिलाता है, जिसके तहत आर्थिक संकट से निपटने में संघीय सरकार की भूमिका बढ़ाई गई थी।</p>

<h3>फ्रांस और यूरोप में विरोध की वजह क्या है?</h3>

<p>दरअसल, फ्रांस में सितंबर के आखिर में शैक्षणिक सत्र शुरू होने के बाद छात्रों के विरोध की खबरें सामने आईं। शिक्षकों की कमी, जर्जर कक्षाओं और विश्वविद्यालयों में एडमिशन से जुड़ी शिकायतों के साथ जीवनयापन की बढ़ती लागत भी असंतोष का कारण बनी। ट्रेड यूनियनों ने बेहतर वेतन, कम कीमतों और पेंशन से जुड़ी मांगों का समर्थन किया है। सरकार ने 3,000 अतिरिक्त स्थानापन्न शिक्षकों की व्यवस्था करने का वादा किया है। यूनिवर्सिटीज की रजिस्ट्रेशन फीस बढ़ाने की योजनाओं को भी वापस लिया गया है।</p>

<p>स्पेन और पुर्तगाल में आवास संकट विरोध का प्रमुख मुद्दा रहा है। किराये में बढ़ोतरी, घर खरीदने की मुश्किलें और निवेश फंडों द्वारा संपत्तियां खरीदने को लेकर लोगों में नाराजगी है। पुर्तगाल में 2015 से 2024 के बीच मकानों की कीमतों में 124 प्रतिशत की बढ़ोतरी का आंकड़ा इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है। इटली में घरेलू खर्चों और बेल्जियम में विश्वविद्यालयों की फीस तथा शिक्षा सुधारों को लेकर भी विरोध हुआ है। हालांकि, इन सभी आंदोलनों को एक ही कारण से जोड़ना सही नहीं होगा। हर देश की राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां अलग हैं।</p>

<h3> फ्रांस की हिंसा अमेरिकी चुनाव का मुद्दा बनेगी?</h3>

<p>अब सवाल उठता है कि क्या फ्रांस की हिंसा अमेरिकी चुनाव का मुद्दा बनेगी?   फ्रांस की घटनाओं पर वेंस और खन्ना के अलग-अलग तर्क अमेरिकी राजनीति में दो व्यापक दृष्टिकोण सामने रखते हैं। रिपब्लिकन इमिग्रेशन नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाना चाहते हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पक्ष आर्थिक असमानता, महंगे आवास और युवाओं के लिए घटते अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।</p>

<p>नवंबर 2026 के मिडटर्म चुनावों से पहले यह बहस मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा भी है। रिपब्लिकन फ्रांस की घटनाओं को उदारवादी इमिग्रेशन नीतियों के संभावित परिणाम के रूप में पेश कर सकते हैं। दूसरी ओर, डेमोक्रेट्स इसे आर्थिक नीतियों और आम नागरिकों की समस्याओं पर चर्चा का अवसर बना सकते हैं। लेकिन दोनों तर्कों की अपनी सीमाएं हैं। हिंसा या आगजनी अपने आप यह साबित नहीं करती कि उसका कारण इमिग्रेशन है। इसी तरह, आर्थिक असमानता विरोध-प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि समझा सकती है, लेकिन वह तोड़फोड़ या हिंसा को उचित नहीं ठहराती।</p>

<p>बता दें कि <a href="https://www.indiatv.in/world/europe/emmanuel-macron-stern-message-who-engaged-in-vandalism-severe-punishment-2400-rioters-arrested-in-france-2026-10-19-1249653" target="_blank" title="'जिसने तोड़फोड़ की उसे कीमत चुकानी होगी', इमेनुअल मेक्रों का सख्त संदेश, फ्रांस में अब तक 2400 उपद्रवी गिरफ्तार">फ्रांस में पिछले तीन दिन से उपद्रव कर रहे लोगों के खिलाफ एक्शन शुरू हो चुका है</a>। पुलिस ने अब तक 2 हजार 400 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया है। अकेले रविवार को 2 हजार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस बीच फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रों ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि जिन्होंने भी तोड़फोड़ की है। तबाही मचाई है। उन्हें ही इसका भुगतान करना होगा।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/world/europe/italy-france-cost-of-living-protests-violence-arson-loot-hundreds-arrested-2026-10-18-1249549" target="_blank" title="इटली और फ्रांस में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, लूटपाट और आगजनी, सैकड़ों गिरफ्तार">इटली और फ्रांस में महंगाई के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, लूटपाट और आगजनी, सैकड़ों गिरफ्तार</a></p>

<p> </p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/why-in-france-burning-violence-immigration-vs-economic-inequality-jd-vance-ro-khanna-debate-raging-in-us-2026-10-19-1249749     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/why-in-france-burning-violence-immigration-vs-economic-inequality-jd-vance-ro-khanna-debate-raging-in-us-2026-10-19-1249749 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 19 Oct 2026 15:24:37 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     Explainer: मंगल के चंद्रमा से मिट्टी लाएगा जापान, क्या है MMX मिशन? जानिए क्या खुलेगा राज     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ जापान अब अंतरिक्ष अभियान में एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। जापान की स्पेस एजेंसी मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस की मिट्टी को धरती पर लाएगी। इस सैंपल का अध्ययन कर कई संभावनाओं का पता लगाया जा सकेगा।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/japan-space-mission-1792315515.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[जापान अंतरिक्ष मिशन]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/japan-space-mission-1792315515.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/japan-space-mission-1792315515.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      जापान अंतरिक्ष मिशन
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Explainer: </strong>जापान अपनी तकनीकी क्षमताओं से पूरी दुनिया को समय-समय पर अचंभे में डाल देता है। इस जापान अंतरिक्ष के क्षेत्र में इतिहास रचने की तैयारी कर रहा है। जापान एयरोस्पेस एक्सफ्लोरेशन एजेंसी (JAXA) मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी के सैंपल्स लाने के लिए अपना महत्वाकांक्षी मिशन लॉन्च करने जा रही है। यह विश्व का पहला ऐसा मिशन होगा जिसके तहत मंगल के किसी चंद्रमा की मिट्टी के सैंपल धरती पर लाए जाएंगे। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों से मंगल के इतिहास, चंद्रमाओं के निर्माण और सौरमंडल में जीवन की उत्पत्ति से जुड़े सवालों को समझने में मदद मिलेगी। यह मिशन भविष्य में मंगल पर मानव अभियान की संभावनाओं के लिहाज से भी अहम है।</p>

<h3>क्या है जापान का MMX मिशन?</h3>

<p>MMX मिशन का पूरा नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (Martian Moons eXploration) है। जापान एयरोस्पेस एक्सफ्लोरेशन एजेंसी (JAXA) इस मिशन को संचालित कर रही है। इसके तहत एक अंतरिक्ष यान मंगल के चंद्रमा फोबोस तक जाएगा और वहां की सतह की अध्ययन करेगा। साथ ही लौटते वक्त मिट्टी के सैंपल अपने साथ लेकर धरती पर वापस आएगा। प्लानिंग के मुताबिक जापान अंतरिक्ष यान को एच-3 रॉकेट के जरिए लॉन्च करेगा। यह यान अगस्त 2027 के आसपास मंगल क्षेत्र में पहुंचेगा और 2031 तक धरती पर वापस लौटेने की उम्मीद है। मंगल के किसी चंद्रमा से मिट्टी लेकर वापस लौटने का यह दुनिया का पहला मिशन होगा। इस मिशन में फ्रांस और जर्मनी का संयुक्त रूप से विकसित इडेफिक्स रोवर भी शामिल है। इसके अलावा अमेरिका और यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसियां उपकरणों तथा संचार व्यवस्था में सहयोग कर रही हैं।</p>

<h3>मंगल के दो चंद्रमा कौन-कौन?</h3>

<p>बता दें कि मंगल के दो प्राकृतिक चंद्रमा हैं- एक फोबोस और दूसरा डीमोस। इनका साइज अनियमित है और ये आलू की तरह दिखाई देते हैं। अगर पृथ्वी के चंद्रमा से इनकी तुलना की जाए तो इनके मुकाबले ये दोनों बहुत छोटे हैं। फोबोस मंगल के ज्यादा करीब है।  एक दिन में यह मंगल के तीन चक्कर लगाता है। डीमोस मंगल से अपेक्षाकृत दूर है। वैज्ञानिकों के लिए दोनों चंद्रमाओं की उत्पत्ति अब भी एक पहेली के समान है। यही कारण है कि इनकी मिट्टी और संरचना का अध्ययन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।</p>

<h3>रहस्य बने हुए हैं मंगल के Moon</h3>

<p>1960 के दशक से मंगल ग्रह पर दर्जनों मिशन भेजे गए हैं, लेकिन इसके चांद ज़्यादातर एक रहस्य ही बने हुए हैं। फोबोस और डीमोस के नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं में डर और आतंक के प्रतीक से लिए गए हैं, जो युद्ध के देवता एरेस के बेटे हैं, जिनका रोमन समकक्ष मंगल है। फोबोस पर उतरने की रूस की कई कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं, जिसमें 2011 में की गई एक कोशिश भी शामिल है।</p>

<h3>फोबोस और डीमोस बने कैसे?</h3>

<p>वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फोबोस और डीमोस बने कैसे? इसे समझने के लिए दो प्रमुख सिद्धांत हैं। पहला सिद्धांत ये है कि किसी बड़े खगोलीय पिंड के मंगल से टकराने के बाद निकले मलबे से दोनों चंद्रमाओं का निर्माण हुआ होगा। अगर ऐसा है, तो फोबोस की मिट्टी में मंगल से निकले पदार्थ के निशान मिल सकते हैं। वहीं दूसरे सिद्धांत के मुताबिक फोबोस और डीमोस दरअसल क्षुद्रग्रह हो सकते हैं, जो सौरमंडल के किसी दूसरे हिस्से से मंगल के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आकर उसकी परिक्रमा करने लगे। फोबोस से मिट्टी के सैंपल्स का विश्लेषण करके वैज्ञानिक इन दोनों संभावनाओं की जांच कर सकेंगे। इससे यह भी समझने में मदद मिल सकती है कि मंगल के आसपास के क्षेत्र का निर्माण और विकास कैसे हुआ।</p>

<h3>सैम्पल्स कैसे इकट्ठा करेगा अंतरिक्ष यान?</h3>

<p>इस मिशन का लक्ष्य फोबोस (मंगल के चंद्रमा) से कम से कम 10 ग्राम मिट्टी इकट्ठा करना है। इसके लिए दो अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। पहली तकनीक के तहत अमेरिकी उपकरण दबाव वाली गैस की मदद से सतह की धूल को एक कंटेनर में पहुंचाएगा। वहीं दूसरी तकनीक के तहत जापानी उपकरण मिट्टी में करीब दो सेंटीमीटर तक प्रवेश करके नमूने इकट्ठा करेगा। नमूनों को एक विशेष कैप्सूल में सुरक्षित रखा जाएगा। पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय पैदा होने वाली गर्मी से बचाने के लिए इसे खास तौर पर डिजाइन किया गया है। योजना के मुताबिक ये कैप्सूल्स वापसी में ऑस्ट्रेलिया में उतरेंगे उसके बाद सैम्पल्स को जापान ले जाया जाएगा।</p>

<h3>फोबोस पर उतरना मुश्किल क्यों?</h3>

<p>दरअसल, मंगल के चंद्रमा फोबोस पर गुरुत्वाकर्षण धरती के मुकाबले लगभग 2,000 गुना कम है। इतनी कम गुरुत्वाकर्षण वाली सतह पर उतरना आसान नहीं है। अंतरिक्ष यान को उतरते समय अस्थिर होने से बचाना होगा। इसके लिए MMX के लैंडिंग मॉड्यूल में झटके सहने वाले चार पैरों वाला सिस्टम लगाया गया है। रोवर को भी कम गुरुत्वाकर्षण में चलने और पलट जाने पर खुद को सीधा करने के लिए डिजाइन किया गया है।</p>

<h3>क्यों अहम है यह अभियान?</h3>

<p>बता दें कि अमेरिका, चीन और अन्य देश भविष्य में मंगल पर मानव मिशन भेजने की संभावनाओं पर काम कर रहे हैं। ऐसे में मंगल के चंद्रमा का अध्ययन वैज्ञानिक और व्यावहारिक, दोनों लिहाज से काफी महत्वपूर्ण हो सकता है। वैज्ञानिक यह भी समझना चाहते हैं कि क्या मंगल के किसी चंद्रमा का इस्तेमाल भविष्य में मानव मिशन के लिए एक पड़ाव या संचालन केंद्र के रूप में किया जा सकता है।</p>

<p>बता दें जून 2025 में <a href="https://www.indiatv.in/world/asia/japan-lunar-mission-suffers-setback-moon-lander-resilience-crashes-during-landing-2025-06-06-1140764" target="_blank" title="जापान के चंद्र मिशन को लगा झटका, लैंडिंग के दौरान क्रैश हुआ मून लैंडर Resilience">जापान का एक प्राइवेट लैंडर चंद्रमा पर उतरने का प्रयास करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया</a> था। टोक्यो स्थित कंपनी आईस्पेस ने लैंडर से संपर्क टूटने के कई घंटे बाद मिशन को विफल घोषित किया था। लॉन्च कंट्रोलर्स ने लैंडर से संपर्क करने के तमाम प्रयास किए लेकिन उन्हें कोई संदेश नहीं मिला जिसके बाद उन्होंने कहा कि वो मिशन को समाप्त कर रहे हैं। </p>

<p>(इनपुट-एपी)</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/is-banning-social-media-for-children-the-right-move-research-reveals-a-better-way-to-protect-teen-mental-health-2026-10-17-1249454" target="_blank" title="बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन कितना सही? रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें, जानिए क्या है बेहतर रास्ता">बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन कितना सही? रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें, जानिए क्या है बेहतर रास्ता</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/japan-to-launch-spacecraft-on-a-mission-to-get-samples-from-a-martian-moon-phobos-mmx-mission-know-details-2026-10-18-1249570     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/japan-to-launch-spacecraft-on-a-mission-to-get-samples-from-a-martian-moon-phobos-mmx-mission-know-details-2026-10-18-1249570 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 18 Oct 2026 14:56:14 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन कितना सही? रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बातें, जानिए क्या है बेहतर रास्ता     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने से मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं पूरी तरह दूर होने की संभावना कम है। रिसर्च के मुताबिक, मजबूत प्राइवेसी सेटिंग, लत लगाने वाले फीचर्स पर नियंत्रण, डिजिटल शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता बच्चों को ऑनलाइन ज्यादा सुरक्षित रखने के बेहतर उपाय हो सकते हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-1792245233.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[दुनिया के कई देशों में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी हो रही है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PIXABAY REPRESENTATIONAL]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-1792245233.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-1792245233.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      दुनिया के कई देशों में नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया पर बैन की तैयारी हो रही है।
                      <span class="copyright">Image Source : PIXABAY REPRESENTATIONAL</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Social Media Ban for Children: </strong>बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत पर सोशल मीडिया के असर को लेकर दुनिया भर में बहस तेज है। कई देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की शुरुआत कर दी है, जबकि दूसरे देश भी ऐसे कदम उठाने पर विचार कर रहे हैं। लेकिन क्या सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन लगाने से बच्चों की चिंता, तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं दूर हो जाएंगी? डिजिटल मीडिया और मार्केटिंग के प्रभावों का अध्ययन करने वाले एक रिसर्चर का मानना है कि इसका जवाब इतना आसान नहीं है। रिसर्च से जुड़ी शुरुआती बातें बताती हैं कि प्रतिबंध लगाना अकेले इस समस्या का प्रभावी समाधान नहीं हो सकता।</p>

<h3><strong>सोशल मीडिया कंपनियों पर क्यों बढ़ रहा है दबाव?</strong></h3>

<p>साल 2026 सोशल मीडिया कंपनियों के लिए कानूनी चुनौतियों से भरा रहा है। मार्च से यूट्यूब और इंस्टाग्राम-फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा कई मुकदमों में समझौते कर चुकी हैं या भुगतान कर चुकी हैं। इन मामलों की कुल रकम 17 अरब डॉलर से ज्यादा बताई गई है। कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने बच्चों को अपने प्लेटफॉर्म से जोड़े रखने के लिए जानबूझकर ऐसे डिजाइन बनाए, जो उन्हें बार-बार इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करते हैं। साथ ही, सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर जनता को गुमराह करने के आरोप भी लगे हैं। इन मुकदमों से संकेत मिलता है कि कंपनियों के कामकाज पर सरकारों और लोगों की नजर है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-impact-1792245356.jpg"    /></p>

<h3><strong>कितने देशों में बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन?</strong></h3>

<p>दुनिया के कई देश अब नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को सीमित करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने दिसंबर 2025 से 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लागू किया। इसके बाद ब्रिटेन ने भी इसी तरह का प्रतिबंध लगाने की दिशा में कदम बढ़ाया। ग्रीस, संयुक्त अरब अमीरात और कनाडा समेत 20 से ज्यादा देश नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर रोक लगाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। हालांकि, सभी देशों के नियम एक जैसे नहीं हैं। कहीं उम्र की सीमा अलग है, तो कहीं माता-पिता की सहमति और उम्र की पुष्टि करने के तरीकों पर अलग-अलग नियम बनाए जा रहे हैं।</p>

<h3><strong>किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लग सकती है रोक?</strong></h3>

<p>प्रस्तावित और लागू प्रतिबंधों में अलग-अलग प्लेटफॉर्म शामिल हैं। इनमें स्नैपचैट, यूट्यूब, टिकटॉक, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे नाम प्रमुख हैं। हालांकि, सभी देश इन सभी प्लेटफॉर्म पर एक साथ रोक लगाने की योजना नहीं बना रहे हैं। प्रतिबंधों के पीछे मानसिक स्वास्थ्य के अलावा दूसरे कारण भी हैं। कुछ सरकारें विदेशी कंपनियों के नियंत्रण वाले प्लेटफॉर्म को लेकर राजनीतिक चिंताएं जताती हैं, जबकि कुछ का जोर बच्चों की निजी जानकारी और ऑनलाइन सुरक्षा पर है। इसके बावजूद, बच्चों और किशोरों की मानसिक सेहत लगभग हर उस सरकार की प्रमुख वजहों में शामिल है, जो सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने की बात कर रही है।</p>

<h3><strong>सोशल मीडिया से बच्चों की मानसिक सेहत पर क्या असर पड़ता है?</strong></h3>

<p>सोशल मीडिया के मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव को लेकर बहस 2024 में जोनाथन हैड्ट की किताब ‘द एंग्जियस जनरेशन’ के बाद और तेज हुई। हैड्ट का तर्क है कि <a href="http://www.indiatv.in/explainers/how-excessive-social-media-use-may-affect-children-mental-health-according-to-new-study-2026-06-13-1224932" target="_blank" title=" क्या आपका बच्चा भी सोशल मीडिया का दीवाना है? स्टडी में पता चला बहुत बड़ा खतरा">सोशल मीडिया बच्चों के सामाजिक और दिमागी विकास को प्रभावित कर सकता है। इसके संभावित नुकसान में नींद की कमी, ध्यान का बार-बार भटकना, सोशल मीडिया की लत, अकेलापन, दूसरों से अपनी तुलना करना और हर चीज में परफेक्ट बनने का दबाव शामिल हैं।</a> इन कारणों से चिंता और डिप्रेशन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति पर केवल सोशल मीडिया को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि इसके पीछे कई सामाजिक और व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/online-safety-for-children-1-1792245321.jpg"    /></p>

<h3><strong>मानसिक स्वास्थ्य को लेकर आंकड़े क्या बताते हैं?</strong></h3>

<p>एक अध्ययन के मुताबिक, 2026 में 14 से 20 साल के युवाओं में मानसिक बीमारी का अनुभव करने की संभावना 50 साल पहले इसी उम्र के लोगों के मुकाबले 100 फीसदी से ज्यादा है। वहीं, वैश्विक स्तर पर 2021 के अनुमान के मुताबिक, 20.5 फीसदी युवाओं में चिंता के बढ़े हुए लक्षण और 25.2 फीसदी में डिप्रेशन के बढ़े हुए लक्षण पाए गए थे। शोधकर्ता मानते हैं कि सोशल मीडिया और स्क्रीन पर बढ़ता समय इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। हालांकि, मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की बेहतर पहचान और जागरूकता भी बढ़ी है। कोविड-19 महामारी के दौरान लोग घरों में सीमित हुए और पढ़ाई, काम तथा सामाजिक मेलजोल ऑनलाइन होने लगा, जिससे अकेलेपन और सामाजिक दूरी में बढ़ोतरी हुई।</p>

<h3><strong>क्या सोशल मीडिया के कुछ फायदे भी हैं?</strong></h3>

<p>सोशल मीडिया के आलोचक कई बार इसकी तुलना शराब और सिगरेट से करते हैं। उनका तर्क है कि जिस तरह इन चीजों की खरीद पर उम्र संबंधी प्रतिबंध हैं, उसी तरह सोशल मीडिया पर भी बच्चों के लिए रोक लगनी चाहिए। लेकिन सोशल मीडिया और इन पदार्थों में एक अहम अंतर है। सोशल मीडिया के कुछ फायदे भी हैं, खासकर उन किशोरों के लिए जो अपने आसपास के समुदाय से जुड़ाव महसूस नहीं करते। इसके जरिए वे समान रुचियों वाले लोगों से जुड़ सकते हैं, नए समुदाय बना सकते हैं, अपनी बात सामने रख सकते हैं और सामाजिक मुद्दों में भागीदारी कर सकते हैं। अमेरिका में प्यू रिसर्च के एक सर्वे में 80 फीसदी किशोरों ने कहा कि सोशल मीडिया उन्हें अपने दोस्तों की जिंदगी में हो रही घटनाओं से जुड़े रहने में मदद करता है।</p>

<h3><strong>तंबाकू कंपनियों से समझौते का क्यों हो रहा है जिक्र?</strong></h3>

<p>सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ मुकदमों और समझौतों की तुलना तंबाकू उद्योग से भी की जा रही है। 1998 में अमेरिकी राज्यों ने बड़ी तंबाकू कंपनियों के साथ समझौता किया था, ताकि धूम्रपान से जुड़े स्वास्थ्य खर्चों की भरपाई हो सके। इस समझौते की कुछ रकम युवाओं में धूम्रपान कम करने वाले कार्यक्रमों के लिए तय की गई थी। लेकिन 2026 में ऐसे कार्यक्रमों पर राज्यों की कुल फंडिंग, तंबाकू कर और समझौते से मिलने वाले 21.7 अरब डॉलर के राजस्व का केवल 3.4 फीसदी है। इससे सवाल उठता है कि नुकसान कम करने के उद्देश्य से मिलने वाला पैसा वास्तव में उसी काम पर कितना खर्च हो रहा है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-ban-for-children-1792245373.jpg"    /></p>

<h3><strong>मेटा के 17 अरब डॉलर के समझौते से क्या होगा?</strong></h3>

<p>अगस्त 2026 में मेटा ने कई अमेरिकी राज्यों के साथ 17 अरब डॉलर के समझौते में रकम देने पर सहमति जताई। इस पैसे का कुछ हिस्सा मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे को मजबूत करने, स्कूलों और समुदायों में कार्यक्रम चलाने तथा जनस्वास्थ्य जागरूकता अभियान के लिए निर्धारित किया गया है। लेकिन यहां भी एक बड़ी समस्या है। राज्यों को यह बताने के लिए स्पष्ट निगरानी व्यवस्था या तय दिशा-निर्देश नहीं हैं कि वे इस रकम का इस्तेमाल कैसे करें। साथ ही, ऐसा कोई व्यवस्थित तरीका नहीं है, जिससे यह पता चल सके कि इस पैसे से बच्चों की मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, सुरक्षा और भलाई में कितना सुधार हुआ। यानी रकम मिलने के साथ उसके प्रभाव का हिसाब रखना भी जरूरी है।</p>

<h3><strong>ऑस्ट्रेलिया में बच्चे कैसे चला रहे हैं सोशल मीडिया?</strong></h3>

<p>ऑस्ट्रेलिया में सोशल मीडिया प्रतिबंध के शुरुआती अनुभव बताते हैं कि नियम लागू करना आसान नहीं है। उपलब्ध शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, 12 से 15 साल की उम्र के करीब 61 फीसदी बच्चे प्रतिबंध के बावजूद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक पहुंच बना रहे हैं। इसके लिए वे फर्जी पहचान का इस्तेमाल करते हैं, अपनी तस्वीरों में बदलाव करते हैं या वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क की मदद लेते हैं। इस दौरान लाखों अकाउंट बंद भी किए गए। बच्चों के इन तरीकों से नियमों को चकमा देने की खबरों के बीच ब्रिटेन के सांसद उपभोक्ताओं के लिए वीपीएन के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाने के प्रस्ताव पर भी चर्चा कर रहे हैं।</p>

<h3><strong>उम्र की पहचान करने वाली तकनीक में क्या दिक्कतें हैं?</strong></h3>

<p>ऑस्ट्रेलिया जैसे कुछ देशों में सोशल मीडिया कंपनियों को खुद ऐसी व्यवस्था बनाने को कहा गया है, जिससे यूजर्स की उम्र की पुष्टि की जा सके। लेकिन इस तकनीक को भी आसानी से चकमा दिया जा सकता है। कुछ नाबालिगों ने चेहरे की पहचान करने वाली तकनीक को धोखा देने के लिए फोटो एडिटिंग सॉफ्टवेयर, मशहूर हस्तियों की तस्वीरों, खास मेकअप और बड़े दोस्तों या माता-पिता की मदद का इस्तेमाल किया। कुछ बच्चों ने अकाउंट बनाते समय अपनी जन्मतिथि गलत दर्ज की या परिवार के किसी वयस्क के पहले से वेरिफाइड अकाउंट का इस्तेमाल किया। इसके अलावा, उम्र की सही पुष्टि करने के लिए संवेदनशील निजी डेटा जुटाना पड़ता है, जिससे प्राइवेसी को लेकर नई चिंताएं पैदा होती हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/social-media-ban-1792245306.jpg"    /></p>

<h3><strong>प्रतिबंध लागू होने के बाद भी कितने बच्चे सोशल मीडिया पर हैं?</strong></h3>

<p>ऑस्ट्रेलिया में प्रतिबंध लागू कराने की जिम्मेदारी संभालने वाले सुरक्षा आयुक्त ने एक अनुपालन रिपोर्ट में बताया कि प्रतिबंधित प्लेटफॉर्म पर पहले से अकाउंट रखने वाले 10 में से करीब 7 बच्चे अब भी उन प्लेटफॉर्म पर मौजूद थे। रिपोर्ट के मुताबिक, 10 से 15 साल के 80 फीसदी से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई किशोर अब भी नियमित रूप से सोशल मीडिया इस्तेमाल करते हैं। ऑस्ट्रेलिया सरकार उन कंपनियों पर जुर्माना बढ़ाने की कोशिश भी कर रही है, जो नियमों का पालन नहीं करतीं। नीति बनाने वालों की एक और चिंता यह है कि पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से कुछ बच्चे मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म छोड़कर ऐसे ऑनलाइन ठिकानों पर जा सकते हैं, जहां जोखिम और भी ज्यादा हो।</p>

<h3><strong>फिर क्या है बेहतर रास्ता?</strong></h3>

<p>शोधकर्ता का मानना है कि केवल सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने से युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य संकट का प्रभावी समाधान होने की संभावना कम है। इसके बजाय सरकारों को कंपनियों के लिए ऐसे सुरक्षा मानक अनिवार्य करने चाहिए, जो शुरुआत से ही लागू हों। इसे ‘सेफ्टी बाय डिफॉल्ट’ कहा जाता है। इसका मतलब है कि बच्चों के अकाउंट पर सबसे मजबूत सुरक्षा और प्राइवेसी सेटिंग पहले से चालू हो। उदाहरण के लिए, बच्चों की प्रोफाइल डिफॉल्ट रूप से सर्च में दिखाई न दे, ताकि अनजान लोग उन्हें आसानी से खोज न सकें। यदि बच्चे अपनी प्रोफाइल को अधिक लोगों के लिए उपलब्ध कराना चाहें, तो उन्हें खुद सेटिंग बदलनी पड़े। इससे ऑनलाइन अनजान लोगों से संपर्क का जोखिम घटाया जा सकता है।</p>

<h3><strong>सोशल मीडिया की लत लगाने वाले फीचर्स पर भी नियंत्रण जरूरी</strong></h3>

<p>सुरक्षा मानकों के तहत प्लेटफॉर्म के ऐसे डिजाइन और एल्गोरिदम पर भी सीमाएं लगाई जा सकती हैं, जो यूजर्स को बार-बार ऐप खोलने या लगातार स्क्रॉल करते रहने के लिए प्रेरित करते हैं। शोधकर्ता के मुताबिक, इस तरह के फीचर्स कमजोर स्थिति में मौजूद बच्चों और किशोरों को मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही, बच्चों को डिजिटल लिटरेसी और ऑनलाइन सुरक्षा की शिक्षा देना भी जरूरी है, ताकि वे इंटरनेट के फायदे और जोखिम दोनों को समझ सकें। स्क्रीन से दूर रहने के लिए दिन में कुछ समय तय करना भी मददगार हो सकता है। इस तरह बच्चों को सोशल मीडिया से पूरी तरह काटने के बजाय सुरक्षित इस्तेमाल के लिए तैयार किया जा सकता है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/online-safety-for-children-1792245335.jpg"    /></p>

<h3><strong>माता-पिता और सरकार की क्या भूमिका होनी चाहिए?</strong></h3>

<p>बच्चों के व्यवहार में बदलाव पर माता-पिता और उनकी देखभाल करने वाले वयस्कों को ध्यान देना चाहिए। यदि किसी बच्चे में सोशल मीडिया या स्क्रीन के अत्यधिक इस्तेमाल के संकेत दिखें, तो परिवार को मदद लेने के आसान, स्पष्ट और किफायती विकल्प मिलने चाहिए। फिलहाल, कई जगह बच्चों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता तक पहुंच आसान नहीं है। संयुक्त राष्ट्र भी सुझाव देता है कि बच्चों को उनके ऑनलाइन भविष्य से जुड़े फैसलों में अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। इसका मतलब यह नहीं है कि 12 साल के बच्चों को नियामक संस्थाओं की जिम्मेदारी सौंप दी जाए। बल्कि उनकी राय से यह समझा जा सकता है कि वे ऑनलाइन क्या पसंद करते हैं, किन चीजों से जुड़ते हैं और स्क्रीन से दूर होना उनके लिए मुश्किल क्यों होता है।</p>

<h3><strong>बैन से ज्यादा जरूरी है सुरक्षित सोशल मीडिया</strong></h3>

<p>सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने का उद्देश्य बच्चों को मानसिक नुकसान से बचाना है, लेकिन शुरुआती अनुभव दिखाते हैं कि ऐसे नियमों को लागू करना और उनका पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण है। बच्चे प्रतिबंधों से बचने के तरीके खोज सकते हैं और कुछ मामलों में ज्यादा जोखिम वाले ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की ओर भी जा सकते हैं। इसलिए शोधकर्ता के मुताबिक, सरकारों, सोशल मीडिया कंपनियों, स्कूलों और परिवारों को मिलकर काम करना चाहिए। बेहतर सुरक्षा और प्राइवेसी सेटिंग, लत लगाने वाले फीचर्स पर नियंत्रण, डिजिटल शिक्षा, स्क्रीन से नियमित दूरी और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को साथ लेकर चलना जरूरी है। बच्चों की राय को भी इन प्रयासों में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वे ऑनलाइन दुनिया में ज्यादा सुरक्षित रह सकें और संतुलित जीवन जी सकें। (द कन्वर्सेशन)</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="http://www.indiatv.in/explainers/what-is-social-gaming-why-govt-passed-online-gaming-bill-to-curb-real-money-games-2025-08-24-1157985" target="_blank" title="क्या है सोशल गेमिंग? जानें रियल मनी वाले गेम बंद होने की असली कहानी, क्यों सरकार ने लिया बड़ा फैसला?">क्या है सोशल गेमिंग? जानें रियल मनी वाले गेम बंद होने की असली कहानी, क्यों सरकार ने लिया बड़ा फैसला?</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/is-banning-social-media-for-children-the-right-move-research-reveals-a-better-way-to-protect-teen-mental-health-2026-10-17-1249454     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/is-banning-social-media-for-children-the-right-move-research-reveals-a-better-way-to-protect-teen-mental-health-2026-10-17-1249454 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 17 Oct 2026 19:24:34 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     कोलकाता की रंग बिरंगी सड़कें देखीं? सुंदरता और सुरक्षा पर क्यों उठे सवाल, क्या कहते हैं नियम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ कोलकाता की रंग बिरंगी सड़कें सबका मन मोह रही हैं, लेकिन इन सड़कों पर पिछले दिनों हुई दुर्घटना की खबर ने इन सड़कों को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या सड़कों को सुंदर बनाने के साथ सुरक्षित भी बनाया जा सकता है? जानें इस एक्सप्लेनर में....    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/colourful-road-1792141078.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[कोलकाता की रंग बिरंगी सड़कें]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/colourful-road-1792141078.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/colourful-road-1792141078.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      कोलकाता की रंग बिरंगी सड़कें
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><a href="https://www.indiatv.in/west-bengal">पश्चिम बंगाल</a> में दुर्गा पूजा के मौके पर राज्य सरकार की पहल पर कोलकाता को नए सिरे से सजाया जा रहा है। कहीं रोशनी की चमक, तो कहीं रंगोली। वहीं, इस बीच कोलकाता के कई फ्लाईओवर और ब्रिज को भी नए रंग में सजाने का इंतजाम किया है कोलकाता नगर निगम और हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स (HRBC) ने। पहले से ही गड़ियाहाट और चिंगरीघाटा फ्लाईओवर की सड़क पर रंग करने का काम चल रहा है। हालांकि पहल सामने आते ही जहां कई लोगों ने इस पहल की तारीफ की, वहीं कई लोगों को आशंका है कि इन रंग बिरंगी सड़कों  पर गाड़ी चलाते समय विजन की समस्या हो सकती है, इससे दुर्घटना होने की आशंका भी है। </p>

<p>बुधवार दोपहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें देखा जा रहा है कि सड़क पर ऑयल पेंट करने की वजह से और साथ में बारिश की वजह से फिसलकर एक के बाद एक, तीन बाइक स्किड करके गिर गईं और दुर्घटना का शिकार हो गईं। इसी को लेकर अब अग्निमित्रा पॉल के नगर विकास विभाग को विरोधियों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।</p>

<p><strong>कोलकाता की रंग बिरंगी सड़क, देखें वीडियो</strong></p>

<p><div class="atmidvid"><div class="mtvidmb"><iframe src="https://www.indiatv.in/widgets/playervod?accountId=63bd2161756d5f000872bc0b&profile=ee1c1003868cb_vod&streamUrl=//vod-indiatv.akamaized.net/63bd2161756d5f000872bc0b/2026/10/pzv2fps2/master.m3u8&posterImageUrl=//thumbs.indiatvnews.com/63bd2161756d5f000872bc0b/2026/10/medium_thumb/pzv2fps2.jpg&pip=0&piv=0&autoplay="    allowfullscreen="true" webkitallowfullscreen="true" frameborder="0" msallowfullscreen="true" scrolling="no"></iframe></div></div>

<p><strong>कोलकाता के 'रेनबो फ्लाईओवर' पर क्या हुआ?</strong><br />
यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक वीडियो सामने आया, जिसमें कोलकाता के एक फ्लाईओवर पर कई बाइक सवार चमकीले रंगों से रंगे और बारिश से भीगे हिस्से पर फिसलते हुए दिखाई दिए। 14 अक्टूबर को छपी रिपोर्टों के अनुसार, फुटेज में देखा जा सकता है कि एक के बाद एक कई बाइक सवार अपना संतुलन खो बैठे। इन घटनाओं के दौरान क्या हुआ, और क्या कोई घायल हुआ, यह शुरुआती रिपोर्टों से स्पष्ट नहीं हो सका। फुटेज की असलियत और फिसलने के सटीक कारण की अभी पुष्टि होनी बाकी है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/roads-1792141713.jpg"    /></p>

<p>पॉल ने बताया कि अधिकारियों को इस घटना की जांच करने और कारण का पता लगाने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने कहा कि सड़क पर 'एंटी-स्किड' (फिसलन रोकने वाला) पेंट का इस्तेमाल किया गया था, और अगर इस कोटिंग की वजह से सड़क उपयोगकर्ताओं को कोई दिक्कत आती है, तो प्रशासन इसमें बदलाव करने पर विचार करेगा। जांच से यह पता चलने की उम्मीद है कि क्या फिसलने की वजह पेंट था, सड़क का गीला होना था, या फिर कोई और कारण था।</p>

<p><strong>रंग बिरंगी सड़क को लेकर सियासत तेज</strong></p>

<p>कुणा घोष ने कहा, अगर आपको अनसाइंटिफिक और खतरनाक पेंट हटाना ही है, तो इतनी बचकानी हरकत क्यों की? हादसे की ज़िम्मेदारी कौन लेगा? किसके पैसे बर्बाद हुए? चिंगरीहाट हादसे और गरियाहाट में पेंट हटाने की तस्वीरें रहने दीजिए।</p>

<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/KunalGhoshAgain/status/2110569219222036943?s=20"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<p>टीएमसी ने आरोप लगाया, बंगाल में जनता के जनादेश को चुराकर सत्ता में आई भाजपा सरकार अब लोगों की जान जोखिम में डाल रही है! हाल ही में पेंट किया गया फ्लाईओवर एक 'मौत का जाल' बन गया है; पहली ही बारिश में यहां बाइकें फिसल रही हैं और हादसे हो रहे हैं। इस घोर लापरवाही के लिए मंत्री @paulagnimitra1 को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। बंगाल की जनता को सुरक्षित सड़कें चाहिए, न कि खतरनाक बुनियादी ढांचा!</p>

<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/AITCofficial/status/2110340395192430961?s=20"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<p>सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सजावटी रंग-रोगन टायरों की पकड़ (ग्रिप) को कम कर सकते हैं और एक सामान्य सफर को दुर्घटना का कारण बना सकते हैं। पश्चिम बंगाल की शहरी विकास और नगरपालिका मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने इस घटना की जांच के आदेश दिए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि वे उस जगह का निरीक्षण करें और पता लगाएं कि आखिर किस वजह से गाड़ियां गिरीं।</p>

<p>अग्निमित्रा पॉल का कहना है कि सौंदर्यीकरण के काम में 'एंटी-स्किड' (फिसलन रोकने वाले) पेंट का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने कहा कि अगर इन रंगों की वजह से देखने में दिक्कत आती है या वाहन चालकों को कोई परेशानी होती है, तो अधिकारी वैकल्पिक इंतजामों पर विचार करेंगे।</p>

<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/Tamal0401/status/2110323957933240510?s=20"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<p><strong>सड़कों पर पेंट करने से फिसलेंगे वाहन? </strong><br />
जब किसी वाहन के टायर सड़क पर अच्छी पकड़ (ग्रिप) बनाए रखते हैं, तो वह सुरक्षित रूप से चलता है। यह पकड़ टायर के रबर और सड़क की सतह के बीच होने वाले घर्षण (फ्रिक्शन) से मिलती है। इसी की मदद से चालक वाहन की गति बढ़ा सकता है, ब्रेक लगा सकता है, दिशा बदल सकता है और संतुलन बनाए रख सकता हैं, खासकर घुमावदार रास्तों पर। जब सड़क पर पेंट किया जाता है, तो यह कोटिंग सड़क की सतह के बनावट (टेक्सचर) को बदल सकती है। पेंट के प्रकार, उसमें इस्तेमाल सामग्री, उसकी फिनिश और सड़क की मौजूदा हालत के आधार पर, नई सतह पर पुरानी डामर वाली सड़क की तुलना में कम पकड़ मिल सकती है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/road-safety-1792141652.jpg"    /></p>

<p>सड़क गीली होने पर खतरा और बढ़ सकता है। पानी, टायर और सड़क के बीच के संपर्क और घर्षण को कम कर सकता है। वहीं, चिकनी या खराब बनावट वाली कोटिंग भी कम पकड़ दे सकती है। अगर सड़क पर इतनी पकड़ नहीं है कि चालक की ब्रेक लगाने, दिशा बदलने या मोड़ काटने की जरूरतों को पूरा कर सके, तो टायर फिसल सकते हैं। हालांकि, सभी सड़क कोटिंग्स एक जैसे जोखिम पैदा नहीं करतीं। </p>

<p><strong>क्या सड़कों को सुरक्षित रखते हुए सुंदर बनाया जा सकता है?</strong></p>

<ul>
	<li>सड़क पर कलाकृतियों को ऐसी जगहों पर लगाना चाहिए, जहां वाहनों की पकड़ पर कोई असर न पड़े।</li>
	<li>कोलकाता की अल्पना जैसी पारंपरिक डिज़ाइनों को फुटपाथों, पैदल यात्री चौकों, सड़क किनारे की दीवारों, ट्रैफिक-आइलैंड की सतहों और मुख्य वाहन मार्ग से दूर अन्य क्षेत्रों पर चित्रित किया जा सकता है। </li>
	<li>अधिकारियों को विशेष रूप से वाहनों के लिए डिज़ाइन और परीक्षित उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। व्यापक उपयोग से पहले उनकी गीली सतह पर फिसलन प्रतिरोध क्षमता, टिकाऊपन, दृश्यता और मौजूदा सड़क सतह के साथ अनुकूलता की जांच की जानी चाहिए।</li>
	<li> विशेष उच्च-घर्षण वाली सतहों में एक उपयुक्त बाइंडर को टिकाऊ एग्रीगेट के साथ मिलाकर एक बनावट वाली सतह बनाई जा सकती है। ऐसे सिस्टम का चयन और इंस्टॉलेशन इंजीनियरिंग विनिर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए, विशेष रूप से मोड़ों, जंक्शनों के पास और अन्य स्थानों पर जहां ब्रेकिंग या स्टीयरिंग की आवश्यकता अधिक होती है।</li>
	<li>उपयुक्त रूप से डिजाइन किए गए कर्ब, ऊंचे पैदल यात्री क्षेत्र और कम गति वाले क्षेत्रों में पैटर्न वाली सतहों के माध्यम से रंग का उपयोग कर सकते हैं। ये पूरी हाई-स्पीड सड़क को पेंट करने की तुलना में अधिक टिकाऊ विकल्प प्रदान कर सकते हैं।</li>
	<li> रिटेनिंग दीवारों पर भित्ति चित्र, रंगीन खंभे, कलात्मक प्रकाश व्यवस्था, सजावटी रेलिंग और सार्वजनिक कला प्रतिष्ठान वाहनों के चलने वाली सतह को बदले बिना फ्लाईओवरों को नया रूप दे सकते हैं। </li>
	<li>सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए गड्ढों की मरम्मत, जल निकासी, परावर्तक लेन चिह्न, स्पष्ट संकेत, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और नियमित रखरखाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सजावटी कार्य सड़क की खामियों को छिपाना नहीं चाहिए और न ही चालकों का ध्यान यातायात संकेतों और लेन सीमाओं से भटकाना चाहिए।</li>
	<li>किसी भी रंगी हुई सड़क को नियमित यातायात के लिए खोलने से पहले, अधिकारियों को उसकी गीली और सूखी फिसलन प्रतिरोध क्षमता, सतह की बनावट, जल निकासी, दृश्यता और स्थायित्व का मूल्यांकन करना चाहिए। यातायात और मौसम की स्थितियों को देखते हुए निगरानी करनी चाहिए।</li>
</ul>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/social-media-post-on-paigambar-muhammad-leads-death-sentence-who-is-iranian-student-najmeh-amini-2026-10-16-1249174">ईरान में एक पोस्ट और मिली मौत की सजा, कौन हैं 23 वर्षीय ईरानी छात्रा नजमेह अमिनी?</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/kolkata-colorful-roads-politics-boil-details-about-safe-ways-to-beautify-streets-explained-2026-10-16-1249219     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/kolkata-colorful-roads-politics-boil-details-about-safe-ways-to-beautify-streets-explained-2026-10-16-1249219 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 14:45:33 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     ईरान में एक पोस्ट, और मिली मौत की सजा, कौन हैं 23 वर्षीय ईरानी छात्रा नजमेह अमिनी?      ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ ईरान में सोशल मीडिया पोस्ट के आरोप में 23 साल की छात्रा को मौत की सजा सुनाई गई है। छात्रा का नाम नजमेह अमिनी है और उनपर ईशनिंदा का आरोप है। जानिए अमिनी ने क्या पोस्ट किया था और क्या कहता है ईरान का कानून?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/amini-1792129355.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[कौन है नजमेह अमिनी, मिली है मौत की सजा]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/amini-1792129355.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/amini-1792129355.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      कौन है नजमेह अमिनी, मिली है मौत की सजा
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world">ईरान</a> की 23 वर्षीय छात्रा, नजमेह अमिनी को सोशल मीडिया पोस्ट पर कथित ईशनिंदा के आरोप में मौत की सजा सुनाई गई है। ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद की रहने वाली अमिनी सजा के बाद फिर से मानवाधिकारों से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय विवाद के केंद्र में आ गई हैं। उनके मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धार्मिक कानूनों और ईरान में मौत की सजा के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर उन लोगों के संदर्भ में जो सरकार विरोधी प्रदर्शनों में शामिल रहे हैं।</p>

<p><strong>अमिनी पर क्या आरोप लगे हैं?</strong><br />
अमिनी को मौत की सजा इस आरोप के कारण सुनाई गई है कि उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में पैगंबर मुहम्मद का अपमान किया था। इस अपराध को 'सब्ब अल-नबी' (यानी पैगंबर का अपमान) कहा जाता है, और ईरान के इस्लामिक दंड संहिता की धारा 262 के तहत इसके लिए मौत की सजा का प्रावधान है। रिपोर्टों के अनुसार, सुरक्षा बलों द्वारा अमिनी की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। उनके मामले की सुनवाई मशहद की एक आपराधिक अदालत में हुई, जहां कथित धार्मिक अपराध को मौत की सजा का आधार बनाया गया।</p>

<p><strong>क्या कहता है ईरान का कानून?</strong></p>

<ul>
	<li>ईरान के इस्लामिक दंड संहिता की धारा 262 के तहत, पैगंबर मुहम्मद का अपमान करने पर मौत की सजा दी जा सकती है। धारा 263 में कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान है, जैसे कि अगर वे शब्द अनजाने में कहे गए हों।</li>
	<li>ईरानी कानून में ईशनिंदा (धार्मिक अपमान) से जुड़े प्रावधानों के तहत कुछ खास परिस्थितियों में छूट दी गई है; जैसे कि अगर कोई टिप्पणी अनजाने में की गई हो या नशीले पदार्थों के प्रभाव में की गई हो।</li>
	<li>अनुच्छेद 263 में ऐसी परिस्थितियों का जिक्र है, जिनमें किसी बयान को मौत की सजा वाला अपराध नहीं माना जा सकता। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति को किसी भी तरह की सजा नहीं मिलेगी। खबरों के अनुसार, अदालत ने अमिनी की दलील को स्वीकार नहीं किया।</li>
	<li>अमिनी पर चल रहे व्यापक कानूनी मामलों में 'मोहारेबेह' (ईश्वर के खिलाफ दुश्मनी), किसी शत्रु देश के साथ सहयोग करना, ईरान के सर्वोच्च नेता का अपमान करना और सुरक्षाकर्मियों के साथ भिड़ना जैसे आरोप भी शामिल थे। खबरों के मुताबिक, ईशनिंदा का मामला और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कानूनी कार्यवाही, दोनों अलग-अलग मामले थे।</li>
</ul>

<p><strong>अमिनी ने जेल से रिकॉर्ड किया वीडियो</strong><br />
जेल से रिकॉर्ड किए गए एक कथित ऑडियो संदेश में, अमिनी ने ईशनिंदा के बदले मिली मौत की सजा पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उन्होंने अपने परिवार और भविष्य की अपनी उम्मीदों का जिक्र करते हुए यह डर भी जताया है कि शायद उन्हें अपनी बात कहने का कोई और मौका ना मिले। हालांकि, उनकी मौत की सजा अभी अंतिम नहीं है और इसके खिलाफ ईरान के सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।</p>

<p><strong>जनवरी में गिरफ्तार हुई थीं अमिनी</strong><br />
अमिनी को जनवरी 2026 में देशव्यापी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान गिरफ़्तार किया गया था। इन प्रदर्शनों के बाद बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई, जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों ने कई लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में, उनका मामला उनकी शुरुआती गिरफ़्तारी के हालात से आगे बढ़ गया। 'ईरान ह्यूमन राइट्स' और 'ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी' (HRANA) की रिपोर्टों से पता चलता है कि उन पर अलग-अलग आपराधिक मामले चलाए गए, जिसके परिणामस्वरूप एक मामले में उन्हें लंबी जेल की सज़ा सुनाई गई और दूसरे मामले में मौत की सज़ा दी गई।</p>

<p>अमिनी को मशहद की वकीलाबाद जेल में रखा गया है। ईशनिंदा (blasphemy) के मामले के केंद्र में रही सोशल मीडिया पोस्ट में असल में क्या लिखा था, इसका खुलासा सार्वजनिक रूप से नहीं किया गया है। इसलिए, कथित अपराध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मानवाधिकार निगरानी समूहों और मीडिया रिपोर्टों पर ही निर्भर हैं।</p>

<p><strong>अमिनी ने साइकेडेलिक मशरूम खाया था</strong><br />
उनके बचाव पक्ष ने दलील दी कि ये बातें अमिनी की गलती से, जुबान फिसलने के कारण कही गई थीं। उस समय उन्होंने दोस्तों के साथ साइकेडेलिक मशरूम (नशीले मशरूम) खाए थे, जिसके कारण उन्हें मतिभ्रम (hallucinations) हो रहा था। मीडिया रिपोर्टों में ईरानी अखबार 'खुरासान' का हवाला देते हुए बताया गया है कि जज ने इस दलील को खारिज कर दिया। जज ने सवाल किया कि अगर वह वास्तव में ऐसी मानसिक स्थिति में थीं, तो उन्होंने अन्य लोगों या राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ ऐसी बातें क्यों नहीं कहीं?</p>

<p><strong>अमिनी को और क्या सजा मिली है?</strong><br />
अमीनी को केवल मौत की सजा ही नहीं मिली है। मशहद रिवोल्यूशनरी कोर्ट में चले एक अलग मामले में, उन्हें 12 साल, 6 महीने और 1 दिन की जेल की सजा सुनाई गई है। उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा के खिलाफ काम करने और ईरानी सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार फैलाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। मानवाधिकार निगरानी समूहों ने इस कानूनी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं।</p>

<p>'ईरान ह्यूमन राइट्स मॉनिटर' की रिपोर्ट के अनुसार, हिरासत और कानूनी कार्यवाही के दौरान अमीनी को अपनी पसंद का वकील करने की अनुमति नहीं दी गई। संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि उनसे जबरन कबूलनामा लेने के लिए शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना दी गई हो सकती है।</p>

<p><strong>क्या कहा मानवाधिकार समर्थकों ने?</strong><br />
मानवाधिकार समर्थकों का तर्क है कि ऑनलाइन की गई किसी कथित टिप्पणी के लिए मौत की सजा देना बहुत कठोर कदम है। यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार समिति का भी मानना ​​है कि जिन अपराधों में जानबूझकर किसी की हत्या नहीं की गई हो, वे अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत 'सबसे गंभीर अपराधों' की श्रेणी में नहीं आते, जिनके लिए मौत की सजा दी जा सके।<br />
<br />
<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
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    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/social-media-post-on-paigambar-muhammad-leads-death-sentence-who-is-iranian-student-najmeh-amini-2026-10-16-1249174     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/social-media-post-on-paigambar-muhammad-leads-death-sentence-who-is-iranian-student-najmeh-amini-2026-10-16-1249174 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 16 Oct 2026 12:09:50 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     चीन को झटका, भारत से बढ़ाएंगे रिश्ते! नवंबर में प्रधानमंत्री मोदी से मिल सकते हैं नेपाल के PM बालेन शाह     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के भारत दौरे की चर्चा है। बताया जा रहा है कि बालेन शाह नवंबर में भारत के दौरे पर आ सकते हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात होगी।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/balen-shah-1792066856.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/balen-shah-1792066856.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/balen-shah-1792066856.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह
                      <span class="copyright">Image Source : PTI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p class="rtejustify">नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह (बालेंद्र शाह) नवंबर में भारत दौरे पर आ सकते हैं। प्रधानमंत्री बनने के करीब आठ महीने बाद उनका यह पहला आधिकारिक द्विपक्षीय विदेश दौरा होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, तीन दिवसीय यात्रा नवंबर के तीसरे या चौथे सप्ताह में प्रस्तावित है। इस दौरान बालेन शाह की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों देशों के बीच बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण और सीमा विवाद जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।</p>

<p class="rtejustify">नेपाल के अंग्रेजी अखबार द काठमांडू पोस्ट की 15 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार, भारत और नेपाल के अधिकारियों ने उन परियोजनाओं की लिस्ट शेयर की है, जिनका उद्घाटन या शिलान्यास शाह की यात्रा के दौरान किया जा सकता है। हालांकि, दोनों देशों की ओर से अभी तक यात्रा की आधिकारिक तारीखों की घोषणा नहीं की गई है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>पहले दौरे पर नहीं जाएंगे चीन</strong></h3>

<p class="rtejustify">नेपाल के प्रधानमंत्रियों के लिए भारत पारंपरिक रूप से पहला विदेशी गंतव्य रहा है। हालांकि, कुछ प्रधानमंत्रियों ने इस परंपरा से अलग रास्ता चुना। पुष्प कमल दहल प्रचंड ने 2008 में चीन का दौरा किया था, जबकि केपी शर्मा ओली ने दिसंबर 2024 में सत्ता में लौटने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए चीन को चुना था।</p>

<p class="rtejustify">ऐसे में बालेन शाह का भारत दौरा दोनों पड़ोसी देशों के बीच संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। बालेन शाह मार्च में प्रधानमंत्री बने थे। सितंबर में वह संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका गए थे, लेकिन भारत यात्रा उनकी पहली आधिकारिक द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी।</p>

<p class="rtejustify">शाह ने अपने शुरुआती कार्यकाल में विदेशी राजनयिकों से व्यक्तिगत मुलाकातों को लेकर सतर्क रुख अपनाया था। बाद में उन्होंने भारत और चीन के राजदूतों से अलग-अलग मुलाकात की। अगस्त में उन्होंने भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव के साथ अपनी पहली व्यक्तिगत राजनयिक बैठक की थी।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>भारत-नेपाल के बीच कई परियोजनाओं पर हो सकता है समझौता</strong></h3>

