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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palखामोशियों के भी अपने स्वर होते हैं—
बस उन्हें सुनने वाला एक मन चाहिए।
“तुषारविंद” हाइकुओं का ऐसा संग्रह है, जहाँ अनकहे जज़्बात शब्दों की छोटी-सी धुन बनकर उभरते हैं। हर हाइकू मन की उन कोमल तरंगों को छूता है, जो अक्सर शब्दों से परे रह जाती हैं—कभी प्रेम की हल्की आहट, कभी यादों की नमी, तो कभी आत्मा की गहराइयों से उठती कोई अनजानी पुकार।
यह पुस्तक उन पलों का संगीत है, जब मन खुद से बात करता है—धीरे, सच्चे और बेहद करीब।
हर पंक्ति एक एहसास है, हर हाइकू एक छोटी-सी दुनिया।
अगर आप भी खामोशी में छुपी धुनों को महसूस करना चाहते हैं,
तो यह संग्रह आपके लिए है—
जहाँ शब्द कम हैं, पर भाव अनंत।
यह हाइकू-संग्रह जीवन के छोटे-छोटे पलों, प्रकृति के रंगों और मन की गहराइयों को तीन पंक्तियों में संजोता है। हर हाइकू एक एहसास है—जो पढ़ते ही दिल में उतर जाता है।
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मीरा ठाकुर ने मुंबई विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर में स्वर्ण पदक प्राप्त किया तथा एम.एड. की उपाधि अर्जित की। आपने 1999 से 2007 तक बिरला स्कूल, कल्याण तथा 2007 से 2019 तक गल्फ एशियन स्कूल और डी.पी.एस., शारजाह जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में हिंदी का अध्यापन किया। इस दौरान आप हिंदी विभाग की उप-विभागाध्यक्ष के रूप में भी कार्यरत रहीं। दो दशकों तक शारजाह एवं दुबई में निवास करने के पश्चात वर्तमान में आप अबूधाबी में रहकर हिंदी साहित्य की सतत सेवा कर रही हैं।
आपके अब तक तीन स्वतंत्र काव्य संग्रह— ‘धूप–छाँव की दरी’, ‘अंतर्मन के द्वीप’ तथा ‘जीवन से संवाद’— प्रकाशित हो चुके हैं। आपकी 50 से अधिक रचनाएँ देश-विदेश की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं, साथ ही दस से अधिक साझा संकलनों में भी आपकी सहभागिता रही है। आप ‘अनन्य यू.ए.ई.’ पत्रिका की सह-संपादक भी हैं।
आपको ‘काव्य हिंदुस्तान अंतर्राष्ट्रीय साहित्य समूह’ द्वारा ‘काव्य श्री हिंदुस्तान सम्मान’, समरस संस्थान साहित्य सृजन, भारत द्वारा ‘समरस श्री काव्य शिरोमणि सम्मान’, ‘अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय शोध/साहित्य उत्कृष्ट अवार्ड’, ‘निर्मला स्मृति संपादन साहित्य सम्मान’, ‘साहित्य संचय गौरव सम्मान’ तथा ‘TBN अमृता प्रीतम वैश्विक काव्य सम्मान’ से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त ‘सामयिक परिवेश’ (एस.के.पी. पी.जी. कॉलेज, देवास), इंडियन सोशल एंड कल्चरल सेंटर, अबूधाबी, वागीश अंतर्राष्ट्रीय संस्था (यू.ए.ई.) तथा भारतीय दूतावास, अबूधाबी द्वारा भी आपको कई प्रशस्ति-पत्र प्राप्त हुए हैं।
आपकी रचनाएँ विभिन्न ऑनलाइन (जाल) पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रहती हैं तथा ‘प्रवासी हाइकु कोश’ में भी आपके अनेक हाइकु संकलित हैं।
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