भिखारी को बेटा बनाकर उसके लंड से चुदी
(Hindi Xxx Sex Kahani)
हिंदी Xxx सेक्स कहानी में मैं पति की गैरमौजूदगी में लंड के लिए तरस रही थी कि मुझे एक भिखारी लड़के का लंड दिखा तो मैं उसे घर ले आयी क्योंकि उसका लंड 8″ का था.
दोस्तो, इससे पहले आपने मेरी एक सेक्स कहानी
सुनसान जगह पर चूत चटवाई और लंड चूसा
को पढ़ा था.
आज की कहानी उसी हिंदी Xxx सेक्स कहानी का अगला भाग है.
पिछली बार मैंने आपको बताया कि कैसे मुझे राह चलता लड़का मिला और मैं उसका लंड देख कर मेरा गला सूख गया.
मैं पागल हो गई और उसे अपनी चूत की रबड़ी खिला बैठी और उसके बाद मैं उसको अपने घर ले आई.
मैं राज के मोटे लंड पर मोहित हो चुकी थी और सोच रही थी कि इसको अपना बेटा बना लेती हूँ.
उसके बाद इसके लौड़े से जब मर्जी चुदवाती रहूँगी.
अब आगे हिंदी Xxx सेक्स कहानी:
दोस्तो, मेरे हस्बैंड मुझे बच्चे का सुख नहीं दे सकते थे, यह बात डॉक्टरी जांच से मुझे पता चल चुकी थी.
एक दिन मैंने अपने हस्बैंड से कहा- मुझे एक बच्चा अडॉप्ट करना है!
तो वे मेरी बात मान गए और उन्होंने अपने एक वकीन दोस्त से बच्चा गोद लेने संबंधी सारे कागजात भी बनवा दिए और सारे कागज मेरे पास घर आ गए.
पति तो विदेश में जॉब करते थे और उनका साल में एक बार ही घर आना होता था.
मैं राज को घर ले आई और उससे कहा- राज, तुम जा कर नहा लो, जब तक मैं हम दोनों के लिए खाना बना लेती हूँ.
उसने हामी भरी और वह नहाने चला गया.
इधर मैं किचन में जाकर हम दोनों के लिए खाना बनाने लगी.
मेरी चूत एकदम लाल हुई पड़ी थी और राज के बारे में सोच-सोच कर गीली हो रही थी.
तभी राज नहाने के बाद किचन में ही मेरे पास आ गया.
मैं उसे देखती रह गई नहाने के बाद राज और भी गोरा और हैंडसम लग रहा था.
पता नहीं वह लड़का कितने दिन बाद नहाया था.
मेरी नजर उसकी टांगों के बीच में फूले हुए पहाड़ पर गई तो मैं और भी ज्यादा कामुक हो गई.
उसका लंड अभी भी मुझे सलामी दे रहा था.
वह मुझसे थोड़ा शर्मा रहा था.
मैंने उससे कहा- मैं तुझे अडॉप्ट कर रही हूँ, आज से तू मुझे मां बुलाएगा!
मैं राज से उसके बारे में पूछने लगी कि तुम कहां से हो?
वह बताने लगा.
मैंने उसे समझाया- जो सब हमारे बीच हुआ है, उसे किसी को बताना मत.
अब वह भी मुझसे खुल कर बातें करने लगा.
वह बोला- आप सच में बला की खूबसूरत हो और आपकी चूत का स्वाद अमृत जैसा है … मीठा और नमकीन!
यह सुन कर मैं शर्मा गई और राज को हल्के से थप्पड़ मारती हुई बोली- चलो अब अपना खाना खत्म करो, वरना तुम्हें शारीरिक शक्ति कैसे मिलेगी? और तुम मुझे खुश कैसे कर पाओगे!
यह बोल कर मैं हंसने लगी.
मैं भी उसके मोटे 8 इंच के लंड के बारे में सोच रही थी कि इतना मोटा लंड अपनी नाजुक सी चूत में कैसे लूँगी!
फिर मैं उसको खाना लगा कर देने लगी.
मैं खाना परोसने के लिए नीचे झुकी तो मैंने अपना पल्लू जान-बूझकर नीचे गिरा दिया ताकि राज मेरे दूध देख कर मस्त हो सके.
मेरा पल्लू नीचे गिरा देख कर राज के मुँह में तो पानी ही आ गया.
फिर मैंने बड़ी अदा से इठलाते हुए अपना पल्लू सही किया और उसे बांकी नजर से देखती हुई नहाने चली गई.
कुछ समय बाद मैं भी नहा कर और खाना आदि खाकर रेडी हो गई.