<p class="rtejustify">बालेन शाह के दौरे के दौरान भारत की मदद से नेपाल में चल रही कई परियोजनाओं को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं। संभावित परियोजनाओं में पनौती स्थित नेपाल पुलिस अकादमी, उत्तर प्रदेश की सीमा के पास भैरहवा इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट और पश्चिमी नेपाल के दार्चुला जिले में पुलों का उद्घाटन शामिल है। महाकाली नदी पर बने पुलों से जुड़ी परियोजनाएं भी एजेंडे में रह सकती हैं।</p>

<p class="rtejustify">इसके अलावा, दोनों प्रधानमंत्री डोधारा चांदनी इंटीग्रेटेड चेक पोस्ट, लोअर अरुण जलविद्युत परियोजना और सिलीगुड़ी-झापा पेट्रोलियम पाइपलाइन के निर्माण की शुरुआत कर सकते हैं।</p>

<p class="rtejustify">ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होने की संभावना है। भारत की सरकारी कंपनी एनएचपीसी से जुड़ी 750 मेगावाट की वेस्ट सेती, 480 मेगावाट की फुकोट कर्णाली और 450 मेगावाट की सेती नदी-6 जलविद्युत परियोजनाएं वार्ता का हिस्सा बन सकती हैं।</p>

<p class="rtejustify">इसके अलावा, कोशी नदी परियोजना, प्रस्तावित अयोध्या-जनकपुर रेलवे संपर्क और नेपाल की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संबंधी योजनाओं में भारत की सहायता पर भी विचार किया जा सकता है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन पर होगी चर्चा</strong></h3>

<p class="rtejustify">भारत और नेपाल के बीच संबंधों में सहयोग के साथ कुछ ऐसे मुद्दे भी हैं, जिनका अब तक समाधान नहीं निकल पाया है। इनमें कालापानी-लिपुलेख सीमा विवाद, नेपाल के लिए अतिरिक्त हवाई प्रवेश मार्ग, व्यापार असंतुलन और पारगमन व्यवस्था प्रमुख हैं।</p>

<p class="rtejustify">द काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि भारत के साथ सीमा, हवाई मार्ग और व्यापार असंतुलन जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा की जरूरत है। अधिकारी के अनुसार, दशैं त्योहार के बाद यात्रा की तैयारियों को लेकर परामर्श किया जाना था।</p>

<p class="rtejustify">दोनों देशों के बीच लंबे समय से लंबित पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना पर भी बातचीत हो सकती है। भारत और नेपाल के बीच सीमा संबंधी मतभेद संवेदनशील विषय बने हुए हैं और इन पर किसी ठोस प्रगति को इस यात्रा के अहम परिणामों में गिना जाएगा।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>बाढ़ राहत के बाद पुनर्निर्माण में भारत से मदद की उम्मीद</strong></h3>

<p class="rtejustify">नेपाल में 26 अगस्त को भोतेकोशी क्षेत्र में आई बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों में सहायता दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से बात कर हरसंभव मानवीय सहायता देने की पेशकश की थी। इसके बाद भारत ने नेपाल को 130 टन से अधिक राहत सामग्री भेजी और बचाव एव फॉरेंसिक कार्यों के लिए 54 विशेषज्ञ तैनात किए। बालेन शाह ने 2 सितंबर को संसद में दिए गए संबोधन में भारत सहित सहायता देने वाले देशों का आभार जताया था।</p>

<p class="rtejustify">अब नेपाल बाढ़ से क्षतिग्रस्त सड़कों, पुलों और जलविद्युत सुविधाओं के पुनर्निर्माण के लिए भारत से अनुदान और रियायती ऋण की उम्मीद कर रहा है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले इस संबंध में संभावित सहायता पर चर्चा करने के लिए नई दिल्ली का दौरा भी कर चुके हैं।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>भारत-नेपाल संबंधों की दिशा तय कर सकती है यात्रा</strong></h3>

<p class="rtejustify">बालेन शाह का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देश बुनियादी ढांचे और ऊर्जा सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ लंबे समय से लंबित विवादों के समाधान की संभावनाएं तलाश रहे हैं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने 30 सितंबर को कहा था कि नेपाल और भारत, दोनों ही प्रधानमंत्री बालेन शाह की भारत यात्रा को परिणामोन्मुखी और सार्थक बनाने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।</p>

<p class="rtejustify">सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने पहले संबोधन के दौरान बालेन शाह ने भारत, नेपाल और चीन के बीच जलवायु सहयोग तंत्र बनाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आपदाओं के प्रति संवेदनशीलता का मुद्दा भी उठाया था।</p>

<p class="rtejustify">अब नई दिल्ली की प्रस्तावित यात्रा में यह देखना अहम होगा कि बालेन शाह की विदेश नीति की प्राथमिकताएं भारत के साथ ठोस समझौतों में कितनी बदल पाती हैं। बुनियादी ढांचे, ऊर्जा, बाढ़ पुनर्निर्माण और सीमा विवाद पर होने वाली बातचीत दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।</p>

<p class="rtejustify"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/gallery/world-who-is-katie-zachariah-controversy-erupts-over-trump-new-press-secretary-legal-credentials-2026-10-15-1249022" target="_blank" title="ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी को लेकर क्यों मचा बवाल? तस्वीरों के जरिए जानें कौन हैं केटी जकारिया"><strong>ट्रंप की नई प्रेस सेक्रेटरी को लेकर क्यों मचा बवाल? तस्वीरों के जरिए जानें कौन हैं केटी जकारिया</strong></a></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/world/asia/many-students-dead-after-school-roof-collapses-in-pakistan-2026-10-15-1248967" target="_blank" title="पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा, 29 बच्चों की मौत; घायलों में कई की हालत नाजुक"><strong>पाकिस्तान में स्कूल की छत गिरने से बड़ा हादसा, 29 बच्चों की मौत; घायलों में कई की हालत नाजुक</strong></a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/nepal-pm-balen-shah-india-visit-in-november-meeting-with-prime-minister-narendra-modi-2026-10-15-1249037     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/nepal-pm-balen-shah-india-visit-in-november-meeting-with-prime-minister-narendra-modi-2026-10-15-1249037 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 17:52:15 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     यूक्रेन की घटना से दुनिया को मिली नई सबक, कितनी खतरनाक हो सकती है Starlink की सर्विस?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ Starlink के मिलिट्री को दी जाने वाली स्टारशील्ड सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस के स्लोडाउन की घटना से दुनिया को नई सबक मिली है। यह दर्शाता है कि स्टारलिंक की सर्विस को बाहर से भी कंट्रोल किया जा सकता है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/starlink-2-1792050692.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[स्टारलिंक सर्विस]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : STARLINK]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/starlink-2-1792050692.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/starlink-2-1792050692.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      स्टारलिंक सर्विस
                      <span class="copyright">Image Source : STARLINK</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>Elon Musk एक तरफ अपने सोशल मीडिया हैंडल पर सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस Starlink की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं। वहीं, यूक्रेन की सेना को लगे झटके ने पूरी दुनिया को स्टारलिंक की सर्विस का दूसरा पहलू दिखाया है। एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस StarShield (स्टारलिंक का मिलिट्री वर्जन) की इंटरनेट स्पीड को बिना किसी पूर्व सूचना के कम कर दी गई। इसकी वजह से यूक्रेनी सेना का एक महत्वपूर्ण ड्रोन मिशन प्रभावित हुआ। इंटरनेट स्पीड स्लो होने की वजह से 160 किलोमीटर प्रति घंटे से चलने वाले ड्रोन की स्पीड कम होने लगी। हालांकि, इसका खामियाजा रूसी मिलिट्री को भी भुगतना पड़ा है।</p>

<h3><strong>Starlink पर पहले भी लग चुके आरोप</strong></h3>

<p>एलन मस्क की कंपनी पर पहले भी कई बार सर्विस को कंट्रोल करने और ब्लॉक करने का आरोप लग चुका है। स्टारलिंक के टर्मिनल ड्रोन पर लगाकर जैमिंग से बचा गया और लंबी दूरी तक के सटीक हमलों को अंजाम दिया गया है। स्टारलिंक पर डेटा चोरी और जासूसी के सीधे आरोप पर भी लगे हैं। कंपनी पर मुख्य तौर पर सर्विस कंट्रोल करने और सिस्टम को ब्लॉक करने का आरोप भी लग चुका है।</p>

<p>Starlink LEO ऑर्बिट में धरती के चारों ओर घूम रहे हजारों सैटेलाइट नेटवर्क का इस्तेमाल करके इंटरनेट सर्विस पहुंचाता है। सैटेलाइट से निकलने वाले बीम्स का इस्तेमाल कम्युनिकेशन के लिए किया जाता है। क्योंकि सैटेलाइट तेजी से मूव करती है और उससे निकलने वाली बीम बेहद पतली होती है, जिसकी वजह से ड्रोन ऑपरेटर इसकी मदद से उसे लंबी दूरी तर ऑपरेट करने में सक्षम होते हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/starlink-1792050693.jpg"    /></p>

<h3><strong>यूक्रेन वाली घटना से क्या मिला सबक?</strong></h3>

<p><a href="https://www.indiatv.in/india/national/india-government-telecom-ministry-direct-reply-to-elon-musk-regarding-starlink-issue-says-rules-are-same-for-everyone-2026-10-08-1247778" target="_blank" title="स्टारलिंक के मुद्दे पर भारत सरकार ने एलन मस्क को दे दिया सीधा जवाब, कहा- 'नियम सबके लिए बराबर हैं' ">एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक</a> यूक्रेन को अफोर्डेबल जैमिंग-रोधी कम्युनिकेशन उपलब्ध कराई हैं। इसके लिए स्टारलिंक के हजारों टर्मिनल फ्रंटलाइन पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, पौलेंड की तरफ से यूक्रेन को 29,000 टर्मिनल उपलब्ध कराया है। इस तरह से लगभग 1 लाख से ज्यादा टर्मिनल्स यूक्रेन द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं। हालांकि, जब स्टारलिंक जैसी निजी कंपनी या अमेरिकी सरकार इन टर्मिनल के स्विच कंट्रोल करती है तो यह पूरे सिस्टम को कमजोर बना सकता है। ऐसे में युद्ध के दौरान एक नए तरह का खतरा पैदा हो सकता है, क्योंकि मॉडर्न वॉरफेयर में कम्युनिकेशन का महत्वपूर्ण है।</p>

<p>वहीं, दुनिया के देशों को स्टारलिंक जैसी कमर्शियल सर्विस को इस्तेमाल करने के लिए रेगुलेशन और कंट्रोल बेहद जरूरी है। अगर, इसे कंट्रोल नहीं किया जाएगा तो बड़े युद्ध का खतरा बढ़ सकता है। यूरोपी संघ ने स्टारलिंक के अलावा IRIS जैसे स्वदेशी और मल्टीलेटरल यानी बहुपक्षीय सैटेलाइट सिस्टम पर जोर दिया है। दुनिया को भी यूक्रेन की इस घटना से सबक लेते हुए Multilateral सिस्टम पर ध्यान देना चाहिए।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/starlink-1-1792050693.jpg"    /></p>

<h3><strong>एलन मस्क ने दी सफाई</strong></h3>

<p>StarShield की इंटरनेट स्पीड कम होने वाले मामले पर अब एलन मस्क ने सफाई दी है और कहा कि यह अमेरिकी सरकार और सेना के नियंत्रण में है। इसकी स्पीड को बढ़ाना और घटाना पूरी तरह से अमेरिकी सेना और अंततः अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले पर निर्भर है। इसका Starlink से कोई लेना-देना नहीं है। स्टारलिंक एक कमर्शियल सर्विस है, जिसका इस्तेमाल आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए नहीं किया जा सकता है।</p>

<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/elonmusk/status/2110445577184133456"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<h3><strong>कितनी खतरनाक हो सकती है सर्विस?</strong></h3>

<p>तक्षशिला इंस्टीट्यूशन ने अपनी रिपोर्ट में भी Starlink के संभावित खतरे के बारे में बताए हैं और सरकार से सुरक्षा मंजूरी देने से पहले इनके बारे में विचार करने का आग्रह किया है। Starlink के अवैध टर्मिनल सरकार के सर्विस बंद करने के आदेश के बाद भी एक्टिव रह सकते हैं, जिसकी वजह से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा हो सकता है। बाहरी कंट्रोल होन की वजह से जरूरत के समय में इसकी सर्विस को बंद किया जा सकता है। इसके अलावा डेटा का इस्तेमाल भारतीय हितों के विरूद्ध किया जा सकता है।</p>

<p>एलन मस्क ने पिछले दिनों Starlink की भारत में सर्विस की देरी को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने अपने पोस्ट में कहा कि दुनिया के 195 देशों में स्टारलिंक की सुविधा मिल रही है लेकिन भारत के ऊपर सैटेलाइट की बीम बंद है।</p>

<p><strong>यह भी पढ़ें - <a href="https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-37-seconds-in-cockpit-tail-broke-off-how-brave-captain-smit-machhar-land-plane-explained-2026-10-01-1246387" target="_blank" title="Flydubai फ्लाइट की टूटी टेल, फिर भी सेफ लैंडिंग, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनाया कौन सा ट्रिक, जानें ">Flydubai फ्लाइट की टूटी टेल, फिर भी सेफ लैंडिंग, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनाया कौन सा ट्रिक, जानें</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/starlink-ukraine-drone-slowdown-how-dangerous-is-elon-musk-satellite-internet-service-2026-10-15-1248986     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/starlink-ukraine-drone-slowdown-how-dangerous-is-elon-musk-satellite-internet-service-2026-10-15-1248986 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 15 Oct 2026 13:23:13 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     इजरायल में पाकिस्तान समेत 31 देशों के पायलटों पर बैन, एयर फ्रांस ने माने नए नियम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ एयर फ्रांस ने इजरायल के नए नियमों के तहत पाकिस्तानी पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल जाने वाली उड़ानों में तैनात करने पर रोक लगा दी है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/air-france-2-1791983156.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[पाकिस्तानी पायलटों पर बैन]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP/INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/air-france-2-1791983156.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/air-france-2-1791983156.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      पाकिस्तानी पायलटों पर बैन
                      <span class="copyright">Image Source : AP/INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p class="rtejustify">इजरायल जाने वाली उड़ानों में पाकिस्तानी पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फ्रांस की प्रमुख एयरलाइन एयर फ्रांस ने बुधवार को पुष्टि की कि वह इजरायल के नए प्रतिबंधों का पालन कर रही है। इन नियमों के तहत उन देशों के नागरिकों को इजरायल जाने वाली या उसके हवाई क्षेत्र से गुजरने वाली उड़ानों में ड्यूटी देने से रोका जा रहा है, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।</p>

<p class="rtejustify">रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति से पाकिस्तान समेत 31 देशों के नागरिक प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कई अरब और मुस्लिम बहुल देश शामिल हैं। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव और एयरलाइंस की परिचालन व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम बहुल देशों के नागरिक प्रभावित</strong></h3>

<p class="rtejustify">अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली मीडिया और फ्रांसीसी खोजी पत्रकारिता संस्था मेदियापार्ट ने इस प्रतिबंध की जानकारी दी है। प्रभावित देशों में पाकिस्तान के अलावा अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, ईरान, ओमान, सऊदी अरब और नाइजर जैसे देश शामिल हैं।</p>

<p class="rtejustify">एयर फ्रांस ने अपने बयान में कहा कि जिन देशों में वह उड़ानें संचालित करती है, वहां के अधिकारियों द्वारा यात्रियों और कर्मचारियों के लिए निर्धारित प्रवेश नियमों का पालन करना उसकी जिम्मेदारी है। एयरलाइन के मुताबिक, इजरायली अधिकारियों के नए नियमों से प्रभावित कर्मचारियों को तेल अवीव जाने वाली उड़ानों के संबंध में जानकारी दे दी गई है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को दिया गया निर्देश</strong></h3>

<p class="rtejustify">इजरायली मीडिया चैनल एन12 की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल के परिवहन एवं सड़क सुरक्षा मंत्रालय ने 1 अक्टूबर को विदेशी एयरलाइंस को निर्देश दिया कि इजरायली हवाई क्षेत्र में उड़ान संचालित करने वाले पायलट और केबिन क्रू ऐसे देशों के नागरिक या दोहरी नागरिकता धारक नहीं होने चाहिए, जिनके इजरायल के साथ राजनयिक संबंध नहीं हैं।</p>

<p class="rtejustify">यह निर्देश 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई में हुए कांड के बाद आया। हालांकि, इस घटना और नए प्रतिबंधों के बीच संबंध को लेकर उपलब्ध रिपोर्ट में इजरायली अधिकारियों के सुरक्षा संबंधी तर्क का जिक्र किया गया है।</p>

<p class="rtejustify">बता दें कि <strong><a href="https://www.indiatv.in/world/asia/flydubai-fz1073-crisis-who-landed-the-plane-after-omani-co-pilot-allegedly-attacked-the-indian-origin-captain-2026-09-30-1246243" target="_blank" title="https://www.indiatv.in/world/asia/flydubai-fz1073-crisis-who-landed-the-plane-after-omani-co-pilot-allegedly-attacked-the-indian-origin-captain-2026-09-30-1246243">फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या FZ-1073 में ओमान के सह-पायलट ने मुख्य पायलट कैप्टन स्मित माछर पर चाकू से हमला कर दिया</a></strong>, जिससे विमान 34,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे गिरने लगा। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद भारतीय मूल के कैप्टन स्मित माछर ने साहस दिखाया और यात्रियों व केबिन क्रू की मदद से हमलावर सह-पायलट को काबू में किया गया, जिसके बाद विमान को सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया। हमले में घायल भारतीय पायलट का अस्पताल में इलाज चल रहा है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी क्रू को दी जानकारी</strong></h3>

<p class="rtejustify">एयर फ्रांस के इस कदम के बाद अमेरिका की यूनाइटेड एयरलाइंस ने भी अपने पायलटों और केबिन क्रू को इजरायल जाने वाली और वहां से आने वाली उड़ानों पर लागू राष्ट्रीयता संबंधी नियमों की जानकारी दी।</p>

<p class="rtejustify">विमानन समाचार वेबसाइट सीएच-एविएशन के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, यूनाइटेड एयरलाइंस के आंतरिक शेड्यूलिंग ज्ञापन में 29 देशों का जिक्र किया गया है। इन देशों के नागरिकों को तेल अवीव जाने वाली या वहां से आने वाली उड़ानों में काम करने से रोका जा सकता है।</p>

<p class="rtejustify">इस सूची में अफगानिस्तान, अल्जीरिया, बांग्लादेश, ब्रुनेई, कोमोरोस, क्यूबा, जिबूती, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, नाइजर, उत्तर कोरिया, ओमान, पाकिस्तान, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, वेनेजुएला और यमन शामिल हैं।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>फ्रांस में भेदभाव को लेकर उठे सवाल</strong></h3>

<p class="rtejustify">राष्ट्रीयता के आधार पर पायलटों और केबिन क्रू की तैनाती पर रोक से फ्रांस में रोजगार कानून के संभावित उल्लंघन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का तर्क है कि किसी कर्मचारी को केवल उसकी राष्ट्रीयता के आधार पर किसी खास उड़ान से हटाना भेदभाव का मामला बन सकता है।</p>

<p class="rtejustify">इस विवाद का एक अहम पहलू यह है कि एयरलाइन संबंधित कर्मचारियों को अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर काम करने की अनुमति दे सकती है, जबकि उन्हें इजरायल जाने वाली उड़ानों से बाहर रखा जा सकता है। इससे सवाल उठता है कि क्या किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता को बिना व्यक्तिगत सुरक्षा आकलन के उसकी पेशेवर जिम्मेदारियों से जोड़ना उचित है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>अंतरराष्ट्रीय विमानन पर क्या होगा असर?</strong></h3>

<p class="rtejustify">इजरायल के नियमों का असर आने वाले समय में अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस पर भी पड़ सकता है। यदि अधिक देश उड़ान कर्मचारियों की राष्ट्रीयता के आधार पर इसी तरह के प्रतिबंध लागू करते हैं, तो एयरलाइंस के लिए क्रू की तैनाती, उड़ानों का शेड्यूल और कर्मचारियों का प्रबंधन अधिक जटिल हो सकता है।</p>

<p class="rtejustify">फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि कितनी एयरलाइंस इन नियमों को किस स्तर तक लागू कर रही हैं। हालांकि, एयर फ्रांस और यूनाइटेड एयरलाइंस से जुड़ी रिपोर्टों ने राष्ट्रीय सुरक्षा और कर्मचारियों के समान अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज कर दी है।</p>

<p class="rtejustify"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/world/us/4-700-year-old-shipwreck-found-off-turkish-coast-laden-with-pottery-startling-details-revealed-2026-10-14-1248768" target="_blank" title="तुर्की के तट पर मिला 4700 साल पुराना डूबा हुआ जहाज़, लदे थे मिट्टी के बर्तन, सामने आई चौंकाने वाली बात"><strong>तुर्की के तट पर मिला 4700 साल पुराना डूबा हुआ जहाज़, लदे थे मिट्टी के बर्तन, सामने आई चौंकाने वाली बात</strong></a></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/world/asia/pakistan-reaffirms-commitment-to-saudi-arabia-security-amid-houthi-attacks-makkah-joint-defence-agreement-2026-10-14-1248759" target="_blank" title="हूती हमलों के बीच सऊदी अरब के समर्थन में आया पाकिस्तान, शहबाज शरीफ ने दिया सुरक्षा का भरोसा"><strong>हूती हमलों के बीच सऊदी अरब के समर्थन में आया पाकिस्तान, शहबाज शरीफ ने दिया सुरक्षा का भरोसा</strong></a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/israel-bans-31-countries-pilots-including-pakistan-air-france-to-comply-with-new-rules-2026-10-14-1248802     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/israel-bans-31-countries-pilots-including-pakistan-air-france-to-comply-with-new-rules-2026-10-14-1248802 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 17:25:39 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सोने की कीमतों में गिरावट के बीच चीन ने बढ़ाई खरीदारी, सितंबर में खरीदा 23 टन गोल्ड; आखिर क्या है रणनीति?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ सोने की कीमतों में गिरावट से जहां कई निवेशक खरीदारी को लेकर सतर्क हो सकते हैं, वहीं चीन ने इस दौरान गोल्ड खरीदने की रफ्तार बढ़ा दी। सितंबर 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने करीब 23 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/china-gold-1791957632.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[चीन क्यों कर रहा सोने की धड़ाधड़ खरीदारी?]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : CANVA]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/china-gold-1791957632.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/china-gold-1791957632.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      चीन क्यों कर रहा सोने की धड़ाधड़ खरीदारी?
                      <span class="copyright">Image Source : CANVA</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>वैश्विक वित्तीय बाजारों में इन दिनों सोने की चमक फीकी पड़ती दिख रही है। <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/gold-became-cheaper-by-rs-9000-in-september-while-silver-also-dropped-by-rs-8000-check-today-new-rates-2026-10-01-1246336" target="_blank">सितंबर के महीने में सोने की कीमतों में भारी गिरावट</a> दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने, बॉन्ड यील्ड में उछाल और ब्याज दरों के ऊंचे बने रहने की उम्मीदों के चलते निवेशकों के सोना कम अट्रैक्टिव हो गया है। हालांकि, इसके बिल्कुल विपरीत दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी चीन का केंद्रीय बैंक (PBOC) लगातार सोने के बड़े भंडार को समेटने में जुटा हुआ है। कीमतों में गिरावट के बावजूद चीन ने सितंबर में ताबड़तोड़ खरीदारी करते हुए अपने गोल्ड रिजर्व में भारी-भरकम इजाफा किया है।</p>

<p>पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) यानी चीन के केंद्रीय बैंक ने सितंबर में 7.40 लाख औंस सोना खरीदा है, जो यह लगभग 23 टन के बराबर है। इस खरीदारी के बाद चीन का घोषित गोल्ड रिजर्व बढ़कर 7.747 करोड़ औंस (लगभग 2,410 टन) हो गया। इससे पहले अगस्त में चीन ने 6.50 लाख औंस और जुलाई में 6.40 लाख औंस सोना खरीदा था। यानी सितंबर की खरीदारी इन दोनों महीनों से ज्यादा रही। आपको बता दें कि यह लगातार 23वां महीना है जब चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व में लगातार इजाफा किया है। ऐसे में ये आंकड़े बताते हैं कि चीन की खरीदारी केवल किसी एक महीने में कीमतों में आई गिरावट पर आधारित नहीं है, बल्कि इसके पीछे रिजर्व मैनेजमेंट की लंबी अवधि की योजना भी हो सकती है।</p>

<h3><strong>आखिर क्या हो सकती है चीन की रणनीति?</strong></h3>

<ol>
	<li>चीन की सोने की खरीदारी के पीछे एक संभावित वजह विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना है। दुनिया के कई केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व का बड़ा हिस्सा विदेशी मुद्राओं और सरकारी बॉन्ड जैसे एसेट्स में रखते हैं। लेकिन किसी एक करेंसी या एसेट पर बहुत ज्यादा निर्भरता होने से कुछ खास तरह के आर्थिक और मार्केट रिस्क बढ़ सकते हैं। सोना इस मामले में अलग भूमिका निभाता है। यह किसी दूसरे देश की सरकार की देनदारी नहीं है और इसे किसी एक मुद्रा के बराबर नहीं माना जाता। इसलिए केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व में सोना रखकर अलग-अलग एसेट्स के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश कर सकते हैं।</li>
	<li>सोने को लंबे समय से अनिश्चितता के दौर में एक रणनीतिक संपत्ति माना जाता रहा है। वैश्विक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, मुद्रा में उतार-चढ़ाव या वित्तीय बाजारों में बड़े बदलाव के समय इसकी मांग बढ़ सकती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की दूसरी तिमाही में दुनिया के केंद्रीय बैंकों और अन्य आधिकारिक संस्थानों की शुद्ध सोने की खरीदारी 289 टन रही। रिपोर्ट में कहा गया कि भू-राजनीतिक अनिश्चितता और रिजर्व में विविधता लाने की जरूरत ने खरीदारी को समर्थन दिया। चीन ने भी इस अवधि में अपने सोने के भंडार में बढ़ोतरी की थी।</li>
	<li>चीन अकेला ऐसा देश नहीं है जो अपने रिजर्व में सोने को अहमियत दे रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की 2026 की केंद्रीय बैंक सर्वे रिपोर्ट में 89% उत्तरदाताओं ने उम्मीद जताई कि अगले 12 महीनों में वैश्विक केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ाएंगे। वहीं, 45% ने कहा कि उनके अपने संस्थान भी सोने की हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं। यह रुझान दिखाता है कि केंद्रीय बैंक सोने को केवल तेजी से मुनाफा कमाने का साधन नहीं, बल्कि रिजर्व में डायवर्सिफिकेशन और रिस्क मैनेजमेंट के एक ऑप्शन के रूप में देखते हैं। फिर भी, हर देश की खरीदारी उसकी आर्थिक जरूरतों, मौजूदा भंडार और बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।</li>
	<li>जब सोने की कीमतें तेजी से बढ़ती हैं, तब केंद्रीय बैंकों के लिए बड़े पैमाने पर खरीदारी करना महंगा पड़ सकता है। इसके विपरीत, कीमतों में गिरावट आने पर समान रकम में ज्यादा सोना खरीदने का अवसर मिल सकता है। सितंबर में मजबूत अमेरिकी डॉलर, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर उम्मीदों ने सोने को दबाव में रखा। सोना आम तौर पर नियमित ब्याज या आय नहीं देता, इसलिए जब बॉन्ड जैसे ऑप्शन बेहतर रिटर्न देने लगते हैं, तो कुछ निवेशकों के लिए सोने का अट्रैक्शन कम हो सकता है।</li>
</ol>

<h3><strong>सोने की कीमतों में क्यों आई गिरावट?</strong></h3>

<p>सितंबर महीने में वैश्विक स्तर पर सोने पर चौतरफा दबाव देखने को मिला था। इसके मुख्य कारण यूएस फेडरल रिजर्व के संकेत, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में सख्ती और आगे भी दरों को ऊंचा बनाए रखने के संकेतों ने बुलियन मार्केट को प्रभावित किया। वहीं, मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में अन्य विकल्पों का रुख किया, क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता है। इसके परिणामस्वरूप, सितंबर के दौरान वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी।</p>

<p><strong>यह भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/gold-prices-drop-by-rs-1400-silver-also-sees-a-significant-decline-of-rs-2000-check-today-s-latest-rates-2026-10-12-1248420" target="_blank">1400 रुपये सस्ता हुआ सोना, चांदी के कीमतों में भी 2000 रुपये की बड़ी गिरावट- चेक करें आज के ताजा भाव</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/china-is-aggressively-buying-gold-despite-price-falling-pboc-added-23-tonnes-of-gold-in-september-what-is-the-strategy-of-dragon-2026-10-14-1248715     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/china-is-aggressively-buying-gold-despite-price-falling-pboc-added-23-tonnes-of-gold-in-september-what-is-the-strategy-of-dragon-2026-10-14-1248715 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 14 Oct 2026 11:30:47 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     इतना अमीर देश, 83 अरब डॉलर की सेना, हूतियों का मुकाबला क्यों नहीं कर पा रही सऊदी आर्मी?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ यमन के हूती विद्रोही खाड़ी के अमीर देश सऊदी अरब पर लगातार हमला कर रहे हैं। 83 अरब डॉलर की सेना वाला सऊदी अरब हूतियों को जवाब क्यों नहीं दे रहा। आखिर उसकी क्या मजबूरी है? जानिए इस एक्सप्लेनर में....     ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arabia-1791892166.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं दे रहा जवाब]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arabia-1791892166.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arabia-1791892166.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      सऊदी अरब हूतियों को क्यों नहीं दे रहा जवाब
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/raining-bombs-prince-in-bunker-security-alerts-fail-what-happen-next-in-saudi-arabia-houthi-war-explained-2026-10-13-1248488">सऊदी अरब पर ईरान-समर्थित हूती विद्रोही लगातार हमले कर रहे हैं।</a> इस वीकेंड यानी शनिवार को हूतियों ने रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर जानलेवा हमला किया। तेल से मालामाल और धनवान इस देश पर एक दशक से भी ज़्यादा समय में हुआ सबसे घातक हमला किया गया, जिसमें 12 लोग मारे गए और 300 से ज़्यादा घायल हो गए। इसके बाद राजनयिक मिशनों को अपने नागरिकों को उस जगह से दूर रहने की चेतावनी देनी पड़ी।</p>

<p><strong>हूती क्यों कर रहे हैं हमले</strong><br />
सऊदी अरब और हूतियों के बीच यह तनाव तब बढ़ा जब ईरान-समर्थित हूथी विद्रोहियों और सऊदी-समर्थित यमन की सरकार के बीच हुआ समझौता इस साल की शुरुआत में टूट गया और सऊदी अरब ने यमन में अपनी सैन्य भागीदारी बढ़ा दी। पिछले महीने हूती विद्रोहियों ने लाल सागर तट के पास रणनीतिक इलाकों पर कब्ज़ा कर लिया। इसके बाद, सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ हमले शुरू किए। इसके जवाब में हूतियों ने सऊदी अरब के अहम तेल और पर्यटन बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया है।<br />
<br />
<strong>हमले से धूमिल हो रही है सऊदी की छवि</strong><br />
हूतियों के हमले ने धनवान देश सऊदी अरब की अरबों डॉलर की रक्षा क्षमताओं की कमज़ोरियों को उजागर कर दिया है। इस हमले से तेल से मालामाल इस देश की स्थिरता और सुरक्षा की छवि को भी नुकसान पहुंचा है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने देश को निवेश और व्यापार के लिए क्षेत्र की सबसे सुरक्षित जगह के तौर पर स्थापित करने के लिए अरबों डॉलर खर्च किए हैं।</p>

<p><strong>सऊदी से मजबूत है क्या हूती की सेना</strong> <br />
सऊदी अरब के पास दुनिया की सबसे अच्छी तरह से सुसज्जित सेनाओं में से एक है। रियाद ने 2025 में अपने रक्षा खर्च पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का लगभग 6.5 प्रतिशत, यानी लगभग 83 बिलियन डॉलर खर्च किया, जो दुनिया का आठवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च है। इसके साथ ही इस देश ने हाल ही में तुर्की और पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता किया है। इसकी सैन्य-औद्योगिक क्षमता सीमित है, इसलिए इसने आयातित अत्याधुनिक हथियारों पर भारी खर्च किया है।</p>

<p>सऊदी के पास शानदार सैन्य हार्डवेयर हैं, जैसे F-15 फाइटर जेट, यूरोफाइटर टाइफून, पैट्रियट और THAAD मिसाइल सिस्टम, और अन्य अत्याधुनिक उपकरण। रियाद के अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों ने पिछले सप्ताह पूरे यमन में हूती ठिकानों पर हमले किए हैं, ताकि यमनी सरकारी सेना के खिलाफ ईरान समर्थित समूह की हालिया बढ़त को रोका जा सके।</p>

<p>हूतियों के पास मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें शामिल हैं, जैसे कि 'फिलिस्तीन-2' (Palestine-2), जो हाइपरसोनिक क्षमताओं वाली दो-चरण वाली ठोस ईंधन मिसाइल है, और 'तूफान' (Toufan), जो ईरान की 'गदर' (Ghadr) मिसाइल का ही रीब्रांडेड संस्करण प्रतीत होता है। अल जज़ीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, विद्रोहियों के पास कई कम दूरी की मिसाइलें भी हैं, जैसे कि उनकी 'बुरकान' (Burkan) और 'बद्र' (Badr) श्रृंखला, जिनके बारे में माना जाता है कि वे ईरानी मूल की हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/saudi-arab-1791883920.jpg"    /></p>

<p><strong>हूतियों ने कैसे परेशानी में डाला है सऊदी अरब को?</strong><br />
सऊदी अरब अपनी सेना पर अरबों डॉलर खर्च करता है, फिर भी हूती के हमले उसकी सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर अंदर आ ही जाते हैं। जानकारों का मानना ​​है कि इसके पीछे सऊदी अरब का विशाल आकार एक वजह हो सकती है।हूती हमलों से सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा है और इंटरसेप्टर्स (हमले को रोकने वाली मिसाइलें) भी खत्म हो रहे हैं। </p>

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<p><strong>हूती क्यों कर रहे हैं हमले?</strong><br />
हूती अब "खेल के नियम बदलना" चाहते हैं।  ईरान समर्थित यह समूह सऊदी अरब के साथ वही करना चाहता है जो सऊदी अरब उनके साथ करता है। उनके पास हज़ारों की संख्या में ऐसे लड़ाके हैं जो अच्छी तरह से प्रशिक्षित, दृढ़ और यमन के कठिन पहाड़ी इलाकों में लड़ने में माहिर हैं। उनकी मिसाइलें और ड्रोन सालों से तेल-समृद्ध खाड़ी देशों के लिए खतरा बने हुए हैं, और हाल ही में इज़राइल तक भी पहुंच गए हैं।<br />
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<strong>सऊदी की क्या है मजबूरी</strong></p>

<p>सऊदी अरब को उम्मीद थी कि अमेरिका उसकी सुरक्षा में सीधे तौर पर बड़ी मदद करेगा, लेकिन अमेरिकी स्तर से स्पष्ट समर्थन या कड़ा रुख न मिलने के कारण सऊदी खुद को कूटनीतिक और सामरिक रूप से असुरक्षित महसूस कर रहा है। सऊदी अरब यमन के जटिल और पहाड़ी इलाकों में फिर से किसी बड़े सीधे जमीनी युद्ध (Ground War) में नहीं उलझना चाहता, क्योंकि इससे भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान का जोखिम रहता है।</p>

<p>सऊदी अरब हूतियों को पूरी तरह समाप्त करने की कोशिश में ईरान को सीधे तौर पर इस जंग में नहीं घसीटना चाहता, इसलिए वह एक सीमित और नपे-तुले संघर्ष की रणनीति अपनाता आया है जो कई बार असरकारक साबित नहीं होती।<br />
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<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/houthi-attacks-saudi-arabia-why-trump-reacted-strongly-inside-story-2026-10-11-1248265">सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले तो कब से हो रहे, लेकिन अमेरिका अचानक अब क्यों भड़क गया? समझिए इनसाइड स्टोरी</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/wealthy-country-with-an-83-billion-military-why-of-saudi-arabia-unable-to-confront-war-with-houthis-explained-2026-10-13-1248558     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/wealthy-country-with-an-83-billion-military-why-of-saudi-arabia-unable-to-confront-war-with-houthis-explained-2026-10-13-1248558 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 13 Oct 2026 15:03:34 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     आखिर 11 दिन बाद आधी रात को कैसे खत्म हुआ MPSC छात्रों का आंदोलन, तुकाराम मुंढे का क्या होगा रोल?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ महाराष्ट्र में MPSC छात्रों ने अपना आंदोलन रविवार की रात को समाप्त कर दिया है। बता दें कि छात्र पुणे  में अपनी मांगों को लेकर 11 दिन से प्रदर्शन कर रहे थे। आइए जानते हैं कि आखिर 11 दिन बाद आधी रात को कैसे खत्म हुआ है छात्रों का ये आंदोलन।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-protest-2-1791803396.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[MPSC छात्रों का प्रदर्शन खत्म।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI/INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-protest-2-1791803396.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-protest-2-1791803396.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      MPSC छात्रों का प्रदर्शन खत्म।
                      <span class="copyright">Image Source : PTI/INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>महाराष्ट्र में 11 दिनों से चल रहा एमपीएससी छात्रों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया। पुणे में आंदोलन कर रहे छात्र पेपर लीक की जांच के साथ आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। सरकार ने जांच का भरोसा दिया, लेकिन अध्यक्ष के मुद्दे पर बात अटकी हुई थी। रविवार रात ऐसा क्या हुआ कि छात्रों ने आंदोलन खत्म करने का फैसला लिया? अध्यक्ष को लेकर क्या रास्ता निकला और सरकार ने छात्रों को क्या-क्या भरोसा दिया? समझिए आंदोलन खत्म होने की पूरी कहानी।</p>

<h3><strong>अध्यक्ष के मुद्दे पर अटकी थी बात</strong></h3>

<p>एमपीएससी की परीक्षा में गड़बड़ी और ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों ने पुणे में आंदोलन शुरू किया था। छात्रों की मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार इस्तीफा दें। सरकार ने जांच का भरोसा दिया, लेकिन छात्र सिर्फ जांच की घोषणा से संतुष्ट नहीं थे। उनका कहना था कि अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। इसी मुद्दे पर सरकार और छात्रों के बीच सहमति नहीं बन पा रही थी।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-protest-4-1791803617.jpg"    /></p>

<h3><strong>सरकार ने संविधान का हवाला दिया</strong></h3>

<p>मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि एमपीएससी अध्यक्ष को हटाने के लिए संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना जरूरी है। संविधान के अनुच्छेद 317 के तहत तय प्रक्रिया के बिना अध्यक्ष को सीधे नहीं हटाया जा सकता। सरकार जांच के जरिए मामले की सच्चाई सामने लाना चाहती थी, जबकि छात्र अध्यक्ष के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे थे। इसी वजह से बातचीत बार-बार अटक रही थी।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-student-protest-1-1791803877.jpg"    /></p>

<h3><strong>आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन</strong></h3>

<p>छात्रों के आंदोलन को एनसीपी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार का समर्थन मिला। मनसे प्रमुख राज ठाकरे ने भी मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर छात्रों के मुद्दे पर चर्चा की। दूसरी तरफ, आंदोलन के दौरान छात्रों पर पुलिस मामले दर्ज किए जाने और भूख हड़ताल कर रहे कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने से मामला और गंभीर हो गया। अब छात्रों की मांग सिर्फ पेपर लीक की जांच तक सीमित नहीं थी। वे अध्यक्ष की जवाबदेही और अपने खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की भी मांग कर रहे थे।</p>

<h3><strong>रविवार रात बातचीत में निकला रास्ता</strong></h3>

<p>11 अक्टूबर की रात मंत्री शिवेंद्र सिंह राजे भोसले आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उनके साथ विधायक रोहित पवार, विश्वजीत कदम और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। शुरुआत में जांच और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर चर्चा हुई, लेकिन अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं बनी। इसके बाद अध्यक्ष विवेक भीमनवार को जांच पूरी होने तक छुट्टी पर भेजने का रास्ता सामने आया। सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला बताया। इससे छात्रों की तत्काल कार्रवाई की मांग और सरकार की संवैधानिक मजबूरी के बीच एक रास्ता निकला। सरकार के इस फैसले के बाद छात्र प्रतिनिधियों ने आपस में चर्चा की। आखिरकार 12 अक्टूबर को आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की गई। यानी आंदोलन खत्म होने की सबसे बड़ी वजह अध्यक्ष के इस्तीफे पर सहमति नहीं, बल्कि उन्हें फिलहाल छुट्टी पर भेजने और दूसरी मांगों पर सरकार के आश्वासन थे।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-protest-3-1791803593.jpg"    /></p>

<h3><strong>जांच में तुकाराम मुंढे को बड़ी भूमिका</strong></h3>

<p>सरकार ने एमपीएससी मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय आयोग बनाने की घोषणा की है। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जज दिलीप भोंसले करेंगे। वहीं, <a href="https://www.indiatv.in/maharashtra/mpsc-protest-tukaram-mudhe-inquiry-committee-secretary-2026-10-12-1248303" target="_blank" title="MPSC में सुधार के लिए तुकाराम मुंढे को बड़ी जिम्मेदारी, 10 दिन बाद अभ्यर्थियों का आंदोलन खत्म">वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को आयोग का सचिव बनाया गया है।</a> आयोग में रिटायर्ड जज पी. डी. नाईक, अधिकारी लखमी गौतम और सेवानिवृत्त अधिकारी गणेश पाटील को भी शामिल किया गया है। आयोग पेपर लीक के आरोपों, परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया की जांच करेगा। छात्र भी अपने दस्तावेज और सबूत आयोग के सामने रख सकेंगे। आयोग को 60 दिनों में रिपोर्ट सौंपनी है। अब देखना होगा कि जांच में क्या सामने आता है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।</p>

<h3><strong>भर्ती और पुलिस मामलों पर भी भरोसा</strong></h3>

<p>सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी आश्वासन दिए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, अगले तीन वर्षों में 70 हजार पद भरने और 2027 की ग्रुप-C भर्ती में पदों की संख्या दोगुनी करने की बात कही गई है। आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने का आश्वासन भी दिया गया है। हालांकि, इन फैसलों पर अमल की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेशों से होनी बाकी है। छात्रों ने इन आश्वासनों के आधार पर आंदोलन स्थगित किया है। अब उनकी मांग है कि सरकार अपने वादे समय पर पूरे करे।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/maharashtra-mpsc-student-protest-1791803731.jpg"    /></p>

<h3><strong>आंदोलन खत्म, लेकिन अध्यक्ष पर फैसला बाकी</strong></h3>

<p>इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि विवेक भीमनवार को छुट्टी पर भेजना और उन्हें स्थायी रूप से पद से हटाना दो अलग-अलग बातें हैं। छात्र अध्यक्ष का इस्तीफा मांग रहे थे, लेकिन फिलहाल सरकार ने उन्हें छुट्टी पर भेजने का फैसला किया है। उनके खिलाफ आगे क्या कार्रवाई होगी, यह जांच के निष्कर्षों और संवैधानिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। 11 दिनों के आंदोलन के बाद पुणे में प्रदर्शन तो रुक गया है, लेकिन छात्रों के सवाल अभी बाकी हैं। क्या 60 दिनों में जांच रिपोर्ट आएगी? क्या पेपर लीक के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी? क्या भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी? और क्या आयोग के अध्यक्ष पर अंतिम फैसला होगा? अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने वादों को पूरा करने की है। छात्रों ने आंदोलन स्थगित किया है, लेकिन एमपीएससी में पारदर्शिता और जवाबदेही की उनकी मांग अब भी कायम है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong> <a href="https://www.indiatv.in/maharashtra/mpsc-postpone-3-exams-scheduled-to-begin-on-october-3-new-dates-announced-soon-2026-09-29-1245938" target="_blank" title="MPSC ने 3 अक्टूबर से होने वाली तीन मुख्य परीक्षाएं कीं स्थगित, जल्द घोषित होगी नई तारीख">MPSC ने 3 अक्टूबर से होने वाली तीन मुख्य परीक्षाएं कीं स्थगित, जल्द घोषित होगी नई तारीख</a></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/maharashtra/maharashtra-drug-inspector-paper-leak-case-superset-of-294-questions-made-secret-revealed-after-breakup-know-detail-2026-08-27-1239824" target="_blank" title="294 सवालों का ‘सुपरसेट’ बना, अधिकारियों से होते हुए अभ्यर्थी तक पहुंचा, MPSC पेपर लीक मामले में चौंकाने वाले खुलासे">294 सवालों का ‘सुपरसेट’ बना, अधिकारियों से होते हुए अभ्यर्थी तक पहुंचा, MPSC पेपर लीक मामले में चौंकाने वाले खुलासे</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/how-mpsc-students-protest-finally-end-at-midnight-after-11-days-know-points-of-agreement-and-about-tukaram-mundhe-role-in-investigation-2026-10-12-1248385     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/how-mpsc-students-protest-finally-end-at-midnight-after-11-days-know-points-of-agreement-and-about-tukaram-mundhe-role-in-investigation-2026-10-12-1248385 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 12 Oct 2026 16:42:40 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हमले तो कब से हो रहे, लेकिन अमेरिका अचानक अब क्यों भड़क गया? समझिए इनसाइड स्टोरी     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब पर हमलों को लेकर अमेरिका अचानक भड़क गया है। अमेरिका ने अब हूती विद्रोहियों को अंजाम भुगतने की धमकी दी है। जानिए इसकी पीछे की वजह क्या है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/houthi-attacks-1791736301.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[हूती विद्रोही।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/houthi-attacks-1791736301.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/houthi-attacks-1791736301.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      हूती विद्रोही।
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों ने सबसे बड़ा हमला किया है। इसमें रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के 2 टर्मिनल तबाह हो गए हैं। हूती के हमले में एक अमेरिकी समेत 8 देशों के 12 नागरिक मारे गए हैं। हूती फाइटर्स ने रियाद के अलावा दम्माम और घावर तेल-गैस फील्ड पर भी अटैक किया है। अमेरिका ने हूती को सख्त चेतावनी दी है। सऊदी अरब ने पलटवार करते हुए हूती के कब्जे वाले कई शहरों में भारी बमबारी की है। मक्का पीस पैक्ट करने वाले पाकिस्तान ने भी हूती के हमलों की कड़ी निंदा की है।  उधर, हूती ने सऊदी अरब का एयरस्पेस इस्तेमाल करने वाली एयरलाइंस को वॉर्निंग दी है। सऊदी के सिविलियन एयरपोर्ट को हूती निशाना बना सकते हैं। ट्रंप ने भी तीन B-25 बॉम्बर रवाना किए हैं, जिससे मिडिल-ईस्ट में युद्ध और भड़कने का खतरा है। इधर, अब ट्रंप ने भी हूती विद्रोहियों को चेतावनी दे दी है। जानें अब ट्रंप को क्यों गुस्सा आ गया।</p>

<p><strong>अमेरिका ने हूती विद्रोहियों को कड़ी चेतावनी</strong></p>

<p>दरअसल, सऊदी अरब के घावों पर कई बार नमक छिड़क चुके ट्रंप ने अब मलहम लगाने की कोशिश की है। अमेरिका ने हूती को वॉर्निंग दी है कि अगर सऊदी पर हमले नहीं रोके तो हूती को इसकी बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी सऊदी को सांत्वना दी है और हूती को कड़ी चेतावनी दी है कि वो लिमिट क्रॉस न करें। अब सवाल उठता है अमेरिका का गुस्सा क्या एक अमेरिकी की मौत की वजह से है? रियाद पर 4 बड़े हमले हो चुके हैं तब अमेरिका को गुस्सा नहीं आया? सऊदी क्राउन प्रिंस बार-बार ट्रंप के आगे गिड़गिड़ा चुके हैं फिर भी ट्रंप ने मदद नहीं की।</p>

<p><strong>हूती विद्रोहियों के हाथ लगे अमेरिकी हथियार</strong></p>

<p>गौरतलब है कि हूती ने अमेरिका के टैंक, बख्तरबंद वाहन, तोपें हाल ही की लड़ाई में कब्जा कर ली थीं, तब भी ट्रंप ने उनके खिलाफ हमले के आदेश नहीं दिए। हूती के हाथ लगे हथियार अमेरिका के कोई कबाड़ हो चुके वेपन नहीं हैं। इनमें ओशकोश जैसे माइन रेजिस्टेंस वाहन हैं जो बारूदी सुरंगों और बमों के हमले भी झेल सकते हैं। Humvees जैसे हल्के बख्तरबंद वाहन हैं जिन्हें अमेरिकी ग्राउंड फोर्स मिडिल ईस्ट में इस्तेमाल करती है। लंबी दूरी तक मार करने वाली अमेरिकी मोबाइल आर्टिलरी गन हैं। इन हथियारों की कीमत करीब 4 करोड़ डॉलर के आसपास है। तो ट्रंप को अब गुस्सा इसीलिए आया है क्योंकि हूती के हमले में एक अमेरिकी की जान गई है।</p>

<p><strong>एयरपोर्ट के 2 टर्मिनल हूती विद्रोहियों ने उड़ाए</strong></p>

<p>बता दें कि हूती ने रियाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पैसेंजर टर्मिनल 3 और 4 को उड़ाया है, जिस वक्त हमला किया गया एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 और 4 में काफी भीड़ थी। मिसाइल टारगेट पर गिरते ही कांच के बड़े-बड़े टुकड़े फर्श पर आंधी तूफान की तरफ गिरे। कई लोगों को चोटें आईं। एयरपोर्ट के एक हिस्से में खून के निशान काफी दूर तक देखे गए। रियाद अटैक में 12 लोगों की मौत हुई है, जिनमें सऊदी अरब के 4 और 2 बांग्लादेशी शामिल हैं। इसके अलावा अमेरिका, इजिप्ट, जॉर्डन, सीरिया, सूडान और फिलिस्तीनी नागरिक शामिल हैं। कोई पाकिस्तानी, इंडियन और इजरायली इस हमले की चपेट में नहीं आया है। 309 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं जिनमें कई की हालत नाजुक बताई जा रही है।</p>

<p><strong>अभी जीत से कोसों दूर हैं डोनाल्ड ट्रंप</strong></p>

<p>दरअसल, अमेरिकी नाकेबंदी की वजह से ईरान अपना तेल बेच नहीं पा रहा है। ईरान के जहाजों को अमेरिका उड़ा रहा है। ईरान इसीलिए ट्रंप पर दबाव बनाने के लिए सऊदी अरब के तेल को हूती के जरिए रोकने की लड़ाई लड़ रहा है। ये गेम बहुत लंबा है। ट्रंप इसे जीतने का दावा बार-बार कर चुके हैं। मगर जीत से कोसों दूर हैं।</p>

<p><strong>मिडिल-ईस्ट में फिर हो सकता है बड़ा हमला</strong></p>

<p>उधर, ट्रंप ने अब नई चाल चली है। ब्रिटेन के RAS फेयरफोर्ड एयरपोर्ट से बी-52 बॉम्बर रवाना किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 3 बॉम्बर रवाना हो चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका और इजरायल मिलकर मिडिल-ईस्ट में बहुत बड़ा हमला करने वाले हैं। देखना होगा कि ये हमला हूती पर होगा या हूती की युद्ध मशीनरी को चलाने वाले ईरान पर।</p>

<p>इससे पहले खबर सामने आई थी कि <a href="https://www.indiatv.in/world/asia/saudi-arabia-riyadh-airport-attacked-houthi-rebels-killing-12-and-injuring-over-300-2026-10-11-1248139" target="_blank" title="सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला, 12 लोगों की मौत, 300 से ज्यादा घायल">सऊदी अरब के रियाद एयरपोर्ट पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमला हुआ</a>, जिसमें 12 लोगों की मौत हो गई और 300 से ज्यादा घायल हो गए।ट</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/world/asia/us-fighter-jet-strikes-cargo-ship-gulf-of-oman-iran-blockade-2026-10-11-1248185" target="_blank" title="ईरान की नाकेबंदी के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, ओमान की खाड़ी में कार्गो शिप पर फाइटर जेट से हमला">ईरान की नाकेबंदी के बीच अमेरिका का बड़ा एक्शन, ओमान की खाड़ी में कार्गो शिप पर फाइटर जेट से हमला</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/houthi-attacks-saudi-arabia-why-trump-reacted-strongly-inside-story-2026-10-11-1248265     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/houthi-attacks-saudi-arabia-why-trump-reacted-strongly-inside-story-2026-10-11-1248265 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 11 Oct 2026 22:03:46 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     दिल्ली में जारी रहेगा CJP का प्रदर्शन, जानें क्यों धरी की धरी रह गई उनकी सारी तैयारी     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ 10 अक्टूबर, आज वही तारीख है जिसका बार-बार जिक्र किया जा रहा था। सरकार को झुकाने की धमकी दी जा रही थी। सड़क पर उतरकर सत्ता को हिलाने की बातें कही जा रही थीं लेकिन सारी बातें हवा हवाई हो गईं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/delhi-jantar-mantar-protest-3-1791649031.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[10 अक्टूबर को फ्लॉप रहा CJP का प्रदर्शन।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/delhi-jantar-mantar-protest-3-1791649031.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/delhi-jantar-mantar-protest-3-1791649031.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      10 अक्टूबर को फ्लॉप रहा CJP का प्रदर्शन।
                      <span class="copyright">Image Source : PTI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आज वैसा कुछ भी नहीं हो पाया जैसा 20 जुलाई को हुआ था। जंतर-मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट में एक भी नेता नहीं पहुंच पाया। खुद CJP के लीडर्स वहां तक नहीं पहुंच पाए। ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर से निकलीं जरूर, लेकिन वो जंतर-मंतर नहीं पहुंच पाईं। अरविंद केजरीवाल भी जंतर-मंतर तक नहीं पहुंच पाए। राहुल गांधी जंतर-मंतर के लिए निकले ही नहीं। वो दिल्ली से चेन्नई निकल गए और अखिलेश यादव दिल्ली आने की जगह सैफई चले गए। 'वोट चोरी' पर विपक्षी एकता की आज पोल खुल गई। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी ने ऐलान किया है कि रविवार को भी प्रदर्शन जारी रहेगा। लेकिन सवाल है कि आज ऐसा मुमकिन कैसे हुआ कि कोई बवाल नहीं होने पाया।</p>

<p><strong>दिल्ली में तैनात थे 30 हजार से ज्यादा जवान</strong></p>

<p>दरअसल, जंतर-मंतर का सेकेंड चैप्टर शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। आज दिल्ली पुलिस के 30 हजार से ज्यादा जवान जंतर-मंतर के आसपास तैनात थे। हर रास्ते पर बैरिकेडिंग थी। हर सिचुएशन से निपटने की तैयारी थी। आज जो भी जंतर-मंतर के लिए निकला, बैनर पोस्टर लहराने की कोशिश की, जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही दिल्ली पुलिस ने उसे डिटेन कर लिया। गिनती के चंद लोग जंतर-मंतर पहुंचे भी तो उनके नारों का शोर दिल्ली पुलिस की तैयारियों के आगे सुनाई नहीं दिया।</p>

<p><strong>दोपहर होते-होते सबकुछ ठंडा पड़ गया</strong></p>

<p>जंतर-मंतर के आस पास का पूरा इलाका आज छावनी बना रहा। कनॉट प्लेस हो, रीगल सिनेमा हो, मिंटो ब्रिज हो या आकाशवाणी भवन, जहां प्रोटेस्टर्स ने हंगामा करने की कोशिश की, उन्हें पुलिस उठाकर ले गई। ना अभिजीत दिपके पहुंच पाए, ना ध्रुव राठी को मौका मिला, ना नेहा वोहरा की दाल गली। दिल्ली पुलिस ने आज सिर्फ 30 हजार जवानों की फौज ही नहीं उतारी, बल्कि चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए। दर्जनों ड्रोन्स उड़ाए। सड़कों पर कील लगाई। कॉकरोच जनता पार्टी के जो सपोटर्स इन सबके बाद भी कनॉट प्लेस के आस पास पहुंचे, उन्हें समझ में नहीं आया कि करना क्या है। या तो वो थोड़ी देर में वापस लौट गए या फिर उन्हें पुलिस डिटेन करके ले गई। दोपहर होते-होते सबकुछ ठंडा पड़ चुका था। जितने लोग सड़कों पर बचे थे, उससे ज्यादा दिल्ली पुलिस के 12 डिटेंशन सेटर्स में पड़े थे।</p>

<p><strong>संसद मार्ग टू रफी मार्ग तक थी पूरी तैयारी</strong></p>

<p>जंतर मंतर के आस-पास जिन इलाकों में 20 जुलाई को जबरदस्त हंगामा हुआ था, पत्थरबाजी हुई थी, लाठीचार्ज हुआ था, दोपहर से लेकर देर रात तक बवाल हुआ था, वो सारे इलाके आज सुनसान पड़े थे। दिल्ली पुलिस इस बार बिल्कुल क्लियर थी कि 20 जुलाई रिपीट नहीं होने देगी, इसलिए पूरा लुटियंस जोन आज कड़े पहरेदारी में रहा। कुछ प्रोटेस्टर्स जब जंतर-मंतर नहीं पहुंच पाए, तो संसद मार्ग, रफी मार्ग, अशोक रोड, रायसीना रोड, अकबर रोड, शाहजहां रोड और इंडिया गेट सर्किल की तरफ जमा होने लगे। लेकिन वहां भी दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए तैयार बैठी थी। कुछ ही मिनटों में ये सारे रास्ते खाली करा लिए गए।</p>

<p><strong>खींच-खींचकर पुलिस वैन में ले जाए गए प्रदर्शनकारी</strong></p>

<p>सारे प्लान फेल हुए तो कई प्रोटेस्टर्स ने असली रंग दिखाना शुरू कर दिया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के नाम पर जमा हुए और हिंदुत्व के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। बात सिर्फ नारेबाजी तक नहीं रुकी। पिछली बार की तरह इस बार भी पुलिस के जवानों को निशाना बनाने की कोशिश भी हुई। बाबा खड़ग सिंह मार्ग के पास जैसे ही पुलिस के जवान कम हुए, वहां पत्थरबाजी की खबर आ गई। पूरे दिन प्रोटेस्टर्स जंतर-मंतर जाने की कोशिश करते रहे और पुलिस उनके अरमानों पर पानी फेरती रही। इसलिए शाम होते-होते लोग कनॉट प्लेस पहुंचने लगे। पुलिस ने थोड़ी देर वहां लोगों को इकट्ठा होने दिया। जैसे ही कुछ लोग वहां जमा हुए, नारेबाजी शुरू हो गई। और नारेबाजी शुरू हुई तो दिल्ली पुलिस ने भी अपना काम शुरू कर दिया। खींच-खींचकर उन्हें पुलिस वैन में भरा और अपने साथ ले गई।</p>

<p><strong>फेल हुआ जंतर-मंतर वाला प्लान</strong></p>

<p>आज कॉकरोच जनता पार्टी का जंतर-मंतर वाला प्लान पूरी तरह से फेल रहा और ये इसलिए हुआ क्योंकि दिल्ली पुलिस ने पुख्ता तैयारी की थी। सड़कों पर तो तैनाती थी ही, सर्विलांस रूम भी बनाए गए थे, जहां बैठकर चप्पे-चप्पे की निगरानी चल रही थी। जहां कहीं हलचल दिखती, तुरंत कमांड सेंटर से इसकी जानकारी दी जा रही थी और पुलिस फौरन एक्शन ले रही थी। उधर, <a href="https://www.indiatv.in/india/national/supreme-court-opposition-leaders-preventive-detention-delhi-special-bench-sunday-hearing-2026-10-10-1248105" target="_blank" title="दिल्ली में विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, कल रविवार को स्पेशल बेंच करेगी सुनवाई">दिल्ली में विपक्षी नेताओं की एहतियातन हिरासत में लेने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है</a>। इसको लेकर याचिका दायर की गई है, जिसकी सुनवाई रविवार को स्पेशल बेंच करेगी।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/india/politics/rahul-gandhi-slams-centre-over-hindi-imposition-questions-police-action-against-students-in-delhi-2026-10-10-1248106" target="_blank" title="'इंटरनेट बंद कर दिया गया और पुलिस छात्रों को पीट रही थी', राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' में कहा">'इंटरनेट बंद कर दिया गया और पुलिस छात्रों को पीट रही थी', राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' में कहा</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/delhi-jantar-mantar-cjp-protest-october-10-police-security-opposition-leaders-detained-2026-10-10-1248113     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/delhi-jantar-mantar-cjp-protest-october-10-police-security-opposition-leaders-detained-2026-10-10-1248113 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 10 Oct 2026 21:49:23 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     आसिम मुनीर का बड़ा प्लान, टुकड़ों में बंट जाएगा पाकिस्तान, क्यों अहम हैं पंजाब और सिंध?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ पाकिस्तान अभी चार प्रांतों, पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में बंटा हुआ है। लेकिन जल्द ही पाकिस्तान कई राज्यों और छोटे छोटे इलाकों में बंट सकता है। आसिम मुनीर की क्या प्लानिंग है? जानिए।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-24-1791526819.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[क्या टुकड़ों में बंट जाएगा पाकिस्तान]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-24-1791526819.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-24-1791526819.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      क्या टुकड़ों में बंट जाएगा पाकिस्तान
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><a href="https://www.indiatv.in/world/asia">पाकिस्तान</a> के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने राजनीतिक नक्शे में बदलाव का प्लान बनाया है, जिसके बाद पाकिस्तान के नक्शे में दशकों बाद सबसे बड़ा बदलाव हो सकता है। बता दें कि अभी पाकिस्तान चार प्रांतों, पंजाब, सिंध, खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान, में बंटा हुआ है। 'द इकोनॉमिस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर अब इन बड़े प्रांतों को छोटे राज्यों में बांटना चाहते हैं, जिससे 12 से 15 नए प्रांत या 160 छोटे इलाके में बंट सकते हैं। इस प्रस्ताव से पाकिस्तान में सत्ता के संगठन के तरीके में बुनियादी बदलाव आएगा। इससे सिर्फ़ नक्शे पर नाम या सीमाएं ही नहीं बदलेंगी। पाकिस्तान के बड़े प्रांतों को तोड़ने से सत्ता के वैकल्पिक केंद्र भी कमज़ोर हो सकते हैं और देश का प्रशासनिक ढांचा सेना की ज़रूरतों के प्रति ज़्यादा जवाबदेह बन जाएगा।</p>

<p><strong>क्या है आसिम मुनीर का प्लान</strong><br />
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की विशाल आबादी की वजह से प्रशासन चलाने में गंभीर प्रशासनिक समस्याएं पैदा हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए घंटों यात्रा करनी पड़ती है, जबकि पंजाब के एक-चौथाई से भी कम लोगों को घर पर सुरक्षित पीने का पानी मिल पाता है। ऐसे में आसिम मुनीर का तर्क है कि प्रांत इतने बड़े हैं कि उन्हें ठीक से चलाना मुश्किल है और इसी वजह से पाकिस्तान का प्रदर्शन खराब रहता है। देश धीमी ग्रोथ, ज़्यादा महंगाई और भारी कर्ज़ चुकाने के बोझ से जूझ रहा है। लेकिन इन समस्याओं की जड़ें पाकिस्तान के प्रांतों के आकार से कहीं ज़्यादा गहरी हैं।</p>

<p><strong>आसिम मुनीर का बढ़ता असर</strong><br />
पाकिस्तान के इतिहास में दो-पांचवें से ज़्यादा समय तक सेना का सीधा शासन रहा है, जबकि चुनी हुई सरकारें अक्सर सेना के साये में काम करती रही हैं। 'द इकोनॉमिस्ट' का तर्क है कि जिन समस्याओं को मुनीर छोटे प्रांत बनाकर हल करने की बात कर रहे हैं, उनमें से कई के लिए सेना खुद ज़िम्मेदार रही है। पत्रिका ने सेना के कीमती ज़मीन और कारोबार पर कब्ज़े, और साथ ही सरकारी संसाधनों में उसकी बड़ी हिस्सेदारी का ज़िक्र किया। इसी वजह से इस प्रस्ताव को लेकर विरोधाभास पैदा होता है।</p>

<p>अगर पाकिस्तान की प्रांतीय सरकारें उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर पा रही हैं, तो उन्हें छोटे हिस्सों में बांटने को सरकार को नागरिकों के करीब लाने की कोशिश के तौर पर पेश किया जा सकता है। लेकिन अगर नए हिस्से कमज़ोर हुए और केंद्र पर ज़्यादा निर्भर रहे, तो इस पुनर्गठन से सेना के लिए उन पर अपना असर जमाना और भी आसान हो सकता है।</p>

<p><strong>पंजाब और सिंध क्यों अहम हैं?</strong><br />
पाकिस्तान के चार प्रांत सिर्फ़ प्रशासनिक हिस्से नहीं हैं, बल्कि वे राजनीतिक ताकत के बड़े केंद्र भी हैं। पंजाब में पारंपरिक रूप से पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ का दबदबा रहा है, जबकि सिंध पाकिस्तान पीपल्स पार्टी का गढ़ बना हुआ है। दोनों प्रांतों ने सैन्य शासन के दौरान भी राजनीतिक सत्ता के वैकल्पिक केंद्र के तौर पर काम किया है। इसी वजह से उन्हें छोटी इकाइयों में बांटने की संभावना राजनीतिक रूप से अहम हो जाती है।</p>

<p><strong>बदला हुआ राजनीति माहौल और मुनीर का बढ़ता कद</strong><br />
पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इक़बाल पहले भी ज़्यादा प्रांतों और छोटी प्रशासनिक इकाइयों की ज़रूरत के बारे में बात कर चुके हैं, जिसमें 12 से 15 प्रांत और 160 ज़िलों तक की संभावना शामिल है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आ रहा है, जब मुनीर ने पाकिस्तान की राजनीति पर ज़बरदस्त पकड़ बना ली है। चुनी हुई सरकार के होने के बावजूद, असल में पाकिस्तान पर मुनीर का ही शासन चलता है। उन्होंने PML-N और PPP के साथ मिलकर अपनी स्थिति मज़बूत की है, जबकि पाकिस्तान की तीसरी बड़ी राजनीतिक ताकत के नेता इमरान खान को जेल में रखा है। बदलते राजनीतिक माहौल की वजह से, प्रस्तावित बदलावों को पाकिस्तान में सत्ता के लिए चल रहे बड़े संघर्ष से अलग करके देखना मुश्किल है।</p>

<p><strong>खैबर पख्तूनख्वा में उथल-पुथल जारी</strong><br />
प्रांतीय बदलावों का ये प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान खैबर पख्तूनख्वा में नई राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहा है। जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी 'पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ'  और सरकार के बीच बातचीत नाकाम होने के बाद, इस हफ़्ते की शुरुआत में उनके हज़ारों समर्थकों ने इस्लामाबाद की ओर मार्च शुरू किया। यह मार्च खैबर पख्तूनख्वा से शुरू हुआ, जहां इमरा खान की पार्टी की सरकार है।<br />
पाकिस्तानी सरकार ने इस्लामाबाद के चारों ओर भारी सुरक्षा बल तैनात किए हैं और प्रदर्शनकारियों को राजधानी में घुसने से रोकने का संकल्प लिया है। इस मार्च ने संघीय सरकार और खैबर पख्तूनख्वा में पीटीआई के नेतृत्व वाली सरकार के रिश्तों पर और दबाव डाल दिया है, खासकर ऐसे समय में जब यह प्रांत उग्रवाद की गंभीर समस्या से भी जूझ रहा है।</p>

<p><strong>बलूचिस्तान और PoK में भी फैली है अशांति</strong><br />
चार प्रांतों के बाहर फैली अशांति भी पाकिस्तान के राजनीतिक ढांचे की परीक्षा ले रही है। बलूचिस्तान बरसों से अपनी तथाकथित आज़ादी, संसाधनों और इस्लामाबाद की भूमिका को लेकर अलगाववादी हिंसा का सामना कर रहा है। इसलिए, प्रांत को बांटने की किसी भी कोशिश में इलाक़े, संसाधनों और स्थानीय राजनीतिक सत्ता से जुड़े बेहद संवेदनशील सवाल शामिल होंगे।</p>

<p>वहीं, पाकिस्तान के कब्ज़े वाला कश्मीर (PoK) भी असंतोष का एक बड़ा केंद्र रहा है; यहां शासन, कीमतों, टैक्स और आर्थिक हालात को लेकर लोगों का गुस्सा समय-समय पर विरोध प्रदर्शनों के रूप में सामने आता रहा है। ये सभी दबाव मिलकर यह बताते हैं कि पाकिस्तान के आंतरिक ढांचे को फिर से तय करने की कोई भी कोशिश कितनी जटिल होगी।</p>

<p><strong> प्रांतों को छोटे राज्यों में बांटने से क्या होगा फायदा</strong><br />
ऐसे राजनीतिक माहौल और लगातार चार बड़े प्रांतों में फैली अशांति को छोटे राज्यों में बांटने के पक्ष में एक ठोस प्रशासनिक तर्क भी है। क्योंकि 1947 के बाद से पाकिस्तान काफ़ी बड़ा हो गया है, और इसके कुछ मौजूदा प्रांत बहुत विशाल हैं, जहां प्रशासन चलाना मुश्किल है। ऐसे में, इन चार शक्तिशाली प्रांतों को छोटे राज्यों में बांटने से न केवल पाकिस्तान का प्रशासनिक नक्शा बदलेगा, बल्कि इससे पाकिस्तान में सत्ता का संतुलन भी बदल सकता है और प्रशासनिक मजबूती से सत्ता को नियंत्रित करने में मदद भी मिल सकती है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/world/asia/imran-khan-release-pti-long-march-islamabad-sohail-afridi-khawaja-asif-warning-2026-10-08-1247771">इमरान की पार्टी ने बढ़ाई इस्लामाबाद की टेंशन! राजधानी की तरफ बढ़ रहा लॉन्ग मार्च; तिलमिलाए मंत्री ने PTI को TTP से जोड़ दिया</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/pakistan-fragment-into-multiple-pieces-four-major-provinces-into-smaller-regions-asim-munir-plan-2026-10-09-1247857     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/pakistan-fragment-into-multiple-pieces-four-major-provinces-into-smaller-regions-asim-munir-plan-2026-10-09-1247857 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 09 Oct 2026 12:35:03 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     इंडिगो की फ्लाइट पर हवा में गिरी बिजली, टूट गई नाक, Farade Cage ने कैसे बचाई यात्रियों की जान     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ पटना से लखनऊ के लिए जा रही इंडिगो फ्लाइट जब 17000 फीट की ऊंचाई पर थी, तो उसपर आकाशीय बिजली गिरी। फ्लाइट को ज्यादा नुक्सान नहीं हुआ। जानें किस तकनीक से बच गई यात्रियों की जान?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/flights-1-1791450487.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[इंडिगो फ्लाइट पर गिरी बिजली]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/flights-1-1791450487.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/flights-1-1791450487.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      इंडिगो फ्लाइट पर गिरी बिजली
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>पटना से लखनऊ जा रही इंडिगो की एक फ़्लाइट 6E925, जब लखनऊ के पास करीब 17000 फीट की ऊंचाई पर था, उसी समय <a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/indigo-flight-patna-to-lucknow-struck-by-lightning-nose-damaged-104-passengers-safe-2026-10-07-1247586">खराब मौसम की वजह से विमान पर ज़बरदस्त आसमानी बिजली गिरी</a>। बिजली गिरने से जेट का 'नोज़ कोन' (विमान के अगले हिस्से का शंकु-आकार का भाग) बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस विमान में 104 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे, जब फ्लाइट हवा में हुई डरावनी घटना का शिकार हो गई। 17,000 फ़ीट की ऊंचाई पर  खराब मौसम के बीच नीचे उतरते समय  विमान के अगले हिस्से में साफ़ तौर पर ढांचागत नुकसान दिखने के बावजूद, विमान चौधरी चरण सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तय समय से पहले सुरक्षित उतर गया और किसी को कोई चोट नहीं आई।</p>

<p>इस तरह की घटना के बाद हैरानी की बात ये है कि बिजली गिरने के बावजूद आखिर फ्लाइट को ज्यादा नुकसान कैसे नहीं हुआ। तो इसका जवाब है वो बेहतरीन इंजीनियरिंग सिद्धांत, जिसे फैराडे केज कहा जाता है जो कॉमर्शियल विमानों को जानलेवा आकाशीय बिजली के झटकों से बचाते हैं।</p>

<p><strong>क्या होता है फैराडे केज सिद्धांत</strong><br />
विमानों की सुरक्षा के लिए कॉमर्शियल एयरलाइनर 'फैराडे केज' के सिद्धांत पर बनाए जाते हैं। यह एक लगातार चलने वाला कंडक्टिव खोल होता है जो बिजली के चार्ज को किसी भी फ्लाइट की बाहरी बॉडी के साथ-साथ आगे बढ़ाता है। ऐसे में जब विमान पर बिजली गिरती है, जिसमें करोड़ों वोल्ट की बिजली होती है, तो चार्ज विमान के किसी बाहरी हिस्से, जैसे नोज़ कोन या विंगटिप से अंदर आता है। फिर यह बाहरी मैटेलिक स्किन या उसमें लगी कॉपर फ़ॉइल जाली के चारों ओर बहता है और आखिर में पिछले किनारों पर लगे स्टैटिक डिस्चार्ज विक्स के ज़रिए सुरक्षित रूप से बाहर निकल जाता है। बिजली का सुचालक होने वाली यह बाहरी परत अंदर के केबिन को सुरक्षित रखती है और संवेदनशील एवियोनिक्स, फ़्यूल टैंक और यात्रियों को बिजली के झटकों से बचाती है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/farade-cage-1791450487.jpg"    /></p>

<p><strong>फैराडे केज कैसे काम करता है?</strong><br />
जब इस केज पर बिजली गिरती है, तो इसके अंदर मौजूद मुक्त इलेक्ट्रॉन बाहरी सतह पर फैल जाते हैं और बाहरी और आंतरिक आवेश मिलकर केज के भीतर के विद्युत क्षेत्र को शून्य (Zero) कर देते हैं। फिर इसके अंदर रखे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (जैसे मोबाइल फोन) तक कोई भी रेडियो तरंग या सिग्नल नहीं पहुंच पाता। इसका आविष्कार वर्ष 1836 में प्रसिद्ध वैज्ञानिक माइकल फैराडे ने किया था।</p>

<p><strong>फैराडे केज का कहां कहां होता है प्रयोग</strong><br />
अस्पतालों में एमआरआई (MRI स्कैन रूम को सटीक डेटा के लिए बाहरी रेडियो तरंगों से बचाने हेतु फैराडे केज के रूप में बनाया जाता है।<br />
जब आकाश से बिजली गिरती है, तो कार के अंदर बैठे लोग सुरक्षित रहते हैं क्योंकि कार की धातु की बॉडी फैराडे केज की तरह काम करती है।<br />
संवेदनशील वैज्ञानिक उपकरणों और डेटा को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) से बचाने के लिए</p>

<p> </p>

<p><strong>विमान की नाक ही क्यों टूट गई?</strong><br />
विमान की नोज़ कोन, जिसे तकनीकी भाषा में 'रेडोम' कहा जाता है, हवा में उड़ते समय बिजली गिरने की स्थिति में विमान का सबसे कमज़ोर हिस्सा होता है। विमान के बाकी हिस्से में मैटेलिक अलॉय या कंडक्टिव कॉपर जाली वाली कंपोजिट सामग्री का इस्तेमाल होता है, लेकिन इसके उलट रेडोम को नॉन-मैटेलिक फ़ाइबरग्लास या कंपोजिट सामग्री से बनाया जाना ज़रूरी होता है, क्योंकि वेदर रडार डिश सीधे नोज़ कोन के अंदर लगी होती है।</p>

<p>नोज़ के आस-पास कोई भी मेटल शील्डिंग माइक्रोवेव रडार सिग्नल को रोक देगी, जिससे पायलट तूफ़ानी बादलों को देख नहीं पाएंगे। चूंकि रेडोम में बाकी फ़्यूज़लेज (हवाई जहाज़ की मुख्य बॉडी) जैसी लगातार कंडक्टिव बाहरी परत नहीं होती, इसलिए बिजली गिरने पर, इलेक्ट्रिकल आर्क के हवाई जहाज़ की कंडक्टिव बॉडी तक पहुंचने से पहले, उस खास हिस्से में काफ़ी ज़्यादा गर्मी से नुकसान, स्ट्रक्चर का दबना या सतह में छेद हो सकता है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/india/national/first-exclusive-video-of-brahmos-su-30-used-in-operation-sindoor-in-india-pakistan-conflict-2026-10-08-1247667">ब्रह्मोस SU-30 का पहला एक्सक्लूसिव वीडियो आया सामने, देखकर कांप उठेंगे पाकिस्तान और चीन</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/lightning-strikes-indigo-flight-mid-air-nose-cone-damaged-how-faraday-cage-saved-2026-10-08-1247695     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/lightning-strikes-indigo-flight-mid-air-nose-cone-damaged-how-faraday-cage-saved-2026-10-08-1247695 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 08 Oct 2026 14:53:40 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     काला सागर में ड्रोन की मार, भारत पर कितना असर? गेहूं, तेल और भारतीय नाविकों का क्या है कनेक्शन     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ रूस-यूक्रेन युद्ध में काला सागर अब ड्रोन हमलों के कारण व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए भी खतरनाक हो गया है। इसका असर भारतीय नाविकों, अनाज-तेल की सप्लाई, समुद्री बीमा और वैश्विक कीमतों पर पड़ सकता है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/black-sea-war-1791378018.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[रोमानिया में काला सागर के तट पर स्थित एक पोर्ट पर समुद्री ड्रोन के हमले के बाद उठता धुआं।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/black-sea-war-1791378018.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/black-sea-war-1791378018.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      रोमानिया में काला सागर के तट पर स्थित एक पोर्ट पर समुद्री ड्रोन के हमले के बाद उठता धुआं।
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>रूस और यूक्रेन की जंग अब सिर्फ जमीन पर लड़ी जाने वाली लड़ाई नहीं रह गई है। काला सागर में ड्रोन हमलों ने सैन्य ठिकानों के साथ-साथ व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को भी खतरे में डाल दिया है। इस समुद्र से <a href="https://www.indiatv.in/world" target="_blank">दुनिया</a> के कई देशों के लिए गेहूं, मक्का, तेल और खाद की सप्लाई होती है। हाल के हमलों में भारतीय नाविक भी प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सवाल है कि काला सागर में ऐसा क्या खास है और यहां चल रही लड़ाई का असर अफ्रीका, एशिया और भारत तक कैसे पहुंच सकता है? आइए समझते हैं।</p>
<h3><strong>काला सागर की स्थिति इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?</strong></h3>
<p>काला सागर यूरोप और एशिया के बीच स्थित एक बड़ा समुद्री क्षेत्र है। इसके किनारे रूस, यूक्रेन, तुर्किये, बुल्गारिया, रोमानिया और जॉर्जिया हैं। हालांकि इसका महत्व सिर्फ इन 6 देशों तक सीमित नहीं है। यहां से जाने वाला अनाज, तेल और दूसरी जरूरी चीजें हजारों किलोमीटर दूर अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के बाजारों तक पहुंचती हैं। इसलिए काला सागर में कोई बड़ी रुकावट पैदा होती है तो उसका असर दूर-दराज के देशों में खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।</p>
<h3><strong>गेहूं की सप्लाई में काला सागर की क्या भूमिका है?</strong></h3>
<p>काला सागर के बंदरगाहों से हर साल करोड़ों टन अनाज दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भेजा जाता है। रूस और यूक्रेन मिलकर दुनिया के निर्यात होने वाले गेहूं का करीब एक चौथाई हिस्सा सप्लाई करते हैं। रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है, जबकि यूक्रेन गेहूं और मक्का का बड़ा सप्लायर है। अगर इन समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रुकती या धीमी होती है, तो मिस्र, बेरूत और नैरोबी जैसी जगहों में रोटी की कीमत बढ़ सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ता है जो खाने-पीने की चीजों के लिए आयात पर निर्भर हैं।</p>
<h3><strong>तेल के लिए भी क्यों अहम है काला सागर?</strong></h3>
<p>काला सागर रूस के तेल कारोबार का भी बड़ा केंद्र है। रूस के समुद्री टर्मिनलों से रोज करीब 10 लाख बैरल कच्चा तेल गुजरता है। नोवोरोसिस्क रूस का प्रमुख दक्षिणी तेल निर्यात केंद्र है। इसके पास कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम का समुद्री टर्मिनल भी है, जो कजाखस्तान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा संभालता है। इन टर्मिनलों से तेल की आवाजाही में रुकावट आती है तो वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है। एशिया की रिफाइनरियों तक पहुंचने वाली सप्लाई भी इससे प्रभावित हो सकती है।</p>
<h3><strong>काला सागर से बाहर निकलना मुश्किल क्यों है?</strong></h3>
<p>काला सागर की भौगोलिक स्थिति इसे और संवेदनशील बनाती है। यह सीधे खुले समुद्र से नहीं जुड़ा है। यहां से निकलने वाले जहाजों को तुर्किये के बोस्फोरस से गुजरना पड़ता है। इसके बाद वे मरमारा सागर पार करते हैं और डार्डानेल्स से होकर भूमध्यसागर की ओर जाते हैं। इन जलडमरूमध्यों पर 1936 की मॉन्ट्रो कन्वेंशन लागू होती है। यही काला सागर को बाहरी दुनिया से जोड़ने वाला समुद्री रास्ता है। इसलिए यहां संकट पैदा होने पर जहाजों के लिए कोई आसान वैकल्पिक रास्ता उपलब्ध नहीं है।</p>
<h3><strong>रूस-यूक्रेन युद्ध में काला सागर कैसे बना जंग का मैदान?</strong></h3>
<p>2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद काला सागर भी युद्ध का बड़ा मैदान बन गया। शुरुआत में यहां पारंपरिक नौसैनिक लड़ाई हुई। इसमें युद्धपोत, मिसाइल फ्रिगेट, तटीय मिसाइल सिस्टम और समुद्री सुरंगों का इस्तेमाल हुआ। लेकिन यूक्रेन के पास रूस जैसी बड़ी पारंपरिक नौसेना नहीं थी। इसलिए उसने छोटे, सस्ते और दूर से नियंत्रित किए जा सकने वाले समुद्री ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ाया। इन विस्फोटक ड्रोन ने रूस के लिए नई चुनौती पैदा कर दी और धीरे-धीरे काला सागर में युद्ध की रणनीति बदलने लगी।</p>
<h3><strong>यूक्रेन के समुद्री ड्रोन से रूस को क्या नुकसान हुआ?</strong></h3>
<p>यूक्रेन ने रूस के ऐतिहासिक नौसैनिक केंद्र सेवस्तोपोल के आसपास लगातार समुद्री ड्रोन हमले किए। इन हमलों के कारण रूसी नौसेना को अपने कई बड़े युद्धपोत पूर्व की ओर नोवोरोसिस्क ले जाने पड़े। यह सिर्फ सैन्य तैनाती में बदलाव नहीं था। नोवोरोसिस्क रूस का बड़ा व्यावसायिक केंद्र भी है। यहां से तेल और दूसरे महत्वपूर्ण सामान का कारोबार होता है। नतीजा यह हुआ कि जिस समुद्री क्षेत्र में रूसी युद्धपोत ड्रोन से बचने की कोशिश कर रहे थे, उसी क्षेत्र से तेल, खाद और गेहूं ले जाने वाले व्यापारी जहाज भी गुजर रहे थे।</p>
<h3><strong>अब युद्ध का खतरा व्यापारी जहाजों तक कैसे पहुंच गया?</strong></h3>
<p>युद्ध शुरू होने के बाद से काला सागर में व्यापारी जहाजों को जोखिम रहा है, लेकिन अक्टूबर की शुरुआत में हालात ज्यादा गंभीर हो गए। अक्टूबर की शुरुआत में यूक्रेनी मक्का लेकर जा रहे तुर्किये के एक कार्गो जहाज को सीधे हमला झेलना पड़ा। जहाज रोमानिया के विशेष आर्थिक क्षेत्र में डूब गया और 2 नाविकों की मौत हो गई। इसके 48 घंटे बाद बुल्गारिया के जलक्षेत्र में 2 कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया गया। यह नाटो के किसी सदस्य देश के समुद्री क्षेत्र में इस तरह के हमलों का पहला मामला था। इस हमले में एक जहाज डूब गया और 10 नाविक लापता हो गए।</p>
<h3><strong>बुल्गारिया में हुए दूसरे हमले में भारतीयों के साथ क्या हुआ?</strong></h3>
<p>बुल्गारिया के जलक्षेत्र में हमले का शिकार हुए दूसरे जहाज पर 18 चालक दल के सदस्य मौजूद थे। उन्हें बचा लिया गया। इनमें 7 भारतीय नाविक शामिल थे। यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारतीय नागरिक दुनिया के समुद्री व्यापार में बड़ी संख्या में काम करते हैं। युद्ध क्षेत्र में बढ़ती असुरक्षा सीधे उनके जीवन को खतरे में डाल सकती है। लाल सागर और अदन की खाड़ी में ड्रोन तथा मिसाइल हमलों के बीच काम कर चुके भारतीय नाविक अब काला सागर में भी इसी तरह के जोखिम का सामना कर रहे हैं।</p>
<h3><strong>सोची के पास तेल टैंकर पर हमले से चिंता क्यों?</strong></h3>
<p>इसके बाद रूस के पर्यटन शहर सोची के तट के पास लाइबेरिया के झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘अफ्रामैक्स रियो’ समुद्री ड्रोन की चपेट में आ गया। हमले के बाद जहाज के डेक पर भीषण आग लग गई। आपातकालीन टग बोट ने आग बुझाने की कोशिश की और सभी 23 चालक दल के सदस्यों को बचा लिया गया। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और युद्ध के बीच की कड़ी को साफ कर दिया। जहाज लाइबेरिया के झंडे के नीचे था, उसके क्रू के सभी सदस्य भारतीय थे और वह रूसी तट से लदा कच्चा तेल ले जा रहा था।</p>
<h3><strong>इस हमले की सबसे बड़ी खास बात क्या थी?</strong></h3>
<p>‘अफ्रामैक्स रियो’ पर हमला सक्रिय युद्ध की अग्रिम पंक्ति से सैकड़ों किलोमीटर दूर हुआ। इसका मतलब यह है कि खतरा सिर्फ उस जगह तक सीमित नहीं है जहां रूस और यूक्रेन की सेनाएं सीधे आमने-सामने हैं। समुद्री ड्रोन बहुत दूर तक पहुंचकर ऐसे जहाजों को भी निशाना बना सकते हैं जो युद्ध में सीधे शामिल नहीं हैं। किसी व्यापारी जहाज का झंडा किस देश का है, उसमें कौन सा सामान है और उसका चालक दल किस देश का है, इन सबके बावजूद समुद्र में मंडरा रहा ड्रोन उसे एक संभावित लक्ष्य बना सकता है।</p>
<h3><strong>रूस और यूक्रेन जहाजों को निशाना क्यों बना रहे हैं?</strong></h3>
<p>रूस और यूक्रेन दोनों समुद्री सप्लाई लाइनों को युद्ध में रणनीतिक महत्व देते हैं। रूस यूक्रेन के डेन्यूब बंदरगाहों और तटीय भंडारण केंद्रों पर हमले करता है। रूस का दावा है कि इन जगहों पर हथियारों की सप्लाई होती है। दूसरी ओर, यूक्रेन तेल टैंकरों और ईंधन से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाता है। उसका उद्देश्य रूस की तेल से होने वाली कमाई को प्रभावित करना है, क्योंकि इसी आय से युद्ध के लिए संसाधन जुटाए जाते हैं। लेकिन इन हमलों के बीच सबसे ज्यादा जोखिम उन नागरिक नाविकों का है जिनका युद्ध से कोई सीधा संबंध नहीं है।</p>
<h3><strong>काला सागर में जंग का जहाजों के किराए पर क्या असर पड़ता है?</strong></h3>
<p>व्यापार के लिए समस्या केवल जहाज पर हमला होने से नहीं पैदा होती। खतरा बढ़ते ही समुद्री बीमा कंपनियां युद्ध जोखिम का प्रीमियम बढ़ा देती हैं। काला सागर में हर नए हमले के साथ जहाजों का बीमा महंगा हो सकता है। बुल्गारिया के नेतृत्व ने भी चेतावनी दी है कि बढ़ती बीमा लागत सामान्य व्यापारिक जहाजों के संचालन को मुश्किल बना रही है। इसके बाद जहाज मालिक ज्यादा जोखिम भत्ता मांगते हैं और माल ढुलाई का किराया बढ़ता है। बड़ी शिपिंग कंपनियां जोखिम वाले रास्तों से पीछे हट सकती हैं और इसके चलते पुराने जहाजों पर निर्भरता बढ़ सकती है।</p>
<h3><strong>आखिर इस पूरे संकट का असर आम लोगों पर कैसे पड़ेगा?</strong></h3>
<p>समुद्र में बढ़ते जोखिम का असर आखिरकार आम लोगों की जेब तक पहुंच सकता है। जहाजों का बीमा और माल ढुलाई महंगी होने पर डीजल, तेल और आटे जैसी चीजों की कीमत बढ़ सकती है। अगर स्थिति इतनी खराब हो जाए कि कंपनियां काला सागर को प्रतिबंधित क्षेत्र मानने लगें, तो सप्लाई और महंगी हो जाएगी। अनाज को लेकर चिंता सबसे ज्यादा है। 28 सितंबर को न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आने वाले महीनों में बड़े खाद्य संकट की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि कुछ बड़े अनाज निर्यातकों को खासकर काला सागर के रास्ते माल भेजने में परेशानी हो सकती है।</p>
<h3><strong>भारत ने रूस और यूक्रेन से बातचीत क्यों बढ़ाई?</strong></h3>
<p>जयशंकर ने यह भी बताया था कि खाद की कमी बढ़ रही है और भारत सुरक्षित काला सागर शिपिंग बहाल करने के लिए रूस और यूक्रेन दोनों से बातचीत कर रहा है। यानी भारत की भूमिका अब केवल चिंता जताने तक सीमित नहीं है। नई दिल्ली सीधे दोनों पक्षों से संपर्क कर रही है। भारत के लिए यह मुद्दा खाद्य सुरक्षा और अपने नागरिकों की सुरक्षा दोनों से जुड़ा है। दुनिया के वाणिज्यिक समुद्री कर्मचारियों में भारतीय नाविकों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक है। ऐसे में काला सागर में बढ़ता खतरा भारत के लिए आर्थिक और मानवीय दोनों तरह की चिंता पैदा करता है।</p>
<h3><strong>भारत की कूटनीति सिर्फ नाविकों तक सीमित क्यों नहीं रही?</strong></h3>
<p>भारतीय कोशिशों की शुरुआत व्यापारी जहाजों में काम करने वाले नाविकों की सुरक्षा से हुई, लेकिन बाद में इसका दायरा बढ़कर अनाज और ऊर्जा ढांचे तक पहुंच गया। यूक्रेन ने भारत, अमेरिका, तुर्किये और मिस्र की ओर से दिए गए 4 अलग-अलग युद्धविराम प्रस्ताव मिलने की पुष्टि की है। यूक्रेन के मुताबिक, भारत का प्रस्ताव सबसे व्यापक था, क्योंकि इसमें समुद्री स्थिरता के साथ ऊर्जा से जुड़े ढांचे को भी शामिल किया गया था। हालांकि इन प्रस्तावों को जमीन पर लागू करना मुश्किल है। रूस समुद्री हमलों पर औपचारिक रोक लगाने का विरोध कर रहा है, क्योंकि व्यापारिक ढांचे पर दबाव उसके लिए युद्ध में महत्वपूर्ण रणनीतिक साधन है।</p>
<h3><strong>एक ही समुद्र में युद्ध और कूटनीति साथ-साथ क्यों चल रही है?</strong></h3>
<p>काला सागर में इस समय एक अनोखी स्थिति बन गई है। जिस समुद्र में ड्रोन सैन्य जहाजों और तेल टैंकरों को निशाना बना रहे हैं, उसी समुद्र में सुरक्षित व्यापार के लिए कूटनीतिक बातचीत भी चल रही है। यानी सैन्य कार्रवाई और कूटनीति दोनों का केंद्र एक ही समुद्र है। यही वजह है कि काला सागर अब सिर्फ रूस और यूक्रेन के बीच चल रही लड़ाई का हिस्सा नहीं रह गया है। यहां वैश्विक खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सप्लाई, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ गई है।</p>
<h3><strong>काला सागर का असर दुनिया के दूसरे हिस्सों तक क्यों जाएगा?</strong></h3>
<p>रूस और यूक्रेन जमीन और संप्रभुता को लेकर लड़ रहे हैं, लेकिन उनकी अर्थव्यवस्था और समुद्री व्यापार पूरी दुनिया से जुड़े हैं। काला सागर से निकलने वाला गेहूं अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के देशों तक पहुंचता है। यहां से जाने वाला तेल वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित करता है। भारतीय नाविक इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार का अहम हिस्सा हैं और अब उनकी सुरक्षा भी खतरे में है। इसलिए काला सागर में होने वाला हर ड्रोन हमला सिर्फ एक जहाज या एक देश की समस्या नहीं है। इस समुद्र की स्थिति आगे चलकर दुनिया के खाद्य बाजार, ईंधन की कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/world/europe/is-russia-really-planning-an-attack-on-nato-explaining-the-rising-tensions-after-kyiv-missile-strikes-2026-08-08-1236155" target="_blank" title="क्या रूस NATO पर हमला करने वाला है? कीव पर फिर मिसाइलों की बौछार, काला सागर में भी अटैक">क्या रूस NATO पर हमला करने वाला है? कीव पर फिर मिसाइलों की बौछार, काला सागर में भी अटैक</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/russia-ukraine-war-why-black-sea-drone-attacks-threaten-indian-sailors-global-food-and-oil-supplies-2026-10-07-1247516     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/russia-ukraine-war-why-black-sea-drone-attacks-threaten-indian-sailors-global-food-and-oil-supplies-2026-10-07-1247516 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 18:36:07 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     फ्रांस में स्टूडेंट्स क्यों हुए बेकाबू, सड़कों पर उतरे छात्रों की क्या है डिमांड, मुश्किल में फंसी सरकार     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ फ्रांस में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। क्या हैं छात्रों की मांगे और विरोध प्रदर्शन ने सरकार की परेशानी क्यों बढ़ा दी है?     ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-protest-1791357762.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[फ्रांस में विरोध प्रदर्शन]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-protest-1791357762.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-protest-1791357762.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      फ्रांस में विरोध प्रदर्शन
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>फ्रांस में स्कूलों में चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच शिक्षा मंत्री ने छात्रों से उनकी राय जानने के लिए कार्यक्रम शुरू करने और शिक्षकों की भर्ती करने का ऐलान किया है। फ्रांस में हो रहा विरोध प्रदर्शन पर अब सियासी रंग भी चढ़ने लगा है। बेहतर हालात की मांग को लेकर फ्रांस भर में छात्र सितंबर के आखिर से ही सैकड़ों हाई स्कूलों के गेट बंद कर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों के साथ छिटपुट झड़पें भी हुई हैं।</p>

<p>इसके बाद देश भर में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच, प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने पूरे फ्रांस में इस हफ़्ते हाई स्कूल की कक्षाएं बंद कर दी हैं। मंगलवार को जब हज़ारों लोग कई शहरों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग (जैसे कि अनुपस्थित शिक्षकों की जगह नए शिक्षक रखना, लंच ब्रेक का समय बढ़ाना और स्कूल के समय में बदलाव करना) को लेकर रैलियां कर रहे थे, तो पुलिस ने हाई स्कूलों को ब्लॉक करने वाले प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-protest-1-1791358016.jpg"    /></p>

<p>अधिकारियों के मुताबिक, पूरे देश में प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग ढाई लाख थी, लेकिन आयोजकों का अनुमान था कि छात्रों और कार्यकर्ताओं की संख्या करीब पांच लाख थी। हाई स्कूल स्टूडेंट्स यूनियन ने बताया कि लगभग 2,000 हाई स्कूलों को ब्लॉक कर दिया गया या दिन भर के लिए बंद रखा गया। प्रदर्शनकारी हाथों में ऐसे पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे जिन पर लिखा था, उन्हें हमारी कोई परवाह नहीं है और जीवित रहें या पढ़ाई करें। स्ट्रासबर्ग, ल्योन और रेनेस में विरोध प्रदर्शन कई बार हिंसक हो गए; पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर आगजनी की और चीज़ें फेंकीं।</p>

<p><strong>छात्रों की क्या है डिमांड</strong></p>

<ul>
	<li>स्टूडेंट्स की शिकायत है कि जब टीचर एब्सेंट होते हैं, तो अक्सर उनकी जगह लेने वाला कोई नहीं मिलता। इससे क्लास कैंसिल हो जाती हैं या स्टूडेंट्स को वे लेसन नहीं मिल पाते जो उन्हें मिलने चाहिए। सरकार ने अब वादा किया है कि वह देखेगी कि एब्सेंट टीचरों की जगह कैसे भरी जा सकती है।</li>
	<li>बहुत ज़्यादा भीड़ वाले क्लासरूम एक और बड़ी शिकायत है। स्टूडेंट्स और टीचर का कहना है कि खचाखच भरे कमरों में पढ़ाना मुश्किल होता है और हर स्टूडेंट पर अलग से ध्यान देने के लिए कम समय मिलता है। स्टाफ की कमी इस समस्या को और बढ़ा सकती है।</li>
	<li>विरोध-प्रदर्शनों ने पुरानी और ठीक से देख-रेख न होने वाली इमारतों की ओर ध्यान खींचा है। स्टूडेंट्स ने पानी के रिसाव से लेकर चूहों के आतंक तक की समस्याओं के बारे में बताया है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बच्चों को ऐसे स्कूलों में नहीं पढ़ना चाहिए जहाँ बेसिक देख-रेख की भी कमी हो।</li>
	<li>स्टूडेंट्स स्कूल के दिन की अवधि पर भी सवाल उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने मंत्रियों को उन शेड्यूल की समीक्षा करने का आदेश दिया है जो सुबह लगभग 8 बजे से शाम 6 बजे तक चल सकते हैं, साथ ही यह भी देखने को कहा है कि क्या स्टूडेंट्स को लंबे लंच ब्रेक की ज़रूरत है।</li>
	<li>स्टूडेंट्स का कहना है कि स्कूलों में रिसोर्स की कमी है, एक बड़ी शिकायत फंडिंग को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सालों से कम निवेश के कारण स्कूल स्टाफ, रखरखाव और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस में शिक्षा पर होने वाला खर्च महंगाई के मुकाबले कम रहा है।</li>
	<li>हर छात्र का अनुभव एक जैसा नहीं होता। स्कूलों और इलाकों के बीच असमानता भी एक चिंता का विषय है, खासकर पिछड़े इलाकों के छात्रों के लिए। ये विरोध प्रदर्शन सितंबर में पेरिस के आसपास के पिछड़े इलाकों में शुरू हुए और फिर पूरे देश में फैल गए। इन इलाकों के छात्रों का कहना है कि उनकी शिक्षा की गुणवत्ता इस बात पर काफी हद तक निर्भर करती है कि वे कहाँ रहते हैं।</li>
	<li>चिंताएं सिर्फ़ इमारतों और शिक्षकों तक ही सीमित नहीं हैं। छात्रों ने पढ़ाई के दबाव, सपोर्ट स्टाफ़ तक पहुंच और फ्रांस की शिक्षा प्रणाली व यूनिवर्सिटी में दाखिले की प्रक्रिया से जुड़ी मुश्किलों जैसे मुद्दे भी उठाए हैं। कई प्रदर्शनकारियों के लिए ये सभी मुद्दे आपस में जुड़े हुए हैं। शिक्षकों की कमी, खचाखच भरी कक्षाएं, खराब इमारतें और लंबे स्कूल के दिन - ये सभी मिलकर स्कूल के पहले से ही मुश्किल अनुभव को और तनावपूर्ण बना देते हैं।</li>
</ul>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-students-1791358748.jpg"    /></p>

<p><strong>पीएम लेकोर्नू ने क्या कहा</strong><br />
ये विरोध प्रदर्शन दो हफ़्ते पहले पेरिस के सबसे गरीब इलाक़ों में शुरू हुए थे और देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए। सरकार का कहना है कि यह आंदोलन अब शहरी हिंसा में बदल गया है और कुछ रैलियों में दंगा-रोधी पुलिस तैनात की गई है। प्रधानमंत्री लेकोर्नू ने क्लास रद्द करने की घोषणा करते हुए कहा, "हाई स्कूल को जलाने से स्कूल की इमारतों की हालत में सुधार नहीं होता है। उन्होंने मंत्रियों को यह भी आदेश दिया कि वे अक्टूबर के आखिर तक छात्रों की मांगों पर ध्यान दें। इन मांगों में टीचरों की जगह नए टीचर रखना, स्कूल के समय में बदलाव, लंच ब्रेक और पुरानी हो चुकी इमारतों की मरम्मत शामिल है।</p>

<p>फ्रांस के गृह मंत्रालय ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन शुरू होने के बाद से उसने 6,100 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से ज़्यादातर 18 साल से कम उम्र के हैं। न्याय मंत्रालय ने घोषणा की कि 1,800 से ज़्यादा लोगों पर मुकदमा चलाया जाएगा, जिनमें 1,483 नाबालिग शामिल हैं। लेकोर्नू के अनुसार, विरोध-प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 215 किशोर और 715 पुलिस अधिकारी घायल हुए हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/france-1791358748.jpg"    /></p>

<p><strong>सरकार के लिए बना गर्दन की फांस</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/world/europe/france-student-protests-school-vandalism-arson-education-reform-demands-2026-10-02-1246637">उत्तरी शहर लेंस में हाई स्कूल के छात्रों और पुलिस के बीच झड़प के दौरान एक 15 साल के लड़के का हाथ उड़ गया।</a> सरकार ने कहा कि लगभग 200 से 250 प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर चीजें फेंकी थीं। फ्रांसीसी अखबार 'ला वॉइक्स डू नॉर्ड' ने बताया कि विरोध-प्रदर्शन के दौरान पुलिस का ग्रेनेड उठाने के बाद उस किशोर का हाथ और बांह का कुछ हिस्सा कट गया।</p>

<p><strong>ट्रंप ने की बड़ी टिप्पणी</strong><br />
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में हो रहे विरोध-प्रदर्शनों पर टिप्पणी करते हुए बिना किसी सबूत के बेतहाशा हो रहे इमिग्रेशन और मुसलमानों को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया।अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में, ट्रंप ने दावा किया कि "फ्रांस में जो हो रहा है, वह बेकाबू बड़े पैमाने पर हो रहे माइग्रेशन से कम नहीं है। यह स्कूलों के बारे में नहीं है, यह इस्लाम के बारे में है जो कभी महान रहे देश पर कब्ज़ा करना चाहता है!"</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/why-did-china-build-a-new-air-base-in-laos-understand-the-dragon-s-entire-strategy-2026-10-05-1247047">चीन ने लाओस में क्यों बनाया नया एयर बेस? समझिए ड्रैगन की पूरी रणनीति</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/france-protest-fire-students-killed-on-streets-what-are-their-demans-govt-in-problem-2026-10-07-1247427     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/france-protest-fire-students-killed-on-streets-what-are-their-demans-govt-in-problem-2026-10-07-1247427 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 07 Oct 2026 13:01:55 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     ज्ञानेश कुमार की क्यों बढ़ी मुश्किलें, CEC को सस्पेंड किया जा सकता है? जानें क्या हैं प्रावधान     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। उनके इस्तीफे की मांग हो रही है और ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। क्या सुप्रीम कोर्ट मुख्य चुनाव आयुक्त को सस्पेंड कर सकता है?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/gyanesh-1791278918.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/gyanesh-1791278918.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/gyanesh-1791278918.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर चारों तरफ से मुश्किलों में घिरते जा रहे हैं। एक तरफ उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष और कॉकरोच जनता पार्टी का विरोध प्रदर्शन जारी है तो वहीं सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया। यह नोटिस एक याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किया गया जिसमें आरोप लगाया गया था कि चुनाव आयोग के कई फैसले एकतरफा लिए गए थे। हालांकि, कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त को काम करने से हटाने या सस्पेंड करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया।</p>

<p>सुप्रीम कोर्ट मे ये भी कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को तुरंत सस्पेंड करने की मांग असामान्य सी बात है। ज्ञानेश कुमार को तुरंत उनके पद से हटाने की मांग वाली याचिका की सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना ने की। सुनवाई के बाद और तमाम तरह के सवालों के बाद ये सवाल है कि क्या किसी संवैधानिक संस्था के कामकाज के बारे में आरोपों की जांच के दौरान, अदालत उस संस्था के प्रमुख को कुछ समय के लिए पद से हटा सकती है?</p>

<p><strong>क्या सुप्रीम कोर्ट CEC को सस्पेंड कर सकता है?</strong><br />
तो इसका जवाब है नहीं।  संविधान के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास CEC को पद से हटाने या निलंबित करने की विशेष शक्ति नहीं है। संविधान के आर्टिकल 324(5) के अनुसार, CEC को केवल उसी प्रक्रिया और आधार पर हटाया जा सकता है जिस प्रकार सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है, यानी संसद द्वारा महाभियोग प्रक्रिया के जरिए। सुप्रीम कोर्ट चुनाव आयोग के फैसलों की वैधता की जांच कर सकता है। यदि कोई निर्णय कानून के विरुद्ध पाया जाता है, तो उसे रद्द किया जा सकता है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/gyanesh-kumar-1-1791278918.jpg"    /></p>

<p><strong>सीईसी को हटाने की क्या प्रक्रिया है</strong><br />
संविधान में CEC को हटाने की प्रक्रिया बहुत सख्त है। कोर्ट ऐसे किसी पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ़ लगे आरोप को सीधे पद से हटाने के बराबर नहीं मान सकता। हाल ही में (अक्टूबर 2026 में) चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एकतरफा फैसले लेने के आरोपों पर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्हें तुरंत सस्पेंड करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया है। इस मामले में कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/supreme-court-9-1791278918.jpg"    /></p>

<p><strong>कोर्ट ने क्या क्या कहा?</strong></p>

<ul>
	<li>सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह केवल मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर कोई फैसला नहीं दे सकती और यदि जांच में चुनाव आयोग के कोई फैसले कानून या संविधान के खिलाफ पाए जाते हैं, तो कोर्ट उन्हें रद्द या निरस्त कर सकता है। लेकिन कोर्ट में दायर याचिका में पद से हटाने और अंतरिम रोक लगाने के बीच अंतर करने की कोशिश की गई है।</li>
	<li>याचिकाकर्ता कोर्ट से मांग कर रहे हैं कि जब तक ज्ञानेश कुमार के कामकाज की वैधता की जांच हो रही है, तब तक उन्हें विवादित शक्तियों का इस्तेमाल करने से अस्थायी रूप से रोका जाए। वे उन फैसलों को भी चुनौती दे रहे हैं जो कथित तौर पर संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत ज़रूरी भागीदारी के बिना लिए गए थे।</li>
	<li>सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के कार्यकाल के दौरान यह सवाल देखा था कि क्या CEC अन्य चुनाव आयुक्तों की तुलना में ज़्यादा अधिकार का इस्तेमाल कर सकता है। कोर्ट ने आखिरकार कई सदस्यों वाले चुनाव आयोग की सामूहिक प्रकृति और बहुमत से फैसले लेने के सिद्धांत पर ज़ोर दिया। उस इतिहास की वजह से मौजूदा विवाद और भी अहम हो जाता है। </li>
	<li>कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेंच का रवैया काफी सावधानी भरा था। CJI ने संकेत दिया कि चुनाव आयोग से आरोपों पर जवाब देने और अपनी स्थिति स्पष्ट करने की उम्मीद की जाएगी।</li>
	<li>कोर्ट ने कहा कि कमिश्नरों से आम सहमति से फैसले लेने की उम्मीद की जाती है और जहां आम सहमति नहीं होती, वहां कानून बहुमत से फैसले का प्रावधान करता है। लेकिन बेंच ने सबूत से जुड़ी एक बुनियादी समस्या की ओर भी इशारा किया। </li>
	<li>'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023' की धारा 18 कहती है कि आयोग को अपना कामकाज जहां तक ​​संभव हो, सर्वसम्मति से करना चाहिए। अगर CEC और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद होता है, तो मामले का फैसला बहुमत से किया जाएगा।</li>
</ul>

<p><strong>मुख्य चुनाव आयुक्त का क्या काम है?</strong><br />
मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संविधान द्वारा सुरक्षित है। चुनाव आयोग से यह उम्मीद की जाती है कि वह सरकार (कार्यपालिका) से स्वतंत्र होकर काम करे। अनुच्छेद 324 चुनावों की "देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण" की ज़िम्मेदारी चुनाव आयोग को सौंपता है, न कि व्यक्तिगत रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को। इसमें यह भी प्रावधान है कि जब अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की जाती है, तो CEC आयोग के अध्यक्ष के रूप में काम करते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अनुच्छेद 324(5) के अनुसार, CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।</p>