हम दोनों को शॉपिंग पर जाना था.
मुझे राज के लिए कपड़े लेने थे और अपने लिए भी नई ब्रा-पैंटी के कुछ सैट लेने थे.
मैं खुद की जवानी को राज को टू पीस दिखाने के लिए बेताब थी.
मैंने पिंक कुर्ती और व्हाइट पजामी पहनी थी.
राज ने मुझे देखा तो बोला- आप गोरी हो इसलिए पिंक सूट में बहुत हॉट लग रही हो मां!
उसकी बातें और अपने लिए उसके मुँह से मां सुन कर मैं बहुत खुश हो गई.
फिर हम दोनों स्कूटी से मॉल की तरफ निकल गए.
वह मेरे पीछे बैठा था, मुझसे चिपक कर.
उसका लंड मेरी गांड से टकराता हुआ मुझे महसूस हो रहा था.
कुछ ही देर में हम दोनों मॉल पहुंच गए और मैंने राज के लिए कपड़े ले लिए.
फिर मैं उसको लेडीज अंडरगारमेंट्स सेक्शन में ले आई.
मॉल के स्टाफ की सारी लेडीज हम दोनों को हस्बैंड-वाइफ समझ रही थीं.
वहां से मैंने कुछ पैंटी और ब्रा उठाईं और चेंजिंग रूम में चली गई.
मैं राज को भी चेंजिंग रूम में लेकर गई थी.
मैं राज को पहन-पहन कर दिखाने लगी और पूछने लगी- बता, कौन सी पसंद है तुझे!
राज कुछ नहीं बोला, उसकी नज़र मेरी चूचियों और चूत पर थी.
मेरी नज़र उसके लंड पर पड़ी जो पूरी तरह तन चुका था.
फिर मैंने उससे कहा- तेरा अकड़ गया है, अभी तू बाहर वेट कर, मैं आती हूँ.
मेरे इतना बोलते ही उसने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और मुझे किस करने लगा.
मैंने उसको रोका और कहा- यहां नहीं, कोई देख लेगा!
लेकिन राज मुझे सेक्सी पैंटी और ब्रा में देखकर ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ हो गया था.
वह सीधे अपने घुटनों पर बैठ गया और मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत चाटने लगा.
मैंने उसको रोका नहीं, मेरी आवाज़ भी मदभरी सिसकारियों में बदल रही थी.
मैंने बोला- पैंटी उतार कर चाट ले, वरना उसकी नई पैंटी गंदी हो जाएगी!
उसने एक झटके में मेरी पैंटी नीचे खींच दी और अपना मुँह मेरी चूत पर लगा दिया.
मैंने अपने मुँह पर हाथ रख लिया ताकि बाहर आवाज़ न जाए.
तभी राज ने मेरी चूत को काट-काट कर चाटना स्टार्ट कर दिया.
वह अपने मुँह में मेरी पूरी चुत को भर कर किसी अमिया की तरह भर भर कर उसका रस चूस रहा था.
मैं उसकी चाटने की इस अदा से पूरी तरह से तड़प उठी और मुझसे रुका नहीं गया.
लाख कोशिशों के बाद मेरी सिसकारियां निकल ही गईं ‘आह मादरचोद धीरे चाट आह मर गई!’
मेरी इस मदभरी आवाज को शायद बाहर काम कर रही लड़कियों ने सुन लिया था.
उनमें से एक आई और वह चेंजिंग रूम का दरवाज़ा बजाने लगी- क्या हुआ मैम? आप ठीक तो हो ना?
मैंने अपनी आवाज को संयंत करते हुए उससे कहा- अरे कुछ नहीं, वह एक कॉकरोच आ गया था.
मैं अपनी सांसों को कंट्रोल करने लगी. राज ने अपना मुँह चूत से हटाया और वह मुझे होंठों पर किस करने लगा.
मैंने उसे रोका कि रुक जा कुत्ते मेरे मुँह की हालत बिगाड़ेगा क्या … घर जाकर जो करना है, कर लेना. यहां कोई मेरे चटे हुए मुँह को देख कर समझ जाएगा कि मेरी चुम्मी ली गई है. चलो अब घर चलते हैं.
मैंने जो पैंटी ट्राई की थीं, उनमें से एक मेरी चूत के पानी से पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.
मैंने उस पैंटी को भी चेंजिंग रूम में छोड़ दिया और बिलिंग करवा कर वहां से चली आई.
बाद में मुझे ख्याल आया तो मन में ही कहने लगी कि उस पैंटी को देख कर पता नहीं स्टाफ वाले क्या सोचेंगे!
यह सोचते ही मेरे होंठों पर एक मादक मुस्कान भी आ गई.