<p><strong>मुश्किलों में चौतरफा घिरे ज्ञानेश कुमार</strong><br />
केरलम सरकार ने <a href="https://www.indiatv.in/explainers/serious-allegations-on-cec-gyanesh-kumar-rules-of-removing-chief-election-commissioner-2026-09-24-1245206">ज्ञानेश कुमार से जुड़े 20 साल पुराने केस में जांच के आदेश दिए हैं</a>। केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 साल पुराने मामले में विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (VACB) को जांच के आदेश दिए हैं। मामला सड़क परियोजना में कथित भ्रष्टाचार और मलेशियाई चीफ इंजीनियर ली सी बेन की आत्महत्या से जुड़ा है।</p>

<p>ज्ञानेश कुमार केरलम कैडर के रिटायर्ड IAS अफसर हैं। 2006 में वे राज्य के PWD सचिव थे। तब अंगामली से तिरुवनंतपुरम तक मुख्य सड़क के अपग्रेडेशन के लिए 215 करोड़ रुपए मंजूर हुए थे। इंडो-मलेशियन कंपनी PATI-BEL को काम मिला था। 2003 में शुरू हुआ प्रोजेक्ट अगस्त 2006 तक पूरा होना था, लेकिन तब तक सिर्फ 30% काम हुआ था। इसी दबाव में ली ने मलेशिया जाकर सुसाइड कर लिया।</p>

<p>चुनाव में धांधली को लेकर ज्ञानेश कुमार पर 14 फैसलों को एकतरफा लेने के आरोप हैं। उनके खिलाफ दायर याचिका में मांग की गई है कि उन्हें रद्द किया जाए। एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाकर इसकी जांच हो। जांच होने तक ज्ञानेश कुमार को सस्पेंड किया जाए। जांच के लिए चुनाव आयोग के दस्तावेज देखे जाएं। सुप्रीम कोर्ट घोषणा करे कि चुनाव आयोग के फैसले अकेले मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं ले सकते।<br />
<br />
<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/explainers/eronet-and-ecinet-can-software-remove-your-name-from-the-voter-list-explained-2026-09-30-1246193">ERONET और ECINET क्या हैं? क्या कोई सॉफ्टवेयर Voter List से आपका नाम हटा सकता है</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/will-gyanesh-kumar-resigned-or-suspend-whats-sc-order-how-could-cec-be-suspended-explained-2026-10-06-1247246     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/will-gyanesh-kumar-resigned-or-suspend-whats-sc-order-how-could-cec-be-suspended-explained-2026-10-06-1247246 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 06 Oct 2026 15:07:01 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     चीन ने लाओस में क्यों बनाया नया एयर बेस? समझिए ड्रैगन की पूरी रणनीति     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ चीन लाओस के एयरबेस को पायलट ट्रेनिंग और दोनों देशों के सैन्य सहयोग का सेंटर बता रहा है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर में इसकी अहमियत इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। ड्रैगन की चाल को समझ पाना आसान नहीं है। 
    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-design-2026-10-05t145652-1791192431.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[चीन ने लाओस में क्यों बनाया नया एयर बेस? ]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-design-2026-10-05t145652-1791192431.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-design-2026-10-05t145652-1791192431.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      चीन ने लाओस में क्यों बनाया नया एयर बेस? 
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>चीन ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी को एक और बड़ा विस्तार दिया है। चीन का पहला विदेशी मिलिट्री बेस 2017 में हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका के जिबूती में बनाया गया था लेकिन अब इसे विस्तार देते हुए लाओस में भी नया एयरबेस बनाया है। 29 सितंबर 2026 को चीन के रक्षा मंत्रालय ने लाओस के बान क्यून एयरपोर्ट पर चीन-लाओस जॉइंट सपोर्ट एंड ट्रेनिंग सेंटर और चीन-लाओस फ्रेंडशिप एविएशन एकेडमी के संचालन की घोषणा की। चीन इसे पायलट ट्रेनिंग और दोनों देशों के सैन्य सहयोग का केंद्र बता रहा है, लेकिन रणनीतिक विशेषज्ञों की नजर में इसकी अहमियत इससे कहीं ज्यादा हो सकती है। उद्घाटन समारोह में लाओस के डिफेंस मिनिस्टर खामलींग औथाकेसन ने शिरकत की। इत्तेफाक से, नए बेस का उद्घाटन जून में लाओस के प्रेसिडेंट थोंगलून सिसोलिथ के चेयरमैन शी जिनपिंग से मिलने के लिए बीजिंग दौरे के बाद हुआ है। उस मौके पर, शी ने नेशनल डिफेंस जैसे कई मुद्दों पर स्ट्रेटेजिक बातचीत की  थी। </p>

<h3>कहां बनाया गया है चीन का नया एयर बेस?</h3>

<p>बान क्यून एयर बेस लाओस की राजधानी वियनतियाने से करीब 50 किलोमीटर उत्तर में है। यहां करीब 2,000 मीटर लंबा रनवे, टैक्सीवे, पार्किंग एप्रन, एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर और पांच हैंगर हैं। यह इलाका पहले अमेरिकी सैन्य और CIA के एयरबेस नेटवर्क के तहत आने वाले लिमा साइट 44 का हिस्सा था। लेकिन अब इस पर चीन का कंट्रोल हो गया है।</p>

<p>चीन का दावा है कि इस सेंटर का मकसद लाओस की एयरफोर्स के पायलटों की ट्रेनिंग मजबूत करना है। चीन का कहना है कि दोनों देश इसे मिलकर चलाएंगे और इसका उद्देश्य सैन्य सहयोग बढ़ाना और इलाके में शांति और स्थिरता में योगदान देना है। चीन ने साफ कहा है कि यह बेस किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है।</p>

<p>जहां तक तीसरे देश के खिलाफ़ न होने की बात है, तो इस डेवलपमेंट से सबसे ज़्यादा चिंता वियतनाम को होगी। चीन ने 1979 में वियतनाम पर हमला करवाया था। यह एयरबेस PLA को अपनी मौजूदा दक्षिण-पश्चिमी सीमा से लगभग 400km दक्षिण में इंडोचीन पेनिनसुला में पैर जमाने का मौका देता है। यह लोकेशन वियतनाम के ठीक पश्चिम में भी है। इसका मतलब है कि चीन इसका इस्तेमाल इंडोचीन में गहराई तक असर डालने के लिए कर सकता है। </p>

<h3>क्या इससे लाओस चीन पर ज्यादा निर्भर हो जाएगा?</h3>

<p>यह एक प्रमुख सवाल है जो इस घटनाक्रम के बाद उठना लाजिमी है। दरअसल, लाओस की एयरफोर्स छोटी है और उसके पास रूसी तथा चीनी मूल के विमान और हेलीकॉप्टर हैं। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि चीन धीरे-धीरे लाओस को रूसी सैन्य उपकरणों से हटाकर अपने विमान और हथियारों की ओर ले जा सकता है। इससे लाओस की सैन्य निर्भरता चीन पर बढ़ सकती है। चीन और वियतनाम के बीच पहले से ही ऐतिहासिक और रणनीतिक तनाव रहा है। नए एयर बेस की लोकेशन वियतनाम के ठीक पश्चिम में है। इसलिए चीन की इंडोचीन क्षेत्र में स्थायी सैन्य मौजूदगी वियतनाम के लिए चिंता का विषय बन सकती है।</p>

<p>आम तौर पर, चीन ने यह नहीं बताया कि वह लाओस में कौन से एसेट्स, एयरक्राफ्ट प्लेटफॉर्म या अपने लोगों की संख्या भेजेगा। लेकिन, एक सोर्स ने बताया कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी एयर फ़ोर्स (PLAAF) JL-8 जेट ट्रेनर्स को नई बान क्यून फ़ैसिलिटी में, दूसरी जगह भेजे गए लाओटियन K-8Ws के साथ बेस करेगी। एक अहम सवाल बेन क्यून एयर बेस तक PLA की पहुंच को कंट्रोल करने वाले कानूनी इंतज़ाम और शर्तें हैं। </p>

<h3>कंबोडिया के बाद लाओस क्यों महत्वपूर्ण?</h3>

<p>दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की सैन्य पहुंच अब सिर्फ लाओस तक सीमित नहीं है। कंबोडिया के रीम नेवल बेस में भी चीन की मौजूदगी है। चीन और कंबोडिया ने अप्रैल 2025 में वहां जॉइंट सपोर्ट ट्रेनिंग सेंटर खोला था। रीम से चीन को गल्फ ऑफ थाईलैंड तक पहुंच मिलती है। रिपोर्ट के मुताबिक, लाओस का बान क्यून बेस चीन की सीमा के बाहर PLA का पहला एयरफोर्स-स्पेसिफिक बेस है। इससे पहले चीन का विदेशी सैन्य बेस जिबूती में था, जबकि कंबोडिया में उसकी नौसैनिक सुविधा है।</p>

<p>बता दें कि हाल में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका का दौरा किया था। वॉशिंगटन पहुंचने के बाद चीन और अमेरिका के रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा कि<a href="https://www.indiatv.in/world/us/xi-jinping-major-message-from-america-china-and-us-should-be-partners-not-rivals-2026-09-24-1245058" target="_blank"> दोनों देशों को "प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार" बनना चाहिए</a>। शी ने भरोसा जताया कि बदलते दौर में चीन और अमेरिका आपसी संबंधों को आगे बढ़ाने का सही रास्ता निकाल सकते हैं।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/world/us/donald-trump-asked-the-chinese-president-xi-jinping-will-you-buy-weapons-from-america-says-ambassador-2026-09-28-1245770" target="_blank">दुनिया को हजम क्यों नहीं हो रही ये बात! ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति से पूछा- "क्या अमेरिका से हथियार खरीदोगे?"</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/why-did-china-build-a-new-air-base-in-laos-understand-the-dragon-s-entire-strategy-2026-10-05-1247047     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/why-did-china-build-a-new-air-base-in-laos-understand-the-dragon-s-entire-strategy-2026-10-05-1247047 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 05 Oct 2026 15:00:02 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     कैप्टन स्मित पर हमले की जांच में क्यों कूदा ऑस्ट्रेलिया? ओमानी को-पायलट से है खास कनेक्शन     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ फ्लाईदुबई हमले के आरोपी ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी का ऑस्ट्रेलिया कनेक्शन सामने आने के बाद वहां आतंकवाद रोधी जांच शुरू हो गई है। एजेंसियां उसके छात्र जीवन, गतिविधियों, संपर्कों और संभावित कट्टरपंथ की जांच कर रही हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/hamami-1791116082.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[ऑस्ट्रेलिया फ्लाईदुबई की घटना की जांच शुरू कर चुका है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/hamami-1791116082.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/hamami-1791116082.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      ऑस्ट्रेलिया फ्लाईदुबई की घटना की जांच शुरू कर चुका है।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Flydubai FZ1073 Attack: </strong>फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 में 30 सितंबर को हुए हमले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया था। <a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/uae-reveal-flydubai-incident-was-a-terrorist-attack-co-pilot-struck-captain-with-an-axe-2026-10-03-1246701" target="_blank" title="UAE का बड़ा खुलासा, फ्लाईदुबई की घटना 'आतंकवादी हमला', को-पायलट ने कुल्हाड़ी से कैप्टन पर वार किया">ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी पर भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कुल्हाड़ी 'क्रैश एक्स' से हमला करने और विमान को अपने कब्जे में लेने की कोशिश का आरोप है</a>। अब इस मामले की जांच ऑस्ट्रेलिया तक पहुंच गई है। वजह है अल-हमामी का ऑस्ट्रेलिया से पुराना कनेक्शन। उसे 2014 में ऑस्ट्रेलिया का स्टूडेंट वीजा मिला था और उसने 2015 से 2017 तक वहां पढ़ाई की थी। ऐसे में बड़ा सवाल है कि ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान वह कट्टरपंथ की ओर बढ़ा?</p>
<h3><strong>ऑस्ट्रेलिया क्यों कर रहा है जांच?</strong></h3>
<p>ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरियन ज्वाइंट काउंटर टेररिज्म टीम (VIC JCTT) ने अल-हमामी के ऑस्ट्रेलिया से जुड़े संबंधों की जांच शुरू कर दी है। इस टीम में ऑस्ट्रेलियन फेडरल पुलिस (AFP), विक्टोरिया पुलिस और ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (ASIO) शामिल हैं। AFP के प्रवक्ता ने कहा,</p>
<blockquote><p>'VIC JCTT पुष्टि कर सकती है कि वह व्यक्ति ऑस्ट्रेलिया से जुड़े संबंधों की जांच कर रही है। उचित समय पर इस बारे में अपडेट दिया जाएगा।'</p>
</blockquote>
<p>जांच का सबसे अहम सवाल है कि क्या अल-हमामी ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए कट्टरपंथी विचारों के संपर्क में आया था।</p>
<h3><strong>ऑस्ट्रेलिया में कब रहा था अल-हमामी?</strong></h3>
<p>रिपोर्ट्स के मुताबिक अल-हमामी को 2014 में ऑस्ट्रेलिया का स्टूडेंट वीजा मिला था। एबीसी न्यूज ने सूत्रों के हवाले से बताया कि उसने 2015 से 2017 तक ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई की। इसके बाद वह देश से चला गया। लेकिन उसकी वीजा की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रिपोर्ट के मुताबिक उसका स्टूडेंट वीजा 2019 में रद्द कर दिया गया था, क्योंकि वह किसी कोर्स में नामांकित नहीं था। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई और रहने के दौरान उसके संपर्क किन लोगों से थे और उसकी गतिविधियां कैसी थीं।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/flydubai-hamami-1791116098.jpg"    /></p>
<h3><strong>फ्लाईदुबई की फ्लाइट में आखिर हुआ क्या था?</strong></h3>
<p>30 सितंबर को फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 दुबई से तेल अवीव जा रही थी। इसी दौरान को-पायलट अल-हमामी ने कथित तौर पर कॉकपिट में मौजूद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर क्रैश एक्स से हमला कर दिया। इसके बाद उसने विमान पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश की। हमले के दौरान विमान करीब 30 सेकंड में 16,000 फीट से ज्यादा नीचे आ गया। गंभीर रूप से घायल कैप्टन स्मित ने किसी तरह कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद यात्रियों और क्रू ने अल-हमामी को काबू में किया।</p>
<h3><strong>विमान को गिरने से किसने बचाया?</strong></h3>
<p>इस घटना में 2 ऑफ-ड्यूटी पायलटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। ये दोनों उस समय ड्यूटी पर नहीं थे, लेकिन उन्होंने संकट की स्थिति में विमान को संभालने में मदद की। उन्होंने विमान को स्थिर करने और सुरक्षित तरीके से इमरजेंसी लैंडिंग कराने में सहायता की। आखिरकार विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित उतारा गया। अगर समय रहते कॉकपिट का नियंत्रण वापस नहीं मिलता, तो स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती थी।</p>
<h3><strong>क्या अल-हमामी ने अपना मकसद बताया?</strong></h3>
<p>आपातकालीन लैंडिंग के बाद जांचकर्ताओं ने अल-हमामी से पूछताछ की। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक अल-हमामी ने कथित तौर पर पूछताछ में स्वीकार किया कि उसका इरादा विमान को जानबूझकर गिराने का था। रिपोर्ट के अनुसार उसने यह भी कहा कि वह 'मौत से नहीं डरता।' यही वजह है कि जांचकर्ता अब सिर्फ विमान में हुए हमले को नहीं, बल्कि उसके पूरे बैकग्राउंड को खंगाल रहे हैं।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/australia-1791116098.jpg"    /></p>
<h3><strong>उसके पुराने रिकॉर्ड में ऐसा क्या मिला?</strong></h3>
<p>अल-हमामी के पुराने रिकॉर्ड ने जांच को और गंभीर बना दिया है। WSJ के मुताबिक वह पहले ओमान की सरकारी एयरलाइन ओमान एयर में काम करता था। वहां अधिकारियों को पता चला था कि वह चरमपंथी वेबसाइटों पर जाता था। इसके बाद उसे फ्लाइट ड्यूटी से हटा दिया गया। उसके बारे में जानकारी रखने वाले लोगों के मुताबिक उसने बाद में एक डी-रेडिकलाइजेशन कार्यक्रम पूरा किया और उसे प्रशासनिक काम में लगा दिया गया था।</p>
<h3><strong>फिर वह फ्लाईदुबई के कॉकपिट तक कैसे पहुंचा?</strong></h3>
<p>ओमान एयर से अलग होने के बाद अल-हमामी संयुक्त अरब अमीरात चला गया। फरवरी 2026 में उसे फ्लाईदुबई में नौकरी मिल गई। अब जांचकर्ता यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उसकी पिछली गतिविधियों और रिकॉर्ड की कितनी जानकारी फ्लाईदुबई के पास थी। यह भी स्पष्ट नहीं है कि फ्लाईदुबई ने उसके पुराने रिकॉर्ड को लेकर ओमान के अधिकारियों से कोई जानकारी मांगी थी या नहीं। WSJ के मुताबिक ओमान को उसकी नौकरी के लिए किसी विदेशी एजेंसी से औपचारिक वेटिंग अनुरोध नहीं मिला था।</p>
<h3><strong>ऑस्ट्रेलिया के अलावा किन देशों की नजर है?</strong></h3>
<p>मामले की जांच कई देशों में चल रही है। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इजरायल के अधिकारी भी अल-हमामी के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। जांचकर्ता यह पता लगाना चाहते हैं कि उसने हमला अकेले किया या उसके पीछे कोई बाहरी संगठन या नेटवर्क था। जांच में ईरान से संभावित संबंधों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी विदेशी संगठन से उसके संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/hamam-1791116098.jpg"    /></p>
<h3><strong>सीरिया का कनेक्शन क्यों अहम है?</strong></h3>
<p>अल-हमामी के पिता ओमानी और मां सीरियाई थीं। उसने अपनी जिंदगी का कुछ हिस्सा सीरिया में बिताया था। उस समय वहां गृहयुद्ध चल रहा था और बशर अल-असद की सरकार के खिलाफ कई इस्लामी चरमपंथी गुट हथियारबंद संघर्ष कर रहे थे। WSJ से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि कहीं अल-हमामी का कट्टरपंथ इसी दौर में तो शुरू नहीं हुआ था। यानी उसकी जांच अब ऑस्ट्रेलिया, ओमान और UAE तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके सीरिया में बिताए समय को भी देखा जा रहा है।</p>
<h3><strong>उसके सोशल मीडिया से क्या पता चलता है?</strong></h3>
<p>अल-हमामी की ऑनलाइन गतिविधियां भी जांच का हिस्सा हैं। उसके डिलीट किए गए X अकाउंट के 3,000 से ज्यादा पुराने स्क्रीनशॉट इंटरनेट आर्काइव में मौजूद हैं। इनमें महिलाओं को लेकर रूढ़िवादी और आपत्तिजनक विचार दिखाई देते हैं। उसने महिलाओं के नौकरी करने पर आपत्ति जताई थी और पर्दा करने वाली धार्मिक महिलाओं को पसंद करने की बात कही थी। एक पोस्ट में उसने सऊदी महिलाओं से संपर्क करने के लिए फर्जी प्रोफाइल बनाने की बात भी बताई थी। उसने यह भी कहा था कि उसकी पत्नी को नौकरी नहीं करनी चाहिए।</p>
<h3><strong>ब्रिटेन का कनेक्शन भी सामने आया</strong></h3>
<p>अल-हमामी का शिक्षा से जुड़ा रिकॉर्ड केवल ऑस्ट्रेलिया तक सीमित नहीं है। CNN के मुताबिक उसके नाम से पहले सक्रिय रहा एक LinkedIn प्रोफाइल भी मिला है। इसमें बताया गया था कि उसने ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी के जरिए रिमोट यानी दूरस्थ शिक्षा का कोर्स किया था। इसका मतलब है कि जांचकर्ता अब उसके जीवन के अलग-अलग देशों से जुड़े रिकॉर्ड को जोड़ रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि उसने किन जगहों पर पढ़ाई की, कहां रहा और किन लोगों के संपर्क में रहा।</p>
<h3><strong>इस पूरे मामले में सबसे बड़े सवाल क्या हैं?</strong></h3>
<p>अल-हमामी की कहानी में कई सवाल अभी अनुत्तरित हैं। पहला, ऑस्ट्रेलिया में रहने के दौरान उसकी गतिविधियां क्या थीं? दूसरा, ओमान एयर को उसके चरमपंथी वेबसाइटों पर जाने की जानकारी थी तो बाद में वह फ्लाईदुबई तक कैसे पहुंचा? तीसरा, फ्लाईदुबई  को उसके बैकग्राउंड के बारे में कितनी जानकारी थी? चौथा, क्या उसने अकेले विमान पर हमला किया या किसी नेटवर्क से जुड़ा था? और पांचवां, क्या उसका कट्टरपंथ ऑस्ट्रेलिया, ओमान या सीरिया में शुरू हुआ? फिलहाल अलग-अलग देशों की जांच एजेंसियां इन्हीं सवालों के जवाब तलाश रही हैं। ()</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/india/politics/bjp-questions-congress-silence-on-captain-smit-machchhar-also-target-new-appointment-in-up-2026-10-04-1246882" target="_blank" title="कैप्टन स्मित मच्छार पर कांग्रेस की 'चुप्पी' को लेकर BJP ने उठाए सवाल, UP में नई ताजपोशी पर भी साधा निशाना">कैप्टन स्मित मच्छार पर कांग्रेस की 'चुप्पी' को लेकर BJP ने उठाए सवाल, UP में नई ताजपोशी पर भी साधा निशाना</a></strong></p>
<p><iframe   src="https://www.youtube.com/embed/FJY6l7uAj8M?start=32s" frameborder="0"></iframe></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/why-is-australia-investigating-flydubai-attack-omani-co-pilot-hamam-al-hammami-past-under-scanner-2026-10-04-1246902     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/why-is-australia-investigating-flydubai-attack-omani-co-pilot-hamam-al-hammami-past-under-scanner-2026-10-04-1246902 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 04 Oct 2026 17:52:01 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     क्या कोई पाकिस्तानी पायलट भारत में फ्लाइट उड़ा सकता है? जानें क्या कहते हैं नियम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में ओमान के पायलट ने पायलट पर हमला कर दिया। ऐसे में सवाल ये है कि ओमान का पायलट कैसे इजरायल की फ्लाइट में ड्यूटी पर था। क्या पाकिस्तान का पायलट भारत में उड़ान भर सकता है?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-pilot-1791019030.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[पाकिस्तानी पायलट के लिए भारत के नियम]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-pilot-1791019030.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/pakistan-pilot-1791019030.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      पाकिस्तानी पायलट के लिए भारत के नियम
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>दुबई से तेल अवीव जा रही  फ्लाईदुबई (Flydubai) की एक फ़्लाइट के कॉकपिट में को-पायलट ने पायलट पर जानलेवा हमला किया और फ्लाइट पर कब्जा करने की कोशिश की। अगर उस को पायलट ने सफलता पा ली होती को इसमें विमान में सवार सभी यात्रियों के साथ क्या होता, कॉकपिट का दरवाजा अगर कैप्टन ने नहीं खोला होता तो क्या होता? 30 सितंबर को हुई इस घटना के बाद ऐसे तमाम सवाल जेहन में आते हैं जो इस डरावने हमले के पीछे के कई सवालों को जन्म देते हैं और इंटरनेशनल एविएशन के सवाल पर सोचने को मजबूर कर देते हैं कि क्या किसी पायलट की राष्ट्रीयता यह तय कर सकती है कि उसे किसी दूसरे देश में विमान उड़ाने की इजाज़त मिलेगी या नहीं।</p>
<p><strong>को-पायलट की नागरिकता पर सवाल</strong><br />
ये सवाल इसलिए क्योंकि फ्लाईदुबई की फ़्लाइट FZ1073 के को-पायलट की पहचान ओमान के नागरिक के तौर पर हुई है, जिसे कट्टरपंथी विचारधारा का माना जाता है। उसने <a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/uae-reveal-flydubai-incident-was-a-terrorist-attack-co-pilot-struck-captain-with-an-axe-2026-10-03-1246701">भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार पर कॉकपिट के भीतर जानलेवा हमला कर दिया</a> था, जब फ्लाइट हजारों फीट की ऊंचाई पर था और लगभग 30 सेकंड में तेज़ी से नीचे की ओर (करीब 14,000 फ़ीट) उतरने लगा था। विमान में यात्रियों और क्रू ने को-पायलट पर काबू पा लिया और फ़्लाईदुबई के दो पायलट ने इसे सऊदी अरब की एयरपोर्ट पर  उतारने में मदद की और फ्लाइट की सेफ लैंडिंग कराई गई। </p>
<p><strong>ओमान का इजरायल से नहीं है राजनयिक संबंध</strong><br />
फ्लाईदुबई की उस विमान की कॉकपिट के अंदर क्या हुआ, इसकी जांच के साथ-साथ इज़राइल में एक और मुद्दा भी सामने आया है कि क्या UAE-इज़राइल एविएशन संबंधों से जुड़े नियमों के तहत, इज़राइल जाने वाली फ़्लाइट में ओमान के नागरिक को को-पायलट के तौर पर काम करने की इजाज़त दी थी? क्योंकि ओमान के इज़राइल के साथ राजनयिक संबंध भी नहीं हैं। इज़रायल के एग्रीमेंट में एक खास शर्त है कि इज़रायल के लिए फ़्लाइट उड़ाने वाले पायलटों के पास ऐसे देशों के पासपोर्ट होने चाहिए जिनके इज़रायल के साथ डिप्लोमैटिक संबंध हैं और इस तरह से ओमान इस कैटेगरी में नहीं आता है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान के लिए भारत में क्या हैं नियम</strong><br />
पाकिस्तान के खिलाफ़ भारत की ओर से एयरस्पेस को लेकर एक जैसी पाबंदी लागू है। इस पाबंदी के मुताबिक, "पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों और पाकिस्तानी एयरलाइंस/ऑपरेटरों द्वारा संचालित, उनके मालिकाना हक वाले या लीज़ पर लिए गए विमानों, जिनमें मिलिट्री उड़ानें भी शामिल हैं, इनके लिए भारतीय एयरस्पेस उपलब्ध नहीं है।"</p>
<p>यह पाबंदी ज़मीन से लेकर किसी भी ऊंचाई तक लागू होती है। इससे पहले जारी भारतीय NOTAMs में भी ठीक यही बात कही गई थी, जिसमें पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों के साथ-साथ पाकिस्तानी एयरलाइंस या ऑपरेटरों द्वारा संचालित, उनके मालिकाना हक वाले या लीज़ पर लिए गए विमानों को भी शामिल किया गया था। इसका मतलब है कि यह पाबंदी विमान और ऑपरेटर दोनों पर ही लागू होती है।</p>
<p><strong>पाकिस्तान पायलट भारत में उड़ान भरेगा?</strong><br />
भारत ने जो पाबंदी लगाई है, उसमें यह नहीं कहा गया है कि पाकिस्तानी नागरिकों के भारत आने पर रोक है। लेकिन इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान में रजिस्टर्ड विमानों और पाकिस्तानी एयरलाइंस/ऑपरेटरों द्वारा संचालित, उनके मालिकाना हक वाले या लीज़ पर लिए गए विमानों के लिए भारतीय एयरस्पेस उपलब्ध नहीं है। इसलिए, पाकिस्तान में रजिस्टर्ड कोई भी विमान, जिसे पाकिस्तानी एयरलाइन संचालित करती है, वर्तमान में भारत में उड़ान नहीं भर सकता। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तानी एयरलाइन में कार्यरत कोई भी पाकिस्तानी पायलट भी भारत में विमान नहीं उड़ा सकता।</p>
<p><strong>पायलट पाकिस्तानी हो तो क्या होगा?</strong></p>
<p>यदि पाकिस्तानी पायलट संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की एयरलाइन, किसी यूरोपीय एयरलाइन या किसी अन्य विदेशी एयरलाइन में कार्यरत है और उसके पास उस एयरलाइन के विमान को संचालित करने के लिए आवश्यक सभी लाइसेंस और स्वीकृतियां होती हैं। यदि वह एयरलाइन भारत के लिए उड़ान भरने के लिए अधिकृत है और विमान पाकिस्तानी पंजीकृत नहीं है और किसी पाकिस्तानी एयरलाइन/ऑपरेटर द्वारा संचालित, स्वामित्व या पट्टे पर नहीं लिया गया है, तो वर्तमान भारत-पाकिस्तान हवाई क्षेत्र NOTAM (नोटिडेटेड ऑपरेटिंग ऑर्डर) केवल इसलिए उड़ान को प्रतिबंधित नहीं करता क्योंकि पायलटों में से एक पाकिस्तानी है।</p>
<p><strong>भारत ने लगाई हैं सख्त पाबंदियां</strong><br />
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद, भारत ने पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट के लिए एयरस्पेस बैन के अलावा पाकिस्तानी नागरिकों पर भी अलग से पाबंदियां लगाईं। हमले के बाद भारत ने पाकिस्तानी नागरिकों के लिए वीज़ा सर्विस सस्पेंड कर दीं और कुछ खास मामलों को छोड़कर, 27 अप्रैल से मौजूदा भारतीय वीज़ा रद्द कर दिए। SAARC वीज़ा छूट योजना के तहत पाकिस्तानी नागरिकों के भारत आने पर भी रोक लगा दी गई, और जो लोग पहले से ऐसे वीज़ा पर भारत में थे, उन्हें वापस जाने के लिए कहा गया।</p>
<p>इसका मतलब है कि भले ही कोई एयरक्राफ्ट भारत के पाकिस्तानी एयरक्राफ्ट पर लगे बैन के दायरे में न आता हो, फिर भी देश में घुसने और क्रू के तौर पर काम करने के लिए पाकिस्तानी पायलट को भारत की अलग इमिग्रेशन और वीज़ा ज़रूरतों को पूरा करना होगा। भले ही कोई पाकिस्तानी पायलट UAE एयरलाइन के लिए UAE में रजिस्टर्ड एयरक्राफ्ट उड़ा रहा हो और वह एयरक्राफ्ट से जुड़ी एयरस्पेस पाबंदी के दायरे में न आता हो, फिर भी उसका भारत में फिजिकली आना और फ़्लाइट उड़ाना लागू वीज़ा, इमिग्रेशन, सुरक्षा और क्रू-क्लीयरेंस नियमों पर निर्भर करेगा।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br /><a href="https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-37-seconds-in-cockpit-tail-broke-off-how-brave-captain-smit-machhar-land-plane-explained-2026-10-01-1246387">Flydubai फ्लाइट की टूटी टेल, फिर भी सेफ लैंडिंग, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनाया कौन सा ट्रिक, जानें</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-omani-co-pilot-case-can-a-pakistani-pilot-fly-into-india-explained-2026-10-03-1246727     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-omani-co-pilot-case-can-a-pakistani-pilot-fly-into-india-explained-2026-10-03-1246727 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 03 Oct 2026 14:54:14 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     कैप्टन स्मित की बहादुरी के बाद हर कोई सर्च कर रहा है ‘मच्छर सरनेम’… असली मतलब जानकर हैरान रह जाएंगे!     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ फ्लाईदुबई के भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाइट में गंभीर स्थिति के दौरान सूझबूझ और साहस का परिचय दिया था। उनकी बहादुरी और उसके बाद पीएम मोदी से हुई उनकी बातचीत के कारण 'मच्छर' सरनेम चर्चा में आया है।

    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-1790943300.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[कैप्टन स्मित के अनोखे सरनेम को गूगल पर खोज रहे भारतीय।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-1790943300.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/untitled-1790943300.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      कैप्टन स्मित के अनोखे सरनेम को गूगल पर खोज रहे भारतीय।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में हुई डरावनी घटना ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया। भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर ने गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद अदम्य साहस दिखाते हुए 174 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बचाई। इसके बाद से सोशल मीडिया पर ​कैप्टन स्मित मच्छर काफी ट्रेंड कर रहे हैं। साथ ही उनके सरनेम (उपनाम) को लेकर भी एक अलग ही चर्चा छिड़ गई है। इंटरनेट यूजर्स पूछ रहे हैं कि आखिर इस जांबाज पायलट का सरनेम 'मच्छर' (Machchhar) क्यों है और वे किस जाति या समाज से आते हैं? </p>

<h3><strong>गूगल सर्च में छाया सरनेम</strong></h3>

<p>आपको बता दें कि कैप्टन स्मित का सरनेम मच्छार और मच्छर दोनों लिखा जा रहा है लेकिन पिछले साल एक पॉडकास्ट में उन्होंने अपना सरनेम 'मच्छर' बताया था। उनका यह सरनेम 'मच्छर' आमतौर पर गुजराती नागर ब्राह्मणों से जुड़ा है। इसके अलावा, मनकड और कुछ अन्य सरनेम भी इस प्रतिष्ठित और बेहद सफल समुदाय से जुड़े हैं- जैसे हाथी, घोड़ा, मंकोडी आदि।</p>

<h3><strong>गुजराती नागर ब्राह्मणों के रहस्यमय उपनामों की अनसुनी कहानी</strong></h3>

<p>एक पायलट के तौर पर स्मित मच्छार की बहादुरी के साथ-साथ उनके सरनेम ने भी देश के लोगों में जिज्ञासा पैदा की है। गुजरात में अलग-अलग जातियों के बीच कुछ सरनेम ऐसे भी हैं जो हैरान करने वाले हैं। गुजरात में 'मच्छार' सरनेम मुख्य रूप से 2 समुदायों लोहाना और नागर ब्राह्मण में मिलता है। लोहाना समुदाय मूल रूप से कच्छ और पाकिस्तान के सिंध से जुड़ा कारोबारी तबका है। 19वीं सदी में ये मुंबई में व्यापार के सिलसिले में आकर बसे।  </p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/5-1790943846.jpg"    /></p>

<p>वहीं,नागर ब्राह्मण सौराष्ट्र का यह समुदाय कलम और कागजात का धनी रहा है। मुगलों और अंग्रेजों के दौर में इस समाज के लोग मुंशी, लेखक और शिक्षक रहे। गुजराती साहित्य और आजादी के आंदोलन में नागरों का दबदबा रहा। यह समाज खुद को प्रशासनिक कार्यों और पढ़ाई-लिखाई से ही जोड़कर देखता आया है। यानी 174 यात्रियों की जानें बचाने वाले कैप्टन स्मित की बहादुरी जितनी अनोखी है, उनके सरनेम की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है।</p>

<h3><strong>क्या है 'मच्छर' सरनेम का असली मतलब?</strong></h3>

<ul>
	<li>इस गुजराती सरनेम के इतिहास पर लिखी किताबों की मानें तो इसकी 3 मुख्य वजह सामने आती हैं। गुजराती शब्द 'मत्सर' से यह बिगड़कर 'मच्छार' और 'मच्छर' बना, जिसका मतलब ईर्ष्या या जलन होता है। माना जाता है कि जो परिवार मच्छरों की बहुतायत वाले इलाके में रहते थे, उन्हें पहचान के लिए यह सरनेम मिला।</li>
	<li>इसके अलावा किसी दुबले-पतले या छोटे कद के इंसान को मजाकिया लहजे में यह नाम मिला हो।</li>
	<li>वहीं, 1960 के दशक का एक किस्सा भी मशहूर है, जब पूर्व सांसद जयसुखलाल हाथी का सम्मान 'मच्छार' सरनेम वाले एक व्यक्ति ने किया था। उस दौर में मजाकिया लहजे में खूब चुटकी ली गई थी कि 'क्या जमाना आ गया है, हाथी का सम्मान एक मच्छर कर रहा है।</li>
	<li>इसके अलावा 'मच्छर' शब्द के कई अर्थों में से एक अर्थ 'जोश' या 'जुनून' भी है। इसके लिए 'भगवद गोमंडल कोश' के वॉल्यूम 7, पेज नंबर 6873 का संदर्भ लिया जा सकता है। यह गुजराती भाषा का एक प्रामाणिक विश्वकोश (encyclopaedia) है।</li>
	<li>कैप्टन स्मित मच्छर ने यह साबित कर दिया है कि उनका सरनेम काफी अर्थपूर्ण है और उन्होंने इसे पूरी तरह से आत्मसात किया है।</li>
</ul>

<h3><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/mumbai-1790943846.jpg"    /></h3>

<h3><strong>गुजराती सरनेम इतने अनोखे क्यों होते हैं?</strong></h3>

<p>गुजराती नागर ब्राह्मणों, खासकर सौराष्ट्र के वडनगर नागरों के बारे में एक दिलचस्प बात यह है कि उनके सरनेम बहुत ही अनोखे और अलग तरह के होते हैं। ज्यादातर ब्राह्मण सरनेम काफी गंभीर लगते हैं, जैसे शर्मा, मिश्रा, त्रिपाठी, त्रिवेदी, भट्ट, दवे, व्यास, पांड्या वगैरह। लेकिन नागर सरनेम की लिस्ट अचानक बिल्कुल अलग मोड़ ले लेती है। आप ऐसे नागर लोगों से मिल सकते हैं जिनके सरनेम हाथी, घोड़ा, मच्छर, मंकड़, मंकौड़ी या जुआ हैं।</p>

<p>वहीं, आज <a href="https://www.indiatv.in/india/national/pm-modi-spoke-to-pilot-smit-machhar-and-praised-his-courage-2026-10-02-1246531">पीएम मोदी ने भारत के बहादुर पायलट कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बात की</a>। इस दौरान उन्होंने स्मित की हिम्मत की तारीफ की और उन्होंने उनके जल्द ठीक होने की कामना की।</p>

<p><strong>यह भी पढ़ें-</strong></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/flydubai-cockpit-footage-showed-bloodied-captain-smit-machchhar-lying-on-ground-watch-video-2026-10-02-1246521" target="_blank" title="FlyDubai फ्लाइट की कॉकपिट में क्या हुआ था? कैप्टन स्मित पर हमले के बाद मची अफरातफरी, वीडियो आया सामने">FlyDubai फ्लाइट की कॉकपिट में क्या हुआ था? कैप्टन स्मित पर हमले के बाद मची अफरातफरी, वीडियो आया सामने</a></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/pm-netanyahu-revealed-attacker-on-smit-machchhar-omani-co-pilot-was-suicidal-and-radicalised-2026-10-02-1246500" target="_blank" title="FlyDubai के कैप्टन स्मित को ओमान के को-पायलट ने क्यों मारा चाकू, इजरायली PM नेतन्याहू ने बताया">FlyDubai के कैप्टन स्मित को ओमान के को-पायलट ने क्यों मारा चाकू, इजरायली PM नेतन्याहू ने बताया</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-indian-pilot-smit-machchhar-surmane-came-into-the-spotlight-what-is-it-mean-2026-10-02-1246597     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-indian-pilot-smit-machchhar-surmane-came-into-the-spotlight-what-is-it-mean-2026-10-02-1246597 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 02 Oct 2026 17:47:53 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     Flydubai फ्लाइट की टूटी टेल, फिर भी सेफ लैंडिंग, कैप्टन स्मित मच्छार ने अपनाया कौन सा ट्रिक, जानें     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ दुबई से तेल अवीव आ रही फ्लाईदुबई फ्लाइट के कॉकपिट में को-पायलट ने पायलट स्मित मच्छार को चाकू मारकर घायल कर दिया। घायल कैप्टेन ने फ्लाइट से इमरजेंसी कोड्स भेजे और फिर फ्लाइट की सेफ लैंडिंग कराई गई। जानें कौन सा कोडवर्ड इस्तेमाल किया गया?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/generated-image-1790925261898-1-1790928138.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[सेफ लैंडिंग कैसे हुई]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/generated-image-1790925261898-1-1790928138.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/10/generated-image-1790925261898-1-1790928138.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      सेफ लैंडिंग कैसे हुई
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>दुबई से इजरायल की राजधानी तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की एक फ्लाइट में अपनी जान की बाजी लगाकर विमान में सवार यात्रियों की जान बचाने वाले <a href="https://www.indiatv.in/india/national/flydubai-flight-indian-hero-saved-174-lives-who-is-smit-machhar-know-about-his-family-2026-10-01-1246358">कैप्टन स्मित मच्छार के साहस और वीरता की प्रशंसा पूरी दुनिया में हो रही है</a>। फ्लाइट की कॉकपिट में कैप्टन स्मित मच्छार को उनके को-पायलट ने कई बार चाकू मारा। इससे मात्र 37 सेकंड के अंदर फ्लाइट 14,300 फीट नीचे आ गई। गंभीर रूप से घायल और खून से लथपथ होने के बाद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। इससे अन्य क्रू मेंबर्स और यात्री अंदर आ गए और हमला करने वाले को पायलट को पकड़ लिया। फिर फ्लाइट की तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग कराई गई।</p>

<p><strong>लैंडिंग से पहले क्या थी फ्लाइट की स्थिति</strong><br />
तेज़ रफ़्तार से अचानक नीचे उतरने के दौरान बहुत ज़्यादा एरोडायनामिक दबाव पड़ने से फ्लाईदुबई की फ़्लाइट FZ1073 के पिछले हिस्से (Tail) को काफ़ी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 की ऊंचाई में अचानक और अनियमित उतार-चढ़ाव हुए, और यह बहुत कम समय में तेज़ी से हज़ारों फ़ीट नीचे आ गई। इस अचानक हरकत की वजह से बोइंग 737 के पिछले हिस्से (Tail section) पर सामान्य ऑपरेटिंग लिमिट से कहीं ज़्यादा एरोडायनामिक दबाव पड़ा, जिससे कम्पोजिट पैनल उखड़ गए और टेल कोन के पास स्ट्रक्चरल स्किन में दरारें आ गईं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/generated-image-1790846300890-1-1790846404.jpg"    /></p>

<p><strong>इमरजेंसी में फ़्लाइट नीचे कैसे उतरती है</strong><br />
जब कोई विमान इमरजेंसी में नीचे उतरता है (इमरजेंसी डिसेंट), तो फ़्लाइट क्रू एक सटीक चेकलिस्ट का पालन करता है। इसे इस तरह से बनाया गया है कि विमान की बनावट से जुड़ी स्पीड की सीमाओं को पार किए बिना नीचे उतरने की रफ़्तार को ज़्यादा से ज़्यादा किया जा सके।</p>

<ul>
	<li>जैसे ही विमान नीचे की ओर झुकता है, पायलट तुरंत थ्रॉटल को 'आइडल' (न्यूनतम पावर) पर ले आते हैं ताकि विमान की स्पीड ज़रूरत से ज़्यादा न बढ़े।</li>
	<li>एरोडायनामिक ब्रेक की तरह काम करने के लिए विंग्स पर लगे फ़्लाइट स्पॉइलर (स्पीडब्रेक) को पूरी तरह से खोल दिया जाता है। इससे विमान खतरनाक रूप से तेज़ आगे बढ़े बिना, 5,000 से 7,000 फ़ीट प्रति मिनट से ज़्यादा की रफ़्तार से सीधे नीचे उतर सकता है।</li>
	<li>टारगेट ऊंचाई लगभग हमेशा 10,000 फ़ीट (3,000 मीटर) होती है। यह वह ऊंचाई है जहां बाहर की हवा इतनी घनी होती है कि यात्री और क्रू बिना अतिरिक्त ऑक्सीजन मास्क के सामान्य रूप से सांस ले सकें।</li>
	<li>आमतौर पर होने वाली इमरजेंसी स्थितियों (जैसे केबिन के प्रेशर में कमी) में, विमान को सावधानी से संभाला जाता है ताकि उसके ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे।</li>
</ul>

<p>फ्लाइट ने दुबई से इजरायल के लिए उड़ान भरी थी और टेक ऑफ के कुछ घंटे बाद ही फ्लाइट में इमरजेंसी ट्रांसपोंडर कोड भेजे गए, जिससे सुरक्षा अलर्ट जारी हो गया। Flightradar24 के डेटा के मुताबिक, बोइंग 737 ने पहले 'स्क्वाक 7700' कोड भेजा, जो आम इमरजेंसी का कोड है। उसके बाद '7500' कोड भेजा गया। यह कोड विमान के हाईजैक अलर्ट का होता है। </p>

<p><strong>क्या होते हैं इमरजेंसी कोड</strong></p>

<p>7500 : गैर-कानूनी दखल</p>

<p>7600 : रेडियो कम्युनिकेशन में खराबी</p>

<p>7700 : इमरजेंसी अलर्ट</p>

<p><strong>7500 कोड का मतलब क्या है?</strong><br />
Flightradar24 के अनुसार, Squawk 7500 'गैर-कानूनी दखल' (unlawful interference) का कोड है, जो आमतौर पर हाइजैकिंग से जुड़ा शब्द है। इंटरनेशनल सिविल एविएशन ऑर्गनाइजेशन (ICAO) इस कोड का इस्तेमाल एयर ट्रैफिक कंट्रोल को यह बताने के लिए करता है कि किसी विमान में गैर-कानूनी दखल हो सकता है। यह सिग्नल क्रू को रेडियो पर अपनी स्थिति के बारे में सीधे अधिकारियों को अलर्ट करने का एक सीक्रेट मैसेज होता है।</p>

<p><strong>7500 सिग्नल भेजने पर क्या होता है?</strong><br />
7500 सिग्नल से विमान की पहचान हो सकती है। एविएशन और सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया जा सकता है। विमान पर कड़ी नजर रख सकते हैं। जरूरत पड़ने पर, उसे रोकने या एस्कॉर्ट करने के लिए मिलिट्री विमान भी तैनात किए जा सकते हैं</p>

<p><strong>7600 कोड का क्या मतलब है?</strong><br />
7600 कोड कम्युनिकेशन फेल होने का संकेत देता है। अगर किसी एयरक्राफ्ट का एयर-ट्रैफिक कंट्रोल के साथ सामान्य टू-वे रेडियो कम्युनिकेशन टूट जाता है, तो पायलट ट्रांसपोंडर पर 7600 कोड चुन सकते हैं। </p>

<p><strong>7700 कोड का क्या मतलब है?</strong><br />
7700 सामान्य इमरजेंसी कोड है। यह एयर-ट्रैफिक कंट्रोल को बताता है कि विमान में कोई इमरजेंसी है। इसमें कई तरह की स्थितियां हो सकती हैं, जैसे गंभीर मैकेनिकल समस्या से लेकर मेडिकल इमरजेंसी या कोई ऐसी स्थिति जिसमें तुरंत मदद की जरूरत हो। FAA के नियमों के अनुसार, 7700 का इस्तेमाल तब किया जाता है जब पायलट इमरजेंसी घोषित करता है और विमान की पहचान रडार से नहीं हो पाती है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/10/generated-image-1790847266127-1-1790847316.jpg"    /></p>

<p><strong>इजरायल ने बताया आतंकी हमला</strong><br />
फ्लाईदुबई पर हुए नाकाम आतंकी हमले के बारे में इज़राइली सरकार के पूर्व प्रवक्ता एलन लेवी ने कहा, "इज़राइल का मानना ​​है कि यह आतंकी हमले की एक कोशिश थी और यह इज़राइल के लिए 9/11 जैसा हो सकता था, अगर उस भारतीय कैप्टन ने बहादुरी न दिखाई होती। उन्होंने कॉकपिट का दरवाज़ा खोलकर यात्रियों को अंदर आने दिया और फ्लाइट को बचा लिया। ओमान के रहने वाले को-पायलट ने सऊदी अरब के ऊपर उड़ान के दौरान भारतीय कैप्टन पर चाकू से हमला किया और कॉकपिट पर कब्ज़ा करने की कोशिश की। उस हाथापाई के दौरान, बहादुर भारतीय कैप्टन ने दरवाज़ा खोल दिया ताकि यात्री अंदर आ सकें। यात्री अंदर गए और पायलट को काबू में किया।</p>

<p><strong>सबने मिलकर यात्रियों को बचा लिया</strong><br />
एक इज़राइली प्लंबर ने प्लेन के स्टीयरिंग व्हील को पकड़कर उसे नीचे की ओर गोता लगाने (nosedive) से रोका। बाकी यात्रियों ने टेररिस्ट पायलट को ईयरफोन से तब तक काबू में रखा, जब तक कि प्लेन में मौजूद एक ऑफ-ड्यूटी पायलट ने कंट्रोल अपने हाथ में नहीं ले लिया और आखिरकार प्लेन को सऊदी अरब में सुरक्षित लैंड कराया। पहले भी कई बार प्लेन हाईजैक हुए हैं। यह पहला मामला है जिसके बारे में मुझे पता है, जिसमें पायलट ने न सिर्फ़ प्लेन को क्रैश करने की कोशिश की, बल्कि उसे 9/11 जैसे हमले के लिए हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बनाई थी। भारतीय को-पायलट और प्लेन में मौजूद यात्रियों की हिम्मत की वजह से इस हमले को रोका जा सका।"<br />
<br />
<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/india/politics/an-indian-prevented-9-11-from-happening-said-pm-modi-at-the-upsc-centenary-celebrations-expressed-pride-on-captain-smit-machchhar-2026-10-01-1246353">'एक हिंदुस्तानी ने 9/11 होने से बचा लिया', UPSC शताब्दी समारोह में बोले पीएम मोदी, कैप्टन स्मित पर जताया गर्व</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-37-seconds-in-cockpit-tail-broke-off-how-brave-captain-smit-machhar-land-plane-explained-2026-10-01-1246387     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/flydubai-flight-37-seconds-in-cockpit-tail-broke-off-how-brave-captain-smit-machhar-land-plane-explained-2026-10-01-1246387 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 01 Oct 2026 14:42:17 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     ERONET और ECINET क्या हैं? क्या कोई सॉफ्टवेयर Voter List से आपका नाम हटा सकता है     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ भारत निर्वाचन आयोग वोटर लिस्ट बनाने के लिए डिजिटल और तकनीकी प्लेटफॉर्म ERONET और ECINET का प्रयोग करता है, जो मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रियाओं का प्रबंधन करते हैं। क्या सॉफ्टवेयर आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा सकते हैं?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/voter-list-3-1790759763.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[वोटर लिस्ट]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/voter-list-3-1790759763.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/voter-list-3-1790759763.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      वोटर लिस्ट
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><a href="https://www.indiatv.in/india/politics/rift-in-india-alliance-before-meet-congress-slams-aap-leader-sanjay-singh-statement-2026-09-30-1246109">चुनाव आयोग पर वोट चोरी के आरोप लगते रहे हैं और साथ ही ईवीएम में गड़बड़ी को लेकर भी विवाद होता रहता है</a>। वोट चोरी, यानी वोटर के नाम वोटर लिस्ट से हटाने का आरोप लगाने वाली विपक्षी पार्टियां विशेष गहन संशोधन (SIR) को जिम्मेदार मानती हैं। वोट चोरी या वोटर का नाम हटाने के आरोप को चुनाव आयोग बार बार खारिज करता रहता है। चुनाव आयोग का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम से किसी भी वोटर को वोटर लिस्ट से हटाया नहीं जा सकता। पोर्टल और ऐप्स केवल आवेदन दाखिल करने की अनुमति देते हैं, जिनकी फिर जांच की जाती है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता को नोटिस जारी किए बिना और उसे अपनी बात रखने का अवसर दिए बिना कोई भी वोट नहीं हटाया जा सकता।</p>

<p><strong>वोटर लिस्ट से नाम हटाने के नियम</strong><br />
लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में मतदाता सूची से अपना नाम हटवाने की प्रक्रिया का ढांचा निर्धारित किया गया है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य दुरुपयोग को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को भी बिना सूचना दिए या विरोध करने का मौका दिए बिना अपना वोट न खोना पड़े।</p>

<p><strong>वोटर लिस्ट में नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है</strong><br />
यदि कोई मतदाता अपना नाम मतदाता सूची से हटवाना चाहता है या मतदाता सूची में दर्ज किसी प्रविष्टि पर आपत्ति करता है, तो उसे प्रपत्र 7 को निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) को जमा करना होगा। यदि मतदाता किसी अन्य निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो गए हैं, तो वे स्वयं भी इस प्रपत्र का उपयोग करते हैं। इसमें निर्वाचन क्षेत्र का नाम, मतदाता का ईपीआईसी नंबर (EPIC Number) नाम हटवाने का कारण और आवेदक का विवरण और हस्ताक्षर जैसी महत्वपूर्ण जानकारी आवश्यक होती है। जमा करने के बाद, स्थानीय बूथ स्तरीय अधिकारी (BLO) इसकी पावती जारी करता है।</p>

<p><strong>जान लें खास बातें</strong></p>

<ul>
	<li>मतदाता का स्थायी रूप से दूसरे निर्वाचन क्षेत्र में स्थानांतरित हो जाना, पंजीकृत पते पर न मिलना, दो बार नाम दर्ज होना, मृत्यु हो जाना, या भारतीय नागरिक न होना। मनमाने या राजनीतिक आधार पर नाम हटाने की मांग नहीं की जा सकती।</li>
	<li>प्रत्येक आवेदन को आधिकारिक अभिलेखों में दर्ज किया जाता है। यदि कोई प्रपत्र अधूरा या दोषपूर्ण है, तो उसे प्रारंभिक चरण में ही अस्वीकार किया जा सकता है।</li>
	<li>यदि किसी मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव है, तो मतदाता मूल्यांकन अधिकारी (ERO) को मतदाता को एक सूचना देनी होगी, जिसमें सुनवाई की तिथि, समय और स्थान निर्दिष्ट हो। यह सूचना व्यक्तिगत रूप से, पंजीकृत डाक द्वारा या मतदाता के निवास स्थान पर चिपकाकर दी जा सकती है।</li>
	<li>एक मतदाता निरीक्षण अधिकारी संबंधित पते पर जाकर यह जांच करता है कि मतदाता अभी भी वहां रह रहा है, उसकी मृत्यु हो गई है, या फिर पंजीकरण दोहराया गया है। प्राप्त जानकारी की रिपोर्ट मतदाता निरीक्षण अधिकारी को भेजी जाती है।</li>
	<li>नाम हटाने की मांग करने वाले आवेदक और जिस मतदाता के नाम पर सवाल उठाया जा रहा है, दोनों को सुनवाई का अधिकार है। निर्णय लेने से पहले, मतदाता नियंत्रण अधिकारी (ईआरओ) दस्तावेज़ मांग सकता है, व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य कर सकता है और शपथ के तहत बयान भी दर्ज कर सकता है।</li>
	<li>साक्ष्यों पर विचार करने के बाद, ईआरओ या तो आवेदन को अस्वीकार करता है या नाम हटाने की स्वीकृति देता है। स्वीकृति मिलने पर, नाम सूची से हटा दिया जाता है और अगली अद्यतन सूची में दर्ज हो जाता है।</li>
	<li>यदि किसी मतदाता को लगता है कि उसका नाम गलत तरीके से मतदाता सूची से हटा दिया गया है, तो वह मतदाता सूची अधिकारी (ERO) के आदेश को चुनौती दे सकता है। वह निवास और पहचान प्रमाण के साथ प्रपत्र 6 भरकर अपना नाम दोबारा दर्ज कराने के लिए आवेदन भी कर सकता है।</li>
	<li>प्रपत्र 7 में झूठी घोषणा करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत दंडनीय है।</li>
</ul>

<p><strong>क्या कोई आपका नाम वोटर लिस्ट से हटा सकता है?</strong></p>

<p>कानूनी तौर पर, एक ही निर्वाचन क्षेत्र का कोई भी मतदाता किसी अन्य मतदाता के नाम पर आपत्ति जताने के लिए फॉर्म 7 दाखिल कर सकता है। लेकिन इससे वोट स्वतः रद्द नहीं हो जाता। ईआरओ को कोई भी आदेश पारित करने से पहले नोटिस जारी करना, सत्यापन करना और सुनवाई करना अनिवार्य है। इन चरणों के बिना किसी भी प्रकार का विलोपन गैरकानूनी है। झूठा आवेदन दाखिल करना दंडनीय अपराध है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/voter-list1-1790759763.jpg"    /></p>

<p><strong>क्या किसी सॉफ्टवेयर के जरिए वोटों को रद्द किया जा सकता है?</strong></p>

<ul>
	<li>ऑनलाइन पोर्टल केवल आवेदन स्वीकार करते हैं; वे स्वयं नाम नहीं हटा सकते।</li>
	<li>प्रत्येक मामले में अभी भी सत्यापन और सुनवाई की आवश्यकता है।</li>
	<li>यहां तक ​​कि थोक हेरफेर के संदिग्ध मामलों में भी, ईआरओ को उचित प्रक्रिया का पालन करना होगा।</li>
	<li>यदि सॉफ्टवेयर-आधारित प्रतिरूपण का प्रयास किया जाता है, तो यह धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के बराबर होगा, लेकिन यह स्वयं कानूनी सुरक्षा उपायों को दरकिनार नहीं करेगा।</li>
	<li>सॉफ्टवेयर सिस्टम को एप्लिकेशनों से भर सकता है; लेकिन यह अपने आप रिकॉर्ड से नामों को मिटा नहीं सकता।</li>
	<li>भारत में मतदाता का नाम हटाना एक क्लिक का काम नहीं है। चाहे पड़ोसी द्वारा आवेदन किया गया हो या ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से, कानून के अनुसार नाम हटाने से पहले जांच-पड़ताल, सूचना, प्रत्यक्ष सत्यापन और सुनवाई आवश्यक है। </li>
	<li>फर्जी आवेदन दाखिल किए जा सकते हैं, लेकिन इनसे मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जा सकता।</li>
	<li>उचित प्रक्रिया को दरकिनार करने का कोई भी प्रयास गैरकानूनी और दंडनीय है।</li>
</ul>

<p><strong>क्या है ERONET</strong><br />
एसआईआर के दौरान इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) और इसका मुख्य यूनिफाइड प्लेटफ़ॉर्म (ECINET) भारत की वोटर लिस्ट को मैनेज करने वाला टेक्निकल ढांचा बनाते हैं। </p>

<p><strong>ERONET </strong><br />
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स नेटवर्क (ERONET) एक केंद्रीकृत वेब-आधारित प्रणाली है जिसे विशेष रूप से मतदाता सूची (Electoral Roll) के प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इसके जरिए मतदाताओं के नए नाम जोड़ने, पते या विवरण में सुधार करने और नाम हटाने (Deletion) की प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप से संचालित किया जाता है। इसने देश भर के विभिन्न राज्यों की अलग-अलग 36 प्रणालियों को एक समान डिजिटल ढांचे में बदलने का काम किया।<br />
<strong>ECINET </strong><br />
ECINET एक व्यापक और एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसमें ERONET के मतदाता सूची से जुड़े कार्यों सहित चुनाव आयोग की 40 से अधिक अन्य सेवाओं और पोर्टलों को एक ही छत के नीचे मिला दिया गया है। यह मतदाताओं, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के लिए एक साझा मंच है। इसके माध्यम से मतदाता पंजीकरण, आवेदन ट्रैक करना, ई-एपिक (e-EPIC) डाउनलोड करना और चुनावी आंकड़े देखना जैसी सेवाएं मिलती हैं</p>

<p> </p>

<p><strong>ERONET और ECINET  कैसे काम करते हैं</strong><br />
सॉफ्टवेयर की परफॉर्मेंस को लेकर सार्वजनिक चर्चाओं के बावजूद, न तो ERONET और न ही ECINET के पास खुद से किसी वोटर को जोड़ने या हटाने का कानूनी अधिकार है। यह सॉफ्टवेयर मुख्य रूप से एक 'डिसीजन-सपोर्ट सिस्टम' के तौर पर काम करता है, जो संभावित डुप्लिकेट एंट्री या डेटा में कमी की पहचान करके फील्ड स्टाफ के लिए कार्रवाई की व्यवस्थित लिस्ट तैयार करता है।</p>

<p>किसी गड़बड़ी की पहचान होने पर, ज़मीनी स्तर पर फिजिकल वेरिफिकेशन (भौतिक सत्यापन) शुरू किया जाता है। बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर परिवारों से सीधे दस्तावेज़ों का सत्यापन करते हैं। 'रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट' की धारा 15 के तहत, वोटर रजिस्टर में बदलाव का कोई भी औपचारिक आदेश जारी करने से पहले, स्थानीय इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (Electoral Registration Officers) स्वतंत्र रूप से फील्ड रिपोर्ट की जांच करते हैं और उनके पास ही अंतिम कानूनी अधिकार होता है।<br />
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<strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/india/national/after-controversy-election-commission-major-decision-on-form-6-annexure-d-no-longer-required-2026-09-30-1246145">विवाद के बाद चुनाव आयोग का फॉर्म-6 पर बड़ा फैसला, Annexure-D अब नहीं देना होगा, जानें डिटेल्स</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/eronet-and-ecinet-can-software-remove-your-name-from-the-voter-list-explained-2026-09-30-1246193     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/eronet-and-ecinet-can-software-remove-your-name-from-the-voter-list-explained-2026-09-30-1246193 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 30 Sep 2026 14:53:22 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर क्यों मचा है बवाल, हिंसा-प्रदर्शन के बाद अब आगे क्या होगा?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा गिराने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि सोमवार को भीड़ ने हिंसक रूप धारण कर लिया। पुलिसकर्मियों पर पत्थर बरसाए गए। क्या है पूरा विवाद, क्यों हिंसक हुई भीड़ और अब आगे क्या होगा?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahi-masjid-1790654207.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[क्या है उज्जैन शाही मस्जिद विवाद]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahi-masjid-1790654207.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahi-masjid-1790654207.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      क्या है उज्जैन शाही मस्जिद विवाद
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>भारी सुरक्षा के बीच आज उज्जैन में शाही मस्जिद का एक हिस्सा हटाने का काम फिर से शुरू होगा। कल पत्थरबाज़ी की घटनाओं के बाद भीड़ और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। भीड़ को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। हालांकि, अभी स्थिति सामान्य है। उज्जैन की शाही मस्जिद को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब मध्य प्रदेश सरकार ने इस शहर को 2028 के सिंहस्थ कुंभ के लिए तैयार करने का आदेश दिया और आदेश के बाद अधिकारियों ने सड़क चौड़ी करने के प्रोजेक्ट के तहत मस्जिद के एक हिस्से को हटाने का काम शुरू किया।</p>

<p>उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ को लेकर सड़क 15 मीटर चौड़ी होगी, उसकी जद में आ रहे शाही मस्जिद का पहला हिस्सा 3.5 फीट और दूसरा हिस्सा 8 फीट गिरेगा, बाकी मस्जिद सुरक्षित रहेगी। बड़ी मीनार को दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा और मस्जिद से लगे दुकानों के लिए दूसरी जगह दी जाएगी। समझौते के तहत मुस्लिम समाज के लोग खुद ही मस्जिद का हिस्सा गिराने के लिए तैयार हैं। कल मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के दौरान हुए हंगामे के बाद पुलिस ने आठ एफआईआर दर्ज की है, 15 उपद्रवी गिरफ़्तार किए गए हैं। इसके साथ ही पांच सोशल मीडिया एकाउंट पर भी केस दर्ज कराए गए हैं और 100 से ज़्यादा कंटेंट हटाए गए हैं। </p>

<p><strong>क्या है शाही मस्जिद विवाद </strong><br />
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 9 सितंबर को उज्जैन के शाही मस्जिद मामले में दायर याचिका खारिज कर दी थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने व्यापक लोक हित, जन सुरक्षा और सिंहस्थ यातायात प्रबंधन को सर्वोपरि मानते हुए मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई को हरी झंडी दे दी थी। कोर्ट ने जिला प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच हुए समझौते के आधार पर मामले को डिस्पोज ऑफ कर दिया। कमेटी और प्रशासन के बीच समझौते के तहत सड़क के लिए 3 फीट जगह के साथ कुछ दुकानें हटाने पर सहमति बनी थी।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/masjid1-2-1790665771.jpg"    /></p>

<p><strong>शाही मस्जिद विवाद हिंसा में क्यों बदला</strong><br />
उज्जैन में रविवार (27 सितंबर 2026) की रात हुई मीटिंग में मस्जिद के हिस्से को मुस्लिम पक्ष खुद गिराने पर सहमत हो गया था। सोमवार की सुबह तक शांति थी और शहर की शाही मस्जिद के कुछ हिस्से को मस्जिद कमेटी के लोग खुद तोड़ रहे थे। लेकिन तभी एक वीडियो सोशल मीडिया पर सर्कुलेट किया गया, जिसमें दावा किया गया कि जामा मस्जिद को प्रशासन पूरी तरह ध्वस्त करना चाहता है और बुलडोजर भी पहुंच चुके हैं। <a href="https://www.indiatv.in/madhya-pradesh/ujjain-shahi-masjid-dispute-police-crack-down-on-stone-pelters-fir-registered-against-7-over-15-arrested-2026-09-28-1245871">ऐसी अफवाह फैलते ही मस्जिद के आसपास हजारों की भीड़ जुट गई और भीड़ ने आगे बढ़ने की कोशिश की</a>। जब पुलिस ने भीड़ को रोका तो लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी, जिसमें कई पुलिस वाले घायल हो गए।</p>

<p>इसके बाद पुलिस ने पहले आंसू गैस के गोले दागे और फिर लाठीचार्ज करके भीड़ को खदेड़ा। इस दौरान उपद्रवियों ने पुलिस पर जमकर पत्थर फेंके, भीड़ में शामिल महिलाएं भी बैरिकेडिंग हटाने लगीं। पुलिस प्रशासन से उलझने की कोशिश करती महिलाओं को पुलिस ने रोका। पुलिस पर हुए भीड़ के हमले और मस्जिद के बाहर जमा भीड़ को हटाने के दौरान महिला थाना प्रभारी घायल हो गईं। पुलिस पर हमला कर रही भीड़ को दौड़ा - दौड़ा कर पीटा गया। </p>

<p><strong>मस्जिद मैनेजमेंट ने क्या तर्क दिया?</strong><br />
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि मस्जिद एक प्राचीन धार्मिक इमारत है और प्रेयर हॉल, मीनार और दूसरी संरचनाओं के हिस्सों को हटाने से उनके संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन होगा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि सड़क की ज़रूरी चौड़ाई पाने के लिए मस्जिद के पास मौजूद दूसरी संपत्तियों को हटाया जा सकता है। मस्जिद प्रबंधन ने तर्क दिया कि अधिकारियों को मस्जिद को छुए बिना सड़क के दूसरी तरफ के ढांचों को हटाने या किसी दूसरे रास्ते (अलाइनमेंट) पर विचार करना चाहिए।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/masjid-1-1790665784.jpg"    /></p>

<p>नगर निगम के नक्शे और पैमाइश के अनुसार, शाही मस्जिद का अगला हिस्सा (लगभग 9 से 11 फीट चौड़ा भाग) इस 15 मीटर की सड़क की जद (अलाइनमेंट) में आ रहा था। मस्जिद प्रबंधन के अनुसार, इस कार्रवाई से उनके प्रार्थना कक्ष (जमात खाना), परिसर के मजहर चौक और लगभग 120 फीट ऊंची मीनार का हिस्सा प्रभावित हो रहा है। </p>

<p> </p>

<p><strong>कितनी पुरानी है उज्जैन की शाही मस्जिद?</strong><br />
मस्जिद के इमाम और वक्फ प्रबंधन के अनुसार, यह मस्जिद वर्ष 1390 ईस्वी में बनी थी, जिससे इसका इतिहास लगभग 636 साल पुराना (14वीं शताब्दी के अंत का) हो जाता है। इस मस्जिद के 636 साल पुराने होने का दावा मुख्य रूप से मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने किया है। लेकिन इस तारीख की पुष्टि करने वाले ऐतिहासिक रिकॉर्ड सार्वजनिक रूप से स्पष्ट तौर पर सामने नहीं आए हैं। तमाम उपलब्ध जानकारियों के मुताबिक उज्जैन की ऐतिहासिक शाही मस्जिद लगभग 600 से 630 साल पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध 14वीं शताब्दी के अंत से है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/generated-image-1790649078221-1790654108.jpg"    /></p>

<p><strong>इसे शाही मस्जिद क्यों कहा जाता है?</strong><br />
यह मस्जिद उज्जैन के पुराने इलाके छतरी चौक (कंठल क्षेत्र) में स्थित है। इतिहासकारों और उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मस्जिद का निर्माण मालवा के पहले स्वतंत्र शासक दिलावर खान गोरी के शासनकाल (लगभग 1390 ईस्वी) के आसपास हुआ था। इस मस्जिद का निर्माण मध्यकालीन सल्तनत कालीन वास्तुकला के अनुसार किया गया था। प्राचीन काल में मालवा के शासक, उनका शाही काफिला और बड़े प्रशासनिक अधिकारी विशेष पर्वों और जुमे (शुक्रवार) की नमाज के लिए इसी स्थान पर आते थे, जिसके कारण यह मस्जिद 'शाही मस्जिद' के नाम से प्रसिद्ध हुआ।<br />
 <br />
<strong>मस्जिद का हिस्सा गिराना क्यों जरूरी है?</strong><br />
शाही मस्जिद उज्जैन में शहर के पुराने बाज़ार इलाके में गोपाल मंदिर के पास छतरी चौक पर स्थित है। यह जगह इसलिए अहम है क्योंकि यह मस्जिद कंथल चौराहा और गोपाल मंदिर को जोड़ने वाली सड़क पर है; यह रास्ता महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी की ओर भी जाता है। इस सड़क का इस्तेमाल शाही सवारी और पेशवाई जैसे धार्मिक जुलूसों के दौरान भी किया जाता है और 2028 के सिंहस्थ के दौरान यहां भारी भीड़-भाड़ होने की उम्मीद है। उज्जैन नगर निगम का कहना है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और लोगों की सुरक्षा के लिए सड़क चौड़ी करना ज़रूरी है।</p>

<p><strong>मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने क्या कहा?</strong><br />
9 सितंबर को, मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच के एक जज ने प्रस्तावित तोड़फोड़ को चुनौती देने वाली दो याचिकाओं को खारिज कर दिया। अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा कि उसी सड़क पर 10 मंदिरों और एक मस्जिद के कुछ हिस्सों को पहले ही हटाया जा चुका था और उज्जैन में लगभग 80 धार्मिक स्थलों से जुड़े ढांचों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आने वाला सिंहस्थ, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक सुरक्षा महत्वपूर्ण बातें थीं। अदालत ने सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की उम्मीदों और बेहतर सुविधाएं देने व ट्रैफिक मैनेजमेंट की ज़रूरत पर भी ध्यान दिया।</p>

<p><strong>मस्जिद विवाद पर सियासत तेज</strong></p>

<p>गिरिराज सिंह क्या बोले?<br />
गिरिराज सिंह ने अपने वीडियो पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ‘उज्जैन में जारी हंगामा देश में सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने की एक सोची समझी साजिश है. जब विकास कार्यों के लिए मंदिरों को हटाया गया, तब हिंदू समाज ने कानून का सम्मान करते हुए परिपक्वता दिखाई, लेकिन अब शाही मस्जिद पर पूरी तरह से वैध और कानूनी कार्रवाई होने पर बवाल करवाना, देश में विद्रोह फैलाने के गंदे मंसूबे को साफ दर्शाता है.’</p>

<p><strong>क्या बोले ओवैसी?</strong><br />
AIMIM चीफ और लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने शाही मस्जिद के मुद्दे पर मीडिया से बातचीत में कहा, ‘मैं सलाम करता हूं उस जनता को, वो लोग गांधी के रास्ते पर चलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, क्योंकि इस तरीके से मस्जिदों को शहीद नहीं किया जा सकता है। मैं संसद में जिस बात का जिक्र किया था कि जो नया वक्फ संशोधन कानून है, उसके तहत जिले के कलेक्टरों और सरकारों को जो ताकत दी जा रही है, उसका मकसद सिर्फ एक ही की मस्जिदों को, दरगाहों को, खानखांहों को, कब्रिस्तानों को और ईदगाहों को मुसलमानों से छीन लिया जाए, वो सच साबित हो रहा है।’ </p>

<p><strong>अखिलेश यादव ने क्या कहा</strong><br />
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश स्थित उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के क्रम में शाही मस्जिद के एक हिस्से को तोड़े जाने के बीच बड़ी प्रतिक्रिया दी है। सपा चीफ ने कहा है कि हमारे मुसलमान धैर्य रखें। अधिकार छीनने वालों को संविधान सजा देगा। कन्नौज सांसद ने कहा कि सबसे ज्यादा अवैध इमारत जो है वो बीजेपी के पास है।</p>

<p><strong>अब आगे क्या होगा?</strong><br />
कोर्ट के अंतिम रुख और प्रशासन व मस्जिद कमेटी के बीच हुए हालिया समझौतों के आधार पर आगे की रूपरेखा तय हो चुकी है और सहमति के आधार पर केवल 3 फीट हिस्सा हटेगा। मस्जिद की 120 फीट ऊंची बड़ी मीनार को तोड़ा नहीं जाएगा, बल्कि उसे तकनीकी रूप से दूसरी ओर शिफ्ट किया जाएगा। जो दुकानें इस कार्रवाई में हटाई जा रही हैं, उनके दुकानदारों को प्रशासन द्वारा वैकल्पिक जगह आवंटित की जाएगी और मस्जिद प्रबंधन को इसके बदले नियमानुसार FAR (फ्लोर एरिया रेशियो) और TDR (ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स) दिए जाएंगे।</p>

<p>छतरी चौक और कंठाल क्षेत्र में रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारी पुलिस बल (2,500 से अधिक जवान) तैनात रहेंगे ताकि दोबारा कोई अप्रिय घटना न हो। शहर काजी खलीक उर रहमान ने वीडियो संदेश जारी कर लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और शांतिपूर्वक घरों में रहने की अपील की है। मस्जिद का बाधक हिस्सा हटाने का शेष कार्य शांतिपूर्वक तरीके से समाज के लोगों द्वारा ही मिलकर पूरा कराया जाएगा।</p>

<p>लॉ एंड ऑर्डर को संभालने के लिए  2500 पुलिस के जवान और अधिकारी तैनात हैं। जिले के डीएम और एसपी लगातार कैंप कर रहे हैं। बिना आआईडी कार्ड के पूरे क्षेत्र में किसी को एंट्री-एग्जिट की परमिशन नहीं है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। </p>

<p><strong>देखें वीडियो</strong><br />
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<iframe   src="https://www.youtube.com/embed/SfBKlnNxPQ0" frameborder="0"></iframe></p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/madhya-pradesh/ujjain-shahi-masjid-dispute-police-crack-down-on-stone-pelters-fir-registered-against-7-over-15-arrested-2026-09-28-1245871">उज्जैन शाही मस्जिद विवाद, पुलिस ने पत्थरबाजों पर कसा शिकंजा, 7 पर FIR, 15 से ज्यादा को किया गिरफ्तार</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/ujjain-shahi-masjid-controversy-why-muslims-violence-and-protest-what-happens-next-explained-2026-09-29-1245939     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/ujjain-shahi-masjid-controversy-why-muslims-violence-and-protest-what-happens-next-explained-2026-09-29-1245939 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 29 Sep 2026 09:32:54 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     आखिर ऐसा क्या हुआ कि बैंक यूनियनों ने स्थगित कर दी 3 दिनों की हड़ताल, आज से ही शुरू होनी थी स्ट्राइक     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ बैंक कर्मचारी यूनियन लंबे समय से 5-डे वर्किंग यानी हर हफ्ते 2 छुट्टियों की मांग कर रहे हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bank-strike-httpsx-1790565281.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[बैंक कर्मचारी]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : HTTPS://X.COM/JAYESHCHAVADA4U]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bank-strike-httpsx-1790565281.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bank-strike-httpsx-1790565281.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      बैंक कर्मचारी
                      <span class="copyright">Image Source : HTTPS://X.COM/JAYESHCHAVADA4U</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>यूनाइटेड </strong>फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने रविवार, 27 सितंबर को एक बयान में कहा कि 28 से 30 सितंबर तक होने वाली 3 दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल को टाल दिया गया है। ये फैसला इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) द्वारा बैंक यूनियनों की मांगों पर भरोसा दिलाने के बाद लिया गया, जिसमें बैंक कर्मचारियों के लिए प्रत्येक शनिवार को छुट्टी घोषित करने की लंबे समय से लंबित मांग भी शामिल है।</p>

<p>ये फैसला रविवार रात 9:30 बजे IBA और UFBU के बीच हुई एक अहम मीटिंग के बाद लिया गया, जिसमें दोनों पक्षों ने 5-डे वर्किंग की मांग और यूनियनों द्वारा उठाए गए अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा की।</p>

<h3><strong>3 दिन की बैंक हड़ताल क्यों टाली गई?</strong></h3>

<p>UFBU के बयान के अनुसार, हड़ताल को टालने का फैसला IBA द्वारा यूनियनों की मांगों पर भरोसा दिलाने के बाद लिया गया। चर्चा के बाद, IBA और UFBU के प्रतिनिधियों वाली एक हाई-लेवल कमेटी बनाई जाएगी जो प्रत्येक शनिवार को छुट्टी घोषित करने की मांग की जांच करेगी। कमेटी संभावित विकल्पों पर विचार करेगी और इस मुद्दे पर सभी संबंधित पक्षों के साथ चर्चा करेगी। इसके साथ ही, कमेटी बैंक ग्राहकों के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी पक्षों के लिए समाधान खोजेगी।</p>

<h3><strong>अभी हर महीने दो शनिवार को ही मिलती है छुट्टी</strong></h3>

<p>बताते चलें कि बैंक कर्मचारी यूनियन लंबे समय से 5-डे वर्किंग यानी हर हफ्ते 2 छुट्टियों की मांग कर रहे हैं। मौजूदा सिस्टम में, बैंक प्रत्येक महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को बंद रहते हैं, जबकि बैंक यूनियन सभी शनिवारों को छुट्टी की मांग कर रहे हैं। बैंक यूनियन की ये मांग मार्च 2024 के वेतन समझौते (Wage Settlement) का भी हिस्सा थी, लेकिन इस प्रस्ताव पर आगे की कार्यवाही का इंतजार है।</p>

<h3><strong>PLI योजना पर भी शुरू हो सकती है चर्चा</strong></h3>

<p>इसके साथ ही, बैंक यूनियनों ने स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना का भी मुद्दा उठाया है। UFBU के बयान के अनुसार, अब IBA के साथ PLI योजना पर चर्चा शुरू हो सकती है। सरकार को कोई भी प्रस्ताव भेजने से पहले यूनियन और एसोसिएशन अपनी चिंताओं को दूर करने के लिए योजना में बदलाव की मांग कर रहे हैं।</p>

<p>UFBU ने कहा कि IBA और बैंक यूनियनें 8 मार्च, 2024 की चर्चाओं के मिनट्स में लिस्ट किए गए अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा करेंगी। उम्मीद है कि चर्चा का मुख्य फोकस बाकी मुद्दों को जल्द से जल्द सुलझाने पर होगा। </p>

<h3><strong>क्या 28 सितंबर को बैंक खुले रहेंगे?</strong></h3>

<p>3 दिनों की हड़ताल को स्थगित करने के बाद अब देशभर के सभी बैंक सोमवार, 28 सितंबर को ही नहीं, बल्कि 29 और 30 सितंबर को भी सामान्य दिनों की तरह कामकाज करेंगे। <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/will-there-be-a-bank-strike-in-your-city-today-sbi-issued-a-major-update-at-midnight-2026-09-28-1245740" target="_blank">UFBU द्वारा बुलाई गई 3 दिनों की हड़ताल </a>आज से ही शुरू होने वाली थी और ये बैंकों के छमाही क्लोजिंग पीरियड के समय ही होने वाली थी। UFBU द्वारा प्रस्तावित इस हड़ताल को लेकर सबसे ज्यादा चिंता की बात ये थी कि इसे शनिवार और रविवार को लगातार दो दिनों की छुट्टी के ठीक बाद बुलाया गया था। ऐसे में, आम ग्राहकों के बैंकों से जुड़े जरूरी और महत्वपूर्ण काम लगातार 5 दिनों के लिए रुक जाते और देर हो जाते।</p>

<h3><strong>हाई-लेवल कमिटी, IBA और बैंक यूनियनों की बातचीत पर रहेगा खास फोकस</strong></h3>

<p>वित्त मंत्रालय की घोषणा के बाद रविवार, 27 सितंबर को तमाम सरकारी बैंकों की ब्रांच खुली थीं ताकि ग्राहक 3 दिन के प्रस्तावित हड़ताल से पहले अपने जरूरी काम पूरा कर सकें। अब एक हाई-लेवल कमिटी, IBA और बैंक यूनियनों के बीच आगे की बातचीत पर खास नजरें होंगी, जिसमें 5-डे वर्किंग बैंकिंग वीक, सभी शनिवार को छुट्टी, PLI स्कीम और दूसरी लंबित मांगों पर चर्चा की जाएगी।</p>

<p><strong><em>ये भी पढ़ें</em></strong></p>

<p><strong><a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/will-there-be-a-bank-strike-in-your-city-today-sbi-issued-a-major-update-at-midnight-2026-09-28-1245740" target="_blank" title="आज आपके शहर में बैंकों की हड़ताल रहेगी या नहीं, SBI ने आधी रात को जारी किया बड़ा अपडेट">आज आपके शहर में बैंकों की हड़ताल रहेगी या नहीं, SBI ने आधी रात को जारी किया बड़ा अपडेट</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/what-exactly-happened-to-cause-bank-unions-to-call-off-the-three-day-strike-that-was-scheduled-to-begin-today-2026-09-28-1245747     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/what-exactly-happened-to-cause-bank-unions-to-call-off-the-three-day-strike-that-was-scheduled-to-begin-today-2026-09-28-1245747 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 28 Sep 2026 08:42:26 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सितंबर में अचानक क्यों आया इतना आंधी-पानी? जो यूपी से छत्तीसगढ़ तक मच गई तबाही! घर-दुकानों में भरा पानी     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ अचानक भारी बारिश यूपी से पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ का हाल बेहाल है। कई जगहों पर पानी भर गया। पानी ने घरों और दुकानों तक में घुसपैठ कर दी। आइए जानते हैं कि इसकी वजह क्या है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/september-heavy-rain-in-india-1790493086.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[भारी बारिश के कारण यूपी से पश्चिम बंगाल तक हाहाकार!]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/september-heavy-rain-in-india-1790493086.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/september-heavy-rain-in-india-1790493086.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      भारी बारिश के कारण यूपी से पश्चिम बंगाल तक हाहाकार!
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>सितंबर महीने के आखिरी हफ्ते में <a href="https://www.indiatv.in/india/national/imd-rain-alert-for-14-states-flood-situation-from-up-bihar-to-chhattisgarh-snowfall-in-hilly-states-2026-09-27-1245579" target="_blank" title="बारिश ने मचाई तबाही! 14 राज्यों में अलर्ट, UP-बिहार से छत्तीसगढ़ तक बाढ़ का खतरा, पहाड़ों पर बर्फबारी">सैलाबी आफत से देश के 14 से ज्यादा राज्यों में तबाही मची है</a>। नॉर्थ ईस्ट से लेकर उत्तराखंड और हिमाचल के पहाड़ों तक मौसम ने करवट ली है। यूपी, बिहार, ओडिशा, बंगाल में भारी बारिश के बाद जलभराव से हालात बिगड़ गए हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, 29 सितंबर तक छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, बंगाल में मूसलाधार बारिश का रेड अलर्ट है। यूपी के 63 जिले इस वक्त तेज बारिश की चपेट में हैं। लगातार बारिश के चलते लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर के सिटी इलाके फ्लड जोन में तब्दील हो चुके हैं। सड़कों पर दरिया बह रहा है। लोगों के घर-मकान सैलाब की चपेट में हैं। आइए जानते हैं कि इसकी वजह क्या है।</p>
<p><strong>यूपी से छत्तीसगढ़ तक आंधी-पानी से आफत!</strong></p>
<p>हालांकि, हालात बिगड़ने के बाद ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड में SDRF और NDRF की मदद से रेस्क्यू अभियान चलाया गया है। बिहार की कोसी और गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पश्चिम बंगाल के भी कई जिले पानी की मार झेल रहे हैं। बंगाल के समंदर से सटे इलाकों में तेज हवाओं के साथ समंदर में ऊंची लहरें उठ रही हैं। लोगों को सावधान रहने की हिदायत जारी की गई है। उधर, यूपी में भी वज्रपात और बारिश के प्रहार से कई जिलों में भारी नुकसान की खबर है। वहीं, पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी के चलते भी मौसम का मिजाज बदल गया है। उत्तराखंड और हिमाचल के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी हुई है।</p>
<p><strong>अचानक क्यों हो रही इतनी बारिश?</strong></p>
<p>मौसम विभाग के मुताबिक, यह ताजा बारिश का दौर ऐसे वक्त में आया है जब साउथ छत्तीसगढ़ और आस-पास के इलाकों में बना हुआ डीप डिप्रेशन सेंट्रल और ईस्ट इंडिया के मौसम को प्रभावित कर रहा है। यह सिस्टम नॉर्थ-नॉर्थ-वेस्ट की तरफ बढ़ रहा है, जिससे नमी वाली हवाएं आ रही हैं। इसके रास्ते में बड़े पैमाने पर बारिश हो रही है।</p>
<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/Indiametdept/status/2103774402244669677?s=20"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>
<p><strong>डीप डिप्रेशन कैसे बनता है?</strong></p>
<p>समुद्र में Deep Depression वायुमंडलीय दबाव में भारी कमी और समुद्री सतह के गर्म होने के कारण बनता है। जब समुद्र की सतह का टेंपरेचर जब 26 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होता है, तब वहां की हवा गर्म होकर ऊपर उठ जाती है। फिर, गर्म हवा के ऊपर उठ जाने से उस जगह पर खाली स्थान बन जाता है और हवा का प्रेशर बहुत कम हो जाता है, जिसे Low Pressure Area कहते हैं। जब यह Low Pressure Area और ज्यादा मजबूत हो जाता है और हवा की रफ्तार 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा तक होती है, तो इसे सामान्य डिप्रेशन कहते हैं। लेकिन जब हवा की स्पीड बढ़कर 51 से 62 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच जाती है, तब इसे डीप डिप्रेशन कहा जाता है।</p>
<p><strong>भारी बारिश यूपी के करीब 63 जिले प्रभावित</strong></p>
<p>बता दें कि यूपी में लगातार बारिश के चलते जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। लखनऊ, कानपुर, गोंडा, श्रावस्ती, गोरखपुर समेत 63 जिले इस वक्त मूसलाधार मार की चपेट में हैं। लगातार बारिश जारी है। रिहायशी इलाकों में पानी भरा हुआ। सड़कों पर दरिया बह रहा है। भारी बारिश के चलते हालात बिगड़ते जा रहे हैं। गोरखपुर, देवरिया, मऊ, बलिया के ग्रामीण इलाकों में बारिश और आंधी तूफान के चलते पावर कट है। सैकड़ों स्पॉट पर पेड़-पोल गिरने की रिपोर्ट है।</p>
<p><strong>लखनऊ में टूटा बारिश का 15 साल का रिकॉर्ड</strong></p>
<p>उधर, लखनऊ में बारिश ने 15 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। कानपुर में भी 45 साल का रिकॉर्ड टूटा है। लगातार बारिश से गांव, गली-मोहल्लों में पानी भर गया है। सड़कें तालाब बन गई हैं। खेतों में सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो गई है। पेड़ और पोल उखड़कर गिर गए हैं। खबर है कि मौसम बिगड़ने के चलते आज AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी का श्रावस्ती दौरा रद्द कर दिया गया है।</p>
<p><strong>लखनऊ से सटे कानपुर, बाराबंकी और उन्नाव में भी काफी नुकसान</strong></p>
<p>लखनऊ में भारी बारिश के बाद पूरे शहर में जलभराव की समस्या देखने को मिल रही है, जिससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। घरों में किचन और बेडरूम तक पानी घुस गया है। गलियों में कमर तक पानी भरा है। आंधी तूफान, बारिश, वज्रपात के चलते यूपी में कई लोगों की मौत की खबर है। लखनऊ से सटे कानपुर, बाराबंकी, उन्नाव में भी काफी नुकसान हुआ है। प्रशासन की टीम लगातार ग्राउंड पर एक्टिव मोड में है। लखनऊ में पिछले तीन दिनों में कई जगहों पर पेड़ गिरने की खबर सामने आई है।</p>
<p><strong>ऐतिहासिक हुसैनाबाद गेट का ऊपरी हिस्सा गिरा</strong></p>
<p>इसके लखनऊ में भारी बारिश के चलते ऐतिहासिक हुसैनाबाद गेट का एक ऊपरी हिस्सा गिर गया। गनीमत रही कि नीचे उसकी जद में कोई नहीं आया है। दीवार का हिस्सा गिरने के बाद नीचे का गेट वाला रास्ता एहतियातन बंद कर दिया गया है। लगातार बारिश के चलते ये हादसा हुआ है और जल्द ही प्रशासन इसके रेनोवेशन कराने की बात कर रहा है।</p>
<p><strong>गंगा एक्सप्रेसवे टोल गेट के पास भी भरा पानी</strong></p>
<p>यूपी के उन्नाव में भी भारी बारिश के चलते गंगा एक्सप्रेसवे टोल गेट के पास पानी भरने की तस्वीरें सामने आई हैं। चारों तरफ पानी भरने से गाड़ियों की आवाजाही बाधित हुई है। उन्नाव के गंगा एक्सप्रेसवे बशीरतगंज टोल प्लाजा के पास का वीडियो सामने आया है।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/rainfall-wreaked-havoc-in-up-with-117-houses-collapse-15-people-dead-imd-red-alert-heavy-rain-2026-09-26-1245502" target="_blank" title="यूपी में बारिश ने बरपाया कहर, 117 मकान गिरे, 15 लोगों की मौत, हेल्पलाइन नंबर जारी">यूपी में बारिश ने बरपाया कहर, 117 मकान गिरे, 15 लोगों की मौत, हेल्पलाइन नंबर जारी</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/september-heavy-rain-deep-depression-uttar-pradesh-chhattisgarh-waterlogging-explained-2026-09-27-1245623     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/september-heavy-rain-deep-depression-uttar-pradesh-chhattisgarh-waterlogging-explained-2026-09-27-1245623 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 27 Sep 2026 12:48:08 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     पाकिस्तान को कैसे भारी पड़ रहा इमरान की पार्टी का प्रोटेस्ट? कंगाली में बुरी तरह गीला हुआ आटा     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पीटीआई के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च को टालने से सुरक्षा व्यवस्था का खर्च बढ़ गया है। कंटेनरों, पुलिस, खाना, होटल और परिवहन पर सरकारी खर्च 1 अरब पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा पहुंचने का अनुमान है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-4-1790405968.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[पीटीआई के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च के चलते पाकिस्तान पर जबरदस्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV/AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-4-1790405968.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-4-1790405968.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      पीटीआई के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च के चलते पाकिस्तान पर जबरदस्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV/AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>इस्लामाबाद: </strong>पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी कि PTI के प्रस्तावित प्रदर्शन ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च को करीब एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है, लेकिन सुरक्षा के लिए पहले से की गई तैयारियों का खर्च अब और बढ़ने वाला है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा व्यवस्था पर सरकारी खर्च 1 अरब पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा पहुंच सकता है। सबसे बड़ा खर्च उन 1,550 कंटेनरों का है, जिन्हें इस्लामाबाद में रास्ते रोकने और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए लगाया गया है। इन कंटेनरों का किराया ही रोजाना 4.65 करोड़ पाकिस्तानी रुपये है।</p>

<h3><strong>पहले एक हफ्ते की तैयारी थी, अब खर्च दो हफ्ते का</strong></h3>

<p>PTI ने पहले 27 सितंबर से इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च निकालने का ऐलान किया था। इसके लिए पुलिस ने करीब 820 मिलियन पाकिस्तानी रुपये यानी 82 करोड़ रुपये के बजट की मांग की थी। इस रकम में कंटेनरों का किराया, बाहर से आने वाले पुलिसकर्मियों के रहने, खाने और परिवहन का खर्च शामिल था। पुलिस को उम्मीद थी कि प्रदर्शन करीब एक सप्ताह में खत्म हो जाएगा। लेकिन PTI ने मार्च को अब 4 अक्टूबर तक टाल दिया है। ऐसे में पहले से की गई सुरक्षा व्यवस्था को ज्यादा समय तक बनाए रखना होगा। डॉन के मुताबिक, इसी वजह से कुल खर्च 1 अरब रुपये से ऊपर जाने का अनुमान है। बता दें कि <a href="https://www.indiatv.in/explainers/all-shops-to-close-by-9-pm-three-month-lockdown-like-situation-in-pakistan-explained-2026-09-17-1243834" target="_blank" title="रात 9 बजे तक बंद हो जाएंगी सभी दुकानें, पाकिस्तान में तीन महीने के लिए क्यों लगा लॉकडाउन?">पाकिस्तान इस समय भारी कंगाली के दौर से गुजर रहा है और वहां 3 महीने के लिए लॉकडाउन जैसे हालात हैं</a>।</p>

<p><iframe  src="https://www.indiatv.in/newsdata/poll-indiatv-hindi/1285" width="100%"></iframe></p>

<h3><strong>1,550 कंटेनरों का 4.65 करोड़ रुपये किराया</strong></h3>

<p>ऑल पाकिस्तान गुड्स अलायंस के चेयरमैन निसार हुसैन जाफरी के मुताबिक, शुरुआत में 40 फुट के कंटेनर के लिए रोजाना 40,000 रुपये और 20 फुट के कंटेनर के लिए 20,000 रुपये किराया मांगा गया था। बाद में दोनों तरह के कंटेनरों के लिए 30,000 रुपये प्रतिदिन की मांग रखी गई। पुलिस सूत्रों के मुताबिक 1,550 कंटेनरों का रोजाना किराया 4.65 करोड़ रुपये बैठता है। यानी:</p>

<ol>
	<li><strong>1 दिन: </strong>4.65 करोड़ रुपये</li>
	<li><strong>1 सप्ताह:</strong> 32.55 करोड़ रुपये</li>
	<li><strong>2 सप्ताह:</strong> 65.10 करोड़ रुपये</li>
</ol>

<p>PTI के मार्च को एक सप्ताह टालने के बाद इन कंटेनरों का खर्च भी लगभग दोगुना हो जाएगा।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-1790405991.jpg"    /></p>

<h3><strong>18 हजार पुलिसकर्मियों की हुई है तैनाती</strong></h3>

<p>सुरक्षा के लिए पंजाब से 16,000 और सिंध से 2,000 पुलिसकर्मियों को बुलाने का अनुरोध किया गया था। सिंध पुलिस के 2,000 जवान इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं। उनके ठहरने का इंतजाम पुलिस लाइंस मुख्यालय, फैसल मस्जिद और कम्युनिटी सेंटर G-13 में बने मार्की में किया गया है। इन जवानों को रोजाना तीन वक्त का खाना दिया जा रहा है। एक पुलिसकर्मी के खाने पर 600 रुपये प्रतिदिन खर्च हो रहे हैं। इस हिसाब से सिर्फ 2,000 सिंध पुलिसकर्मियों के खाने पर:</p>

<ol>
	<li><strong>रोजाना:</strong> 12 लाख रुपये</li>
	<li><strong>एक सप्ताह: </strong>84 लाख रुपये</li>
	<li><strong>2 सप्ताह: </strong>1.68 करोड़ रुपये</li>
</ol>

<p>खर्च होने का अनुमान है।</p>

<h3><strong>पंजाब पुलिस अभी पहुंची भी नहीं, खर्च शुरू</strong></h3>

<p>पंजाब से आने वाले 16,000 पुलिसकर्मियों का दल 25 सितंबर तक इस्लामाबाद पहुंचना था, लेकिन शुक्रवार शाम तक यह दल राजधानी नहीं पहुंचा था। इसके बावजूद इनके लिए खाने का अनुमानित खर्च 96 लाख रुपये प्रतिदिन है। एक सप्ताह में यह रकम 6.72 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है। यानी जिस पुलिस बल की पूरी तैनाती अभी हुई भी नहीं है, उसके लिए भी बड़ी रकम का इंतजाम करना पड़ रहा है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-1-1790405991.jpg"    /></p>

<h3><strong>पुलिस के आने-जाने पर भी लाखों का खर्च</strong></h3>

<p>पुलिसकर्मियों को उनके ठहरने की जगह से ड्यूटी प्वाइंट तक पहुंचाने के लिए करीब 70 कोस्टर, 30 डबल-कैबिन वाहन और बसें भी लगाई गई हैं। 70 कोस्टर का रोजाना किराया 10.5 लाख रुपये है, जबकि 30 डबल-केबिन वाहनों पर 3 लाख रुपये रोजाना खर्च हो रहे हैं। इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के लिए 13 होटलों में 175 कमरे बुक किए गए हैं। इनमें 11 होटलों के 157 कमरों में इंस्पेक्टर से SP रैंक तक के अधिकारियों के ठहरने की व्यवस्था है। इन कमरों का किराया 7.545 लाख रुपये प्रतिदिन और एक सप्ताह के लिए 52.815 लाख रुपये बताया गया है। DIG और SSP स्तर के अधिकारियों के लिए दो होटलों में बुक किए गए 18 कमरों का किराया इसमें शामिल नहीं है, क्योंकि उसका आंकड़ा उपलब्ध नहीं बताया गया है।</p>

<h3><strong>2700 वाहन और उनके ड्राइवर पुलिस के कब्जे में</strong></h3>

<p>सुरक्षा व्यवस्था का एक और बड़ा पहलू सामने आया है। निसार हुसैन जाफरी के मुताबिक, इस्लामाबाद और पंजाब पुलिस ने करीब 2,700 कंटेनर वाहनों को उनके तीन-तीन सदस्यों वाले चालक दल के साथ कब्जे में लिया है। करीब 400 वाहन और उनके चालक दल अभी नहीं मिले हैं। बाकी वाहनों के चालक दल को पुलिस थानों में रखा गया है। जाफरी के मुताबिक, पुलिस ने ड्राइवरों और दूसरे कर्मचारियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन उन्हें खाने के अलावा पुलिस स्टेशन से बाहर जाने की अनुमति नहीं है। उनके मोबाइल फोन, वाहन के कागजात और चाबियां भी ले ली गई हैं। पुलिस के मुताबिक, बड़े कंटेनर ट्रकों को चलाने के लिए स्पेशल स्किल की जरूरत होती है। इसलिए कंटेनर छोड़ने का फैसला होने तक उनके चालक दल को थानों में रखा गया है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pti-protest-3-1790405991.jpg"    /></p>

<h3><strong>कई अन्य शहरों में भी जब्त किए गए वाहन</strong></h3>

<p>कंटेनर और वाहन इस्लामाबाद, रावलपिंडी, लाहौर, झंग, हसन अब्दाल, अटक, कामोके, टैक्सिला, झेलम, मियांवाली, चकवाल, फैसलाबाद और गुजरात में जब्त किए गए हैं। इन 2,700 वाहनों में करीब 450 वाहन ऐसे हैं, जिनमें सामान लदा हुआ था। इनमें दवाइयां, खाद्य सामग्री और केमिकल जैसी चीजें शामिल हैं। इसका मतलब यह है कि सुरक्षा इंतजाम का असर सिर्फ सरकारी खर्च तक सीमित नहीं है, बल्कि माल ढुलाई और कारोबार पर भी पड़ सकता है।</p>

<h3><strong>आखिर PTI क्यों कर रही है प्रदर्शन?</strong></h3>

<p>PTI ने यह प्रदर्शन और लॉन्ग मार्च अपने संस्थापक और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर बुलाया है। इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं और कई मामलों में उन्हें दोषी ठहराया जा चुका है। PTI नेतृत्व ने अब मार्च की शुरुआत 27 सितंबर के बजाय 4 अक्टूबर को करने का फैसला किया है। पार्टी के मुताबिक, मार्च का उद्देश्य इमरान खान की रिहाई समेत अपनी राजनीतिक मांगों को आगे बढ़ाना है।</p>

<h3><strong>इमरान के बेटे ने समर्थकों को क्या चेतावनी दी?</strong></h3>

<p>इमरान खान के बेटे कासिम खान ने शुक्रवार को समर्थकों से अपील की कि वे PTI के 27 सितंबर वाले प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान अदियाला जेल की तरफ मार्च न करें। उन्होंने आरोप लगाया कि समर्थकों की ऐसी लामबंदी को पाकिस्तानी अधिकारी जेल पर किसी 'जवाबी हमले' के बहाने के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। उनके मुताबिक, इससे उनके पिता की जान खतरे में पड़ सकती है।</p>

<p><script>(function(d, s, id) {
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<h3><strong>पाकिस्तान के लिए यह एक्स्ट्रा खर्च क्यों भारी है?</strong></h3>

<p>यह खर्च ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान की वित्तीय गुंजाइश पहले से सीमित बताई जा रही है। IMF ने अप्रैल 2026 की अपनी समीक्षा में कहा था कि पाकिस्तान की fiscal space यानी सरकारी खर्च की गुंजाइश बहुत सीमित है और आर्थिक झटकों की स्थिति में खर्च को प्राथमिकताओं के हिसाब से नियंत्रित करना जरूरी होगा। IMF ने यह भी कहा था कि क्षेत्रीय संघर्ष से महंगाई और बाहरी खाते पर दबाव बढ़ सकता है। इसलिए PTI के प्रदर्शन को रोकने के लिए कंटेनर, पुलिस, होटल, खाना और परिवहन पर अतिरिक्त खर्च सिर्फ एक सुरक्षा बिल नहीं है। यह ऐसे समय में सरकारी खजाने पर अतिरिक्त दबाव है, जब सरकार को सीमित संसाधनों में दूसरे जरूरी खर्च भी संभालने हैं।</p>

<h3><strong>अगर प्रदर्शन एक हफ्ते और टला है तो क्या होगा?</strong></h3>

<p>अगर प्रदर्शन एक सप्ताह और टलता है तो सरकार को पहले से की गई तैयारियों को बनाए रखने के लिए और पैसे खर्च करने पड़ेंगे। सिर्फ कंटेनरों का दो सप्ताह का किराया 65.1 करोड़ रुपये है। इसके ऊपर पुलिस का खाना, होटल, वाहन और दूसरे सुरक्षा इंतजाम हैं। यानी एक राजनीतिक प्रदर्शन को लेकर तैयार की गई सुरक्षा व्यवस्था जितनी लंबी चलेगी, सरकारी खजाने पर उतना ही अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। पाकिस्तान की मौजूदा सीमित राजकोषीय गुंजाइश को देखते हुए इसे सरकार के लिए एक अतिरिक्त वित्तीय दबाव के तौर पर देखा जा सकता है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/explainers/houthi-attacks-on-saudi-arabia-what-will-pakistan-do-next-3-possible-options-explained-2026-09-10-1242404" target="_blank" title="हूतियों ने सऊदी पर हमले नहीं रोके तो पाकिस्तान क्या करेगा? सामने हैं 3 बड़ी संभावनाएं">हूतियों ने सऊदी पर हमले नहीं रोके तो पाकिस्तान क्या करेगा? सामने हैं 3 बड़ी संभावनाएं</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/how-imran-khan-party-long-march-is-adding-to-the-pakistan-financial-burden-2026-09-26-1245460     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/how-imran-khan-party-long-march-is-adding-to-the-pakistan-financial-burden-2026-09-26-1245460 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 26 Sep 2026 12:35:24 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सड़क पार करते समय हादसा हुआ तो किसकी गलती? पैदल यात्री और ड्राइवर के अधिकार समझें     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ सड़क पार करते समय हादसे में हमेशा पैदल यात्री या ड्राइवर को ही दोषी नहीं माना जाता। हादसे की परिस्थितियों, ट्रैफिक नियमों, वाहन की रफ्तार, पैदल यात्री की स्थिति और चालक की लापरवाही जैसे तथ्यों के आधार पर ही कानून जिम्मेदारी तय करता है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-3-1790311876.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[भारत में सड़क पार करते हुए हर साल हजारों पैदल यात्रियों की जान जाती है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-3-1790311876.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-3-1790311876.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      भारत में सड़क पार करते हुए हर साल हजारों पैदल यात्रियों की जान जाती है।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Pedestrian Road Accident Rules: </strong><a href="https://www.indiatv.in/delhi/delhi-road-accidentt-dtc-bus-marshal-hit-by-bike-while-crossing-road-dies-after-coming-under-truck-2026-09-25-1245232" target="_blank" title="दिल्ली में सड़क पार कर रही DTC बस मार्शल को बाइक ने मारी टक्कर, ट्रक की चपेट में आने से मौत">दिल्ली में गुरुवार को सड़क हादसे में 55 साल की एक महिला की जान चली गई</a>। पुलिस ने बताया कि खजूरी फ्लाईओवर के पास सड़क पार करते समय एक मोटरसाइकिल ने उन्हें टक्कर मार दी जिसके बाद वह एक ट्रक की चपेट में आ गईं और उनकी जान चली गई। आपने ऐसी ही कई खबरें पढ़ी होंगी जहां पैदल सड़क पार करते वक्त लोग गाड़ी की चपेट में आ गए और अपनी जान गंवा बैठे। दरअसल, सड़क पर चलते समय सबसे ज्यादा जोखिम पैदल यात्रियों को रहता है और कई बार उनके साथ गंभीर हादसा हो जाता है। ऐसे मामलों में अक्सर सवाल उठता है कि गलती किसकी मानी जाएगी, पैदल यात्री की या वाहन चालक की? आइए, समझते हैं।</p>

<h3><strong>पैदल यात्री के लिए क्या कहते हैं नियम?</strong></h3>

<p>2017 में आए मोटर व्हीकल्स (ड्राइविंग) रेगुलेशन्स में पैदल यात्रियों को सड़क का जरूरी हिस्सा माना गया है। इन नियमों के मुताबिक, ड्राइवर और गाड़ी में बैठे लोगों को पैदल यात्रियों, साइकिल चलाने वालों, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों की सुरक्षा का खास ध्यान रखना चाहिए। खासकर ऐसी जगह जहां पैदल यात्री सड़क पार कर रहे हों और वहां कोई ट्रैफिक सिग्नल न हो, तो वहां पहुंचते समय वाहन चालक को गाड़ी की रफ्तार कम करनी चाहिए।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-1790311876.jpg"    /></p>

<p>सिर्फ इतना ही नहीं, जरूरत पड़ने पर गाड़ी रोकनी चाहिए और पैदल यात्री को पहले सड़क पार करने का मौका देना चाहिए। इसी तरह, अगर सड़क के किनारे पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ या साइकिल चलाने वालों के लिए अलग रास्ता बना हुआ है, तो वहां वाहन नहीं चलाया जा सकता। ऐसा सिर्फ तब किया जा सकता है, जब पुलिस अधिकारी इसकी इजाजत दें या वहां लगे ट्रैफिक सिग्नल से इसकी अनुमति मिलती हो।</p>

<h3><strong>जेब्रा क्रॉसिंग पर ड्राइवर की जिम्मेदारी क्या है?</strong></h3>

<p>जेब्रा या पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पैदल चल रहे लोगों के सड़क पार करने के लिए बनाया जाता है। नियमों के मुताबिक, वाहन चालक को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग के पास खास सावधानी रखनी होती है। ट्रैफिक सिग्नल पर भी वाहन को पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग से पहले रुकना होता है। अगर हरी बत्ती होने के बावजूद कोई पैदल यात्री पहले से इंटरसेक्शन या संबंधित पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग पर मौजूद है, तो ड्राइवर को उसे रास्ता देना होता है। हादसे के समय पैदल यात्री कहां था और गाड़ी किस तरह चलाई जा रही थी, ये बातें भी महत्वपूर्ण होती हैं।</p>

<h3><strong>गलत जगह से सड़क पार करने पर किसकी गलती?</strong></h3>

<p>सड़क हादसे के बाद सिर्फ यह देखकर फैसला नहीं किया जाता कि पैदल यात्री सड़क कहां से पार कर रहा था। जांच में कई बातों को देखा जाता है। जैसे वह व्यक्ति किस जगह से सड़क पार कर रहा था, वहां पैदल यात्रियों के लिए रास्ता या सिग्नल बना था या नहीं, वाहन कितनी तेज रफ्तार से आ रहा था और चालक के पास हादसा रोकने या वाहन को संभालने का पर्याप्त समय था या नहीं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-1-1790311876.jpg"    /></p>

<p>इसे आसान भाषा में ऐसे समझ सकते हैं कि अगर हादसे में सिर्फ वाहन चालक की ही नहीं, बल्कि किसी हद तक पीड़ित की भी लापरवाही सामने आती है, तो अदालत पूरे मामले के तथ्यों को देखकर जिम्मेदारी तय कर सकती है। इसलिए हर सड़क हादसे में पहले से यह तय नहीं माना जा सकता कि गलती केवल ड्राइवर की थी या केवल पैदल यात्री की। जेब्रा क्रॉसिंग जैसी जगहों पर वाहन चालक की सावधानी हादसे की जांच में एक महत्वपूर्ण बात हो सकती है।</p>

<h3><strong>ड्राइवर की लापरवाही पर क्या कार्रवाई हो सकती है?</strong></h3>

<p>अगर जांच में पता चलता है कि ड्राइवर ने लापरवाही से या तेज और खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाई, जिससे किसी की जान को खतरा हुआ या किसी को चोट लग सकती थी, तो BNS की धारा 281 के तहत कार्रवाई हो सकती है। इस धारा में सड़क पर लापरवाही से गाड़ी चलाना अपराध माना गया है। अगर किसी व्यक्ति की मौत वाहन चालक की लापरवाही के कारण होती है और मामला गैर-इरादतन हत्या की श्रेणी में नहीं आता, तो BNS की धारा 106(1) के तहत कार्रवाई हो सकती है। इसमें 5 साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।</p>