रास्ते में मैंने एक मेडिसिन स्टोर पर अपनी स्कूटी रोकी और एक कंडोम का बड़ा बॉक्स और ‘आई-पिल’ की एक पूरी स्ट्रिप ले ली.
यह देखकर राज बहुत खुश हो गया.
जब हम लोग घर वापस आ रहे थे, तब रास्ते में ही उसने स्कूटी पर पीछे बैठे-बैठे मेरी पजामी में हाथ डाल दिया और मेरी चूत को सहलाने लगा.
मैं भी मदहोश हो रही थी और उसके हाथ को अपनी टांगों से पकड़ कर रखने की नीयत से मैंने अपनी दोनों टांगों को जोड़ लिया ताकि उसका हाथ टांगों में तो फंसा रहे मगर चुत के अन्दर तक न जाए.
वह ऊपर ऊपर से ही मेरी चुत की पुत्तियों को मसल कर मुझे रगड़ने लगा.
उसकी इस हरकत से मेरी चूत वापस इतनी गीली हो गई थी कि पजामी भी गीली हो रही थी.
फिर हम लोग जैसे ही घर के अन्दर पहुंचे, राज ने मुझे पीछे से पकड़ लिया.
मैंने उसे देखा, तो वह मुस्कुरा कर बोला- अब तो घर भी आ गया, मुझे मत रोकना!
मैंने कहा कि थोड़ा रेस्ट तो कर ले.
लेकिन राज को हवस चढ़ी थी.
हवस तो मुझे भी बहुत चढ़ी थी, दिन भर से राज के लंड से चुदाई के बारे में सोच-सोच कर मेरी चूत से रस टपक रहा था.
तभी राज मुझे उठाकर रूम में ले गया और मेरे होंठों से चिपक गया.
वह मेरे मीठे होंठों का रस पीने लगा.
मैं भी एक जवान लौंडे के आठ इंच के लंड से चुदने की लालसा में चुदासी होने लगी और अति जोश में आ गई.
मैं उसका लंड पैंट के ऊपर से ही सहलाने लगी.
राज मेरे होंठों को चूसता जा रहा था.
वह कभी अपने दांतों से काटने लगता, तो कभी मुँह में जीभ डालकर मेरी लार को शर्बत के जैसे चूसने लगता.
वह होंठों को चूसने के साथ ही मेरी गांड को भी पजामी के ऊपर से ही सहलाने लगा और ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा.
मेरी भी मदहोश सिसकारियां निकल पड़ीं.
उसने मेरी कुर्ती उतार कर फेंक दी और मेरी ब्रा खोलने लगा.
वह इतना ज्यादा जोश में था कि उसने पीछे से ब्रा का हुक ही तोड़ दिया.
ब्रा के हटते ही वह मेरे स्तनों पर टूट पड़ा, उन्हें मसलने लगा और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा.
वह मेरे एक दूध को अपने मुँह में लेकर दबाते हुए चूसने लगा, जिससे मेरा भी बुरा हाल हो रहा था.
मैंने उसका सिर पकड़ लिया और बोली- बेटा, आराम से कर … मैं कहीं नहीं जा रही!
राज मुझे गाली देता हुआ बोला- साली रंडी … तूने मुझे आज पूरा दिन तड़पाया है. इतनी सेक्सी कुर्ती और पजामी पहन कर मुझे दिखा रही थी और मॉल में जाकर मुझे पैंटी पहन कर दिखा रही थी!
फिर उसने मेरे दोनों हाथों को अपने हाथों से पकड़ा और मेरी नाभि पर किस करने लगा.
मेरी योनि का रस पूरे बेड को गीला कर रहा था.
तभी उसने मेरी पजामी अपने मुँह से खींच कर नीचे कर दी और मेरी गोरी-गोरी जांघों को देखने लगा.
उसने मेरी जांघों को फैलाया, तो मैंने खड़ी होकर राज को अपने गले से लगा लिया और उसको चूमने लगी.
फिर झुक कर उसकी पैंट खोलकर उसका लंड हाथों में ले लिया.
उसका लंड एकदम कड़क, मोटा और गर्म हो गया था.
मैं उसके लंड को चूमने लगी.
राज ने मुझे रोका कि ये क्या कर रही हो?
मैंने बोला- आज मैंने तुझे बहुत तड़पाया है ना, उसी का इलाज कर रही हूँ!
यह कह कर मैंने राज के लंड का टोपा अपने मुँह में ले लिया.
राज मादक आहें भरने लगा.
उसका लंड इतना मोटा था कि सिर्फ टोपा ही मेरे मुँह में जा पा रहा था.