<h3><strong>ऐसे हादसे के बाद ड्राइवर को क्या करना चाहिए?</strong></h3>

<p>मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के तहत हादसे में किसी व्यक्ति को चोट लगने या संपत्ति को नुकसान होने पर ड्राइवर या वाहन के प्रभारी व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह घायल को जल्द से जल्द इलाज दिलाने के लिए उचित कदम उठाए और जरूरत पड़ने पर उसे नजदीकी डॉक्टर या अस्पताल पहुंचाए। साथ ही पुलिस को मांगी गई जानकारी देनी होती है और घटना की जानकारी जल्द से जल्द, अधिकतम 24 घंटे के भीतर, नजदीकी पुलिस स्टेशन को देनी होती है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pedestrian-road-accident-rules-2-1790311876.jpg"    /></p>

<h3><strong>पीड़ित परिवार को मुआवजा कैसे मिल सकता है?</strong></h3>

<p>मोटर व्हीकल्स एक्ट में सड़क हादसों के पीड़ितों के लिए मुआवजे का भी प्रावधान है। धारा 164 के तहत वाहन के इस्तेमाल से हुए हादसे में मौत होने पर कानूनी वारिसों को 5 लाख रुपये और गंभीर चोट के मामले में 2.5 लाख रुपये मुआवजे का प्रावधान है। इस प्रावधान के तहत दावा करने वाले को वाहन मालिक या वाहन से जुड़ी गलती साबित करना जरूरी नहीं है। इसके अलावा मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण यानी MACT के जरिए भी सड़क हादसे में मौत या चोट से जुड़े मुआवजे के दावे किए जा सकते हैं। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 165 ऐसे ट्रिब्यूनल्स के गठन का प्रावधान करती है।</p>

<h3><strong>तो कौन होता है दोषी, पैदल यात्री या ड्राइवर?</strong></h3>

<p>ऐसे में देखा जाए तो सड़क पार करते समय हादसा होने पर यह कहना सही नहीं है कि हमेशा पैदल यात्री दोषी होगा या ड्राइवर का कसूर होगा। कानून दोनों पक्षों के व्यवहार और हादसे की परिस्थितियों को देखता है। पैदल यात्री को सुरक्षित तरीके से सड़क पार करनी चाहिए, जबकि गाड़ी के ड्राइवर पर सड़क पर चल रहे लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी की जिम्मेदारी है। इस तरह के सड़क हादसों में फैसला घटनास्थल के सबूत, ट्रैफिक नियमों और पूरे घटनाक्रम की जांच के आधार पर सुनाया जाता है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/explainers/birth-death-certificates-rules-revised-amendment-bill-2026-passed-in-lok-sabha-explained-2026-07-31-1234634" target="_blank" title="जन्म और मृत्यु पंजीकरण के सख्त हो गए हैं नियम, जान लें पूरी बात, नहीं तो होगी परेशानी">जन्म और मृत्यु पंजीकरण के सख्त हो गए हैं नियम, जान लें पूरी बात, नहीं तो होगी परेशानी</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/pedestrian-hit-by-vehicle-who-is-at-fault-know-pedestrian-rights-driver-duties-and-compensation-rules-in-india-2026-09-25-1245245     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/pedestrian-hit-by-vehicle-who-is-at-fault-know-pedestrian-rights-driver-duties-and-compensation-rules-in-india-2026-09-25-1245245 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 25 Sep 2026 10:27:09 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     CEC ज्ञानेश कुमार पर लगे हैं गंभीर आरोप, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के क्या हैं नियम?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर कई तरह के गंभीर आरोप लगे हैं। इसके बाद अब विपक्ष उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने जा रहा है। जानें क्या है महाभियोग प्रस्ताव, कैसे सीईसी को उनके पद से हटाया जा सकता है?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cec-gyanesh-kumar-1790273727.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI (FILE)]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cec-gyanesh-kumar-1790273727.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cec-gyanesh-kumar-1790273727.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार
                      <span class="copyright">Image Source : PTI (FILE)</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक मतभेदों की मीडिया रिपोर्टों के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश के शीर्ष चुनावी नेतृत्व पर तीखा हमला किया और कथित वोट चोरी में शामिल लोगों को साफ़ तौर पर "देशद्रोही" बताया। मीडिया रिपोर्टों से पता चला है कि दो चुनाव आयुक्तों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के नेतृत्व में कामकाज के तरीकों और वोटर लिस्ट के डेटा मैनेजमेंट को लेकर 14 अलग-अलग मौकों पर औपचारिक रूप से लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।</p>
<p>इस विवाद पर विपक्ष ने जल्द ही संसद के दोनों सदनों में <a href="https://www.indiatv.in/india/politics/opposition-move-an-impeachment-motion-against-cec-gyanesh-kumar-tabled-next-two-weeks-2026-09-24-1245150">मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाए जाने की बात कही है</a>। कहा जा रहा है कि, इसके लिए कानूनी विशेषज्ञों की मदद से महाभियोग प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया जा रहा है और जल्द ही संयुक्त विपक्ष की ओर से दोनों सदनों में नोटिस सौंपा जाएगा। ऐसे में आने वाले समय में चुनाव आयुक्त के लिए परेशानी बढ़ सकती है।</p>
<p><strong>अहम होता है सीईसी का पद</strong><br />
बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग में तीन चुनाव आयुक्त होते हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) का पद सबसे अहम होता है। इसके अलावा चुनाव आयोग में दो और आयुक्त हैं, और इसी वजह से किसी भी तरह का फैसला या सहमति तीनों आयुक्तों की मर्जी से ली जाती है। यानी फैसला सर्वसम्मति से ही लिया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स की जांच से सामने आई इन बातों के कारण विपक्ष ने सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की है। तो ऐसे में जान लेते हैं कि संसद में किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की क्या प्रक्रिया होती है?</p>
<p><strong>चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति कैसे होती है?</strong></p>
<ul><li>भारत निर्वाचन आयोग पर देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कराने की बड़ी ज़िम्मेदारी होती है।</li>
<li>देश के राष्ट्रपति तीन सदस्यों वाली एक सिलेक्शन कमिटी की सिफारिश पर, मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करते हैं।</li>
<li>इस कमिटी में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और केंद्रीय कैबिनेट का एक सदस्य शामिल होते हैं।</li>
<li>2023 के कानून के अनुसार, चुनाव आयुक्त के लिए नियुक्त होने वाले लोगों के पास पहले सरकार में सेक्रेटरी-लेवल के पदों पर काम करने का अनुभव होना चाहिए। </li>
<li>उन्हें ईमानदार होना चाहिए।</li>
<li>उन्हें चुनाव के मैनेजमेंट और संचालन का ज्ञान और अनुभव होना चाहिए। </li>
<li>आयुक्तों की नियुक्तियां छह साल के कार्यकाल या 65 साल की उम्र तक, जो भी पहले हो, के लिए की जाती हैं।</li>
<li>मुख्य चुनाव आयुक्त को वही सुविधाएं और आर्थिक लाभ मिलते हैं जो सुप्रीम कोर्ट के जजों को मिलते हैं।</li>
</ul><p><strong>सीईसी को कैसे हटाया जा सकता है?</strong></p>
<ul><li>संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से उसी तरह और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है।</li>
<li>यह बात 2023 के एक्ट की धारा 11(2) में भी कही गई है।</li>
<li>सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाने की प्रक्रिया बताई गई है, उन्हें केवल "साबित कदाचार या अक्षमता" के आधार पर ही हटाया जा सकता है।</li>
<li>कदाचार में कोई भी भ्रष्ट तरीका या पद का गलत इस्तेमाल शामिल हो सकता है।</li>
<li>अक्षमता का मतलब ऐसी स्थिति से है जब अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो।</li>
<li>मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना किसी अन्य चुनाव आयुक्त या क्षेत्रीय आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया जाएगा।</li>
<li>भारतीय निर्वाचन आयोग को राजनीतिक दबाव से बचाने के लिए, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया को बहुत मुश्किल बनाया गया है।</li>
</ul><p><strong>महाभियोग प्रस्ताव लाने के बाद क्या होगा</strong><br />
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए, दोनों सदनों के सदस्यों को कदाचार या अक्षमता का स्पष्ट आरोप लगाते हुए एक प्रस्ताव का नोटिस लाना होगा, जिसे महाभियोग प्रस्ताव कहा जाता है। महाभियोग प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने के लिए, लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर होने चाहिए। यदि प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की सच्चाई की जांच के लिए एक जांच की जाती है। </p>
<p>इसके बाद, पद से हटाने के प्रस्ताव को संसद के दोनों सदनों में मौजूद और वोट देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से पास कराना होता है। एक बार प्रस्ताव पास हो जाने पर, राष्ट्रपति मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का आदेश देते हैं। एक बार संवैधानिक ज़रूरतें पूरी हो जाने के बाद राष्ट्रपति के पास कोई विकल्प नहीं बचता, क्योंकि इस मामले में वे संसद की सलाह मानी जाती है।</p>
<p><strong>कब खारिज हुआ था महाभियोग प्रस्ताव</strong><br />
अप्रैल में, राज्यसभा के चेयरमैन और लोकसभा के स्पीकर ने विपक्ष की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दोनों सदनों में पेश किए गए महाभियोग प्रस्तावों को खारिज कर दिया था। इसी साल 12 मार्च को लोकसभा और राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव पेश करने में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने विपक्ष की अगुवाई की थी और लोकसभा वाले प्रस्ताव पर 130 सांसदों और राज्यसभा वाले प्रस्ताव पर 63 सांसदों ने हस्ताक्षर किए थे। उस वक्त मुख्य चुनाव आयुक्त पर पक्षपाती और भेदभावपूर्ण व्यवहार करने और चुनाव में धोखाधड़ी और एसआईआर की जांच में बाधा डालने के आरोप लगाए गए थे।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br /><a href="https://www.indiatv.in/india/politics/congress-leader-rahul-gandhi-attack-on-bjp-and-cec-gyanesh-kumar-2026-09-24-1245154">राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार से मांगा इस्तीफा, कहा- 'BJP के खिलाफ एंटी-इंकम्बेंसी क्यों नहीं? मिल गया जवाब'</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/serious-allegations-on-cec-gyanesh-kumar-rules-of-removing-chief-election-commissioner-2026-09-24-1245206     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/serious-allegations-on-cec-gyanesh-kumar-rules-of-removing-chief-election-commissioner-2026-09-24-1245206 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 24 Sep 2026 23:49:10 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     कितना खतरनाक है चक्रवात 'ARNAB', बंगाल की खाड़ी में बना डीप डिप्रेशन, किन राज्यों को खतरा?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ बंगाल की खाड़ी में बना मौसम सिस्टम अब डीप डिप्रेशन में बदल चुका है और ओडिशा व आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा है। हवा की रफ्तार बढ़ने पर यह खतरनाक चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/arnab-1790139790.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[डीप डिप्रेशन के बाद बनेगा चक्रवात 'ARNAB'? ]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/arnab-1790139790.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/arnab-1790139790.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      डीप डिप्रेशन के बाद बनेगा चक्रवात 'ARNAB'? 
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p class="rtejustify">बंगाल की खाड़ी में बने मौसम सिस्टम के कारण मंगलवार को ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हुई। IMD ने बताया कि यह सिस्टम डीप डिप्रेशन में बदल चुका है और तट की ओर बढ़ रहा है। फिलहाल, यह सिस्टम बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक डीप डिप्रेशन के रूप में है और आगे चलकर खतरनाक चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकता है। चक्रवाती तूफानों के नामों की सूची के अनुसार, उत्तरी हिंद महासागर में बनने वाले <strong><a href="https://www.indiatv.in/india/national/cyclonic-storm-arnab-set-to-wreak-havoc-imd-issues-warning-schools-closed-in-odisha-2026-09-22-1244704" target="_blank" title="https://www.indiatv.in/india/national/cyclonic-storm-arnab-set-to-wreak-havoc-imd-issues-warning-schools-closed-in-odisha-2026-09-22-1244704">अगले चक्रवात का नाम 'अर्नब' होगा।</a></strong></p>

<h3 class="rtejustify"><strong>IMD का ताजा अपडेट</strong></h3>

<p class="rtejustify">IMD ने बुधवार को बताया कि बंगाल की खाड़ी के पश्चिम-मध्य और उससे जुड़े उत्तर-पश्चिम हिस्से में बना डीप डिप्रेशन पिछले छह घंटों में 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम की ओर बढ़ा। सुबह 5:30 बजे यह सिस्टम इसी क्षेत्र में केंद्रित था। यह कलिंगपट्टनम से करीब 70 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, गोपालपुर से 150 किलोमीटर दक्षिण, विशाखापत्तनम से 150 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व और पुरी से 230 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम में था।</p>

<p class="rtejustify">IMD के मुताबिक, इस मौसम सिस्टम के पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने की बहुत अधिक संभावना है। यह बुधवार, 23 सितंबर की रात तक विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) और गोपालपुर (ओडिशा) के बीच, कलिंगपट्टनम के पास से उत्तर आंध्र प्रदेश-दक्षिण ओडिशा तट को डीप डिप्रेशन के रूप में पार कर सकता है।</p>

<p class="rtejustify"><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/Indiametdept/status/2102601936436707552"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<h3 class="rtejustify"><strong>डीप डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान को कैसे पहचाना जाता है?</strong></h3>

<p class="rtejustify">IMD के अनुसार, मौसम विभाग कम दबाव वाले सिस्टम को उसकी तीव्रता और समुद्र के ऊपर अधिकतम लगातार हवा की गति के आधार पर वर्गीकृत करता है। </p>

<ol>
	<li class="rtejustify">17 से 27 नॉट (31-50 किमी प्रति घंटे) की हवा की रफ्तार वाले सिस्टम को डिप्रेशन कहा जाता है।</li>
	<li class="rtejustify">28 से 33 नॉट (52-61 किमी प्रति घंटे) की रफ्तार वाले सिस्टम को डीप डिप्रेशन कहा जाता है।</li>
	<li class="rtejustify">34 नॉट (63 किमी प्रति घंटे) या उससे अधिक की रफ्तार वाले सिस्टम को चक्रवाती तूफान कहा जाता है। </li>
</ol>

<p class="rtejustify">इसका मतलब है कि हर लो प्रेशर सिस्टम अपने आप चक्रवात नहीं बनता। चक्रवाती तूफान की श्रेणी में आने के लिए सिस्टम को निर्धारित हवा की गति की सीमा पार करनी होती है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>किन राज्यों पर पड़ेगा असर?</strong></h3>

<p class="rtejustify">ओडिशा सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में शामिल हो सकता है। राज्य के कई हिस्सों में पहले से ही भारी बारिश हो रही है। बुधवार रात डीप डिप्रेशन के राज्य से टकराने की आशंका को देखते हुए सरकार ने रणनीतिक स्थानों पर कर्मचारी और मशीनरी तैनात कर दी है। 11 जिलों के कलेक्टरों ने वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया। अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर लोगों को ठहराने के लिए चक्रवात और बाढ़ राहत केंद्र तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।</p>

<p class="rtejustify">लगातार हो रही भारी बारिश को देखते हुए जरूरी सामान और उपकरणों का पर्याप्त भंडार तैयार रखा गया है। स्वास्थ्य और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें भी हाई अलर्ट पर हैं। नदियों, जलाशयों और बांधों में पानी के स्तर की लगातार निगरानी की जा रही है।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>ओडिशा में स्कूल बंद</strong></h3>

<p class="rtejustify">भारी बारिश को देखते हुए ओडिशा के चार जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है। IMD के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है और निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में खतरा अधिक है, जहां पहले से लगातार बारिश हो रही है। </p>

<ol>
	<li class="rtejustify">खुर्दा जिले में मंगलवार से गुरुवार तक सभी स्कूल बंद रखने को कहा गया है।</li>
	<li class="rtejustify">गंजाम जिले में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों को मंगलवार से गुरुवार तक बंद रखने का आदेश दिया गया है।</li>
	<li class="rtejustify">जगतसिंहपुर जिले में मंगलवार को सभी स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का फैसला किया गया है।</li>
	<li class="rtejustify">गजपति जिले में मंगलवार से गुरुवार तक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रहेंगे। यह आदेश सरकारी और निजी दोनों संस्थानों पर लागू होगा।</li>
</ol>

<p class="rtejustify">भारी बारिश और खराब मौसम को देखते हुए कुछ सड़कों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। इनमें गंजाम और कंधमाल को जोड़ने वाला कलिंगा घाट भी शामिल है। चिल्का झील में सतपाड़ा और जाह्नीकुड़ा के बीच फेरी सेवा भी 25 सितंबर तक चार दिनों के लिए बंद रहेगी। गजपति, गंजाम और कुछ अन्य जिलों में पेड़ गिरने और सड़कें बंद होने की खबरें भी सामने आई हैं।</p>

<h3 class="rtejustify"><strong>आंध्र प्रदेश में भी असर की आशंका</strong></h3>

<p class="rtejustify">डीप डिप्रेशन का असर तटीय आंध्र प्रदेश पर भी पड़ने की संभावना है। आंध्र प्रदेश सरकार ने संभावित चक्रवाती तूफान के प्रभाव से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। गृह एवं आपदा प्रबंधन मंत्री वंगालापुडी अनिता ने अधिकारियों को 24 घंटे कंट्रोल रूम चालू रखने और मौसम की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोगों से तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बड़े होर्डिंग्स और जर्जर इमारतों से दूर रहने की अपील की है।</p>

<p class="rtejustify"><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/maharashtra/iit-bombay-student-suicide-case-professor-suryanarayana-dulla-sent-on-leave-10-member-committee-formed-for-investigation-2026-09-23-1244828" target="_blank" title="IIT बॉम्बे सुसाइड केस में एक्शन, प्रोफेसर सूर्यनारायणा दुल्ला को छुट्टी पर भेजा गया, जांच के लिए बनी 10 सदस्यीय कमेटी"><strong>IIT बॉम्बे सुसाइड केस में एक्शन, प्रोफेसर सूर्यनारायणा दुल्ला को छुट्टी पर भेजा गया, जांच के लिए बनी 10 सदस्यीय कमेटी</strong></a></p>

<p class="rtejustify"><a href="https://www.indiatv.in/india/national/beef-demand-in-tamil-nadu-government-hostels-minister-vanni-arasu-said-decision-after-discussion-2026-09-23-1244797" target="_blank" title="क्या तमिलनाडु के सरकारी हॉस्टलों में बीफ मिलेगा? मंत्री ने कहा- छात्रों ने मांग की है, चर्चा के बाद फैसला"><strong>क्या तमिलनाडु के सरकारी हॉस्टलों में बीफ मिलेगा? मंत्री ने कहा- छात्रों ने मांग की है, चर्चा के बाद फैसला</strong></a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/deep-depression-in-bay-of-bengal-will-it-turn-into-cyclone-arnab-know-weather-system-2026-09-23-1244832     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/deep-depression-in-bay-of-bengal-will-it-turn-into-cyclone-arnab-know-weather-system-2026-09-23-1244832 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 10:13:37 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     भारत को UNSC में स्थायी सीट मिलेगी कैसे? जानें कौन-कौन साथ और चीन क्यों है अहम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ भारत की UNSC स्थायी सदस्यता की मांग को V4 के 4 यूरोपीय देशों का समर्थन मिला है। हालांकि चीन समेत सभी मौजूदा P5 देशों की भूमिका अहम है, क्योंकि UN चार्टर संशोधन के लिए सभी स्थायी सदस्यों की पुष्टि जरूरी है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-1790066966.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[UNSC में स्थायी सदस्यता की भारत की मांग में कुछ रोड़े अभी भी हैं।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-1790066966.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-1790066966.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      UNSC में स्थायी सदस्यता की भारत की मांग में कुछ रोड़े अभी भी हैं।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>India Permanent UNSC Seat: </strong><a href="https://www.indiatv.in/world/us/india-gets-v4-support-for-permanent-unsc-seat-as-jaishankar-holds-first-v4-plus-india-meet-in-new-york-2026-09-22-1244617" target="_blank" title="'भारत को UNSC का स्थायी सदस्य होना ही चाहिए', 4 यूरोपीय देशों ने किया जोरदार समर्थन">संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानी कि UNSC में स्थायी सदस्यता की भारत की मांग को हाल में 4 यूरोपीय देशों का समर्थन मिला है</a>। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र से इतर हुई पहली V4+इंडिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा कि भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में 'टेबल पर' होना चाहिए। लेकिन समर्थन बढ़ने के बावजूद भारत की स्थायी सीट का रास्ता आसान नहीं है। आइए, समझने की कोशिश करते हैं कि ऐसा क्यों है।</p>

<h3><strong>V4 के चारों देशों ने क्या कहा?</strong></h3>

<p>V4 यानी वाइसेग्राड ग्रुप में पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और चेक गणराज्य शामिल हैं। पहली V4+India विदेश मंत्री स्तर की बैठक में इन चारों देशों ने भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन किया। स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने कहा,</p>

<blockquote>
<p>'हम सभी V4 देशों की इस बात पर सहमति है कि भारत, ग्लोबल साउथ का हिस्सा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की उभरती महाशक्ति होने के नाते, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में टेबल पर होना चाहिए।'</p>
</blockquote>

<p>यह समर्थन ऐसे समय मिला है जब भारत लंबे समय से UNSC की संरचना में बदलाव की मांग कर रहा है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-p5-1-1790067326.jpg"    /></p>

<h3><strong>भारत UNSC में बदलाव क्यों चाहता है?</strong></h3>

<p>भारत का तर्क है कि सुरक्षा परिषद की मौजूदा संरचना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी थी। आज दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक स्थिति काफी बदल चुकी है, लेकिन परिषद की स्थायी सदस्यता की व्यवस्था में उसी अनुपात में बदलाव नहीं हुआ है। भारत सुरक्षा परिषद की स्थायी और अस्थायी, दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करता है। उसका जोर एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत विकासशील देशों की बेहतर भागीदारी पर है। भारत अब तक 1950-51, 1967-68, 1972-73, 1977-78, 1984-85, 1991-92, 2011-12 और 2021-22 में UNSC का 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-supporters-1790067326.jpg"    /></p>

<h3><strong>भारत को किन देशों का समर्थन मिला है?</strong></h3>

<p>भारत को UNSC की स्थायी सदस्यता के लिए कई बड़े देशों का समर्थन प्राप्त है। मौजूदा 5 स्थायी सदस्यों यानी P5 में से अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन कर चुके हैं। रूस लंबे समय से भारत के समर्थन में रहा है। अब V4 के चार देशों के समर्थन से भारत के पक्ष में खड़े देशों की सूची और विस्तृत हुई है। भारत G4 समूह का भी हिस्सा है। इसमें भारत के अलावा ब्राजील, जर्मनी और जापान शामिल हैं। G4 देश एक-दूसरे की UNSC की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करते हैं और सुरक्षा परिषद की स्थायी तथा अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार की मांग करते हैं।</p>

<h3><strong>अफ्रीकी संघ की भी अलग है मांग</strong></h3>

<p>UNSC सुधार को लेकर अफ्रीकी संघ यानी कि AU भी अपनी मांग रखता रहा है। अफ्रीकी देशों का जोर परिषद में अफ्रीका की स्थायी भागीदारी बढ़ाने पर है। अफ्रीकी संघ के Ezulwini Consensus और Sirte Declaration में अफ्रीका के लिए स्थायी प्रतिनिधित्व की मांग दर्ज है। BRICS के विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान में भी अफ्रीकी देशों की इन आकांक्षाओं को मान्यता दी गई है। इस तरह UNSC सुधार की बहस सिर्फ भारत की सीट तक सीमित नहीं है। इसमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका समेत विकासशील देशों के प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है।</p>

<h3><strong>भारत की मांग पर चीन का रुख क्या है?</strong></h3>

<p>चीन की स्थिति इस पूरी प्रक्रिया में खास महत्व रखती है, क्योंकि वह UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में शामिल है। 2025 के BRICS रियो डि जेनेरियो घोषणा-पत्र में चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की संयुक्त राष्ट्र, जिसमें सुरक्षा परिषद भी शामिल है, में 'बड़ी भूमिका' की आकांक्षा का समर्थन दोहराया था। हालांकि, यह समर्थन भारत को नए स्थायी सदस्य के रूप में स्पष्ट रूप से समर्थन देने के समान नहीं है। खासकर वीटो अधिकार के साथ भारत को स्थायी सदस्य बनाने को लेकर चीन की स्थिति को अलग से देखना होगा। इसलिए भारत की दावेदारी में चीन का रुख अब भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/india-unsc-p5-1790067326.jpg"    /></p>

<h3><strong>क्या सभी P5 देशों की मंजूरी जरूरी है?</strong></h3>

<p>हां, सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनने के लिए सभी P5 देशों की मंजूरी चाहिए लेकिन प्रक्रिया को समझना जरूरी है। सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता बढ़ाने के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर में संशोधन करना होगा। चार्टर के अनुच्छेद 108 के मुताबिक, संशोधन पहले महासभा के दो-तिहाई सदस्यों के वोट से अपनाया जाना चाहिए। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र के दो-तिहाई सदस्य देशों को अपनी संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार इसकी पुष्टि करनी होगी और इसमें सभी मौजूदा स्थायी सदस्यों की पुष्टि जरूरी है। इसका मतलब है कि अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन, पांचों मौजूदा स्थायी सदस्यों की मंजूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।</p>

<h3><strong>UNSC में अभी कितने सदस्य हैं?</strong></h3>

<p>सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। इनमें 5 स्थायी सदस्य, अमेरिका, चीन, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन हैं, जबकि 10 अस्थायी सदस्य 2 साल के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं। स्थायी सदस्यों के पास वीटो अधिकार है। इसीलिए किसी नए देश को स्थायी सदस्य बनाने का फैसला सिर्फ ज्यादा देशों के राजनीतिक समर्थन से पूरा नहीं हो जाता। इसके लिए व्यापक UNSC सुधार और चार्टर संशोधन की पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।</p>

<h3><strong>अभी भारत की दावेदारी कहां खड़ी है?</strong></h3>

<p>भारत ने पिछले कई वर्षों में अपनी स्थायी सदस्यता के लिए व्यापक राजनयिक समर्थन जुटाया है। अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन पहले ही भारत की दावेदारी का समर्थन कर चुके हैं। अब V4 के 4 देशों का समर्थन भी इसमें जुड़ गया है। BRICS मंच पर चीन और रूस ने भारत की संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका का समर्थन किया है, लेकिन चीन का यह रुख भारत को स्पष्ट रूप से नए स्थायी सदस्य के तौर पर समर्थन देने से अलग है। इसलिए भारत के सामने अगली बड़ी चुनौती केवल समर्थन जुटाना नहीं, बल्कि UNSC सुधार के व्यापक पैकेज पर सहमति और चार्टर में जरूरी संशोधन की पुष्टि हासिल करना है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/world/us/india-slams-pakistan-at-unsc-over-issue-of-basic-rights-of-kashmiris-in-pok-2026-07-24-1233072" target="_blank" title="UNSC में भारत ने पाकिस्तान को धो डाला, PoK में हो रही हिंसा को लेकर जमकर सुनाया">UNSC में भारत ने पाकिस्तान को धो डाला, PoK में हो रही हिंसा को लेकर जमकर सुनाया</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/india-permanent-unsc-seat-who-supports-india-why-china-matters-and-how-membership-can-happen-2026-09-22-1244658     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/india-permanent-unsc-seat-who-supports-india-why-china-matters-and-how-membership-can-happen-2026-09-22-1244658 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 22 Sep 2026 14:22:07 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हुई, 1952 में घोषित हुए थे विलुप्त, वन्यजीवन के लिए क्यों हैं जरूरी?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ भारत में कभी विलुप्त घोषित हो चुके चीतों की संख्या अब बढ़कर 56 हो गई है। अच्छी बात ये है कि इनमें से 36 का जन्म भारत की धरती पर हुआ है। इसे भारत के वाइल्ड लाइफ संरक्षण के प्रयासों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cheetah-1789957127.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[भारत में चीतों की संख्या बढ़ी]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cheetah-1789957127.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cheetah-1789957127.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      भारत में चीतों की संख्या बढ़ी
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>नई दिल्ली: </strong>प्रकृति से एक बार जो चीज विलुप्त हो जाए, उसे वापस प्रकृति में लाना बहुत मुश्किल या फिर नामुमकिन सा हो जाता है। अगर बात वन्यजीवों की हो तो ये बात सच भी मालूम होती है क्योंकि ऐसे तमाम उदाहरण वन्यजीवों के इतिहास में भरे पड़े हैं। सबसे बड़ा उदाहरण तो डायनासोर है, जिसकी चर्चा तो होती है लेकिन वो दुनिया में मौजूद नहीं हैं।</p>

<p>इन सारी बातों को ध्यान में रखने के बाद भी भारत की धरती को इतिहास बन चुकी चीजों को दोबारा जागृत करने के लिए जाना जाता है। इसका ताजा उदाहरण है "प्रोजेक्ट चीता"। </p>

<h3>देश में एक बार फिर अठखेलियां कर रहे चीता</h3>

<p>"प्रोजेक्ट चीता" के तहत भारत में एक बार फिर चीतों की दहाड़ गूंज रही है। दरअसल चीतों को 1952 में भारत से विलुप्त घोषित कर दिया गया था लेकिन आज प्रोजेक्ट चीता के तहत भारत में एक बार फिर चीतों को अठखेलियां करते हुए देखा जा रहा है।</p>

<p>यह भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि है। आज भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जिनमें 36 का जन्म भारत की धरती पर हुआ है। वाकई भारत के वन्यजीव संरक्षण के लिए ये एक बड़ी खुशखबरी है।</p>

<h3>कभी विलुप्त घोषित थे, आज संख्या बढ़ने से खुशी का माहौल</h3>

<p>MyGov India ने अपने एक्स हैंडल पर इस बात की जानकारी साझा की है। MyGov India ने एक्स पर पोस्ट कर बताया, "भारत में फिर गूंज रही है चीतों की दहाड़! 1952 में भारत से विलुप्त घोषित होने के बाद चीतों ने प्रोजेक्ट चीता के तहत एक शानदार वापसी की है। यह भारत के वन्यजीव संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी उपलब्धि है। आज भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 56 हो गई है, जिनमें 36 का जन्म भारत की धरती पर हुआ है।"</p>

<p><blockquote class="twitter-tweet" data-dnt="true" align="center"><a href="https://twitter.com/mygovindia/status/2101672933278306319"></a></blockquote><script async src="https://platform.twitter.com/widgets.js" charset="utf-8"></script></p>

<h3>वन्यजीवन के लिए क्यों जरूरी हैं चीता?</h3>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/cheetah-1-1789957735.jpg"    /></p>

<p>चीता, वन्यजीवन के लिए बेहद जरूरी जीव हैं। दरअसल ये वाइल्ड लाइफ में एक शिकारी के रूप में जाने जाते हैं और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बनाए रखते हैं। इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि चीता मुख्य रूप से छोटे-मध्यम आकार के शाकाहारी जानवरों का शिकार करता है, जिसमें मुख्य रूप से हिरण, चिकारे, इम्पाला, गजेल आदि होते हैं। ऐसे में इन शाकाहारी जानवरों की संख्या का संतुलन बना रहता है। अगर चीता नहीं होगा तो इन शाकाहारी जानवरों की संख्या नियंत्रण से बाहर हो जाएगी, जोकि न तो जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अच्छी बात है और न ही मानव जीवन के लिए।</p>

<h3>ट्रॉफिक कैस्केड का खतरा</h3>

<blockquote>
<p>वन्यजीवन में अगर शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ेगी तो वह घास-वनस्पति को ज्यादा चरेंगे, ऐसा होने पर मिट्टी का कटाव तो बढ़ेगा ही, साथ में पौधों की विविधता भी घट जाएगी। ऐसे में वन्यजीवन का पारिस्थितिकी तंत्र कमजोर पड़ जाएगा, जिसका असर इंसानों की दुनिया पर भी देखने को मिलेगा।</p>

<p>जंगल में इस प्रभाव को ट्रॉफिक कैस्केड (Trophic Cascade) कहा जाता है। इसके तहत अगर कोई प्रजाति जंगल से गायब होती है तो जंगल यानी वन्यजीवन की पूरी खाद्य श्रृंखला पर असर पड़ता है, जिसकी परेशानी अन्य जीव-जंतुओं को भी उठानी पड़ती है।</p>
</blockquote>

<h3>और कैसे वन्यजीवन को संतुलित रखता है चीता?</h3>

<p>चीते मांसाहारी जीव हैं और उन्हें खाने के लिए किसी भी कीमत पर मांस चाहिए। वह कमजोर या बीमार जानवरों का शिकार करते हैं। अक्सर वह पेट भरने पर अपना खाना छोड़ देते हैं। ऐसे में चीतों द्वारा छोड़े गए खाने के अवशेष को गिद्ध, लकड़बग्घे और सियार जैसे जानवर खाते हैं। इस तरह जंगल की पूरी व्यवस्था चलती रहती है। शिकार एक जीव करता है लेकिन पेट कई जीवों का भरता है। वहीं दूसरी तरफ शाकाहारी जानवरों की संख्या भी असीमित नहीं होती और जंगल अपने आप ही सुचारू रूप से चलता रहता है।</p>

<p>बता दें कि इससे पहले एक चीते द्वारा शिकार का वीडियो खूब चर्चा में आया था। दरअसल <a href="https://www.indiatv.in/viral/news/rajasthan-cheetah-of-kuno-national-park-entered-in-ramgarh-crater-in-baran-hunt-a-goat-watch-video-here-2026-02-20-1199360" target="_blank" title="राजस्थान में घुसा कूनो नेशनल पार्क का चीता, बकरी को बनाया नाश्ता, सामने आया Video">राजस्थान में कूनो नेशनल पार्क का चीता घुस गया था और उसने बकरी का शिकार किया</a> था।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/madhya-pradesh/female-cheetah-ready-to-run-in-jungle-cm-mohan-yadav-making-madhya-pradesh-a-wildlife-leader-beyond-being-tiger-state-2026-05-10-1217572" target="_blank" title="जंगल में दौड़ने को तैयार मादा चीता, टाइगर स्टेट से आगे अब MP को 'वाइल्डलाइफ लीडर' बना रहे CM मोहन यादव">जंगल में दौड़ने को तैयार मादा चीता, टाइगर स्टेट से आगे अब MP को 'वाइल्डलाइफ लीडर' बना रहे CM मोहन यादव</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/major-success-for-indias-wildlife-conservation-efforts-cheetah-population-rises-to-56-2026-09-21-1244397     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/major-success-for-indias-wildlife-conservation-efforts-cheetah-population-rises-to-56-2026-09-21-1244397 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 21 Sep 2026 07:45:13 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     यूपी में पॉलिटिक्स का 'सुपर संडे'! BJP ने की सीटों की मोर्चाबंदी तो अखिलेश लाए नया फॉर्मूला; ऐसे बिछी सियासी बिसात     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ से मोर्चा संभाल लिया है। दूसरी तरफ, यूपी बीजेपी ने भी एक-एक सीट की मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। इसके अलावा, अखिलेश यादव ने पश्चिम में अपनी टीम को एक्टिव कर दिया है। जानें आज यूपी में क्या-क्या हुआ।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/up-assembly-election-2027-1-1789920033.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[यूपी की सियासत में तेज हुई जुबानी जंग।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : ANI (फाइल फोटो)]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/up-assembly-election-2027-1-1789920033.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/up-assembly-election-2027-1-1789920033.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      यूपी की सियासत में तेज हुई जुबानी जंग।
                      <span class="copyright">Image Source : ANI (फाइल फोटो)</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>संडे को यूपी कोई लीडर छुट्टी पर नहीं था। सब के सब ओवरटाइम कर रहे थे। सीएम योगी लखनऊ में जुटे थे। अखिलेश यादव PDA में D पर जोर लगा रहे थे, तो ओवैसी कानपुर में मुस्लिम वोट गिन रहे थे। सब अपनी-अपनी ताकत दिखा रहे थे। अपने अपने वोटर को सेट कर रहे थे क्योंकि यूपी में एक एक वोट की लड़ाई है। कोई नेता नहीं कह सकता कि इस बार मेरे इस वोट सेंध नहीं लग पाएगी। हर वोट के कई दावेदार हैं। कोई नहीं बता सकता कि जाति जुड़ेगी या टूट जाएगी। कोई गारंटी नहीं कि मुसलमान बीजेपी को हराने के लिए ही वोट देगा। चुनाव में लॉ एंड ऑर्डर पर विपक्ष वोट मांगता है। लेकिन यूपी में उलटा हो रहा है। योगी इस मुद्दे पर वोट मांग रहे हैं और अखिलेश इस मुद्दे से भाग रहे हैं। इस बीच 27 में 27 हजार वोट जोड़ने का एक नया फॉर्मूला आ गया है। इसी पर ये रिपोर्ट पढ़िए।</p>

<p><strong>सीएम योगी ने दिलाई 2017 के पहले की याद</strong></p>

<p>पश्चिम से लेकर पूरब तक यूपी की सारी सियासी जमात मैदान में उतर गई है। सब 2027 का हिसाब किताब निकालने में जुट गए हैं। इस बीच, लखनऊ में सीएम योगी ने कहा कि पर्वों और त्योहारों की श्रृंखला हो, VVIP विजिट के कार्यक्रम हों या स्थानीय स्तर पर होने वाले आयोजन हों, सभी सकुशल संपन्न होते हैं। अब ये वो यूपी नहीं हैं, 2017 के पहले मध्य और पश्चिप यूपी के अंदर बहुत सारे जनपद ऐसे थे जहां पर जिस व्यक्ति के पास क्षमता थी वो अपनी बेटी को घर के बाहर यूपी से दूर अपने रिश्तेदार के पास या किसी हॉस्टल में रखकर के पढ़ाने को मजबूर था और जिसके पास क्षमता नहीं थी वो बेटी को घर में बैठाने के लिए मजबूर था।</p>

<blockquote>
<p>आज कोई क्या राह चल रही किसी बेटी को छेड़ने का दुस्साहस नहीं कर सकता, करेगा तो उसे पता है अंजाम क्या होने वाला है: योगी आदित्यनाथ</p>
</blockquote>

<p><strong>मुख्यमंत्री ने 912 कैंडिडेट्स को सौंपे ज्वाइनिंग लेटर</strong></p>

<p>गौरतलब है कि लखनऊ में योगी ने ये बात तब कहीं जब वो यूपी पुलिस में 912 कैंडिडेट्स को ज्वाइनिंग लेटर सौंप रहे थे। उन्होंने फिर से 2017 के पहले दौर याद दिलाया और बता दिया कि  लॉ एंड ऑर्डर ही संकल्प और 27 में बीजेपी ही विकल्प।</p>

<p><strong>BJP ने की 98 जिला प्रभारियों की घोषणा</strong></p>

<p>उधर, यूपी बीजेपी ने एक-एक सीट की मोर्चाबंदी शुरू कर दी है। खासकर उन जगह पर जो बीजेपी के लिए चैलेंज बन सकते हैं। यूपी बीजेपी ने 98 जिला प्रभारियों की घोषणा की। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले इसे संगठन के लिहाज से अहम फैसला माना जा रहा है। नई लिस्ट में संगठन के पुराने और अनुभवी चेहरों की वापसी हुई है और जाति समीकरण को भी साधा गया है। 98 जिला प्रभारियों में 29 ब्राह्मण हैं। यानी करीब एक-तिहाई पद ब्राह्मण नेताओं को मिले हैं। इसके बाद, ओबीसी से 25 जिला प्रभारी बनाए गए हैं। ठाकुर समाज से 18 जिला प्रभारी हैं। बनिया समाज को 13 जिलों की जिम्मेदारी मिली है। वहीं, दलित समाज से  5 जिला प्रभारी हैं। 98 जिला प्रभारियों में 4 महिलाएं भी हैं।</p>

<p><strong>राहुल गांधी के गढ़ में राजनाथ सिंह के बेटे की एंट्री</strong></p>

<p>इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रायबरेली की हो रही है, जिसका जिम्मा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह को दिया गया है। हाल ही में वे बीजेपी के उपाध्यक्ष भी बने हैं। राहुल गांधी की लोकसभा सीट रायबरेली पर बीजेपी का जिला प्रभारी बनाया जाने का मतलब है, बीजेपी राहुल गांधी और अखिलेश को यादव किसी भी छूट देने के मूड में नहीं है।</p>

<p><strong>अखिलेश यादव ने दिए दो नए फॉर्मूले</strong></p>

<p>हालांकि, अखिलेश यादव, समाजवादी पार्टी का हर रोज नया नया फॉर्मूला लेकर आ रहे हैं। आज प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में अखिलेश यादव ने 2027 चुनाव को लेकर दो फॉर्मूले लेकर आए। पहला फॉर्मूला हर विधानसभा में सपा का 27 हजार वोट बढ़ाएंगे और बीजेपी का 27 हजार वोट कम करेंगे। दूसरा फॉर्मूले में आज अखिलेश ने PDA के D पर जोर लगाया। आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार में सबसे ज्यादा अंबेडकर की मूर्तियां तोड़ी गईं। दावा किया कि 72 जिलों में 151 से अधिक डॉ. अम्बेडकर की मूर्तियां तोड़ी गई हैं।</p>

<p><strong>क्या अखिलेश की परेशानी बढ़ाएंगे ओवैसी?</strong></p>

<p>उधर, <a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/asaduddin-owaisi-exclusive-interview-kanpur-rally-up-election-akhilesh-yadav-bjp-aimim-alliance-2026-09-20-1244304" target="_blank" title="'यूपी में पार्टियों ने मुस्लिमों का वोट लिया और उनसे दरी बिछवाई', ओवैसी का बड़ा बयान">असदुद्दीन ओवैसी का फोकस मुस्लिम वोटर्स को साधने पर है</a>। इससे पहले, सितंबर और दिसंबर 2021 में ओवैसी ने जाजमऊ और जीआईसी मैदान में जनसभाओं को संबोधित किया था। यानी 5 साल बाद अब औवेसी ने कानपुर में जनसभा की। असदुद्दीन ओवैसी की आने वाले दिनों में श्रावस्ती और आजमगढ़ में भी जनसभाएं होनी हैं। ये वो सीटे हैं जहां समाजवादियों का गढ़ रहा है। अगर ओवैसी इस बार मुस्लिम वोट पाने में कामयाब हो जाते हैं तो वो जीते या ना जीते, अखिलेश की साइकिल को कमजोर जरूर कर सकते हैं।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/bjp-begins-up-assembly-election-2027-preparations-nitin-nabin-meerut-saharanpur-visit-schedule-2026-09-20-1244330" target="_blank" title="UP में BJP ने शुरू की चुनाव की तैयारी, युवा सम्मेलन करने आ रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन; पढ़ें पूरा शेड्यूल">UP में BJP ने शुरू की चुनाव की तैयारी, युवा सम्मेलन करने आ रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन; पढ़ें पूरा शेड्यूल</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/up-politics-bjp-2027-seat-strategy-akhilesh-yadav-27000-vote-formula-owaisi-muslim-voters-2026-09-20-1244354     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/up-politics-bjp-2027-seat-strategy-akhilesh-yadav-27000-vote-formula-owaisi-muslim-voters-2026-09-20-1244354 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 20 Sep 2026 21:37:14 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     ईरान-अमेरिका के बीच हो रहा युद्ध अचानक सऊदी अरब Vs हूती विद्रोही क्यों हो गया? समझिए पूरा माजरा     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जारी संघर्ष के बीच सवाल उठ रहा है कि मिडिल-ईस्ट में तनाव तो ईरान-अमेरिका की वजह से शुरू हुआ था और यह अब यमन व सऊदी अरब की धरती पर क्यों लड़ा जा रहा है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/saudi-arabia-houthi-conflict-1789803318.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[हूती, जुलाई के बाद से लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/saudi-arabia-houthi-conflict-1789803318.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/saudi-arabia-houthi-conflict-1789803318.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      हूती, जुलाई के बाद से लगातार सऊदी अरब पर हमले कर रहे हैं।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>इसी साल 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल की ईरान पर जॉइंट एयरस्ट्राइक से सुलगा मिडिल-ईस्ट अभी तक शांत नहीं हो पाया है। उधर, पिछले कई महीनों से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर रखा हुआ है, जिससे दुनिया का करीब 20 फीसदी ईंधन शांति काल में गुजरता था। लेकिन अब मुश्किल और बढ़ने वाली है क्योंकि हूती विद्रोहियों का Indian Ocean को Red Sea और आगे फिर स्वेज कैनाल से जोड़ने वाले स्ट्रेट बाब अल-मन्दब पर कंट्रोल बढ़ गया है। यानी मिडिल-ईस्ट के ईरान में जिस जगह यह युद्ध शुरू हुआ था, वह वहां से हटकर अब हजारों किलोमीटर दूर यमन और सऊदी अरब में हो रहा है। आइए समझते हैं कि इसकी शुरुआत कैसे हुई।</p>
<p><strong>हूती विद्रोहियों का 'आंख के बदले आंख' का ऐलान</strong></p>
<p>यूं तो यमन के हूती विद्रोही और सऊदी अरब एक-दूसरे को लंबे वक्त से पसंद नहीं करते, लेकिन बीते जुलाई में 3 तारीख को सना एयरपोर्ट पर ईरान से आ रहे हूती प्रतिनिधिमंडल वाले प्लेन को निशाना बनाए जाने की घटना ने इसमें चिंगारी लगा दी। यह हमला यमन की सऊदी अरब समर्थित सरकार ने किया था। यमनी सरकार ने आरोप लगाया था कि इस फ्लाइट ने उनके देश की संप्रभुता का उल्लंघन किया था। यमनी सरकार ये भी आरोप कई बार लगा चुकी है कि इन प्लेन्स से ईरान, हूती को हथियार पहुंचाता है। लेकिन सना एयरपोर्ट पर प्लेन को टारगेट किए जाने के बाद हूती विद्रोही भड़क गए और 'आंख के बदले आंख' का ऐलान कर दिया। हूती प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा था कि इस हमले ने यमन में De-escalation फेज को खत्म कर दिया है।</p>
<p><strong>प्लेन निशाना बनने के बाद सऊदी पर भड़के हूती</strong></p>
<p>हूती विद्रोहियों ने सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद ऐलान किया कि जिस तरह उनके प्लेन को ब्लॉक किया गया, निशाना बनाया गया, उसी तरह अब सऊदी अरब के रास्तों को भी ब्लॉक करेंगे। समंदर से आसमान तक उनके जहाजों और फ्लाइट्स को निशाना बनाएंगे। सना एयरपोर्ट पर हमले के बाद हूती विद्रोहियों ने स्पष्ट कर दिया था कि वे चुप रहने वाले नहीं और सऊदी को सबक सिखाकर रहेंगे।</p>
<p><strong>अहम मोखा पोर्ट सिटी और मयून द्वीप पर कब्जा कर चुके हैं हूती</strong></p>
<p>इसके बाद से, हूती विद्रोहियों ने एक तरफ सऊदी अरब के जहाजों और उनके अलग-अलग शहरों पर हमले किए। साथ ही, यमन में जमीन पर भी लड़ाई शुरू कर दी। आलम ये है कि अब हूती विद्रोही, स्ट्रैटेजिक रूप से अहम मोखा पोर्ट सिटी को यमनी सरकार से छीन चुके हैं। इसके अलावा, <a href="https://www.indiatv.in/explainers/houthi-control-bab-al-mandab-india-china-trade-cape-of-good-hope-alternative-route-2026-09-18-1243988" target="_blank" title="बाब अल-मन्दब पर हूती का कब्जा! ईरान-अमेरिका के चक्कर में भारत-चीन का व्यापार होगा प्रभावित? अब क्या है नया रास्ता और ये क्यों है महंगा">बाब अल-मन्दब में मौजूद कई द्वीपों पर भी हूती कब्जा जमा चुके हैं</a>। इनमें मयून आईलैंड का नाम भी शामिल है।</p>
<p><strong>सऊदी और हूती विद्रोहियों में क्यों है दुश्मनी?</strong></p>
<p>जहां सऊदी अरब, सुन्नी मुस्लिमों के प्रभाव वाला देश है तो वहीं हूती शिया समुदाय से आते हैं। हूती विद्रोहियों की विचारधारा सऊदी अरब के नीतियों से मेल नहीं खाती है। साथ ही, हूती को ईरान से सैन्य और आर्थिक सपोर्ट मिलता है। लंबे समय से ईरान और सऊदी अरब, मिडिल-ईस्ट में क्षेत्रीय ताकत बनने के लिए आपस में कम्पटीशन करते हैं, जिससे यमन प्रॉक्सी वॉर का अखाड़ा बन गया है।</p>
<p>गौरतलब है कि हूती विद्रोहियों ने साल 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा जमा लिया था और वहां की इंटरनेशनल लेवल पर मान्यता प्राप्त सरकार को बेदखल कर दिया था। दूसरी तरफ, सऊदी अरब अपनी दक्षिणी सरहद के पास हूती के मजबूत होने को अपनी नेशनल सिक्योरिटी के लिए बड़ा खतरा मानता है।</p>
<p><strong>हूती विद्रोही कौन हैं?</strong></p>
<p>शिया धर्मगुरु हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती ने इस आंदोलन की शुरुआत 1990 के दशक में की थी, उन्हीं के नाम पर इनको हूती कहते हैं। यह गुट शुरुआती दौर में यमनी सरकार के तथाकथित करप्शन और अमेरिका-इजरायल के साथ उसकी नजदीकियों की खिलाफत में बना था। बाद में साल 2014-2015 में हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना सहित देश के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया था, जिसके बाद यमन में गृहयुद्ध छिड़ गया था।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/india/national/india-condemns-houthi-attacks-on-saudi-arabia-raises-concern-over-red-sea-bab-al-mandab-security-2026-09-18-1244010" target="_blank" title="हूती विद्रोहियों के हमलों से लाल सागर इलाके में बिगड़े हालात, बाब अल-मन्दब की आजादी पर भी खतरा; भारत ने जताई चिंता">हूती विद्रोहियों के हमलों से लाल सागर इलाके में बिगड़े हालात, बाब अल-मन्दब की आजादी पर भी खतरा; भारत ने जताई चिंता</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/why-iran-us-war-shifted-to-saudi-arabia-houthi-conflict-bab-el-mandeb-explained-2026-09-19-1244114     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/why-iran-us-war-shifted-to-saudi-arabia-houthi-conflict-bab-el-mandeb-explained-2026-09-19-1244114 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 19 Sep 2026 13:25:48 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     बाब अल-मन्दब पर हूती का कब्जा! भारत-चीन का व्यापार होगा प्रभावित? अब क्या है नया रास्ता और ये क्यों है महंगा     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ अब सवाल है कि जब बाब अल-मन्दब से निकलने वाले जहाजों पर खतरा मंडरा रहा है तो अब विकल्प क्या है। जब ईरान के पड़ोस में मौजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पहले से बंद है, और अब जब हूती विद्रोहियों की वजह से बाब अल-मन्दब भी बंद होने की नौबत आ गई तो अब किस रास्ते व्यापार करना होगा।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bab-el-mandeb-houthis-1789730261.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मन्दब के आसपास कई आईलैंड पर कब्जा कर लिया है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bab-el-mandeb-houthis-1789730261.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bab-el-mandeb-houthis-1789730261.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मन्दब के आसपास कई आईलैंड पर कब्जा कर लिया है।
                      <span class="copyright">Image Source : AP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बाद दुनिया के समुद्री व्यापार के एक और प्रमुख रास्ते पर संकट गहरा गया है। दरअसल, ईरान-अमेरिका में टेंशन के चलते होर्मुज पहले से ही बंद है और अब बाब अल-मन्दब पर भी हूती विद्रोहियों के बढ़ते हुए कंट्रोल ने भारत और चीन समेत पूरे एशिया महाद्वीप की चिंता को बढ़ा दिया है। एशिया से यूरोप जाने वाले जहाजों के सामने अब अफ्रीका महाद्वीप का बहुत बड़ा चक्कर लगाकर जाने का ऑप्शन ही बचा है। लेकिन केप ऑफ गुड होप का रास्ता करीब दोगुना लंबा है। इससे समय भी ज्यादा लगेगा और माल ढुलाई भी पहले की तुलना में महंगी हो जाएगी। ऐसे में सवाल उठता है कि बाब अल मन्दब की इस घेराबंदी का भारत-चीन के ट्रेड पर कैसे प्रभाव पड़ेगा।</p>

<h3>हूती विद्रोहियों ने मोखा पोर्ट सिटी पर भी किया कब्जा</h3>

<p>यमन में चल रहे संघर्ष में हूती विद्रोही, सऊदी अरब समर्थित सरकार पर भारी पड़ रहे हैं और एक के बाद एक इलाकों पर कब्जा करते जा रहे हैं। हाल ही हूती विद्रोहियों ने मोखा पोर्ट सिटी पर भी कब्जा कर लिया। <a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/saudi-arabia-fired-a-barrage-of-missiles-at-houthi-rebels-alert-issued-after-threat-to-mecca-2026-09-15-1243346" target="_blank" title="सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों पर ताबड़तोड़ दागीं मिसाइलें, मक्का में खतरे को लेकर अलर्ट जारी">हूती विद्रोहियों पर सऊदी अरब के मक्का पर भी हमला करने का आरोप लग चुका है</a>। हूती विद्रोहियों की इस जीत से एशिया के उन देशों के व्यापार पर खतरा मंडराने लगा है जो बाब अल-मन्दब के जरिए यूरोप के तमाम देशों से व्यापार करते हैं। एशिया के ऐसे देशों की लिस्ट में भारत और चीन का नाम भी शामिल है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/bab-el-mandeb-1789730281.jpg"    /></p>

<h3>केप ऑफ गुड होप ही है अब उम्मीद?</h3>

<p>एशिया के देश, जो समंदर के रास्ते यूरोप से व्यापार करना चाहते हैं, उनके लिए अब केप ऑफ गुड होप ही उम्मीद है। अगर बाब अल-मन्दब के बजाय केप ऑफ गुड होप के रास्ते जहाज लाने और ले जाने होंगे तो इसमें समय भी ज्यादा लगेगा और पूरा अफ्रीका महाद्वीप पार करते हुए अटलांटिक महासागर से Indian Ocean में आना होगा।</p>

<h3>यूरोप से भारत तक आने का समुद्री रास्ता</h3>

<p>मान लीजिए कि अगर भारत को कोई सामान फ्रांस या इटली से आयात-निर्यात करना होगा तो जहाज अगर इटली से चलेगा तो उसे पहले भूमध्य सागर यानी Mediterranean Sea पार करना होगा। फिर स्पेन और मोरक्को के बीच मौजूद स्ट्रेट ऑफ जिब्राल्टर से निकलकर सीधे अटलांटिक महासागर में आना होगा। इसके बाद उन्हें करीब 8 हजार किलोमीटर लंबा पूरा अफ्रीका महाद्वीप पार करना होगा। फिर, Indian Ocean में आने के लिए अफ्रीका महाद्वीप की साउथ टिप पर मौजूद केप ऑफ गुड होप से गुजरना  होगा। उसके बाद, अरब सागर में एंट्री लेकर भारत तक पहुंचा जा सकता है।</p>

<h3>केप ऑफ गुड होप से करीब-करीब दो गुना हो जाएगी दूरी</h3>

<p>आप इस बात को ऐसे समझ सकते हैं कि जब भारत से फ्रांस तक समंदर के रास्ते बाब अल-मन्दब से होकर जाना हो तो दोनों देशों की दूरी करीब 11 हजार किलोमीटर होगी। लेकिन अगर अब कोई जहाज केप ऑफ गुड होप से होते हुए भारत से फ्रांस जाएगा तो उसे करीब 22 हजार किलोमीटर समुद्री रास्ता तय करना होगा।</p>

<p>अगर एशिया या मिडिल ईस्ट से यूरोप किसी जहाज को आना-जाना तो उसे लगभग 10 से 30 दिन ज्यादा लग सकते हैं। उदाहरण के लिए, सऊदी अरब के यानबू से ताइवान की यात्रा में अभी बाब अल-मन्दब के जरिए 19 दिन लगते हैं, लेकिन अगर जहाज को अफ्रीका का चक्कर लगाकर जाना पड़ेगा तो इसमें करीब 48 दिन लग सकते हैं।</p>

<h3>भारत और यूरोपियन यूनियन में कितना व्यापार?</h3>

<p>काउंसिल ऑफ द यूरोपियन यूनियन के मुताबिक, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 2025 में 136.5 बिलियन अमेरिका डॉलर से ज्यादा का व्यापार हुआ था। इसे भारतीय रुपये में कंवर्ट करें तो यह करीब 13.09 लाख करोड़ भारतीय रुपये होता है। इसमें EU ने भारत से करीब 75.8 बिलियन डॉलर का इम्पोर्ट किया था और भारत को लगभग 60.7 बिलियन डॉलर का एक्सपोर्ट किया था।</p>

<p>Anadolu Agency में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के ड्रोन और हमलों के डर से बाब अल-मन्दब से जहाजों का गुजरना करीब 88 फीसदी तक कम हो गया है। हालांकि, हूती विद्रोही यही दावा कर रहे हैं कि वह सिर्फ सऊदी अरब के जहाजों पर ही हमला कर रहे हैं लेकिन बाकी देशों के जहाज भी फिलहाल बाब अल-मन्दब से निकलने का रिस्क लेने से बच रहे हैं।</p>

<h3>बाब अल-मन्दब से होता है दुनिया का 12% व्यापार</h3>

<p>ताजा खबर है कि हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम बंदरगाह शहर मोखा पर भी कब्जा कर लिया है। इसके अलावा, हूती विद्रोहियों ने संकरे बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के पास कई आईलैंड्स पर भी कब्जा जमा लिया है। शांति के वक्त दुनिया का करीब 12 फीसदी व्यापार इसी समुद्री रास्ते से होता है। हूती अभी ईस्ट अफ्रीका के देश जिबूती से भी महज 32 किलोमीटर दूर हैं। जिबूती, एक छोटा सा देश है और यहां अमेरिका व अन्य देशों के मिलिट्री बेस मौजूद हैं।</p>

<p><strong>(इनपुट- AP)</strong></p>

<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/explainers/why-are-yemen-houthis-still-so-powerful-after-years-of-war-airstrikes-and-billions-in-weapons-2026-09-16-1243507" target="_blank" title="सालों की जंग, अरबों के हथियार और हवाई हमले भी बेअसर; आखिर इतने ताकतवर कैसे हुए हूती?">सालों की जंग, अरबों के हथियार और हवाई हमले भी बेअसर; आखिर इतने ताकतवर कैसे हुए हूती?</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/houthi-control-bab-al-mandab-india-china-trade-cape-of-good-hope-alternative-route-2026-09-18-1243988     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/houthi-control-bab-al-mandab-india-china-trade-cape-of-good-hope-alternative-route-2026-09-18-1243988 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 16:51:30 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     कश्मीर की डल झील को आखिर क्या हो गया? हालत देखकर नहीं होगा यकीन, जानिए क्या है वजह     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ कश्मीर की मशहूर डल झील प्रदूषण, सीवेज, कचरे, अतिक्रमण और खरपतवार जैसी कई समस्याओं से जूझ रही है। कभी सूबे की शान कही जाने वाली डल झील के इस हालत में पहुंचने की वजह क्या है, आइए समझने की कोशिश करते हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-2-1789702378.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[डल झील की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-2-1789702378.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-2-1789702378.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      डल झील की हालत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Dal Lake Pollution: </strong>कश्मीर की पहचान कही जाने वाली डल झील को देखकर आज स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यावरण विशेषज्ञ भी चिंतित हैं। जिस झील की खूबसूरती ने दशकों तक बॉलीवुड और दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित किया, उसके कई हिस्से अब गंदगी, खरपतवार और सीवेज की समस्या से जूझ रहे हैं। एक वैज्ञानिक स्टडी के मुताबिक, श्रीनगर में रोज करीब 201 मिलियन लीटर सीवेज पैदा होता है। इसमें से लगभग 73 फीसदी यानी 147 मिलियन लीटर सीवेज बिना ट्रीट किए डल झील या झेलम नदी में पहुंच जाता है। लेकिन सवाल है कि आखिर डल झील की हालत इतनी खराब कैसे हुई? आइए, समझने की कोशिश करते हैं।</p>

<h3><strong>डल झील की हालत इतनी खराब क्यों हुई?</strong></h3>

<p>डल झील और झेलम नदी श्रीनगर और पूरे कश्मीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण जलस्रोत हैं। लेकिन पिछले कई दशकों में बढ़ती आबादी, अतिक्रमण, कूड़ा-कचरा, सीवेज और खराब ड्रेनेज व्यवस्था ने इन जलस्रोतों पर दबाव बढ़ा दिया है। सबसे बड़ी चिंता बिना साफ किए सीवेज को लेकर है। स्टडी के मुताबिक, श्रीनगर में पैदा होने वाले करीब 201 मिलियन लीटर सीवेज में से 73 प्रतिशत का ट्रीटमेंट नहीं हो पाता। यही गंदा पानी झील और नदी में पहुंच रहा है। इसका मतलब है कि हर दिन करीब 147 मिलियन लीटर बिना साफ किया हुआ सीवेज इन जलस्रोतों में जा रहा है।</p>

<p><iframe  src="https://www.indiatv.in/newsdata/poll-indiatv-hindi/1284" width="100%"></iframe></p>

<h3><strong>क्या डल की हालत के लिए सिर्फ सीवेज ही जिम्मेदार है?</strong></h3>

<p>बता दें कि समस्या सिर्फ सीवेज तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोगों और एक्टिविस्टों के मुताबिक, कचरा, अतिक्रमण, तेजी से हो रहा निर्माण, खराब ड्रेनेज सिस्टम और पानी के प्राकृतिक बहाव में रुकावट भी डल झील की हालत खराब कर रहे हैं। डल गेट और प्राकृतिक नालों जैसे पानी के निकास वाले रास्तों में रुकावट से झील का पानी ठीक तरह से बाहर नहीं निकल पाता। इससे पानी का बहाव प्रभावित होता है और गंदगी जमा होने की समस्या बढ़ती है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-situation-1789702813.jpg"    /></p>

<h3><strong>कमल के फूल की जगह खरपतवार क्यों?</strong></h3>

<p>स्थानीय निवासी एजाज अहमद बताते हैं कि बचपन में लोग डल झील के पानी से वजू करते थे और नमाज पढ़ते थे। लेकिन अब पानी से बदबू आती है और उसे छूना भी मुश्किल लगता है। उनके मुताबिक, पहले शिकारे के बीच पीले और सफेद कमल के फूल दिखाई देते थे। अब झील के कई हिस्सों में अजोला की हरी परत और घनी खरपतवार दिखाई देती है। तेजी से हो रहे निर्माण और नई सड़कों को लेकर भी स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-1789704947.jpg"    /></p>

<h3><strong>स्थानीय लोग डल झील के बारे में क्या कह रहे हैं?</strong></h3>

<p>डल झील के पुराने निवासी अब्दुल रज्जाक का कहना है कि आज की डल झील पहले जैसी नहीं रही। उन्होंने कहा,</p>

<blockquote>
<p>'यह अब वह डल नहीं रही, जिसे हम जानते थे। बस नाम ही बचा है। आज डल झील को देखना दुखद है। जिस पानी का इस्तेमाल हम कभी पीने के लिए करते थे, वह अब जहरीला हो गया है। झील के आसपास बढ़ती आबादी ने इसकी हालत खराब कर दी है। करीब 50 साल पहले डल झील बॉलीवुड के गानों में नजर आती थी, लेकिन अब इसकी तारीफ करने वाला कौन है?'</p>
</blockquote>

<p>रज्जाक के मुताबिक, झील का पिछला हिस्सा पूरी तरह खराब हो चुका है और वहां शिकारे तक नहीं चल पा रहे हैं। उन्हें डर है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो कुछ वर्षों में डल झील का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।</p>

<h3><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-situation-2-1789702813.jpg"    /></h3>

<h3><strong>पर्यटन पर क्या असर पड़ सकता है?</strong></h3>

<p>डल झील कश्मीर के पर्यटन की पहचान है। शिकारा, हाउसबोट और झील का खूबसूरत नजारा यहां आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण है। स्थानीय निवासी एजाज अहमद का कहना है कि अगर झील की हालत इसी तरह खराब होती रही तो पर्यटक यहां आना कम कर सकते हैं। इसका सीधा असर उन लोगों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा, जो पर्यटन से जुड़े हैं। यानी डल झील की समस्या सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं है। इसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और हजारों लोगों की आजीविका पर भी पड़ सकता है।</p>

<h3><strong>आखिर झील साफ क्यों नहीं हो रही?</strong></h3>

<p>एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, हर साल झील की सफाई के लिए मशीनें लगाने के लिए फंड दिया जाता है। मशीनें कुछ समय तक झील में चलती हैं और फिर किनारे पर खड़ी कर दी जाती हैं। उनका कहना है कि झील का अगला हिस्सा कुछ हद तक साफ हो जाता है, लेकिन निशात, शालीमार और दरगाह जैसे इलाकों में गंदगी बनी रहती है। उनके मुताबिक, इसके लिए जनता और प्रशासन दोनों जिम्मेदार हैं। सरकार को सीवेज ट्रीटमेंट सिस्टम मजबूत करना होगा और सफाई का काम पूरी क्षमता के साथ करना होगा।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-situation-3-1789702813.jpg"    /></p>

<h3><strong>एक्टिविस्ट के मुताबिक असली समस्या क्या है?</strong></h3>

<p>डल झील की सफाई से जुड़े स्थानीय एक्टिविस्ट तारिक पतलू का कहना है कि सिर्फ कागजों पर योजनाएं बनाने या फोटो खिंचवाने से झील साफ नहीं होगी। उनके मुताबिक, खराब इंजीनियरिंग, प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी और गलत नीतियां भी झील को नुकसान पहुंचा रही हैं। वह श्रीनगर के करीब 80 पंप स्टेशनों का मुद्दा उठाते हैं। उनका कहना है कि इन पंप स्टेशनों के जरिए बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सीधे झील और नदियों में जा रहा है। पतलू का सुझाव है कि इन डीवॉटरिंग पंप स्टेशनों को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी STP में बदला जाए। उनका मानना है कि इससे प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।</p>

<h3><strong>झील के जीव-जंतुओं पर भी पड़ रहा असर</strong></h3>

<p>प्रदूषण का असर सिर्फ पानी पर नहीं, बल्कि डल झील के पूरे पर्यावरण पर पड़ रहा है। तारिक पतलू के मुताबिक, लगातार प्रदूषण और गलत मशीनरी के इस्तेमाल से पानी में रहने वाले जीव-जंतु और पक्षी भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने किंगफिशर और मेंढक जैसे जीवों का जिक्र किया। उनके मुताबिक, अगर पानी की गुणवत्ता इसी तरह खराब होती रही तो झील का पूरा इकोसिस्टम प्रभावित हो सकता है।</p>

<h3><strong>डल झील क्यों कही जाती है जीवनरेखा?</strong></h3>

<p>क्लाइमेट एक्सपर्ट डॉ. तौसीफ भट का कहना है कि डल झील और झेलम नदी को केवल पानी के स्रोत के रूप में देखना सही नहीं है। उन्होंने कहा,</p>

<blockquote>
<p>'ये दोनों हमारी जीवनरेखा हैं। इन्हें सिर्फ पानी की जगह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। ये हमारी अर्थव्यवस्था और पहचान से भी जुड़ी हैं।'</p>
</blockquote>

<p>उनके मुताबिक, कश्मीर के कई जलस्रोत आपस में जुड़े हुए हैं। डल झील से लेकर मानसबल और दूसरे जलस्रोतों को बचाना जरूरी है। उन्होंने खुशाल सर और गिलसर जैसे जलस्रोतों का भी जिक्र किया। उनका कहना है कि अगर एक-एक करके ये जलस्रोत खत्म होते गए और अभी कदम नहीं उठाए गए, तो डल झील को भी बचाना मुश्किल हो सकता है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/dal-lake-situation-1-1789702813.jpg"    /></p>

<h3><strong>श्रीनगर में कितना पानी इस्तेमाल होता है?</strong></h3>

<p>डॉ. तौसीफ भट के मुताबिक, कई आंकड़ों में बताया गया है कि श्रीनगर में एक व्यक्ति नहाने, कपड़े धोने और पीने जैसे कामों में रोज करीब 120 से 150 लीटर पानी इस्तेमाल करता है। उन्होंने श्रीनगर की आबादी को करीब 8 से 12 लाख के बीच बताते हुए कहा कि शहर के कई ऐसे इलाके हैं जहां अभी भी सीवेज कनेक्शन की समस्या है। उन्होंने खास तौर पर रैनावाड़ी और डाउनटाउन के निचले इलाकों का जिक्र किया, जहां कई नाले खुले बहते हैं। ऐसे में इस्तेमाल होने वाले पानी का एक बड़ा हिस्सा बिना सही ट्रीटमेंट के नालों के जरिए जलस्रोतों तक पहुंच सकता है।</p>

<h3><strong>आखिर सरकार क्या कर रही है?</strong></h3>

<p>जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि डल झील की समस्या नई नहीं है। उन्होंने कहा,</p>

<blockquote>
<p>'यह पिछले दो सालों की समस्या नहीं है। यह दशकों पुरानी विरासत की समस्या है। हम इसे रातों-रात नहीं सुलझा पाएंगे, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं।'</p>
</blockquote>

<p>मुख्यमंत्री के मुताबिक, अलग-अलग योजनाओं के तहत कई प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार का मकसद सिर्फ पानी के स्रोतों को बचाना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर बनाना भी है। डल झील और दूसरे जलस्रोतों की सफाई के लिए झील और जलमार्ग प्रबंधन प्राधिकरण (LCMA) और स्थानीय प्रशासन की ओर से ड्रेजिंग, STP और खरपतवार हटाने वाली मशीनों के जरिए काम किया जा रहा है।</p>

<h3><strong>झील की सफाई से समस्या खत्म हो जाएगी?</strong></h3>

<p>विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के सुझावों से साफ है कि सिर्फ झील की सतह से खरपतवार हटाने या मशीनों से गाद निकालने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। सबसे पहले यह रोकना जरूरी है कि गंदा पानी झील में पहुंचे ही नहीं। इसके लिए शहर की पूरी सीवेज व्यवस्था को मजबूत करना होगा। जहां सीवेज कनेक्शन नहीं हैं, वहां नेटवर्क तैयार करना होगा और जरूरत के मुताबिक नए STP लगाने होंगे। साथ ही कचरा सीधे झील या नालों में डालने पर सख्त कार्रवाई जरूरी है।</p>

<h3><strong>डल झील बचाने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?</strong></h3>

<p>स्थानीय एक्टिविस्ट और विशेषज्ञों के सुझावों को आसान भाषा में समझें तो कुछ मुख्य कदम ये हैं:</p>

<ol>
	<li>झील में बिना ट्रीट किया सीवेज जाने से रोकना।</li>
	<li>जिन इलाकों में जरूरत है, वहां STP बनाना।</li>
	<li>पुराने STP की क्षमता और कामकाज में सुधार करना।</li>
	<li>करीब 80 पंप स्टेशनों की व्यवस्था की समीक्षा करना।</li>
	<li>डल गेट और प्राकृतिक नालों के पानी के रास्ते खोलना।</li>
	<li>झील से कचरा और खरपतवार नियमित रूप से हटाना।</li>
	<li>कचरा फेंकने वालों पर सख्त जुर्माना लगाना।</li>
	<li>श्रीनगर के उन इलाकों में सीवेज नेटवर्क पहुंचाना, जहां अभी इसकी कमी है।</li>
	<li>अंतरराष्ट्रीय और दूसरे विशेषज्ञों की मदद से वैज्ञानिक योजना बनाना।</li>
	<li>स्थानीय लोगों में जलस्रोतों को लेकर जागरूकता बढ़ाना।</li>
</ol>

<h3><strong>अगर अभी कदम नहीं उठाए गए तो क्या होगा?</strong></h3>

<p>डल झील की समस्या केवल उसकी खूबसूरती तक सीमित नहीं है। यह पानी, पर्यावरण, पर्यटन, स्थानीय रोजगार और कश्मीर की पहचान से जुड़ा मुद्दा है। बिना ट्रीट किया सीवेज, कचरा, अतिक्रमण और पानी के बहाव में रुकावट जैसी समस्याएं अगर लंबे समय तक बनी रहीं तो झील का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञों का जोर सिर्फ झील की सफाई पर नहीं, बल्कि पूरे शहर की सीवेज और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बदलने पर है। बता दें कि <a href="https://www.indiatv.in/explainers/why-are-the-world-oceans-getting-hotter-how-el-nino-could-intensify-global-climate-risks-explained-2026-07-04-1229063" target="_blank" title="दुनिया के महासागर गर्म क्यों होते जा रहे हैं? एल नीनो से दुनिया को कितना खतरा है? समझें पूरी बात">हाल ही में पर्यावरण से जुड़ी एक और परेशान करने वाली रिपोर्ट आई थी जिसमें दुनिया के महासागरों के गर्म होने के कारण बताए गए थे। आप एक नजर उस रिपोर्ट को भी देख सकते हैं।</a></p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="https://www.indiatv.in/explainers/how-rice-farming-is-fueling-global-warming-through-rising-methane-emissions-explained-2026-05-23-1220405" target="_blank" title=" धान के खेत क्यों बन रहे हैं ग्लोबल वार्मिंग की फैक्ट्री? वैज्ञानिकों ने बताई टेंशन वाली बात">धान के खेत क्यों बन रहे हैं ग्लोबल वार्मिंग की फैक्ट्री? वैज्ञानिकों ने बताई टेंशन वाली बात</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/what-happened-to-kashmir-dal-lake-how-sewage-waste-and-weeds-are-threatening-srinagar-iconic-lake-2026-09-18-1243878     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/what-happened-to-kashmir-dal-lake-how-sewage-waste-and-weeds-are-threatening-srinagar-iconic-lake-2026-09-18-1243878 ]]>     </guid>     <pubDate>Fri, 18 Sep 2026 09:03:42 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     रात 9 बजे तक बंद हो जाएंगी सभी दुकानें, पाकिस्तान में तीन महीने के लिए क्यों लगा लॉकडाउन?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ पाकिस्तान में लॉकडाउन जैसे हालात हो गए हैं। सरकार ने महंगाई पर नियंत्रण के लिए नया दिशा निर्देश तय किया है और इसका नोटिफिकेशन जारी किया है। बाजार रात नौ बजे तक बंद कर दिए जाएंगे। जानें और क्या है नोटिफिकेशन में?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pakistan-lockdown-1789660713.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[पाकिस्तान में लॉकडाउन]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pakistan-lockdown-1789660713.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pakistan-lockdown-1789660713.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      पाकिस्तान में लॉकडाउन
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़े तनाव और रेड सी में आई रुकावटों के बीच, पाकिस्तान में एक बार फिर से लॉकडाउन जैसे हालात हो गए हैं। देश में ईंधन बचाने और गैर-ज़रूरी खर्चों पर लगाम लगाने के लिए पाकिस्तान की शहबाज सरकार ने फालतू खर्च रोकने के लिए एक नया पैकेज पेश किया है, जिसमें सरकारी गाड़ियों की खरीद पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी, सरकारी गाड़ियों के लिए ईंधन आवंटन में 50% की कटौती की जाएगी और शादी-ब्याह के कार्यक्रमों में सिर्फ़ एक डिश परोसा जाएगा। </p>
<p><strong>सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन</strong><br />
समा टीवी के अनुसार, पाकिस्तान सरकार के कैबिनेट डिवीज़न ने गुरुवार को इस नए पैकेज को लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है जिसमें कहा गया है कि ये उपाय तुरंत लागू हो गए हैं। ईंधन की खपत में कटौती और संघीय अधिकारियों की विदेश यात्रा पर प्रतिबंध समेत कुछ पाबंदियां कम से कम तीन महीने तक लागू रहेंगी।हालांकि कहा गया है कि जिन मामलों में विदेश यात्रा अनिवार्य होगी, वहां मंत्रियों, सलाहकारों और अधिकारियों को इकोनॉमी क्लास में यात्रा करनी होगी।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/single-menu-in-marriage-1789660713.jpg"    /></p>
<p><strong>दुकानें रात नौ बजे बंद की जाएंगी</strong><br />
कराची के अख़बार 'डॉन' के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने निर्देश दिया है कि शादी से जुड़े सभी कार्यक्रमों और आयोजनों में सिर्फ़ एक ही डिश परोसी जाए। इस नोटिफ़िकेशन में कई कमर्शियल जगहों के लिए जल्दी बंद होने का समय भी तय किया गया है। दुकानों, बाज़ारों, शॉपिंग मॉल, डिपार्टमेंटल और ग्रोसरी स्टोर को रात 9 बजे तक बंद करना होगा।</p>
<p>शादी-ब्याह के हॉल, टेंट और दूसरे कमर्शियल वेन्यू जहां जश्न वाले कार्यक्रम होते हैं, उन्हें रात 10 बजे तक बंद करना होगा, जबकि रेस्टोरेंट, कैफ़े, खाने-पीने की जगहों और फ़ूड आउटलेट को रात 11 बजे तक बंद करना होगा। टेकअवे और होम-डिलीवरी सेवाओं को इस पाबंदी से छूट दी गई है।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shops-closed-1789660712.jpg"    /></p>
<p>'डॉन' की रिपोर्ट के मुताबिक, कई ज़रूरी सेवाओं को समय की पाबंदियों से बाहर रखा गया है, जिनमें फ़ार्मेसी, अस्पताल, क्लिनिक, मेडिकल लैब, फ़्यूल और CNG स्टेशन, इलेक्ट्रिक-व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशन, जिम, स्पोर्ट्स फ़ैसिलिटी, IT कंपनियाँ और कॉल सेंटर शामिल हैं।</p>
<p><strong>पाकिस्तान ने नई गाड़ियां खरीदने पर रोक </strong></p>
<p>कराची के अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में नई गाड़ी की खरीद पर रोक सरकारी खर्च कम करने के लिए लाए गए बड़े 'किफ़ायती उपायों' का हिस्सा है। इस नोटिफिकेशन में लंबे समय तक चलने वाले सामानों की खरीद पर भी रोक लगाई गई है, लेकिन इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से जुड़ी खरीद को इससे छूट दी गई है। इस्लामाबाद से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, ये दोनों रोक डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर लागू नहीं होंगी।</p>
<p>सरकार ने साथ ही सरकारी गाड़ियों के लिए तीन महीने तक ईंधन (फ्यूल) के आवंटन में 50% की कटौती का आदेश भी दिया है। हालांकि, सेना, सिविल आर्म्ड फोर्सेज, कानून लागू करने वाली एजेंसियों, ज़रूरी सेवाओं और फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू की ऑपरेशनल गाड़ियों को इससे छूट दी गई है। ईंधन से जुड़ी यह रोक इन संगठनों के एडमिनिस्ट्रेटिव और नॉन-ऑपरेशनल विभागों पर लागू होगी।</p>
<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/pakistan-new-car-ban-1789660712.jpg"    /></p>
<p><strong>नोटिफिकेशन में और क्या है </strong></p>
<ul><li>'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के अनुसार, कैबिनेट डिवीजन के नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के दौरान कर्मचारियों से जुड़े खर्चों को छोड़कर बाकी खर्चों (Non-ERE) में हर महीने 5% की कटौती की जाएगी।</li>
<li>यह उपाय पाकिस्तान के विदेशी मिशनों और विदेश में तैनात अधिकारियों पर भी लागू होगा। हालांकि, 'डॉन' अखबार के मुताबिक, किराए, पढ़ाई की फीस और मेडिकल केयर से जुड़े खर्चों को पूरा किया जाता रहेगा।</li>
<li>खर्च में कटौती के दायरे से डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को फिर से बाहर रखा गया है।</li>
<li>सरकार ने तीन महीने के लिए विदेश दौरों और यात्राओं पर भी पूरी तरह रोक लगाने की घोषणा की है, जिसमें ज़रूरी दौरे भी शामिल हैं।</li>
<li>'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, ये पाबंदियां मंत्रियों, सलाहकारों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के विशेष सहायकों, सांसदों और सरकारी अधिकारियों पर लागू होती हैं।</li>
<li>पाकिस्तान सरकार ने ऑफिशियल डिनर और सेमिनार पर भी रोक लगाई है।</li>
<li>किफ़ायत के ये उपाय सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों पर भी लागू होते हैं।</li>
<li>सरकारी विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे शहर के भीतर होने वाली बैठकों को छोड़कर, ज़्यादातर टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए बैठकें करें।</li>
<li>सरकार द्वारा फंड किए जाने वाले ऑफिशियल सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस पर भी रोक लगा दी गई है।</li>
<li>अगर ऐसे कार्यक्रम ज़रूरी हों, तो विभागों से कहा गया है कि वे बाहरी जगहों पर पैसे खर्च करने के बजाय ऑडिटोरियम और कमिटी रूम जैसी सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करें।</li>
<li>कैबिनेट ने ऑफिशियल डिनर पर भी रोक लगा दी है, लेकिन विदेशी प्रतिनिधिमंडलों से जुड़े कार्यक्रमों में छूट दी गई है।</li>
<li>पाकिस्तान ने इससे पहले मार्च में भी किफ़ायत के उपाय लागू किए थे। बाद में उनमें से कुछ उपाय हटा लिए गए थे, हालांकि बाज़ार के खुलने-बंद होने के समय पर लगी पाबंदियां बनी हुई थीं।</li>
</ul><p>ताज़ा नोटिफिकेशन के ज़रिए इस्लामाबाद ईंधन बचाने की अपनी कोशिशों का दायरा सरकारी गाड़ियों और सरकारी खर्च से आगे बढ़ाकर कामकाज के घंटों, विदेश यात्रा और यहां तक ​​कि शादी-ब्याह से जुड़े खर्चों तक बढ़ा रहा है, ताकि ईंधन की खपत और गैर-ज़रूरी खर्चों को कम किया जा सके। इन पाबंदियों से पूरे देश में लॉकडाउन जैसे हालात बनते जा रहे हैं।</p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/all-shops-to-close-by-9-pm-three-month-lockdown-like-situation-in-pakistan-explained-2026-09-17-1243834     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/all-shops-to-close-by-9-pm-three-month-lockdown-like-situation-in-pakistan-explained-2026-09-17-1243834 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 21:46:31 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     शहजाद भट्टी नेटवर्क कैसे बना ISI के हाइब्रिड और प्रॉक्सी वार का नया चेहरा, आतंकी संगठन घोषित होने से क्या असर होगा?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ गृह मंत्रालय ने पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। शहजाद भट्टी नेटवर्क पाकिस्तानी ISI के हाइब्रिड और प्रॉक्सी वार का नया चेहरा माना जा रहा है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahzad-bhatti-network-uapa-1789628045.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[शहजाद भट्टी नेटवर्क पर एक्शन।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI/ANI/INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahzad-bhatti-network-uapa-1789628045.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahzad-bhatti-network-uapa-1789628045.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      शहजाद भट्टी नेटवर्क पर एक्शन।
                      <span class="copyright">Image Source : PTI/ANI/INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारतीय युवाओं को इंटरनेट मीडिया के जरिए अपने जाल में फंसाकर उन्हें कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों की ओर धकेलने की कोशिश कर रही है। इस पूरे नेटवर्क में पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी को आगे किया गया है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक, शहजाद भट्टी मॉड्यूल के खिलाफ अब तक 12 FIR दर्ज की जा चुकी हैं। इन मामलों में 51 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तार आरोपितों के कब्जे से हैंड ग्रेनेड, विदेशी हथियारों की खेप और पेट्रोल बम बरामद किए गए थे।</p>

<h3><strong>क्या है शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN)?</strong></h3>

<p>सरकार के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क<strong> </strong>एक ISI-समर्थित टेरर-गैंगस्टर सिंडिकेट है। इसका मुखिया शहजाद भट्टी है जो कि पाकिस्तान में बैठा है और ISI के इशारे पर काम करता है। सरकार का आरोप है कि यह नेटवर्क युवाओं और छोटे अपराधियों को लालच देकर कट्टरपंथी बना रहा था और भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और सांप्रदायिक सद्भाव को निशाना बना रहा था। ये नेटवर्क  नफरत फैलाने वाला डिजिटल कंटेंट प्रकाशित कर रहा था और जासूसी कर रहा था।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-87-1789628444.jpg"    /></p>

<h3><strong>शहजाद भट्टी नेटवर्क आतंकी संगठन घोषित</strong></h3>

<p>आपको बता दें कि केंद्र <strong><a href="https://www.indiatv.in/india/national/mha-declares-the-shahzad-bhatti-network-as-a-terrorist-organisation-under-the-uapa-2026-09-16-1243541" target="_blank" title="पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसका नेटवर्क UAPA के तहत आतंकी संगठन घोषित, गृह मंत्रालय ने दी जानकारी">सरकार ने पाकिस्तान में बैठे गैंगस्टर से आतंकी बने शहजाद भट्टी के नेटवर्क के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई की है।</a> </strong>गृह मंत्रालय (MHA) ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी कर शहजाद भट्टी के नेटवर्क (SBN) को गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, UAPA, 1967 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।</p>

<h3><strong>14 राज्यों में 253 ऑपरेटिव सक्रिय थे</strong></h3>

<p>जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के 14 राज्यों- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, गुजरात, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और केरल में 253 ऑपरेटिव सक्रिय थे, जिन्हें मल्टी-स्टेट क्रैकडाउन में गिरफ्तार किया गया है। कानूनी तौर पर सरकार ने UAPA की धारा 35(1)(a) का इस्तेमाल कर शहजाद भट्टी नेटवर्क (SBN) को UAPA की पहली अनुसूची में जोड़ दिया है, जिसमें आतंकी संगठन के तौर पर घोषित संगठनों की लिस्ट है। अब तक SBN के गुर्गों पर अलग-अलग राज्यों में हत्या, फिरौती, आर्म्स एक्ट जैसे सामान्य अपराधों में केस दर्ज होते थे। UAPA में आने के बाद पूरा नेटवर्क एक बैन टेरर सिंडिकेट माना जाएगा।</p>

<h3><strong>कैसे काम करते हैं ये नेटवर्क?</strong></h3>

<p>जांच के मुताबिक, शहजाद भट्टी के अलावा पाकिस्तान में मौजूद दाऊद इब्राहिम, मुन्ना झिंगाड़ा और अजमल गुर्जर जैसे अपराधियों के नाम का इस्तेमाल युवाओं को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है। सोशल मीडिया और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को आसान पैसा, हथियार और विदेश में बसने जैसे लालच दिए जाते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह हाइब्रिड और प्रॉक्सी वार का एक खतरनाक तरीका है। इसमें पारंपरिक आतंकी संगठनों के कैडर के बजाय स्थानीय अपराधियों और ऐसे बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता है, जिनका पहले कोई आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। ऐसे युवाओं को रेकी, हथियार पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर अकेले हमले जैसे कामों में इस्तेमाल करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकता है।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/shahzad-bhatti-network-uapa-2-1789628444.jpg"    /></p>

<p>इंटरनेट मीडिया शहजाद भट्टी नेटवर्क का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। पहले युवाओं से ऑनलाइन संपर्क किया जाता है, फिर उन्हें पैसे और अपराध की दुनिया का लालच देकर धीरे-धीरे आतंकी नेटवर्क का हिस्सा बनाने की कोशिश की जाती है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती यह है कि ऐसे मॉड्यूल में शामिल कई युवक पहली नजर में सामान्य नजर आते हैं। उनका कोई पुराना आतंकी रिकॉर्ड नहीं होता। यही वजह है कि एजेंसियां अब सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे नेटवर्क और पाकिस्तान से संचालित हो रहे अपराध-आतंक के गठजोड़ पर खास नजर रख रही हैं।</p>

<h3><strong>आतंकी संगठन घोषित करने के फायदे</strong></h3>

<ol>
	<li><strong>कानूनी कार्रवाई हुई आसान: </strong>शहजाद भट्टी नेटवर्क से जुड़े लोगों पर कार्रवाई हो गई है और पकड़े गए आरोपियों की जमानत लगभग नामुमकिन हो गई है।</li>
	<li><strong>सदस्यता ही अपराध: </strong>अब सिर्फ SBN से जुड़ा होना, उसके लिए भर्ती करना या उसका काम-काज संभालना अपने आप में UAPA के तहत सीधा अपराध बन गया है। </li>
	<li><strong>सख्त जमानत प्रावधान: </strong>भारतीय न्याय संहिता (BNS) जैसे सामान्य कानूनों के मुकाबले UAPA में जमानत मिलना बेहद मुश्किल है। इससे बड़े ऑपरेटिव जेल में ही रहेंगे और सबूत नष्ट नहीं कर पाएंगे। </li>
	<li><strong>अपराध की धारणा: </strong>हथियार, विस्फोटक या उंगलियों के निशान मिलने पर अदालत आरोपी के खिलाफ अपराध की धारणा (Presumption of Guilt) लगा सकती है। </li>
	<li><strong>ज्यादा हिरासत और चार्जशीट का समय: </strong>UAPA में पुलिस 15 दिन की जगह 30 दिन तक पुलिस कस्टडी ले सकती है और बिना डिफॉल्ट जमानत के चार्जशीट दाखिल करने के लिए 180 दिन का समय मिलता है। </li>
	<li><strong>केंद्रीय और अंतर-राज्य समन्वय: </strong>14 राज्यों में फैले इस नेटवर्क पर अब NIA जैसी केंद्रीय एजेंसी आसानी से किसी भी राज्य की FIR को अपने हाथ में ले सकती है। अब जांच एजेंसियां सिंडिकेट से जुड़े बैंक खाते, प्रॉपर्टी और संपत्ति को ट्रेस, जब्त और फ्रीज कर सकती हैं। </li>
	<li><strong>नार्को-टेरर नेक्सस खत्म: </strong>यह नेटवर्क सीमा पार से नशा, हथियार और विस्फोटक की तस्करी से पैसा कमाता है। इस घोषणा के बाद एजेंसियां पूरे भारत में इसकी फाइनेंशियल पाइपलाइन को व्यवस्थित तरीके से बंद कर सकती हैं। </li>
	<li><strong>डिजिटल प्रोपेगैंडा और कट्टरपंथ पर लगाम: </strong>नेटवर्क डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर नफरत फैलाता है और युवाओं को बरगलाता है। अब एजेंसियां कानूनी तौर पर उनके चैनलों को ब्लॉक कराने, एन्क्रिप्टेड बातचीत को इंटरसेप्ट करने और उनका प्रोपेगैंडा शेयर या होस्ट करने वालों पर भी मुकदमा चला सकती हैं।</li>
</ol>

<p>कुल मिलाकर, गृह मंत्रालय के इस फैसले ने शाहजाद भट्टी नेटवर्क को एक लोकल गैंगस्टर गैंग से निकालकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बने एक संगठित आतंकी ढांचे के तौर पर स्थापित कर दिया है, जिससे राष्ट्रीय जांच एजेंसियां और राज्य पुलिस एक साथ मिलकर एक ही कानून के तहत कार्रवाई कर सकेंगी।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें- </strong><a href="https://www.indiatv.in/india/national/action-against-isi-backed-terror-group-shahzad-bhatti-network-in-14-states-more-than-200-operatives-arrested-2026-08-17-1237823" target="_blank" title="ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर पूरे देश में कार्रवाई, 200 से ज्यादा लोग गिरफ्तार, गृह मंत्री अमित शाह ने बताया">ISI समर्थित शहजाद भट्टी नेटवर्क पर पूरे देश में कार्रवाई, 200 से ज्यादा लोग गिरफ्तार, गृह मंत्री अमित शाह ने बताया</a></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/maharashtra/ats-raids-several-areas-in-maharashtra-suspecting-links-to-pakistani-gangster-shahzad-bhatti-2026-07-10-1230368" target="_blank" title="महाराष्ट्र के कई इलाकों में ATS की रेड, पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े होने की आशंका">महाराष्ट्र के कई इलाकों में ATS की रेड, पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी से जुड़े होने की आशंका</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/explainer-how-shahzad-bhatti-network-become-face-of-pakistan-isi-hybrid-proxy-war-against-india-know-impact-of-designated-as-terrorist-organization-2026-09-17-1243695     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/explainer-how-shahzad-bhatti-network-become-face-of-pakistan-isi-hybrid-proxy-war-against-india-know-impact-of-designated-as-terrorist-organization-2026-09-17-1243695 ]]>     </guid>     <pubDate>Thu, 17 Sep 2026 10:14:56 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     अरब सागर में भारत के वॉरशिप से कैसे टकराया पाकिस्तान का युद्धपोत? दूरी को लेकर क्या हैं नियम     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के एक युद्धपोत और पाकिस्तानी नौसेना का जहाज PNS Hunain एक दूसरे से टकरा गए, जिसमें पाकिस्तानी युद्धपोत को काफी नुकसान पहुंचा है। जानें दोनों युद्धपोत कैसे टकराए और दूरी को लेकर क्या नियम हैं?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/warships-collide-1789554909.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[अरब सागर में टकराए पाकिस्तान भारत के युद्धपोत]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/warships-collide-1789554909.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/warships-collide-1789554909.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      अरब सागर में टकराए पाकिस्तान भारत के युद्धपोत
                      <span class="copyright"></span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>उत्तर अरब सागर में भारतीय नौसेना के युद्धपोत से टकराने वाले पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का नाम PNS Hunain है। यह पाकिस्तान नौसेना का यारमूक-क्लास ऑफशोर पेट्रोल वेसल है, जो भारतीय युद्धपोत से टकरा गया। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि PNS Hunain पाकिस्तान नौसेना की चल रही SEASPARK-2026 exercise में शामिल है। पाकिस्तान ने इस बड़े नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत दो सितंबर को कराची से की थी। अभ्यास में पांच दिन का Karachi port phase और उसके बाद North Arabian Sea में दो दिन का Sea phase शामिल था।</p>

<p><strong>कैसे टकराए भारत और पाकिस्तान के वॉरशिप</strong><br />
15 सितंबर की शाम  व्यापक maritime activity के दौरान उत्तर अरब सागर में पाकिस्तान का PNS Hunain भारतीय नौसेना के एक frontline warship के बेहद करीब आ गया। भारतीय पक्ष के अनुसार पाकिस्तानी जहाज तेज गति से असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से चल रहा था, जिसकी वजह से दोनों जहाजों में टक्कर हो गई। घटना अरब सागर में हुई। इस टक्कर में PNS Hunain बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इस युद्धपोत पर करीब 130 पाकिस्तानी सैनिक मौजूद थे। टक्कर के बाद क्षतिग्रस्त PNS Hunain को वापस कराची हार्बर की ओर भेजा गया। <a href="https://www.indiatv.in/india/national/indian-navy-and-pakistani-navy-ship-collision-in-arabian-sea-mea-summons-charge-d-affaires-of-pak-high-commission-2026-09-16-1243511">भारतीय Navy warship को कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।</a></p>

<p>भारत ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए पाकिस्तान के कार्यवाहक राजदूत को तलब कर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है। भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज ने conduct April 1991 के भारत पाकिस्तान के बीच हुए समझौते के Article 10 का सीधा उल्लंघन किया था।</p>

<p><strong>भारत पाकिस्तान के बीच क्या है समझौता</strong><br />
इस घटना ने साल 1991 के द्विपक्षीय समझौते के तहत सैन्य अभ्यास और युद्धाभ्यास के लिए अग्रिम सूचना तथा सुरक्षित आवाजाही के प्रावधानों को फिर से चर्चा में ला दिया है। इसे पहले भी एक 16 जून 2011 को ऐसी ही दुर्घटना हुई थी। पाकिस्तानी जहाज PNS Babur और भारतीय युद्धपोत INS Godavari के बीच अदन की खाड़ी में हुई थीं। भारत ने उस समय भी इसका विरोध दर्ज किया था।</p>

<p>बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच यह समझौता मिलिट्री एक्सरसाइज़, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही के बारे में पहले से सूचना देने से जुड़ा है। इस समझौते में सैन्य अभ्यास और गतिविधियों से जुड़े नियम शामिल हैं, जिनमें दोनों देशों की सेनाओं के बीच संभावित खतरनाक टकराव को रोकने के उपाय हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच हुए समझौते में खास बात यह है कि एक-दूसरे के करीब सैन्य प्लेटफॉर्म (जैसे जहाज या पनडुब्बी) के संचालन से जुड़े एहतियाती उपाय भी शामिल हैं। </p>

<p><strong>दूरी को लेकर क्या हैं नियम</strong></p>

<p>अनुच्छेद 10 में कहा गया है: किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए एक दूसरे के नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों को एक-दूसरे से तीन नॉटिकल मील (NM) से कम दूरी पर नहीं आना चाहिए। यानी जब भारतीय और पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज या पनडुब्बियां अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हों, तो वे एक-दूसरे से कम से कम तीन नॉटिकल मील की दूरी बनाए रखें। तीन नॉटिकल मील लगभग 5.56 किलोमीटर के बराबर होता है, जो दुर्घटना या खतरनाक टकराव की संभावना को कम करने के लिए न्यूनतम दूरी है।</p>

<p><strong>दोनों देशों की नौसेनाओं में कब कब हुआ टकराव</strong></p>

<ul>
	<li>पिछले कुछ दशकों में भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच तनावपूर्ण आमना-सामना की कई घटनाएं हुई हैं।</li>
	<li>'सोसाइटी फॉर पॉलिसी स्टडीज़' के मैरीटाइम रिसर्च ग्रुप की 2024 की एक रिपोर्ट में 1995 की एक घटना का ज़िक्र है, जिसमें इंडोनेशिया में हो रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू में शामिल भारतीय नौसेना के एक जहाज़ के ऊपर पाकिस्तान नौसेना के 'अलौएट' (Alouette) हेलीकॉप्टर खतरनाक रूप से कम ऊंचाई पर उड़े थे।</li>
	<li>इसी रिपोर्ट में 1996 की एक और घटना का ज़िक्र है। अरब सागर में पाकिस्तान के 'सी स्पार्क' अभ्यास से जुड़ी निगरानी के दौरान पाकिस्तान नौसेना के 'अलौएट' हेलीकॉप्टर और भारतीय नौसेना के 'सी किंग'  हेलीकॉप्टर के बीच टक्कर होते-होते बची थी।</li>
</ul>

<p>ये घटनाएं बताती हैं कि जब दोनों देशों के बीच औपचारिक रूप से युद्ध ना भी हो रहा हो, तब भी दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी भरोसा बढ़ाने वाले तंत्र क्यों ज़रूरी हैं और समझौतों पर अमल करना कितना जरूरी है। </p>

<p><strong>समुद्री नेविगेशन के नियम का पालन है जरूरी</strong></p>

<p>बता दें कि नौसेना के जहाज़ आम कॉमर्शियल जहाज़ों से काफी अलग होते हैं। वे अक्सर निगरानी, ​​एक्सरसाइज़, पेट्रोलिंग और दूसरे मिलिट्री मिशन चलाते हैं, कभी-कभी ऐसे इलाकों में जहां अलग-अलग देशों के जहाज़ एक साथ चल रहे होते हैं। इस वजह से समुद्री नेविगेशन के नियमों का पालन करना बहुत ज़रूरी हो जाता है। समुद्र में टक्कर रोकने के लिए इंटरनेशनल रेगुलेशन, जिन्हें आम तौर पर COLREGs कहा जाता है, जहाज़ों की आवाजाही के नियम तय करते हैं और इनका मकसद टक्कर को रोकना होता है। </p>

<p><strong>क्या हैं समुद्री नेविगेशन के नियम</strong></p>

<ul>
	<li>हर जहाज को हर समय आंखों, कानों और अन्य उपलब्ध साधनों से पूरी सतर्कता रखनी चाहिए ताकि आसपास के खतरों और अन्य नावों का पता चल सके।</li>
	<li>प्रत्येक पोत को हमेशा एक सुरक्षित गति से चलना चाहिए ताकि यातायात, दृश्यता और परिस्थितियों के अनुसार समय पर रोका या मोड़ा जा सके। </li>
	<li>यदि कोई संदेह हो, तो यह माना जाना चाहिए कि टक्कर का जोखिम मौजूद है।</li>
	<li>रडार का उपयोग करते समय नाविकों को उसकी सीमाओं की पूरी समझ होनी चाहिए। </li>
	<li>टक्कर से बचने के लिए उठाया गया कदम स्पष्ट और समय पर होना चाहिए।</li>
	<li>जब दो पावर-संचालित जहाज आमने-सामने आ रहे हों, तो दोनों को अपने दाहिने (Starboard/Right) की ओर मुड़ना चाहिए ताकि वे एक-दूसरे के बाईं तरफ से निकल सकें।</li>
	<li>जब दो जहाज एक-दूसरे को काट रहे हों, तो जिस जहाज के दाईं ओर दूसरा जहाज हो, उसे रास्ता छोड़ना (Give-way) होगा।</li>
	<li> एक पोत को रास्ता छोड़ना होता है और दूसरे को अपनी गति व दिशा बनाए रखनी होती है, लेकिन यदि रास्ता देने वाला पोत न हटे, तो दूसरे पोत को खुद कार्रवाई करनी पड़ती है। </li>
</ul>

<p><strong> ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/world/around-the-world/saudi-arabia-fired-a-barrage-of-missiles-at-houthi-rebels-alert-issued-after-threat-to-mecca-2026-09-15-1243346">सऊदी अरब ने हूती विद्रोहियों पर ताबड़तोड़ दागीं मिसाइलें, मक्का में खतरे को लेकर अलर्ट जारी</a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/pakistan-warship-pns-hunain-collide-with-indian-warship-in-arabian-sea-navigation-rules-explained-2026-09-16-1243560     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/pakistan-warship-pns-hunain-collide-with-indian-warship-in-arabian-sea-navigation-rules-explained-2026-09-16-1243560 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 16:42:43 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     सालों की जंग, अरबों के हथियार और हवाई हमले भी बेअसर; आखिर इतने ताकतवर कैसे हुए हूती?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ यमन के हूती विद्रोही वर्षों के युद्ध और बड़े पैमाने पर हवाई हमलों के बावजूद मजबूत बने हुए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर सालों तक झटके झेलने के बाद आज भी वे सऊदी अरब जैसे देश को परेशान करने की हालत में कैसे हैं? आइए, समझते हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/houthi-rebels-1789544326.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[सऊदी अरब और अमेरिका से टक्कर लेने के बावजूद हूती विद्रोही अभी भी मैदान में डटे हुए हैं।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : INDIA TV]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/houthi-rebels-1789544326.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/houthi-rebels-1789544326.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      सऊदी अरब और अमेरिका से टक्कर लेने के बावजूद हूती विद्रोही अभी भी मैदान में डटे हुए हैं।
                      <span class="copyright">Image Source : INDIA TV</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>Houthi Rebels Vs Saudi Arabia:</strong> यमन के हूती विद्रोही पिछले करीब एक दशक से लगातार युद्ध और हवाई हमलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी ताकत कम होने के बजाय बढ़ती गई। सऊदी अरब, UAE, अमेरिका, ब्रिटेन और इजरायल अलग-अलग समय पर हूतियों के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले कर चुके हैं। फिर भी आज हूती एक अहम समुद्री रास्ते के करीब आगे बढ़ रहे हैं और सऊदी अरब की तेल सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। सवाल है कि आखिर इतने हमलों के बाद भी हूती कमजोर क्यों नहीं हुए? आइए, समझने की कोशिश करते हैं।</p>

<h3><strong>पहाड़ी इलाके का मिला बड़ा फायदा</strong></h3>

<p>हूतियों के कब्जे वाला इलाका काफी बड़ा और पहाड़ी है। ऐसे भूगोल में लड़ाकों और सैन्य ठिकानों को अलग-अलग जगहों पर फैलाना आसान होता है। इससे किसी एक बड़े हवाई हमले में उनके पूरे सैन्य ढांचे को तबाह करना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा हूती ऐसे हथियार इस्तेमाल करते हैं, जिनसे वे सऊदी अरब की सीमा के पार तेल और दूसरी महत्वपूर्ण सुविधाओं को निशाना बना सकते हैं। वे समुद्र में तेल टैंकरों और दूसरे जहाजों के लिए भी खतरा पैदा कर सकते हैं।</p>

<p><iframe  src="https://www.indiatv.in/newsdata/poll-indiatv-hindi/1283" width="100%"></iframe></p>

<h3><strong>ईरान से मिला हथियार और तकनीक का सहारा</strong></h3>

<p>हूतियों के पास बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन की बड़ी संख्या है। इनमें से कई हथियार ईरानी मॉडलों से मिलते-जुलते हैं। इनकी पहुंच खाड़ी के देशों के साथ-साथ इजरायल तक है। हूतियों ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाने के लिए उन्नत एंटी-शिप मिसाइलों और समुद्री ड्रोन का भी इस्तेमाल किया है। इससे दुनिया के एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समुद्री रास्ते पर खतरा पैदा हुआ है। ईरान हूतियों को हथियार देने से इनकार करता है, क्योंकि ऐसा करना संयुक्त राष्ट्र के हथियार प्रतिबंध का उल्लंघन होगा। हालांकि, यमन जा रहे कई जहाजों से तस्करी के जरिए भेजे गए ईरानी हथियार और उनके हिस्से जब्त किए जा चुके हैं। 2024 की संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों की एक रिपोर्ट में भी हूतियों, ईरान और ईरान के दूसरे सहयोगियों के बीच व्यापक सैन्य संबंधों का जिक्र किया गया था।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/houthi-weapons-1789544618.jpg"    /></p>

<h3><strong>30 हजार से 3.5 लाख तक हुई लड़ाकों की संख्या</strong></h3>

<p>संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों की 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने करीब 3.5 लाख लड़ाकों की भर्ती कर ली थी। 2015 में यह संख्या लगभग 30 हजार थी। यानी करीब एक दशक में उनके लड़ाकुओं की संख्या में कई गुना ज्यादा इजाफा हुआ है। माना जाता है कि हूतियों को ईरान से अत्याधुनिक तकनीक और अन्य तमाम तरह की मदद मिलती रही है, लेकिन वे अपने हथियारों का काफी हिस्सा यमन में ही तैयार करने में सक्षम हैं। यही वजह है कि कम लागत वाले ड्रोन और मिसाइलों से वे बड़े और महंगे सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकते हैं।</p>

<h3><strong>सऊदी अरब के आधुनिक हथियार भी हुए नाकाम</strong></h3>

<p>सऊदी अरब के पास अमेरिका से मिले अत्याधुनिक लड़ाकू विमान और मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं। हाल के युद्ध के दौरान इनका इस्तेमाल ईरान से आने वाले हमलों के खिलाफ भी किया गया। लेकिन महंगे और आधुनिक इंटरसेप्टर मिसाइलों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में यह सवाल बना हुआ है कि सऊदी अरब कब तक हूतियों के हमलों के साथ-साथ इराक में मौजूद ईरान समर्थित मिलिशिया के संभावित हमलों को रोक पाएगा। इन मिलिशिया पर एक ऐसे हमले का आरोप है, जिससे तेल निर्यात के लिए महत्वपूर्ण पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन बंद हो गई थी।</p>

<h3><strong>2015 से सऊदी अरब से लड़ रहे हैं हूती विद्रोही</strong></h3>

<p>2015 की शुरुआत में सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ युद्ध शुरू किया। इससे पहले हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना समेत देश के उत्तरी और मध्य हिस्सों के बड़े इलाके पर कब्जा कर लिया था। सऊदी अरब को डर था कि उसकी सीमा के ठीक पास ईरान का एक मजबूत और हथियारों से लैस सहयोगी खड़ा हो रहा है। इसके बाद करीब 7 साल तक सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ लगातार हवाई हमले किए। इन हमलों में बड़ी संख्या में आम नागरिकों के मारे जाने की खबरें भी सामने आईं। हूतियों को पीछे धकेलने के लिए यमन सरकार के समर्थक सैनिकों और दक्षिणी अलगाववादियों ने भी लड़ाई लड़ी, लेकिन मोर्चे में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया। आखिरकार 2022 में युद्धविराम हुआ।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/houthi-story-1789544618.jpg"    /></p>

<h3><strong>गाजा युद्ध के बाद लाल सागर में बढ़े हमले</strong></h3>

<p>2023 में गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद हूतियों ने लाल सागर में आने-जाने वाले जहाजों पर हमले शुरू कर दिए। हूतियों ने इसे इजरायल की नाकाबंदी के तौर पर पेश किया। इसके जवाब में अमेरिका और ब्रिटेन ने जनवरी 2024 से हूतियों के खिलाफ लगातार हवाई हमले शुरू किए। इसके अगले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ हवाई अभियान और तेज करने का आदेश दिया। उस समय अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने बताया था कि हजार से ज्यादा ठिकानों पर करीब 2 हजार हथियार गिराए गए। सिर्फ अमेरिकी हथियारों की कीमत ही 75 करोड़ डॉलर से ज्यादा बताई गई। इसके बावजूद हूतियों ने अमेरिका के 7 MQ-9 रीपर ड्रोन मार गिराए। हर ड्रोन की कीमत 3 करोड़ डॉलर से ज्यादा बताई गई। इसके अलावा 6 करोड़ डॉलर से ज्यादा कीमत वाला एक F/A-18 लड़ाकू विमान भी एयरक्राफ्ट कैरियर से फिसलकर समुद्र में चला गया।</p>

<h3><strong>अमेरिकी हमले रुके, इजरायल पर हमले जारी रहे</strong></h3>

<p>कई हफ्तों के अमेरिकी हमलों के बाद हूतियों ने अमेरिकी जहाजों पर हमले रोकने पर सहमति जताई। हालांकि, उन्होंने इजरायल को निशाना बनाना जारी रखा। इजरायल ने 2025 में हूतियों के खिलाफ जवाबी हमले किए। इन हमलों में हूती प्रधानमंत्री समेत कई वरिष्ठ अधिकारियों की मौत हुई और एक महत्वपूर्ण बंदरगाह को भी बार-बार निशाना बनाया गया। ईरान के साथ चल रहे युद्ध के शुरुआती महीनों में हूती बड़े पैमाने पर इससे दूर रहे। लेकिन जुलाई में उन्होंने सऊदी अरब पर फिर हमले शुरू कर दिए और सऊदी जहाजों की नाकाबंदी का ऐलान कर दिया।</p>