फिर मैं भी अपनी जुबान से उसके टोपे को सहलाने लगी और उसके पूरे 8 इंच के लंड को अपनी जुबान से चाटने लगी.
उसके गोटों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी.
राज भी अब पूरा मस्त हो चुका था और उसके लंड से हल्का-हल्का प्रीकम वाला चिकन रस निकलना शुरू हो गया था.
अचानक से उसने मेरे सिर को पकड़ लिया और अपना लंड मेरे मुँह में अन्दर तक घुसाने लगा.
मेरा तो बुरा हाल हो गया था, मैं कुछ कर भी नहीं पा रही थी.
उसका लंड मेरे गले तक चला गया और अचानक से उसके लंड से माल की एक गर्म सी धार मेरे मुँह के अन्दर आती हुई महसूस हुई.
मेरा पूरा मुँह राज के गर्म-गर्म माल से भर गया और मैंने भी राज को चिढ़ाने के लिए उसके लंड को अपने दांतों से प्यार से काट लिया.
तभी उसने मुझे धक्का मार कर बेड पर गिरा दिया और मेरी जांघों को खोलकर सीधे मेरी चुत पर टूट पड़ा.
उसने अपने मुँह से ही मेरी पैंटी नीचे सरका दी और अपने होंठों को मेरी चुत के होंठों से अपने होंठ मिलाकर स्मूच करने लगा.
मेरी सांसें तेज़ हो गईं और सिसकारियां निकलने लगीं.
मैंने एक हाथ से राज का सिर और एक हाथ से बेड पर बिछी हुई चादर को कस कर पकड़ लिया.
तभी मुझे अपनी चुत के अन्दर कुछ गर्म-गर्म जाता महसूस हुआ.
राज अपनी जुबान मेरी चुत के अन्दर तक ले जा रहा था और अपनी गर्म लार को मेरी चुत में भर रहा था.
मैं तड़प उठी और उसका सिर ज़ोर से अपनी चुत पर दबा दिया.
मेरी चुत का झरना निकलना स्टार्ट हो गया.
राज मेरा पूरा पानी पी गया.
वह अभी भी चुत को चाट रहा था.
मैंने ठंडी आह भर कर कहा- बस कर, अब मेरी चुत को अपने लंड के लिए कितना तड़पाएगा? डाल दे अन्दर मेरे!
पर राज ने मेरी एक न सुनी.
वह मेरी चूत में उंगली करने लगा और चूत को दांतों से काटने लगा.
मेरी सांसें पहले से ज्यादा तेज हो गई थीं और मैं रोने भी लगी थी.
मैंने चादर को कस कर पकड़ लिया, मेरी चूत से पानी निकलना बंद नहीं हो रहा था.
तभी राज ने मेरी चूत को अपने मुँह में भर लिया और ज़ोर ज़ोर से चूस कर चूत को मुँह में ही दबाने लगा.
मैं बिन पानी की मछली की तरह तड़प उठी और मुझसे एक पल भी नहीं रुका जा रहा था.
मैं राज से खुद को छुटा कर खड़ी हुई और उसको अपने होंठों से लगा लिया.
थोड़ी देर तक हमने यूँ ही किस किया. मेरी चूत का रस राज के सारे मुँह पर लगा था जो किस के दौरान मेरे मुँह में भी चला गया.
फिर मैंने राज से बोला- जाकर मेरे पर्स में से कंडोम लेकर आ!
वह तुरंत ले आया.
मैंने कंडोम खोल कर उसके लंड पर पहनाना शुरू कर दिया.
उसके लंड पर कंडोम भी छोटा पड़ रहा था, मेरा तो यह सोच कर बुरा हाल हो रहा था कि इसका मूसल मेरी चुत में अन्दर कैसे जाएगा!
लेकिन मेरी चूत लंड मांग रही थी.
उसके लवड़े को कंडोम पहना कर मैं चित लेट गई और राज मेरे ऊपर आ गया.
राज बहुत जोश में था, वह झटके मारने लगा. उसका लंड कभी मेरी चूत से टकराता तो कभी पेट से, उसका शायद पहली बार था.
फिर मैंने अपने हाथों से उसके लंड को अपनी चूत के मुँह पर रख दिया और बोला- बेटा, आराम से पेलना … तेरा बहुत बड़ा है, मैं मर जाऊंगी!
मैंने अभी इतना बोला ही था कि तभी राज ने एक ज़ोरदार झटका मारा और उसने अपना लंड 4 इंच अन्दर घुसा दिया.
मैं ज़ोर से चीख उठी और उससे बोलने लगी- बेटा आराम से!