<h3><strong>सिर्फ हवाई हमलों से हूतियों को हराना मुश्किल क्यों?</strong></h3>

<p>यमन का मामला इसलिए भी मुश्किल है क्योंकि किसी भी संगठन को पूरी तरह हराने के लिए सिर्फ हवाई हमले पर्याप्त नहीं होते। हाल के कई युद्धों ने दिखाया है कि हमले के बाद जमीन पर सैनिकों का आगे बढ़कर इलाके पर कब्जा करना जरूरी होता है। लेकिन हूतियों के खिलाफ लड़ने वाले यमनी गुट खुद बंटे हुए हैं। इनमें सऊदी अरब समर्थित यमन सरकार के सैनिक और यूएई समर्थित दक्षिणी अलगाववादी शामिल हैं। यूएई कभी सऊदी अरब का साझेदार रहा है, लेकिन वह 2019 में यमन से बाहर निकल गया था। इन गुटों के बीच जनवरी में भी लड़ाई हुई थी।</p>

<p><img src="http://resize.indiatvnews.com/resize/newbucket/1200_-/2026/09/saudi-arabia-houthi-1789544618.jpg"    /></p>

<h3><strong>एक्सपर्ट ने हूतियों की ताकत के बारे में क्या बताया?</strong></h3>

<p>यमन एवं ईरान के एक्सपर्ट और यूनिवर्सिटी ऑफ ओटावा के प्रोफेसर थॉमस जूनो के मुताबिक, हूतियों की ताकत की कहानी का केवल आधा हिस्सा ईरान की मदद है। दूसरा आधा हिस्सा उनके विरोधियों की कमजोरी है। उन्होंने कहा कि ईरान का समर्थन बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन दूसरी तरफ उनके विरोधियों की कमजोरी भी उतनी ही अहम है। जूनो के मुताबिक, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार बंटी हुई, कमजोर, असंगठित और भ्रष्ट है और हूतियों ने लगातार इस स्थिति का फायदा उठाया है।</p>

<h3><strong>ईरान ने हूतियों को कितनी तेजी से मजबूत किया?</strong></h3>

<p>रणनीतिक विशेषज्ञ माइकल नाइट्स, जिन्होंने हूतियों पर काफी काम किया है और अब न्यूयॉर्क की रणनीतिक सलाहकार संस्था होराइजन एंगेज में शोध प्रमुख हैं, के मुताबिक हूती ईरान के क्षेत्रीय सहयोगियों में सबसे ज्यादा प्रतिबद्ध और आक्रामक गुटों में हैं। उन्होंने कहा कि ईरान ने हूतियों को बहुत तेजी से विकसित किया है। उनके मुताबिक,</p>

<blockquote>
<p>'जिन क्षमताओं को विकसित करने में लेबनान के हिजबुल्लाह को 20 साल लगे, हूतियों ने उनमें से कई क्षमताएं 5 साल में विकसित कर लीं।'</p>
</blockquote>

<h3><strong>बाब-अल-मंदेब पर बढ़ रहा हूतियों का दबाव</strong></h3>

<p>हाल के हफ्तों में हूती विरोधी गुटों को एक के बाद एक मोर्चों से पीछे हटना पड़ा है। हूती अब बाब-अल-मंदेब की तरफ आगे बढ़ रहे हैं। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरा समुद्री मार्ग है। यह रास्ता वैश्विक व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर यहां समुद्री यातायात बाधित होता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजारों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि हूतियों की गतिविधियां अब केवल यमन का घरेलू मुद्दा नहीं रह गई हैं।</p>

<h3><strong>सऊदी अरब जमीन पर उतरने से क्यों बच रहा?</strong></h3>

<p>सऊदी अरब हूतियों के खिलाफ एक और पूर्ण युद्ध में उतरने को लेकर सतर्क दिखाई देता है। जमीनी अभियान का मतलब लंबे समय तक लड़ाई और बड़ी संख्या में सैनिकों के हताहत होने का खतरा है। अमेरिका भी ईरान के साथ अपने संघर्ष में उलझा हुआ है और यमन में बड़े पैमाने पर जमीनी कार्रवाई से दूर रहना चाहता है। सऊदी अरब ने पिछले महीने तुर्की और पाकिस्तान के साथ आपसी रक्षा समझौता भी किया है, लेकिन अभी तक इसे सक्रिय नहीं किया गया है। इसके बाद ये भी सवाल उठने लगे थे कि <a href="http://www.indiatv.in/explainers/pakistan-saudi-arabia-turkey-makkah-defence-pact-houthi-attacks-aramco-najran-airport-2026-08-21-1238648" target="_blank" title="क्या निकल गई पाकिस्तान-सऊदी और तुर्की के डिफेंस पैक्ट की हवा? समझौते के बाद भी ताबड़तोड़ हमले कर रहे हूती">क्या पाकिस्तान-सऊदी और तुर्की के डिफेंस पैक्ट की हवा निकल गई है?</a></p>

<h3><strong>कूटनीति का रास्ता भी आसान क्यों नहीं?</strong></h3>

<p>हूतियों की मांग है कि सऊदी अरब यमन की नाकाबंदी हटाए। लेकिन सऊदी अरब के लिए ऐसा करना लंबे समय से चले आ रहे युद्ध में हार स्वीकार करने जैसा माना जा सकता है। इसके साथ ही इससे हूतियों को ईरान से और ज्यादा मदद मिलने का रास्ता भी खुल सकता है। प्रोफेसर थॉमस जूनो का कहना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म नहीं होता, तब तक सऊदी अरब और ईरान के रिश्तों में बड़ी प्रगति की संभावना सीमित रहेगी। उन्होंने कहा कि हूती इस समय किसी समझौते के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं और वे अपनी मांगों से पीछे हटने के मूड में नहीं हैं।</p>

<h3><strong>तो आखिर हूतियों को रोकना इतना मुश्किल क्यों है?</strong></h3>

<p>सीधी भाषा में समझें तो हूतियों की ताकत एक नहीं, कई वजहों का नतीजा है। उनके पास पहाड़ी और बड़ा इलाका है, लड़ाकों की संख्या काफी बढ़ चुकी है, मिसाइल और ड्रोन जैसे हथियार हैं, ईरान से तकनीकी और सैन्य मदद मिलने की बात कही जाती है और वे हथियारों का एक हिस्सा खुद भी बना सकते हैं। दूसरी तरफ उनके विरोधी गुट बंटे हुए हैं और यमन की सरकार कमजोर है। ऐसे में सिर्फ हवाई हमलों से हूतियों की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल साबित हुआ है। <strong>(AP से इनपुट्स के साथ)</strong></p>

<p><strong>ये भी पढ़ें: <a href="http://www.indiatv.in/explainers/saudi-arabia-shuts-down-east-west-pipeline-following-houthi-attack-find-out-the-impact-on-oil-supply-and-prices-2026-09-15-1243273" target="_blank" title="हूतियों के हमले के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जानें तेल की सप्लाई और कीमतों पर क्या पड़ेगा असर">हूतियों के हमले के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जानें तेल की सप्लाई और कीमतों पर क्या पड़ेगा असर</a></strong></p>

<p><iframe   src="https://www.youtube.com/embed/GMwn6kdKJd4" frameborder="0"></iframe></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/why-are-yemen-houthis-still-so-powerful-after-years-of-war-airstrikes-and-billions-in-weapons-2026-09-16-1243507     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/why-are-yemen-houthis-still-so-powerful-after-years-of-war-airstrikes-and-billions-in-weapons-2026-09-16-1243507 ]]>     </guid>     <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 13:09:34 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     हूतियों के हमले के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन, जानें तेल की सप्लाई और कीमतों पर क्या पड़ेगा असर     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ मिडिल ईस्ट में तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश सऊदी अरब ने हमले के बाद शुक्रवार को अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद कर दी।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/crude-afp-1-1789452779.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[तेल पाइपलाइन (सांकेतिक तस्वीर)]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : AFP]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/crude-afp-1-1789452779.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/crude-afp-1-1789452779.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      तेल पाइपलाइन (सांकेतिक तस्वीर)
                      <span class="copyright">Image Source : AFP</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>ईरान</strong> के समर्थन वाले हूती विद्रोहियों के हमले के बाद सऊदी अरब की एक बड़ी तेल पाइपलाइन बंद हो गई है, जिससे ग्लोबल एनर्जी मार्केट में तेल की और भी भारी कमी हो सकती है। इतना ही नहीं, तेल की कमी होने से न सिर्फ तेल की कीमतें बढ़ेंगे, बल्कि इससे बाकी चीजों की भी कीमतें बढ़ने की संभावना है। हूती विद्रोहियों ने ये हमला ऐसे समय में किया है, जब पूरी दुनिया पहले से ही पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से तेल की कमी से जूझ रही है।</p>

<h3><strong>हमले के बाद सऊदी अरब ने बंद की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन</strong></h3>

<p>AP की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में तेल के सबसे बड़े उत्पादक देश सऊदी अरब ने हमले के बाद शुक्रवार को अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन बंद कर दी। उसने इस हमले के लिए इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ड्रोन को जिम्मेदार ठहराया। अधिकारियों ने एपी को बताया कि मरम्मत में 3 से 5 हफ्तों का समय लग सकता है।</p>

<p>ये पाइपलाइन मिडिल-ईस्ट से कच्चा तेल निकालने के लिए बहुत जरूरी है। इसके जरिए तेल को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बजाय लाल सागर तक पहुंचाया जाता है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वो समुद्री रास्ता है, जहां से फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमला करने से पहले दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल की सप्लाई होती थी।</p>

<h3><strong>हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम शिपिंग रूट पर मौजूद द्वीपों पर किया कब्जा </strong></h3>

<p>यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के अहम शिपिंग रूट पर मौजूद द्वीपों पर कब्जा कर लिया है, जिससे सऊदी अरब के निर्यात पर और खतरा बढ़ गया है। हालांकि, कुछ सीमित विकल्प अभी भी मौजूद हैं। जैसे- होर्मुज में टैंकरों की थोड़ी-बहुत आवाजाही, लेकिन एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि सप्लाई में और रुकावटें आ सकती हैं और कीमतें बढ़ने से आम लोगों पर बोझ बढ़ सकता है। सोमवार को इंटरनेशनल स्टैंडर्ड ब्रेंट क्रूड की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई।</p>

<h3><strong>ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन क्या है</strong></h3>

<p>ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन सऊदी अरब में लगभग 1200 किलोमीटर तक फैली हुई है। ये फारस की खाड़ी के पास एक प्रोसेसिंग फैसिलिटी से तेल को पश्चिम की ओर लाल सागर तक ले जाती है। वहां, कच्चे तेल को आमतौर पर टैंकरों में भरा जाता है जो या तो स्वेज नहर के रास्ते उत्तर में यूरोप की ओर जाते हैं या फिर बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से दक्षिण में एशिया के लिए जाते हैं।</p>

<p>ये पाइपलाइन 1980 के दशक में इस डर से बनाई गई थी कि ईरान-इराक युद्ध के दौरान तेहरान होर्मुज से होने वाली शिपिंग में रुकावट डाल सकता है। मौजूदा युद्ध के शुरुआती 6 महीनों में, जब होर्मुज में ज्यादातर टैंकरों की आवाजाही ठप थी, तब मिडिल-ईस्ट से तेल की सप्लाई जारी रखने के लिए ये पाइपलाइन बहुत अहम थी।</p>

<h3><strong>ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन से तेल की आवाजाही पर भारी संकट</strong></h3>

<p>रिस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) ने सोमवार को बताया कि अगस्त के आखिर से इस पाइपलाइन और लाल सागर के यानबू बंदरगाह से रोजाना औसतन 2.6 मिलियन से 4 मिलियन बैरल तेल की आवाजाही हो रही थी और ये आवाजाही खत्म होने की कगार पर है।</p>

<p>इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के अनुसार, रोजाना 4 मिलियन बैरल तेल की मात्रा वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 4% है। IEA के अनुसार, सऊदी अरब ने सितंबर 2025 में हर दिन लगभग 10 मिलियन बैरल तेल का उत्पादन किया, लेकिन अगस्त में ये घटकर 6 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया था।</p>

<p>रिस्टैड एनर्जी में तेल बाजार के उपाध्यक्ष जानिव शाह ने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में ताजा उछाल ये साबित करता है कि बाजार पहले से ही सप्लाई में भारी कमी पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। शाह ने कहा कि सऊदी का स्टॉक आने वाले दिनों में निर्यात को बनाए रख सकता है, लेकिन ये स्थिति तेजी से बदल सकती है।</p>

<h3><strong>मध्य पूर्व से तेल की आवाजाही की मौजूदा स्थिति</strong></h3>

<p>स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अभी भी चर्चा का मुख्य विषय है। युद्ध से पहले, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से हर दिन लगभग 20 मिलियन बैरल तेल गुजरता था। कुछ टैंकर फिर से इस स्ट्रेट से गुजर रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक पहले की तुलना में बहुत कम है। समुद्री डेटा कंपनी लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस ने सितंबर के पहले हफ्ते में 90 बार जहाजों के गुजरने की गिनती की। युद्ध से पहले, हर दिन लगभग 130 जहाज यहां से गुजरते थे।</p>

<p>हूतियों ने बाब अल-मंडेब स्ट्रेट पर भी अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जो दक्षिणी लाल सागर के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता है। मेलियस रिसर्च के विश्लेषकों का अनुमान है कि सितंबर की शुरुआत में बाब अल-मंडेब से हर दिन लगभग 3 मिलियन बैरल तेल गुजर रहा था, लेकिन सोमवार को उन्होंने कहा कि अब ये शायद शून्य हो गया है।</p>

<p>हूति हमलों के कारण, यानबू से सऊदी का ज्यादातर ट्रैफिक उत्तर की ओर भूमध्य सागर की तरफ गया, या तो स्वेज नहर के जरिए या मिस्र की SUMED पाइपलाइन के जरिए। लेकिन हूतियों ने उत्तर में भी सऊदी शिपिंग को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। नॉर्थ कैरोलिना में कैंपबेल यूनिवर्सिटी में समुद्री इतिहास के प्रोफेसर साल्वाटोर मर्कोगलियानो ने कहा कि कम से कम होर्मुज का रास्ता अभी भी खुला है।</p>

<h3><strong>तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी</strong></h3>

<p>सप्लाई में कमी के कारण दुनिया भर में तेजी से कीमतें बढ़ रही हैं। जानकारों ने चेतावनी दी है कि हालिया रुकावटों से आने वाले हफ्तों और महीनों में उपभोक्ताओं के लिए और भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। इसका तत्काल दिखने वाला असर ईंधन और घरेलू ऊर्जा बिलों की लागत पर पड़ रहा है। एशिया और अफ्रीका के जो देश मिडिल ईस्ट से होने वाले आयात पर ज्यादा निर्भर हैं, उन्हें सबसे ज्यादा झटके लगे हैं।</p>

<p>ग्लोबल पेट्रोल प्राइसेस के अनुसार, नाइजीरिया में डीजल की कीमतें अब फरवरी के आखिर की तुलना में 92% ज्यादा हैं और पेट्रोल की कीमतें लगभग 61% बढ़ी हैं। इंडोनेशिया में डीजल 87% और पेट्रोल 38% महंगा हुई है। लेबनान में डीजल 80% और पेट्रोल 46% महंगा हुआ है।</p>

<table>
	<tbody>
		<tr>
			<td><strong>देश</strong></td>
			<td><strong>डीजल की कीमतों में वृद्धि</strong></td>
			<td><strong>पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि</strong></td>
		</tr>
	</tbody>
	<tbody>
		<tr>
			<td><strong>नाइजीरिया</strong></td>
			<td><strong>92%</strong></td>
			<td><strong>61%</strong></td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>इंडोनेशिया</strong></td>
			<td><strong>87%</strong></td>
			<td><strong>38%</strong></td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>लेबनान</strong></td>
			<td><strong>80%</strong></td>
			<td><strong>46%</strong></td>
		</tr>
	</tbody>
</table>

<h3><strong>अमेरिका में 66 प्रतिशत महंगा हुआ डीजल</strong></h3>

<p>मोटर क्लब AAA के अनुसार, सोमवार को अमेरिका में रेगुलर पेट्रोल की औसत कीमत लगभग $4.32 प्रति गैलन थी, जो युद्ध से पहले की $2.98 की कीमत से लगभग 45% ज्यादा है। सोमवार को डीजल की औसत कीमत भी $6.23 प्रति गैलन के अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई, जो युद्ध शुरू होने के समय से लगभग 66% ज्यादा है।</p>

<table border="1" cellpadding="1" cellspacing="1">
	<tbody>
		<tr>
			<td><strong>ईंधन</strong></td>
			<td><strong>युद्ध से पहले की कीमत</strong></td>
			<td><strong>सोमवार की कीमत</strong></td>
			<td><strong>बढ़ोतरी</strong></td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>पेट्रोल</strong></td>
			<td><strong>$2.98/गैलन</strong></td>
			<td><strong>$4.32/गैलन</strong></td>
			<td><strong>लगभग 45%</strong></td>
		</tr>
		<tr>
			<td><strong>डीजल</strong></td>
			<td><strong>$3.75/गैलन</strong></td>
			<td><strong>$6.23/गैलन</strong></td>
			<td><strong>लगभग 66%</strong></td>
		</tr>
	</tbody>
</table>

<p> </p>

<p>खासकर डीजल की कीमत का असर दूसरी चीजों पर भी पड़ता है क्योंकि इसका इस्तेमाल लंबी दूरी के ट्रकों, डिलीवरी नेटवर्क और खेती के उपकरणों में होता है।</p>

<p>मेलियस रिसर्च के एनालिस्ट्स ने सोमवार को चेतावनी दी कि महंगाई का असर दूसरी चीजों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने युद्ध की वजह से खाद और ऊर्जा के स्रोतों जैसी जरूरी चीजों पर पड़ रहे दबाव की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, "अमेरिका में फसल कटाई और हीटिंग के मौसम से ठीक पहले डीजल की कमी भी हो रही है।"</p>

<p><strong><em>AP Inputs</em></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/saudi-arabia-shuts-down-east-west-pipeline-following-houthi-attack-find-out-the-impact-on-oil-supply-and-prices-2026-09-15-1243273     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/saudi-arabia-shuts-down-east-west-pipeline-following-houthi-attack-find-out-the-impact-on-oil-supply-and-prices-2026-09-15-1243273 ]]>     </guid>     <pubDate>Tue, 15 Sep 2026 11:43:24 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     यूपी में सिर्फ 2% आबादी, फिर भी जाट वोट क्यों हैं इतने अहम? समझिए पूरा सियासी गणित     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ पश्चिमी उत्तर प्रदेश का जाट वोट बैंक ऐसा फैक्टर है, जिसकी आबादी भले ही राज्य की कुल आबादी का करीब 2 फीसदी है, लेकिन कई विधानसभा सीटों पर इसका प्रभाव काफी ज्यादा है।
    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-design-2026-09-14t221841-1789404493.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[जाट समुदाय के लोग]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : ANI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-design-2026-09-14t221841-1789404493.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-design-2026-09-14t221841-1789404493.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      जाट समुदाय के लोग
                      <span class="copyright">Image Source : ANI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अब ज्यादा समय बाकी नहीं रह गया है। सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। हर दल हर वर्ग के लोगों को लुभाने में लगा हुआ है। इसी क्रम में आज हम बात करेंगे जाट वोटों की। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी का लगभग 2 प्रतिशत है। प्रदेश की कई सीटों पर इनका काफी प्रभाव है। सूबे के पश्चिमी हिस्से में जाट वोट काफी मायने रखते हैं। इसलिए, इसमें कोई हैरानी की बात नहीं होगी अगर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की लीडरशिप वाली सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA), या समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन अगले साल की शुरुआत में होने वाले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों से पहले समुदाय को लुभाने की कोशिश करे।</p>

<p>जाट समुदाय की एक बड़ी आबादी मूलत: खेती -बाड़ी से जुड़ी हुई है। जाट पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय लोक दल (RLD) से जुड़े रहे हैं। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले कुछ सालों में लगातार समुदाय में अपनी जगह बनाई है और जाट वोटरों के एक हिस्से को अपने पाले में करने में कामयाब रही है। फिर भी, RLD समुदाय के सपोर्ट का एक बड़ा हिस्सा बनाए हुए है।</p>

<p>यूपी में लगभग 99 परसेंट जाट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में फैले हुए हैं। इनमें 136 विधानसभा क्षेत्र और 27 लोकसभा सीटें आती हैं। चुनावी जानकारों का मानना है कि अपनी कम आबादी के बावजूद,  जाटों का 35 से 40 विधानसभा सीटों पर मज़बूत असर है, जहां वे नतीजों को काफी हद तक बदल सकते हैं, हालांकि उनका बड़ा असर लगभग 50 सीटों पर है, जहां वे मुकाबले के हिसाब से अहम भूमिका निभा सकते हैं।</p>

<h3>जाटों के वोटिंग का पैटर्न</h3>

<p>2007 के विधानसभा चुनावों में आरएलडी को जाट वोटों का एक बड़ा हिस्सा मिला था। इस चुनाव में मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने जीत हासिल की थी। लोकनीति-CSDS के एनालिसिस के मुताबिक, 61 परसेंट जाटों ने RLD को वोट दिया था, जबकि BJP+ को जाटों के लगभग 18 परसेंट वोट मिले थे। BSP, SP और कांग्रेस को क्रमशः 10 परसेंट, 8 परसेंट और 2 परसेंट जाट वोट मिले थे।</p>

<p>2012 के विधानसभा चुनावों में RLD ने अपना जाट वोट बेस बनाए रखा, लेकिन उनकी संख्या कम हो गई। इस चुनाव में SP ने जीत हासिल की थी। लोकनीति-सीएसडीएस सर्वे के अनुसार आरएलडी को 2012 में 45 प्रतिशत जाट वोट मिले थे। जाट वोट में बीएसपी ने सेंध लगाई और 16 प्रतिशत वोट हासिल किए, जबकि कांग्रेस को 11 प्रतिशत जाट वोट मिले। भाजपा और सपा को 7-7 प्रतिशत जाट वोट मिले। यहां, यह ध्यान रखान चाहिए कि आरएलडी और कांग्रेस 2012 के यूपी चुनावों में गठबंधन सहयोगी थे।</p>

<h3>2017 और 2022 के चुनाव: यूपी की राजनीति में बड़ा बदलाव</h3>

<p>2017 के चुनावों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखा गया। बीजेपी ने 403 विधानसभा सीटों में से 300 से अधिक पर जीत हासिल की। ​​बीजेपी ने जाट वोटों में भी सेंध लगाई, जबकि आरएलडी की पकड़ कमजोर हो गई। वह सिर्फ़ एक सीट जीत पाई, और उसका कुल वोट 1.80 परसेंट रह गया। दूसरी ओर, BJP पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 ज़िलों की 126 सीटों में से 100 सीटें जीतने में कामयाब रही।</p>

<p>2022 के चुनावों में RLD ने SP से हाथ मिलाया और गठबंधन को उम्मीद थी कि वह कृषि कानूनों के विरोध के बाद BJP के ख़िलाफ़ जाटों के गुस्से का इस्तेमाल अपने फ़ायदे में करेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, भले ही वे कुछ असर डालने में कामयाब रहे। 2022 के चुनावों में BJP पश्चिमी UP में 85 सीटें जीतने में कामयाब रही, जबकि SP-RLD गठबंधन ने 41 सीटें जीतीं। हालांकि, BJP को कई जाट-बहुल इलाकों में झटका लगा, क्योंकि वह शामली ज़िले की सभी तीन सीटें, मेरठ की सात में से चार सीटें, मुज़फ़्फ़रनगर की छह में से चार सीटें, मुरादाबाद की सभी छह सीटें, और रामपुर और संभल दोनों ज़िलों की चार में से तीन सीटें हार गई। दूसरी ओर, RLD ने इस बार आठ सीटें जीतीं।</p>

<h3>2027 की पहेली</h3>

<p>BJP लीडरशिप उत्तर प्रदेश में, खासकर पश्चिमी इलाके में जाटों की अहमियत जानती है। इसलिए, पार्टी ने अगस्त 2022 में जाट नेता भूपेंद्र सिंह चौधरी को अपनी प्रदेश अध्यक्ष बनाया था, हालांकि दिसंबर 2025 में हुए फेरबदल में उनकी जगह पंकज चौधरी (एक कुर्मी चेहरा) को ले लिया गया था।</p>

<p>हालांकि, जयंत चौधरी की लीडरशिप वाली RLD अब एनडीए का हिस्सा बन चुकी है। जाटों के बीच समर्थन को और मजबूत करने के लिए यह गठबंधन किया गया। 2022 के विधानसभा चुनाव में  जाट वोटर्स का एक बड़ा हिस्सा SP-RLD गठबंधन के साथ गया था, और BJP को यह बात समझ आ गई थी।</p>

<p>जानकारों का कहना है कि जयंत की RLD BJP को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को लुभाने का मौका देगी। हालांकि, BJP अपने लीडरशिप स्ट्रक्चर में और टिकट बंटवारे के दौरान जाटों को काफी प्रतिनिधित्व देने पर भी विचार करेगी। संजीव बालियान और सत्यपाल सिंह जैसे लीडर जाटों के बीच BJP का सपोर्ट मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसके अलावा, BJP ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया। संदेश साफ था कि BJP ने आजादी के बाद देश के सबसे बड़े जाट नेता को सम्मान दिया है।</p>

<p>बता दें कि 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर<a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/up-assembly-election-2027-bjp-core-group-meets-in-lucknow-yogi-adityanath-and-top-leaders-discuss-poll-strategy-2026-09-12-1242747" target="_blank" title="उत्तर प्रदेश में 2027 का रण जीतने की तैयारी! BJP कोर ग्रुप की बैठक में इन मुद्दों पर हुआ मंथन"> बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी </a>हैं। लखनऊ में शुक्रवार शाम पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर बीजेपी के कोर ग्रुप की अहम बैठक हुई। करीब 2 घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में चुनावी तैयारियों के साथ संगठन और सरकार से जुड़े कई अभियानों पर विस्तार से चर्चा हुई। </p>

<p><strong>ये भी पढ़ें:</strong><br />
<a href="https://www.indiatv.in/uttar-pradesh/akhilesh-yadav-samajwadi-chhatra-sabha-blue-dress-code-up-assembly-election-2027-2026-09-08-1242003" target="_blank" title="ब्लू टी-शर्ट और जींस के साथ लाल टोपी, समाजवादी छात्र सभा का नया ड्रेस कोड, 2027 चुनाव से क्या है कनेक्शन?">ब्लू टी-शर्ट और जींस के साथ लाल टोपी, समाजवादी छात्र सभा का नया ड्रेस कोड, 2027 चुनाव से क्या है कनेक्शन?</a></p>

<p> </p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/only-2-percent-of-the-population-in-up-yet-why-jat-votes-so-important-understand-up-assembly-elections-2027-2026-09-14-1243196     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/only-2-percent-of-the-population-in-up-yet-why-jat-votes-so-important-understand-up-assembly-elections-2027-2026-09-14-1243196 ]]>     </guid>     <pubDate>Mon, 14 Sep 2026 22:20:34 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     EXCLUSIVE: क्या BRICS बन पाएगा 'संयुक्त राष्ट्र' का विकल्प? अगर नहीं तो इससे भारत और ग्लोबल साउथ को क्या-क्या फायदे     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ BRICS समिट के दौरान भी जब एक बार फिर UNSC में सुधार का मुद्दा उठा तो चर्चा होने लगी क्या आने वाले वक्त में ब्रिक्स ही संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्था का विकल्प बन सकता है। और अगर ऐसा ना भी हो तो ब्रिक्स के मजबूत होने से भारत और ग्लोबल साउथ के देशों को क्या-क्या लाभ होंगे। आइए इसके बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-vs-united-nations-1-1789304437.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[BRICS समूह, संयुक्त राष्ट्र का विकल्प है या नहीं।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-vs-united-nations-1-1789304437.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-vs-united-nations-1-1789304437.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      BRICS समूह, संयुक्त राष्ट्र का विकल्प है या नहीं।
                      <span class="copyright">Image Source : PTI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>ग्लोबल पॉलिटिक्स और अर्थव्यवस्था में बढ़ती BRICS की भूमिका के बीच यह प्रश्न लगातार उठाया जा रहा है कि क्या यह ग्रुप भविष्य में संयुक्त राष्ट्र यानी UN का ऑप्शन बन सकता है? इसको लेकर इंडिया टीवी ने विदेश मामलों के एक्सपर्ट डॉ. श्रीश कुमार पाठक से एक्सक्लूसिव बातचीत की। जिसमें उन्होंने बताया कि BRICS, संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है और न ही BRICS का गठन इस मकसद से किया गया था। हालांकि, मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर में सुधार की बात करने और विकासशील देशों की आवाज को मजबूत बनाने में BRICS अहम रोल अदा कर सकता है।</p>

<h3>संयुक्त राष्ट्र से काफी अलग है BRICS समूह</h3>

<p>डॉ. श्रीश कुमार पाठक बोले कि संयुक्त राष्ट्र का अपना चार्टर और करीब-करीब सार्वभौमिक सदस्यता है। वहीं, BRICS चुनिंदा देशों का एक ऐसा समूह है, जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर सुधार के लिए दबाव बना सकता है।</p>

<blockquote>
<p>ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है और न ही इसे ऐसे डिजाइन ही किया गया था। संयुक्त राष्ट्र के पास चार्टर है, लगभग सार्वभौमिक सदस्यता है और शांति स्थापना की संस्थागत व्यवस्था है, जबकि ब्रिक्स मौजूदा वैश्विक व्यवस्था में सुधार के लिए दबाव बनाने वाला मंच है। नई दिल्ली शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने UNSC को 'विशेषाधिकारों का पिरामिड' बताते हुए उसे 'साझेदारी के मंच' में बदलने और इसके लिए 10 सूत्रीय सुधार रोडमैप की जरूरत बताई: विदेश मामलों के जानकार डॉ. श्रीश कुमार पाठक</p>
</blockquote>

<h3>UNSC में सुधार के लिए PM मोदी ने उठाई आवाज</h3>

<p>गौरतलब है कि नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर आयोजित हुई BRICS समिट में PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की वर्तमान व्यवस्था को लेकर प्रश्न किए थे। उन्होंने UNSC को 'विशेषाधिकारों का पिरामिड' कहते हुए इसे 'साझेदारी के मंच' में बदलने की जरूरत पर जोर दिया था। इसके अलावा, <a href="https://www.indiatv.in/india/national/pm-modi-address-brics-summit-2026-new-delhi-2026-09-12-1242811" target="_blank" title="PM मोदी ने BRICS समिट में रखे 10 प्रस्ताव, UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को भी बताया जरूरी">PM मोदी ने संयुक्त राष्ट्र में सुधार के लिए 10 प्रस्ताव का रोडमैप तैयार करने का आह्वान भी किया</a> था। जान लें कि भारत लंबे वक्त से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ का प्रतिनिधित्व बढ़ाने की डिमांड करता आ रहा है।</p>

<h3>BRICS से भारत और ग्लोबल साउथ को क्या-क्या फायदे?</h3>

<p>डॉ. श्रीश कुमार पाठक के अनुसार, BRICS का रोल किसी नए Global Organization को खड़ा करने में नहीं, बल्कि ब्रिक्स के देशों के प्रभाव और व्यावहारिक विकल्पों को बढ़ाने में कारगर साबित हो सकता है।</p>

<blockquote>
<p>भारत और ग्लोबल साउथ के लिए ब्रिक्स का महत्व किसी नई वैश्विक संस्था के निर्माण में नहीं, बल्कि सामूहिक प्रभाव और व्यावहारिक विकल्प बढ़ाने में है। स्थानीय मुद्राओं में वित्त, IMF में सुधार और वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों पर ब्रिक्स की सामूहिक आवाज अधिक प्रभावी हो सकती है। भारत के लिए क्वाड, G20 और ब्रिक्स जैसे अलग-अलग मंचों में सक्रिय भागीदारी रणनीतिक विकल्पों को बढ़ाती है: विदेश मामलों के जानकार डॉ. श्रीश कुमार पाठक</p>
</blockquote>

<h3>भारत के लिए बढ़ेंगे रणनीतिक विकल्प</h3>

<p>एक्सपर्ट का मानना है कि भारत का G20, क्वाड और BRICS जैसे अलग-अलग समूहों में भागीदार बने रहना हमारे देश की स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत बनाने का काम करता है। इन समूहों के जरिए भारत, उभरती अर्थव्यवस्थाओं, ग्लोबल साउथ और पश्चिमी देशों के बीच संतुलन कायम कर सकता है। ऐसे में BRICS समूह भले ही संयुक्त राष्ट्र का विकल्प न बने, लेकिन वैश्विक संस्थाओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने वाला, संतुलित और जवाबदेह बनाने में प्रभावी रोल अदा कर सकता है।</p>

<p><strong>ये भी पढ़ें-</strong></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/explainers/us-venezuela-tension-oil-politics-donald-trump-nicolas-maduro-conflict-2026-01-03-1187735" target="_blank" title=" वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तेल-ड्रग और घुसपैठियों ने कैसे कराई दुश्मनी, जंग छिड़ी तो कौन सा देश देगा मादुरो का साथ? एक्सपर्ट से जानें सबकुछ"><strong>EXCLUSIVE: वेनेजुएला और अमेरिका के बीच तेल-ड्रग और घुसपैठियों ने कैसे कराई दुश्मनी, जंग छिड़ी तो कौन सा देश देगा मादुरो का साथ? एक्सपर्ट से जानें सबकुछ</strong></a></p>

<p><a href="https://www.indiatv.in/world/asia/how-india-russia-friendship-endured-for-decades-despite-global-pressure-vladimir-putin-india-visit-2025-12-03-1180376" target="_blank" title=" ग्लोबल प्रेशर के बावजूद दशकों से कैसे टिकी है भारत-रूस की दोस्ती? एक्सपर्ट ने समझाया एक-एक पहलू"><strong>EXCLUSIVE: ग्लोबल प्रेशर के बावजूद दशकों से कैसे टिकी है भारत-रूस की दोस्ती? एक्सपर्ट ने समझाया एक-एक पहलू</strong></a></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/can-brics-replace-united-nations-expert-explains-benefits-for-india-global-south-2026-09-13-1243009     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/can-brics-replace-united-nations-expert-explains-benefits-for-india-global-south-2026-09-13-1243009 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 18:26:20 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     क्या है ग्लोबल साउथ, इसकी मांगें क्या हैं और BRICS देशों के लिए क्यों है इतना अहम?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ नई दिल्ली में चल रहे BRICS समिट में ग्लोबल साउथ के मुद्दों को उठाया गया। ब्रिक्स में शामिल ज्यादातर देश ग्लोबल साउथ का हिस्सा हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि ग्लोबल साउथ क्या है और इसकी प्राथमिकताएं क्या हैं?    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-2026-09-13t070102-1789263045.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[ब्रिक्स समिट में ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर हुई चर्चा।]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-2026-09-13t070102-1789263045.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/untitled-2026-09-13t070102-1789263045.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      ब्रिक्स समिट में ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर हुई चर्चा।
                      <span class="copyright">Image Source : PTI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p><strong>नई दिल्ली</strong> में आयोजित BRICS समिट में शामिल होने के लिए दुनिया भर के नेता भारत पहुंचे हुए हैं। इस साल भारत BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है, इसलिए वैश्विक स्तर पर फैसले लेने की प्रक्रिया में विकासशील देशों की आवाज को और मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। नई दिल्ली घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की ज़्यादा भागीदारी की मांग की गई और UN सुरक्षा परिषद तथा वैश्विक वित्तीय ढांचे में सुधार का समर्थन किया गया। इस बीच पिछले कई दिनों से "ग्लोबल साउथ" शब्द सुर्खियों में छाया हुआ है। आइए विस्तार से समझते हैं कि असल में 'ग्लोबल साउथ' क्या है और अभी यह इतना अहम क्यों है।</p>
<h3><strong>ग्लोबल साउथ क्या है?</strong></h3>
<p>'ग्लोबल साउथ' एक राजनीतिक और आर्थिक शब्द है, जिसका इस्तेमाल ज़्यादातर एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन के विकासशील और उभरते देशों के लिए किया जाता है। यह कोई तय भौगोलिक श्रेणी नहीं है। ग्लोबल साउथ में शामिल देश उत्तरी गोलार्ध में भी हो सकते हैं। यह शब्द मोटे तौर पर देशों के बीच धन, विकास, ऐतिहासिक अनुभवों और वैश्विक संस्थाओं में उनके प्रभाव के अंतर को दिखाता है, न कि सिर्फ नक्शे पर उनकी जगह को।</p>
<p>खास बात यह है कि इसका मतलब यह भी नहीं है कि इन सभी देशों की राजनीतिक व्यवस्था, विदेश नीति या आर्थिक हित एक जैसे हैं। उदाहरण के लिए, भारत, चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, सऊदी अरब और मिस्र की प्राथमिकताएं बहुत अलग-अलग हैं। जो बात इनमें से कई देशों को एक साथ लाती है, उनमें वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय शासन को प्रभावित करने वाले फैसलों पर ज़्यादा प्रभाव डालने में उनकी साझा दिलचस्पी शामिल है।</p>
<h3><strong>ग्लोबल साउथ क्यों अहम है?</strong></h3>
<p>विकासशील देशों की आर्थिक ताकत में जबरदस्त बदलाव आया है। UN ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UNCTAD) के अनुसार, 2023 में ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी दुनिया की GDP में 42%, सामान के निर्यात में 44% और विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के आने में 65% रही है। इसके ज़्यादा प्रतिनिधित्व के लिए सबसे अहम तर्क यह है कि बढ़ती आर्थिक ताकत का असर उन संस्थाओं में उसी अनुपात में नहीं दिखा है, जो बहुत अलग दौर में बनाई गई थीं।</p>
<p>ग्लोबल साउथ की सुधार की मांग के पीछे यह बात है कि ग्लोबल इकॉनमी तो बदल गई है, लेकिन उसे चलाने वाले ढांचे उसी रफ़्तार से नहीं बदले हैं। इसलिए, यह मांग स्वाभाविक रूप से सिर्फ बातचीत की मेज पर ज़्यादा सीटें पाने से कहीं आगे की है। विकासशील देश नियम तय करने में भी अपनी ज़्यादा बड़ी भूमिका चाहते हैं।</p>
<h3><a href="https://www.indiatv.in/india/national/brics-summit-2026-new-delhi-declaration-global-system-un-imf-wto-changes-strategy-2026-09-12-1242858"><strong>ग्लोबल साउथ के लिए BRICS की भूमिका</strong></a></h3>
<p>ब्रिक्स एक बहुत अहम मंच है, जिसके जरिए उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं मिलकर अपना प्रभाव बढ़ा सकती हैं। शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत और चीन से बना यह ग्रुप बाद में दक्षिण अफ्रीका को शामिल करने के साथ और बड़ा हो गया। अब इसमें 11 सदस्य हैं, जिससे इसका भौगोलिक और आर्थिक दायरा काफी बढ़ गया है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह ग्रुप दुनिया की 40% से ज़्यादा आबादी और ग्लोबल इकॉनमी के लगभग एक-चौथाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।</p>
<p>इसकी अहमियत का एक कारण यह है कि यह ऐसे देशों को एक साथ लाता है जिनकी भू-राजनीति (geopolitics) पर राय अलग हो सकती है, लेकिन मौजूदा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक और राजनीतिक ढांचे को लेकर उनकी चिंताएं एक जैसी हैं। इस वजह से, ब्रिक्स का मकसद सिर्फ एक अलग ग्रुप बनाना नहीं, बल्कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए सामूहिक मोल-भाव की ताकत (collective bargaining power) तैयार करना है।</p>
<h3><strong>ग्लोबल साउथ के देश क्या हासिल करना चाहते हैं?</strong></h3>
<p>दिल्ली में आयोजित BRICS समिट में कई प्राथमिकताएं साफ तौर पर सामने आईं। इनमें कुछ ऐसी हैं, जिनका प्रभाव दुनिया के कई देशों पर पड़ता है। ग्लोबल साउथ के देशों की प्राथमिकताओं में अहम हैं-</p>
<ol><li><strong>ग्लोबल संस्थाओं में ज़्यादा प्रतिनिधित्व-</strong> ब्रिक्स ने UN (जिसमें सिक्योरिटी काउंसिल भी शामिल है) के साथ-साथ IMF और वर्ल्ड बैंक में बड़े सुधारों की मांग की। चीन और रूस ने UN सिस्टम में भारत और ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया।</li>
<li><strong>ग्लोबल ट्रेड में मजबूत आवाज-</strong> नई दिल्ली घोषणापत्र में एकतरफा टैरिफ, संरक्षणवादी उपायों और आर्थिक दबाव की आलोचना की गई। इसके पीछे मुख्य तर्क यह है कि बड़ी ताकतों के फैसलों का बोझ विकासशील अर्थव्यवस्थाओं पर जरूरत से ज़्यादा नहीं पड़ना चाहिए।</li>
<li><strong>ज़्यादा फाइनेंशियल विकल्प-</strong> ब्रिक्स अभी किसी एक कॉमन करेंसी को अपनाने की दिशा में नहीं बढ़ रहा है। इसके बजाय, यह लोकल करेंसी में लेन-देन, पेमेंट-सिस्टम की इंटरऑपरेबिलिटी, क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट और न्यू डेवलपमेंट बैंक को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। समिट में भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम को जोड़ने और सेंट्रल बैंक की डिजिटल करेंसी के बीच इंटरऑपरेबिलिटी की संभावना तलाशने का विचार भी रखा।</li>
<li><strong>टेक्नोलॉजी तक पहुंच और आपसी सहयोग-</strong> AI, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर और दूसरी उभरती हुई टेक्नोलॉजी ब्रिक्स के एजेंडे का हिस्सा बन गई हैं। भारत ने अपनी अध्यक्षता का इस्तेमाल टेक्नोलॉजी सहयोग को 'ग्लोबल साउथ' पर केंद्रित करने के लिए किया।</li>
</ol><p>प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार इसे "नियम मानने वालों" (rule-takers) से "नियम बनाने वालों" (rule-shapers) की ओर बदलाव के तौर पर पेश किया है, और भारत ने कहा है कि वह इस कोशिश का नेतृत्व करने में मदद के लिए तैयार है। दिल्ली घोषणापत्र इसी सोच को दिखाता है कि UN और फाइनेंशियल संस्थाओं में सुधार करना, ग्लोबल ट्रेड को ज़्यादा निष्पक्ष बनाना, डेवलपमेंट फाइनेंस का दायरा बढ़ाना और यह पक्का करना कि उभरती हुई टेक्नोलॉजी विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भी काम आएं।</p>
<h3><strong>ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका</strong></h3>
<p>ब्रिक्स समिट में भारत का नजरिया खास रहा है, क्योंकि नई दिल्ली ने ग्लोबल साउथ के एजेंडे को सिर्फ एक ग्लोबल सिस्टम की जगह दूसरा सिस्टम लाने की कोशिश के तौर पर पेश नहीं किया है। नई दिल्ली ने मौजूदा संस्थाओं में सुधार करने और जहां जरूरत हो, वहां नए सिस्टम बनाने की बात कही है। यह नजरिया भारत की ब्रिक्स प्राथमिकताओं में साफ दिखता है। जैसे UN और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार, तुरंत कोई कॉमन करेंसी लाए बिना लोकल करेंसी में व्यापार को बढ़ावा देना, पेमेंट सिस्टम को जोड़ना, टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना और मजबूत सप्लाई चेन को बढ़ावा देना।</p>
<p>भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान इन विचारों को व्यावहारिक पहलों में बदलने की भी कोशिश की गई है। इनमें ब्रिक्स MSME पोर्टल और स्टार्टअप इनोवेशन फंड से लेकर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर सहयोग और AI, क्वांटम और एडवांस्ड सैटेलाइट टेक्नोलॉजी समेत 37 भारतीय डीप-टेक इनोवेशन को प्रदर्शित करना शामिल है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें-</strong></p>
<p><strong><a href="https://www.indiatv.in/india/national/brics-summit-first-day-in-10-points-modi-jinping-meeting-joint-declaration-and-gala-dinner-2026-09-12-1242888" target="_blank" title="मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, साझा घोषणापत्र और गाला डिनर, BRICS समिट के पहले दिन की 10 बड़ी बातें">मोदी-जिनपिंग की मुलाकात, साझा घोषणापत्र और गाला डिनर, BRICS समिट के पहले दिन की 10 बड़ी बातें</a></strong></p>
<div>
<p><strong><a href="https://www.indiatv.in/explainers/xi-jinping-egypt-visit-how-china-big-middle-east-plan-raises-concerns-for-the-us-2026-09-02-1240796" target="_blank" title="मिडिल ईस्ट में चीन का ‘ऑपरेशन दबदबा’! जिनपिंग के मिस्र दौरे से अमेरिका क्यों होगा परेशान?">मिडिल ईस्ट में चीन का ‘ऑपरेशन दबदबा’! जिनपिंग के मिस्र दौरे से अमेरिका क्यों होगा परेशान?</a></strong></p>
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    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/what-is-global-south-what-its-wants-and-why-is-it-so-matters-2026-09-13-1242898     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/what-is-global-south-what-its-wants-and-why-is-it-so-matters-2026-09-13-1242898 ]]>     </guid>     <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 07:06:55 +0530</pubDate>     </item><item>    <title>    <![CDATA[     BRICS में 11 देश, 11 हित... क्या यह सच में नई ग्लोबल पावर है?     ]]>     </title>     <description>    <![CDATA[ नई दिल्ली में BRICS के 11 देशों के प्रतिनिधि इकट्ठा हुए हैं। इन देशों के जुड़ाव को ग्लोबल पावर बैलेंस को बदलने की उम्मीद पर देखा जा रहा है। कागजों पर तो BRICS काफी आगे दिखता है लेकिन क्या सच में 11 अलग-अलग प्राथमिकताओं वाले 11 देशों का यह ग्रुप नई ग्लोबल पावर बन गया है।    ]]>     </description>     <media:content url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-11-countries-1789213952.webp' type='image/webp' width='1200' height='675'>    <media:description type='plain'>    <![CDATA[वैश्विक स्तर पर कितना पावरफुल है BRICS?]]>    </media:description>    <media:credit role='author' scheme='urn:ebu'><![CDATA[Image Source : PTI]]></media:credit>    </media:content>     <media:thumbnail url='https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-11-countries-1789213952.webp' width='220'/>    <content:encoded>    <![CDATA[ <figure><img src="https://resize.indiatvnews.com/en/resize/newbucket/1200_-/2026/09/brics-11-countries-1789213952.webp" class="type:primaryImage">
                    <figcaption>
                      वैश्विक स्तर पर कितना पावरफुल है BRICS?
                      <span class="copyright">Image Source : PTI</span>
                    </figcaption>
                  </figure><p>दिल्ली में चल रही BRICS समिट ने फिर से दुनिया का ध्यान इस संगठन की बढ़ती हुई ताकत की तरफ खींचा है। ब्राजील, रूस, भारत और चीन से शुरू हुआ यह समूह अब साउथ अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE, सऊदी अरब और इंडोनेशिया को मिलाकर 11 देशों के लिए मंच बन गया है। BRICS देशों में विश्व के लगभग 49.5 फीसदी लोग रहते हैं और ग्लोबल GDP में इनकी भागीदारी करीब 40 प्रतिशत है। लेकिन बड़ा प्रश्न ये है कि क्या बड़ी आबादी और इकोनॉमी वाला यह ग्रुप सच में एक ग्लोबल पावर है, जबकि इसके ज्यादातर मेंबर्स की प्राथमिकताएं एक-दूसरे से जुदा हैं?</p>
<h3>BRICS में 11 देश साथ लेकिन उनके हित अलग-अलग</h3>
<p>बता दें कि चीन, BRICS को अमेरिकी लीडरशिप की पश्चिमी व्यवस्था के ऑप्शन के तौर पर खड़ा करना चाहता है। चीन इसके माध्यम से ग्लोबल साउथ में अपना रणनीतिक और आर्थिक प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। लेकिन भारत BRICS को पश्चिम की खिलाफत वाला गठबंधन नहीं, बल्कि मल्टी-पोलर वर्ल्ड बनाने और वैश्विक संस्थाओं में सुधार के मंच के तौर पर देखता है।</p>
<h3>रूस और ईरान को है पश्चिम के ऑप्शन की तलाश</h3>
<p>वहीं, रूस के लिए BRICS संगठन पश्चिमी प्रतिबंधों से बचाव, व्यापार के खातिर नए सहयोगी तलाशने और यह दिखाने का जरिया है कि वह इंटरनेशनल लेवल पर अलग-थलग नहीं है। इसके अलावा, ईरान की प्रॉयरिटी भी अमेरिकी प्रतिबंधों का ऑप्शन खोजना और गैर-पश्चिमी देशों के साथ अपने आर्थिक संबंधों को मजबूत बनाना है।</p>
<h3>अमेरिका के पुराने स्ट्रैटेजिक पार्टनर हैं सऊदी और UAE</h3>
<p>इसके उलट, सऊदी अरब और UAE, अमेरिका के पुराने स्ट्रैटेजिक पार्टनर माने जाते हैं। ऐसे में वे BRICS से जुड़कर अपने कूटनीतिक और आर्थिक विकल्प बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन वे वेस्टर्न कंट्रीज से संबंध तोड़ने के पक्ष में नहीं हैं। अरब में मौजूद ऑयल प्रोड्यूसिंग नेशन होने के बावजूद सऊदी अरब, ईरान और UAE के बीच क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा को लेकर मतभेद भी हैं।</p>
<h3>साउथ अफ्रीका, मिस्त्र और इथियोपिया को है इन्वेस्टमेंट की तलाश</h3>
<p>वहीं, ब्राजील विकासशील देशों की आवाज को तेज करने और UN समेत तमाम वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ के देशों को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने पर जोर देता है। इसके अलावा, साउथ अफ्रीका के लिए अफ्रीकी हितों और इन्वेस्टमेंट जैसे मुद्दे अहम हैं। जहां मिस्र, विदेशी निवेश चाहता है, तो वहीं इथियोपिया इन्फ्रास्ट्रक्चर और अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को प्रॉयरिटी देता है। साथ ही, इंडोनेशिया अपनी आजाद विदेश नीति बनाए रखते हुए ट्रेड और इन्वेस्टमेंट के मौके बढ़ाना चाहता है।</p>
<h3>आर्थिक आकार बड़ा लेकिन आपस में व्यापार है सीमित</h3>
<p>आंकड़ों में देखें तो BRICS काफी प्रभावशाली नजर आता है। इसकी जनसंख्या G7 से कई गुना ज्यादा है और परचेजिंग पावर पैरिटी यानी PPP के आधार पर BRICS की ग्लोबल GDP में भागीदारी G7 से आगे निकल गई है। इसके मेंबर्स में चीन और भारत जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं हैं, जबकि रूस, सऊदी अरब, UAE और ईरान एनर्जी मार्केट में अहम स्थान रखते हैं।</p>
<h3>अभी आपस में सिर्फ 20 फीसदी व्यापार करते हैं BRICS देश</h3>
<p>इसके बावजूद भी BRICS के सदस्य देशों में Economic Integration काफी हद तक सीमित है। UN Trade and Development के मुताबिक, BRICS देशों का आपस में ट्रेड उनके टोटल ट्रेड का लगभग 20 फीसदी ही है। हालांकि, यह 2003 के मुकाबले करीब 13 गुना बढ़ चुका है। दूसरी तरफ चीन की इकोनॉमी और ट्रेड क्षमता बाकी सदस्य देशों से बहुत बड़ी होने की वजह ग्रुप के भीतर शक्ति संतुलन भी असमान नजर आता है। छोटे सदस्य देश नहीं चाहते कि पश्चिमी देशों के दबदबे के बजाय चीन का वर्चस्व स्थापित हो जाए।</p>
<h3>तलाश रहे हैं डॉलर का ऑप्शन</h3>
<p>BRICS के सदस्य देश लोकल मुद्राओं में व्यापार और ऑप्शनल पेमेंट सिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं। BRICS की बड़ी उपलब्धि न्यू डेवलपमेंट बैंक भी है। दिसंबर 2025 तक न्यू डेवलपमेंट बैंक ने 139 प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 42.9 अरब डॉलर का फाइनेंशिंग भी मंजूर की। यह बड़ी रकम है, लेकिन वर्ल्ड बैंक जैसी स्थापित संस्थाओं की तुलना में इसका साइज अभी छोटा है। लेकिन इसके लिए करेंसी एक्स्चेंज की आजादी और सदस्य देशों के बीच इकोनॉमिक कोऑपरेशन जैसी चीजों की जरूरत होगी।</p>
<h3>ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत बनाने पर जोर</h3>
<p>जैसा कि PM मोदी ने भी BRICS समिट 2026 में ग्लोबल लीडर्स को संबोधित करते हुए कहा कि BRICS को 20 साल हो चुके हैं और इसे अब रिजल्ट देना शुरू करना होगा। PM मोदी ने इस बात पर भी जोर दिया है कि ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत बनाना होगा। वैश्विक मंचों पर इसकी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। <a href="https://www.indiatv.in/india/national/pm-modi-address-brics-summit-2026-new-delhi-2026-09-12-1242811" target="_blank" title="PM मोदी ने BRICS समिट में रखे 10 प्रस्ताव, UN सिक्योरिटी काउंसिल में सुधार को भी बताया जरूरी">प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रयास करना होगा कि नियम मानने वाले से नियम बनाने वालों में बदलें</a>।</p>
<p><strong>ये भी पढ़ें- <a href="https://www.indiatv.in/paisa/business/china-has-manufacturing-russia-has-energy-then-what-unique-proposition-did-india-bring-to-brics-2026-09-12-1242819" target="_blank" title="चीन के पास मैन्युफैक्चरिंग तो रूस के पास एनर्जी, BRICS में क्या खास लेकर आया भारत?">चीन के पास मैन्युफैक्चरिंग तो रूस के पास एनर्जी, BRICS में क्या खास लेकर आया भारत?</a></strong></p>
    ]]>     </content:encoded>     <link>     <![CDATA[     https://www.indiatv.in/explainers/brics-11-countries-different-interests-new-global-power-economic-strength-analysis-2026-09-12-1242839     ]]>     </link>     <guid isPermaLink="true">     <![CDATA[ https://www.indiatv.in/explainers/brics-11-countries-different-interests-new-global-power-economic-strength-analysis-2026-09-12-1242839 ]]>     </guid>     <pubDate>Sat, 12 Sep 2026 17:31:56 +0530</pubDate>     </item></channel></rss>