वह और ज़ोर लगाने लगा और बोला- मां आज मत रोको, आपको खुश करना है मुझे … आपने मुझे अपनी चूत की रबड़ी खिलाई है, मुझे उसका कर्ज़ चुकाना है!
इतना कहते ही उसने एक झटका और मारा और उसका लंड मेरे और अन्दर घुसता चला गया.
मेरी चूत उसके लंड की गर्मी को महसूस कर रही थी और पानी छोड़ने लगी थी.
मैंने अपनी जांघों को ज़ोर से कस लिया और उसकी कमर पकड़ कर रोकने लगी.
मेरा बुरा हाल हो रहा था, सोच रही थी बस ऐसे कभी नहीं मर पाऊंगी.
तभी राज ने मेरे दोनों हाथों को पकड़ा और ज़ोर-ज़ोर से उछल-उछल कर मेरी चूत का भर्ता बनाने लगा.
उसका लंड मेरी बच्चादानी से टकरा रहा था और चूत से पानी निकलना बंद नहीं हो रहा था.
पूरा बेड गीला हो गया.
मुझे भी बेचैनी सी होने लगी और मैं जोश में आ गई और राज को गाली देने लगी- चोद मुझे कुत्ते, रंडी के बच्चे मार दे मुझे आज तू, आज फाड़ दे मेरी चूत!
यह सुनकर राज और ज़ोर से मेरी बच्चेदानी तक लौड़े को पेल कर मेरी चुत को फाड़ने लगा.
मैं ज़ोर-ज़ोर से सिसकारियां लेने लगी और उसकी गांड को दबाने लगी ताकि उसका लंड और अन्दर टक घुस जाए.
मैंने अपनी टांगें लगभग पूरी फैला ली थीं.
करीब 30 मिनट तक यह सब चलता रहा मेरी चूत के अन्दर कंडोम भी फट चुका था.
तभी राज भी आहें भरता हुआ मेरी चूत में ही झड़ गया और मेरी चूत उसके माल से लबालब भर गई.
उसके गर्म-गर्म माल से मैं मचल उठी और मेरा भी पानी झड़ने लगा.
मेरा 5 बार पानी निकल चुका था और थोड़ा सा खून भी निकला था.
मेरी हालत बहुत खराब हो चुकी थी, सांसें बहुत तेज़ थीं और मैं रोने लगी.
मुझसे तो उठा भी नहीं जा रहा था.
तभी राज ने मुझे किस किया और सॉरी बोला- आपको बहुत दर्द दिया मैंने!
मैं हंसने लगी और बोली- पागल तुमने तो मुझे खुश कर दिया!
यह सुनकर वह बोला कि फिर एक और बार हो जाए?
मैंने बोला- तू क्या जान लेना चाहता है क्या मेरी? हालत देख मेरी, मुझसे नहीं होगा!
उसका लंड झड़ने के बाद दुबारा से खड़ा हो गया था.
तभी गांव से मेरी जेठानी का फोन आया.
उन्होंने कहा- तुझे गांव आना है, यहां शादी की तैयारियां करनी हैं.
मैं उनसे बात करते समय हांफ रही थी.
इसलिए उन्होंने मुझसे पूछा- तेरी तबीयत तो ठीक है ना? इतना हांफ क्यों रही है?
मैंने बोला- कुछ नहीं जेठानी जी, बाहर से घूम कर आई हूँ इसलिए!
दरअसल मेरे बड़े देवर की शादी थी तो मुझे गांव जाना था.
जब मैं थोड़ी नॉर्मल हुई, तो राज का लंड चूसने लगी.
दो बार लंड चुसवाने के बाद उसे शांति मिली.
मेरा मुँह और चूत, दोनों सूज गए थे.
अब हम गांव जाने की तैयारी करने लगे.
मैंने सोचा कि राज को भी साथ ले जाऊंगी, तो मेरी चूत का मन लगा रहेगा.
गांव जाते समय हमने रास्ते में होटल में रुक कर एक बार चुदाई की और वापस गांव के लिए चल दिए.
उधर जाकर मुझे पता चला कि मेरी जेठानी का लफड़ा छोटे देवर के साथ चल रहा है.
फिर उधर मैंने अपने बेटे राज से अपनी चुत की मस्त चुदाई करवाई और जेठानी की चुदाई भी देखी.
वह सब बड़ा ही सेक्सी मंजर था.
आपको जानना है तो प्लीज मुझे मेल करके बताएं कि मेरी हिंदी Xxx सेक्स कहानी आपको कैसी लग रही है.
मेरी ईमेल आईडी
vivi65578@gmail.com
What did you think of this story
Comments